आखिर तुझे भी कोई बुला रहा होगा ,तुझे याद कर कर के कोई मुस्कुरा रहा होगा | यूँ ही नहीं जुबाँ लड़खड़ा जाती है हर किसी को देखकर, कोई तुझे भी नगमों में गा रहा […]

गम के फसाने को तेरी खुशियों ने लूटा , तेरी हर दीद की उम्मीद ने अखियों को लूटा , उजाले की हर किरन को तूनें कनखियों से लूटा,तुझे पाने की हर कोशिश को तेरी सखियों […]

वो समझते रहे ताउम्र, बस एक किस्सा मुझे हम वहम् में रहे वो समझते है ,अपना हिस्सा मुझे फरेब खाने की तो तालीम अपनी बड़ी पुरानी है हम फूलों की तरह मिलते, वो दिखाते काटों […]

हासिल कुछ भी नहीं नफरतों से क्यों खेलते हो फिर जज्बातों से जब इंसा ही इंसा का दुश्मन हो क्या मिलेगा किसी को इबादतों से                     राजेश’अरमान’