Category: शेर-ओ-शायरी
रिश्तों की बानगियाँ अब तेजी से बदलने लगी है वास्ता लाश से कम कफ़न से ज्यादा हो गया है राजेश’अरमान’
ऊंची दीवारें भी पल में मिट जाती है बस नज़रें दीवार के पार जानी चाहिए राजेश’अरमान’
उसने खौफ से कभी आइना साफ़ न किया आ जाएँ न नज़र कहीं तस्वीर साफ़ उसकी राजेश ‘अरमान’
तजुर्बों से सीखा मगर बस इतना सीखा फिर गिर पड़े तज़ुर्बा जो गिरने का था राजेश ‘अरमान’
ღღ__भला लफ़्ज़ों में इंतज़ार को, कहाँ तक लिखे कोई “साहब”; . कभी तुम खुद ही आके देख लो, कि अब थक रहा हूँ मैं !!….#अक्स .
कलमकार के कलम की स्याही जिस दिन यारों खत्म हो गई, या तो कोई जुल्म हुआ है उस दिन या वो अात्मा परम् हो गई,
ღღ__भटक रहा था कबसे, मैं इक अनछुए सवाल की मानिन्द; . तेरे खामोश-से जवाब ने “साहब”, लाजवाब कर दिया मुझे!!….#अक्स .
ღღ__सुनो…तुम रुक ही जाओ ना मेरे पास, हमेशा के लिए; . यूँ रोज़ आने-जाने में साहब, वक़्त बहुत लगता है !!……#अक्स .
आखिर तुझे भी कोई बुला रहा होगा ,तुझे याद कर कर के कोई मुस्कुरा रहा होगा | यूँ ही नहीं जुबाँ लड़खड़ा जाती है हर किसी को देखकर, कोई तुझे भी नगमों में गा रहा […]
ღღ__एक बाज़ी गर जीत भी गया, बेईमानी से वो साहब; . महफिल फिर से सज जायेगी, कि वफात बाकी है मेरी !!……#अक्स
ब्रह्मा-ऋषि-मुनि-चरक का तो ये देश हो सकता नहीं ,, क्यूँ बताते हो डॉक्टर पेट में बेटी है बेटा नहीं ..!!
ये तो फिरास़त है मेरी जो विरासत ए इश्क कर दी है तेरे नाम, वरना जाबिरों को काबिल ए वफा समझता ही कौन है ,
गम के फसाने को तेरी खुशियों ने लूटा , तेरी हर दीद की उम्मीद ने अखियों को लूटा , उजाले की हर किरन को तूनें कनखियों से लूटा,तुझे पाने की हर कोशिश को तेरी सखियों […]
ღღ__तुमसे मिलने की तलब, कुछ इस तरह लगी है “साहब”; . जिस तरह से कोई मयकश, मयखाने की तलाश करता है !!…..#अक्स .
कुछ गरीबों का आशना फिर जला है शायद राजा जी के महल में आज रोशनी कुछ और है ……यूई
ღღ__बहुत खामोश रहते हो, तुम भी आज-कल “साहब”‘; . ख़ुदा से है शिकायत या, खुदी से नाराज़ रहते हो !!…..#अक्स .
ღღ__मोहब्बत थी तुझसे ही, तुझसे ही हर गिला रहा; . उम्र-ए-शब-ए-रोज़ का, बस यही सिल-सिला रहा !!……#अक्स .
वक्त की कलम से जिन्दगी के हँसी पल लिखने जा रहा हूँ मैं, गमों की परछाई पर खुशियों के साये सा छाने जा रहा हूँ मैं, गर समझ हो तो आ जाना मेरे साथ , […]
ღღ__बिछड़कर देर तक तुझसे, उस दिन मैं सोंचता रहा “साहब”; . मोहब्बत गर ना हुई होती तो, मेरा क्या हुआ होता !!……#अक्स .
छोड़ आया थी अपनी तन्हाई को भींड में लुत्फ़ अब ले रहां हूँ तन्हाई की भीड़ में राजेश ‘अरमान’
ग़मे-ए-मुदाम से इस कदर परेशां न हो , सुना है हर गम के पंख भी होते है राजेश’अरमान’
तेरे साथ गुज़ारे चंद लम्हों की जागीर की बस मिल्कियत रखता हूँ ये अलग बात है खुद को सबसे अमीर अब भी समझता हूँ राजेश’अरमान’
वो समझते रहे ताउम्र, बस एक किस्सा मुझे हम वहम् में रहे वो समझते है ,अपना हिस्सा मुझे फरेब खाने की तो तालीम अपनी बड़ी पुरानी है हम फूलों की तरह मिलते, वो दिखाते काटों […]
तूफां मन के अंदर हो या समुन्दर में लहरें कुछ न कुछ खींच के ले ही जाती है राजेश ‘अरमान’
बंदगी तेरी यूँ मेरे काम आ गई अब किसी दुआ की जुस्तजू न रही राजेश’अरमान’
ღღ__कभी फुरसत मिले जो ‘साहब’, तो पूरी ये अहद कर दो; . कुछ इस हद तक मुझे चाहो, कि बस “हद” कर दो !!…..#अक्स .
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! patjhar main bhi kuch patte shakho par reh jaate hai bhure waqt main bhi kuch dost saath nibha jaate hai maut se sangharsh aur jeewan se pare ek naya […]
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! phir ek baar sagar shant hai kisi khaas lehar ka intzaar hai baitha hun baahain failaaye kinaare par dil uss se aalingan karne ko baitaab hai @@ SAGAR @@ […]
हासिल कुछ भी नहीं नफरतों से क्यों खेलते हो फिर जज्बातों से जब इंसा ही इंसा का दुश्मन हो क्या मिलेगा किसी को इबादतों से राजेश’अरमान’
कमबख्त दिल सब समझता है खुद दिल से दूरियां रखते है वज़ूद सामने होता है लेकिन खुद को बहरूपिया रखते है राजेश’अरमान’
मुस्लमान बनके बांटो या हिन्दू होके बांटो ,, पर दोस्त , केवल रोटी के ही टुकड़े हर घर में बांटो ……!! […]
न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में कितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे
जिनके आने से पहले, मौसम का गुमाँ हो जाता था आज वो खुद ही हो गए, इक मौसम की तरह राजेश’अरमान’
इम्तिहाँ लेते है वो कुछ इस अंदाज़ से आता हुआ जवाब भी हम भूल जाते है राजेश’अरमान’