कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]

अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]

हर भोर उगता सूरज नई किरणों के संग नए खेल रचता नई ऊर्जा का संचार दिन भर तपस कभी ज्यादा कभी कम इस ज्यादा इस कम में दबे बैठे है कई प्रश्न राजेश’अरमान’

वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख अपने अरमानों को गुमशुदा रख परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख राजेश’अरमान’

बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से , अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों […]