कोई काली कमा के रईस हो जाता है कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है दुनिया का दस्तूर निराला है यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|
कोई काली कमा के रईस हो जाता है कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है दुनिया का दस्तूर निराला है यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|
सुकून हम अपने दिल का अब कहू चुके है हम खुद को गम-ऐ-सागर में डुबो चुके है क्यों मजबूर करते हो हमें, ये खत दिखा कर हम पहले से ही उदास है, बहुत रो चुके […]
शुक्र है मोहोब्बत का कोई मज़हब नहीं होता वर्ना ये भी अमीरी और गरीबी का ख्याल करती मिल जाती हर शक्श-ऐ-आमिर को और हम जैसो को ये बेहाल करती……………………………!! D K
हमको तन्हाई में बुला-बुला कर रोये अपने आंसुओं को छुपा-छुपा कर रोये जब देखी उस ने हमारी सिद्क़-ऐ-दिल लोगो अपने ही आँचल में, वो मुँह छुपा-छुपा कर रोये…………….!! D K
यूँ ही नहीं लबरेज़ हो रही, हमारे दिल में यादें उसकी के हमने पिया था मय-ऐ-गुल्ल-रंग उसके नाम का लोगो……………..!! D K
कौन कहता है कम्बक्त, के हम बे-सरो-सामान सोया करते है के रात कटती है सिर्फ, निगेबानी इस दिल-ऐ-गम की करते करते……………!! D K
हमारी इस बात से भी लोग हमसे खफा रहते है के हम सब से क्यों रफा-दफा रहते है के रंग-ऐ-बईमानी जब सब पर चढ़ी है इस दुनिया में तो क्यों हम हरदम सफा-सफा रहते है…………………………..!! […]
कोई ये कैसे बताये, कि गम क्या है इश्क में इन्सा को होश कहां है!
अपनी सूरत को ज़रा सा इधर कर दे मेरे हर दिल-ऐ-गम को बेअसर कर दे………..!! D K
मेरे हसने और रोने मे तेरी याद आती है , मेरे जगने और सोने मे तेरी याद आती है ! तेरी अमृत भरी आँसूं को क्या मालूम मेरी जां, सम्न्दर पार विराने मे तेरी याद […]
ढूंढते क्या हो हमें अब, इन वीरान कूचों मे मिलने की खुवाईश हो, तो हमारे कब्र पर चले आना…………!! D K
आँखों से आंसू गिर पड़े आज, इस यकीन लव्ज़ को सुन कर के कभी हमने कहा था उस से मोहोब्बत यकीन का दूसरा नाम है………….!! D K
इस चाँद की शख्शियत भी कुछ काम नहीं तुझ से ज़ालिम जब भी मन करता है देखने को, कम्बख्क्त ये नज़र नहीं आता……………!! D K
मुझे भी शौख हुआ था इस मोहोब्बत का साहिब जब गए इसको खरीदने, तो पूरी ज़िन्दगी ही बैचनी पड़ी……………!! D K
न जाने कैसे और कब इस घर की तस्वीर बदल गई के कभी मरीज़-ऐ-मोहोब्बतो का यहाँ जमघट लगा करता था………….!! D K
कुछ ज़ख़्म हमको ताउम्र याद रह जाते है साहिब के वक़्त भी हार जाता है, उन जख्मो के आगे…………..!! D K
न मोहोब्बत, न साथी और न कोई घर अपना शर्म आती है हमें खुद को, एक इंसान कहते हुए……………!! D K
तन्हाई खुद-बा-खुद बन गयी हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा चलो कोई ये तो नहीं कहेगा अब, ये तन्हा है दुनिया में………………..!! D K
इस खेल मे हारे तो इतना रोना आया है तुमको सोचो मोहोब्बत की बाज़ी हारते, तो क्या होता……………..!! D K
बहुत ही अजीब थी हमारी बंदिशे-ऐ-मोहोब्बत साहिब न वो हमको कैद कर सके, और न हम कही फरार हो सके…………!! D K
बड़ी ही ज़िल्लत-ऐ-ज़िन्दगी मिलती है इस इश्क़ मे साहिब हो अगर शौख-ऐ-चाहत दिल में, तो कर के देख लेना………………!! D K
हमारी आँखों को वो कभी गौर से देखता देखता साहिब तो वो भी रूबरू, रोने के सबब और जागने की खुमारी से होता……….!! D K
हमारी खामोशियों का प्यार एक हिस्सा है, जो कभी खत्म न हो वो तेरा मेरा किस्सा है! तेरे जज्बातों ने ही मुझको कायर बना डाला, तुझे पाने की जिद ने मुझे शायर बना डाला !!
इस नफरत भरी सियासत में, कुछ बिक गये,कुछ डर गये ! पर फक्र करतें हैं आज उनपर, जो फिर जमीर के साथ घर गये!!
Kahte hai ummid pe kaayam hai.. Bas yahi soch ke tera hath thama hai.. Shayad Teri lakiro se Mil k kuch ummide fir muskura uthe
जिंदगी कुछ रूकी रुकी सी है सांसे कुछ थमी थमी सी है मायूस है मोहब्बत मेरी पुराने सायों से डरी हुई सी है
ताजुब नहीं मुझे तेरे बदल जाने से ओ बेवफा के कुछ लोग बदल नहीं सकते फितरत-ऐ-दिल अपना………….!! D K
अपनी मोहोब्बत का हमने तमाशा भी खूब किया एक बेवफा ने हमको इश्क़ मे बेहताशा भी खूब किया सोचा था मर कर अब हम किधर जाएंगे, मगर उस बेवफा ने काम-ऐ-दिलासा भी खूब किया……………….!! D […]
जितना व्यस्त रखना है रख लो खुद को , नहीं तो मेरी यादें तुम्हे सब कुछ भुला देंगी ! नफरत करनी हो तो जरा दिल को मजबूत रखना , नहीं तो मेरी खामोशियाँ भी तुम्हे […]
कहीं कोहरे की धुंध के पीछे छुप गए हैं मेरी सफलता के सभी रास्ते, जितना भी करीब जाता हूँ उतने ही दूर मेरे रास्ते नज़र आते हैं, यूँ तो दायरा है मेरे इर्द गिर्द कितनी […]
वो सुबह न आये जिसमे तुझको टूट कर बिखरता देखूं, तेरे रगो में न कभी मैं जुदाई का जहर उतरता देखूं, मांगा है जिसे मैंने भी हर चौखट पर खुदा की, वो पल ही न […]
अपनी इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब बस इतना था साहिब मांग बैठे थे खुदा से वो चीज़, जो बहुत अज़ीज़ थी खुदा के लिए…………!! […]
ऐ खुशियां अब तो लौट आ तू मेरी ज़िन्दगी में सुलह कर करके के अब न वो रहा, न उसकी यादें, और न कोई बहाना इस दिल का…………!! […]
कही तन्हा न कर दे तुझे, ये आदत तन्हा रहने की रातों को अपना हाल-ऐ-दिल तू चाँद, तारो से कह दिया कर……………….!! […]
इस बारिश के रुकने का इंतज़ार न करना तुम आज हमने पीया है गम-ऐ-आंसू, सारे मौसम रो रहे है……………..!! […]
तू हुकुम ही नहीं दे सका, हमको रोशन करने के लिए के हम तो पड़े थे तेरे ही घर मे, चिराग की तरह……………..!! […]
ताश के पत्तों की तरह हो गई है ज़िन्दगी अपनी, जो भी आता है बस खेल कर चला जाता है………………!! […]
इतना भी आसान नहीं, किसी को इश्क़ मे पा लेना पूरी ज़िन्दगी दाव पर लगनी पड़ती है, हर तरह से किसी का होना पड़ता है…………..!! […]
आज अपने ही सवाल पर मायूस खड़े हो क्यों तुम तुम ही तो कहा करते थे न, वो हर किसी का नहीं होता है…………….!! […]
कौन किस से कितना मुकातिफ़ होता है ये तो वक़्त जनता है, और वक़्त ही बता देता है……………!! […]
तू मुझे अगर धुल भी कहे तो कोई बात नहीं के हवा चलने पर ये भी आँखों मे समां जाती है……………!! […]
हमारे जाने के बाद किसी से इश्क़ फरमा कर देख लेना अगर कोई चाहे शिददत से हमारी तरह, तो कहना………………!! […]
मैंने जिस शक्श से मोहोब्बत फरमाई थी आज वही शक्श मुझे बेवफा कहता फिरता है…………..!! […]
उसकी आंखें झील सी गहरी तो है मगर, उस में परछाई मेरे चेहरे की नहीं उसकी बेरुखी से न नाप, इश्क़-ऐ-गहराई को तू वो आदतन मजबूर है, मगर दिल का बुरा नहीं……………………..!! […]
आंखें निकलवा कर हमारी वो अंगारों से, बोले अब इज़ाज़त है तुमको, हमसे रूब-ओ-रू होने की……………….!! […]
अपने चाहत की तपन से उसको हमने सोना तो बना दिया मगर, अब उसको ख़रीदे कैसे, यही सोचते है हम………………..!! […]
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