आँखों के तहखाने ख़ामोशी के वीराने बेकसूर को लगते बेवज़ह के जुर्माने राजेश’अरमान’
आँखों के तहखाने ख़ामोशी के वीराने बेकसूर को लगते बेवज़ह के जुर्माने राजेश’अरमान’
मेरा रंग उड़ने लगा है, देखकर , रंग बदलना उनका राजेश’अरमान’
फुर्सत जब से ग़ुम हुई तन्हाई तब से जुर्म हुई राजेश’अरमान’
ज़िद कभी न हारने की वज़ह कभी बनती है हार की राजेश’अरमान’
इधर आग लगी है बस्तिओं में उधर जनाब तैर रहे है पानी में राजेश’अरमान’
दर्द में भी अब मज़ा न रहा क़ल्ब भी अब पाकीज़ा न रहा परियों की कहानी पर भी यकीं था, हक़ीक़त में अब मोज़ेजा न रहा राजेश’अरमान’
कुछ तो हैरान होगी ज़िंदगी भी जब हमने अपना मुँह मोड़ लिया राजेश’अरमान’
कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]
कुछ परछाइयाँ सी चलती है मेरे पीछे , वक़्त भी बहरूपिया होता है गुमाँ न था राजेश’अरमान’
डोर रिश्तों की नाज़ुक होती है कभी फूल ,कभी चाबुक होती है राजेश’अरमान’
गहरे राज़ छुपे है अपनी ही साँसों में लो तो ठंडी छोड़ों तो गर्म -गर्म राजेश’अरमान’
मेरे लफ्ज़ ग़ुलाम बन गए तेरे लफ़्ज़ों की सरफ़रोशी से राजेश’अरमान’
तेरे शिकवे कभी न हवा हो सके मेरे दर्द की तुम कभी न दवा हो सके कुछ तार बिखरे, कुछ टूट गए ख्वाब अपने कभी न जवाँ हो सके राजेश ‘अरमान’
अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]
पटका तो ,कहीं दूर जा, गिरी ख़ामोशी अब खामोशियों के टुकड़े चुन रहा हूँ राजेश’अरमान’
ज़िंदगी की उधेड़बुन कबूतर गए दाने चुन राजेश’अरमान’
शरीर आत्मा में लगा कोई दीमक मन परमात्मा में लगा कोई दीपक क़र्ज़ सांसों का होता बस शरीर पर आत्मा बही-खातों में रखा कोई बीजक राजेश’अरमान’
मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है राजेश’अरमान’
गम की फसलें सींचता आँखों की बारिश से हर ख्वाब ने दम तोडा अपनी ही गुजारिश से राजेश’अरमान’
अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है जब से बनाया मंज़िल अपने साये को राजेश’अरमान’
उसकी नज़रों की तलाशी में मेरे किरदार बदले से मिले मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में चंद कतरे पर जमे से मिलें राजेश’अरमान’
जरूरत के हिसाब से , खुद से पहचान हुई कई हिस्से अब भी अजनबी है मेरे अंदर राजेश’अरमान’
हर भोर उगता सूरज नई किरणों के संग नए खेल रचता नई ऊर्जा का संचार दिन भर तपस कभी ज्यादा कभी कम इस ज्यादा इस कम में दबे बैठे है कई प्रश्न राजेश’अरमान’
वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख अपने अरमानों को गुमशुदा रख परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख राजेश’अरमान’
पिंजरे तो खोल दिए लेकिन पंछी उड़ गया पिंजरे लेकर राजेश’अरमान’
बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से , अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों […]
तेरा सजदा – 26 कोई तुझे सूख में ही जपता कोई तुझे बस दुःख में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 25 कोई तुझे प्यार से जपता कोई तुझे निहार के जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 24 कोई तेरे जन्म को जपता कोई तेरे मरन को जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 23 कोई तुझे भोग लगा कर जपता कोई ख़ुद को खिवा कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 22 कोई तुझे भूखा रह कर जपता कोई भर पेट खा कर ना जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 21 कोई तुझे शांत बैठ कर जपता कोई तुझे नाच नाच कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 20 कोई सब पाने को जपता कोए सब खोने को जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 19 कोई तुझे इक रंग में जपता कोई तुझे हर रंग में रमता ….. यूई
तेरा सजदा – 18 कोई तुझे बस ख़ुद में जपता कोई तुझे हर शय में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 17 कोई तुझे इक नाम में जपता कोई तुझे कितने नामों से जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 16 कोई हवाओ में बैठ कर जपता कोई गुफाओं में छिप कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 15 कोई तेरा नाम ओड़ के जपता कोए तेरा नाम लिख के जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 14 कोई झंडे पे लिख कुछ जपता कोई झंडे के रंगों में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 13 कोई पानी में डूब तुझे जपता कोई आग पे चल तुझे जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 12 कोई दिन में इक बार ना जपता कोई दिन भर तुझे जपता रहता ….. यूई
तेरा सजदा – 11 कोई दिए की लौ में रमता कोई बाती की लौ में रमता ….. यूई
तेरा सजदा – 10 कोई पथरो में देख् तुझे भजता कोई बिन देखे ही तुझको भजता ….. यूई
तेरा सजदा – 9 कोई ध्यान में जा करता सजदा कोई शोर मचा कर करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 8 कोई धूप जला कर करता सजदा कोई धुनी रमा कर करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 7 कोई मनके गिन गिन करता सज़दा कोई मनके चुन चुन करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 6 कोई माला घूमा कर करता सज़दा कोई माला नचा कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 5 कोई आग लगा कर करता सज़दा कोई आग बुझा कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 4 कोई बाहे जोड़ कर करता सज़दा कोई बाहे खोल कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 3 कोई सर उठा कर करता सज़दा कोई सर झुका कर करता सज़दा ….. यूई
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