Category: शेर-ओ-शायरी

  • “चाँद” #2Liner-106

    ღღ__गलतफ़हमी में जागते रहे, रात भर उनको जगता देखकर;
    .
    भला क्या ज़रूरत थी चाँद को, यूँ रात में निकलने की!!….#अक्स
    .
  • “इशारा”

    हर बाब बन्द और दरीचे खुलीं थीं घर की इशारा इस ओर था,
    कोई चोरी छुपे ही सहीं झरोखों से मगर इन्तजार में राहें निहार रहा था,

  • “दस्तक” #2Liner-105

    ღღ__कल शब तुम्हारी यादों ने “साहब”, क्या दरवाज़े पर दस्तक दी थी?
    .
    सुबह को मेरी गली में, कुछ क़दमों के निशान मिले थे आज!!…..‪#‎अक्स‬

  • ‘दीदार’

    ये तसादुम ये रंजिशे अब देखी नहीं जाती कह दो उन से भी कि दीदार ए यार ना करे ,
    तस्वीरें देख देख कर हम भी दिन काट लेंगें कह दो उनसे भी हमारा इन्तजार ना करे,

  • ज्योति

    हजारो लोग तम लेकर, निगलने दौड़ पड़ते हैं !

    अगर एक ज्योति हल्की सी, कहीं दिखलाई पड़ती है

  • “क़दमों के निशान” #2Liner-104

    ღღ__कल भी आये थे “साहब”, घर तक उनके क़दमों के निशान;
    .
    वो मुझसे मिलते तो नहीं लेकिन, मिलने आते ज़रूर हैं!!….‪#‎अक्स

  • दास्ता ए इशक

    लिखते लिखते स्याही खत्म हो गयी
    दास्ता ए इशक हमसे लिखी न गयी|

  • मिल गया अंजाम मुझे तुमसे दिल लगाने का

    मिल गया अंजाम मुझे तुमसे दिल लगाने का!
    #दर्द मुझे होता है जैसे किसी परवाने का!
    नाकामियों के आलम से परेशान हूँ मगऱ,
    हौसला अभी बाकी है बेखौफ मुस्कुराने का!

    Composed By #महादेव

  • “असर” #2Liner-104

    ღღ__आपकी मोहब्बत का, इतना तो असर हुआ है “साहब”;
    .
    कि अब अक्सर वहाँ होता हूँ, जहाँ होता नहीं हूँ मैं !!….‪#‎अक्स‬

  • तिरंगा

    तिरंगा

    मेरे लब पर तेरे लब पर सब के लब पर गंगा है,
    जो भारत का वासी केवल उसकी जान तिरंगा है

    (कुलदीप विद्यार्थी)

    जब कलम की जरुरत थी उठाई, आज तिरंगे की जरुरत पड़ी उठा लिया, बाकी ये देश के गद्दार समझ जाए पीछे कभी हटने की सोची नहीं हैं

  • “ख्वाब” #2Liner-103

    ღღ__गर इजाज़त हो आपकी, तो कुछ ख्वाब देख लूँ “साहब”;
    .
    यूँ तो अरसा गुज़र चुका है, आप सुलाने नहीं आये !!….‪#‎अक्स

  • सावन के आने से पहले

    कभी वो भी आयें, उनकी यादों के आने से पहले
    फ़िजा महक भी जाये, सावन के आने से पहले

  • दर्द देकर चैन से तुम जीने नही देते

    दर्द देकर चैन से तुम जीने नही देते!
    बेरहम जख्मों को तुम सीने नही देते!
    खोजता हूँ जिन्दगी जाम के पैमानों में,
    उसको मगर चैन से तुम पीने नही देते!

    Composed By #महादेव

  • “ख़त” #2Liner-102

    ღღ__यूँ भी कई बार “साहब”, मोहब्बत का सिला मिला मुझे;
    .
    कि मेरे ख़त के जवाब में, मेरा ही ख़त मिला मुझे!!…..#अक्स
  • “सुना है”

    सुना है रहजन बहुत हैं तिरी राह पर मयकशी के जाम आँखों से लूटते हैं,
    चलों लुटने के बहाने ही सहीं ‘ज़नाब’ तिरी जानिब फिर से हो कर गुजरते हैं,

  • इन्तजार

    तन्हा राहों पर गर मैं भी अकेला चला होता तो अब तलक मंजिल मिल ही गयी होती,
    मगर इन्तजार भी कोई चीज़ होती है ‘हुज़ूर’ गुज़रगाहों पर भी जिसने हमें तन्हा रक्खा,

  • डर

    इक अजीब सा डर रहता है आजकल
    पता नहीं क्यों, किस वजह से,
    किसी के पास न होने का डर
    या किसी के करीब आ जाने का|

  • “ख़ुदकुशी” #2Liner-101

    ღღ__न जाने किस कशिश से कब्र ने, पुकारा था आज “साहब”;
    .
    कि ना चाहते हुए भी मुझको, आज ख़ुदकुशी करनी पड़ी!!…‪#‎अक्स‬
    .

  • तेरी यादों की चुभन रातभर तड़पाती रही

    तेरी यादों की चुभन रातभर तड़पाती रही!
    मेरी साँस तेरे नाम से आती जाती रही!
    गमों की आग में हरलम्हा जल रहा हूँ मैं,
    तेरी आरजू मुझे रातभर रूलाती रही!

    Composed By #महादेव

  • दर्द से भी इश्क हो गया है हमें

    क्यों नहीं जुदा होता दर्द हमसे अब
    लगता है दर्द से भी इश्क हो गया है हमें|

  • कैसे कहे कोई उसको गम नहीं है

    कैसे कहे कोई उसको गम नहीं है!
    जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है!
    हरतरफ तुम खोज लो इलाज-ए-मर्ज को,
    हर दर्द’ का मगर कोई मरहम नहीं है!

    Composed By #महादेव
    mkraihmvns@gmail.com

  • गुफ्तगू #2Liner-100

    ღღ__गुफ्तगू बेशक नहीं करते, निगाहें फिर भी रखते हैं;
    .
    ना जाने प्यार है कैसा, जो कभी बयाँ नहीं होता!!…..‪#‎अक्स‬

  • ‘खरीददार’

    हुज़ूर देखा था मैंनें भी उसे सारी तस्वीरें सरेआम नीलाम करते हुये,
    लगता हैं वो अन्जान हैं इस बात से की यादों के खरीददार नहीं होते,

  • “नाम”

    सुना है नाम बहुत है उसका बदनाम होने के लिये,
    बहुत बड़ा राज होता है जना़ब कामयाबी यूँ ही नहीं मिलती,

  • कहाँ रहते हो #2Liner-96

    ღღ__कहाँ रहते हो तुम भी, आज-कल “साहब”;
    .
    बात-बिन-बात, दिल दुखाने नहीं आते!!….‪#‎अक्स

  • याद #2Liner-97

    ღღ__कोई याद ही ना करे, ये तो हो सकता है “साहब”;
    .
    मगर भूल जाए मुझको, भला ये कहाँ मुमकिन है!!….‪#‎अक्स‬

  • गर फासले बढते है तो बढ जा

    गर फासले बढते है तो बढ जायें
    यूं करीब रहकर भी हम करीब थे कभी??

  • क्या करूँ मैं शिकवा इस बेरहम जमाने से

    क्या करूँ मैं शिकवा इस बेरहम जमाने से!
    थक़ गया हूँ मैं अब और तुझे मनाने से!
    मैं बेवसी की चादरों में लिपटा हूँ मगर,
    दर्द खोज लेता है रोज किसी बहाने से!

    Composed By #महादेव

  • फासले

    वक्त  मिटायेगा  फासले  क्या  पता  कब  वो  मेरे हो जाये,
    मैं ही क्यो मानूँ हार जब भरी महफिल में भी सब अकेले हो जाये

  • “फुरसत” #2Liner-97

    ღღ__कई बार खुद को, यूँ भी बहलाया है हमने “साहब”;
    .
    कि वो आते तो ज़रूर, मगर फुरसत ही कहाँ होगी!!…..‪#‎अक्स‬

  • हर लम्हा तुमसे मैं बात किया करता हूँ

    हर लम्हा तुमसे मैं बात किया करता हूँ!
    यादों से मैं मुलाकात किया करता हूँ!
    हर ख्वाब़ बेइंतहाँ जलाते हैं मुझे,
    खौफ से गुफ्तगूँ’ हर रात किया करता हूँ!

    Composed By #महादेव

  • “तजुर्बा” #2Liner-96

    ღღ__कम उम्र में ही ज्यादा, तजुर्बे हो जाने का ये खतरा है “साहब”;
    .
    कि फिर वो उम्र तो रहती है, मगर कोई बच्चा नहीं रहता !!…..‪#‎अक्स
    .
  • मजबूरियाँ

    कुछ तो मजबूरियाँ तेरी भी रहीं होंगी कुछ तो मजबूरियाँ मेरी भी रहीं होंगी ,
    सब की मजबूरियों में मजबूर थे हम तेरी नजदीकियों से दूर थे हम ,
    अरे जाओं ज़नाब तुम क्या समझोगे दर्द ए दिल को हमारे ,
    अपनी खुशियों मे मशगूल थे तुम अपने गमों मे ही चूर थे हम ,

  • तेरे सिवा दिल में कोई उतरता नहीं है

    तेरे सिवा दिल में कोई उतरता नहीं है!
    तूफान तेरी चाहत का गुजरता नहीं है!
    रूठी है मेरी मंजिल रूठी है जिन्दगी,
    तेरा ख्वाब़ रूठकर मगर मुकरता नहीं है!

    Composed By #महादेव

  • जिन्दगी जब मेरी खामोशियों में होती है

    जिन्दगी जब मेरी खामोशियों में होती है!
    शाँम-ए-गुजर मेरी मदहोशियों में होती है!
    आजमाइशों में दिन गुजर जाता है मगऱ,
    रात तन्हाँ दर्द की सरगोशियों में होती है!

    #महादेव
    mkraihmvns@gmail.com

  • सोचा ना था

    कुछ यूँ कटेगी बेरहम सी  जिन्दगी  हमनें  सोचा ना था,

    वक्त के हाथों ही होगी ख्वाबों की खुदकुशी हमनें सोचा ना था,

    तन्हा  रातों में  ही  हो जायेगा  कत्ले आम साँसों का,

    आँखें खुलेंगी और मिलेगी इस मोड़ पर जिन्दगी सोचा ना था,

  • कभी कभी ये ख्याल आता है

    कभी कभी ये ख्याल आता है
    कि कभी उनका ख्याल ना आये
    तो दिल को राहत मिले|

    मिलते रहते है हमें अपना कहने वाले कई हमें
    जो वाकई अपना समझे
    कभी कोई ऐसा मिले|

  • ज़िद #2Liner-95

    ღღ__ये ज़िन्दगी अक्सर, ज़िद से नहीं चलती “साहब”;
    .
    कुछ धडकनों की खातिर, दिल से समझौता ज़रूरी है!!….‪#‎अक्स
  • खोया शख्स

    खोया शख्स

    ढूंढने निकला हूँ एक शख्स को ,
    जो खो गया है …
    मेरे भीड़ में खो जाने के बाद !

  • दस्तक

    किसी ने कल रात दस्तक दी दिल के दरवाजे पर
    मगर दरवाजा खोला तो वहां कोई न था|

  • “वहम” #2Liner-94

    ღღ__ये भी हो सकता है मुझको, फिर से वहम हुआ हो “साहब”
    .
    फिर भी पूछ लो ना दिल से, क्यूँ मुझे आवाज़ देता है!!…‪#‎अक्स‬
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    AkS_Bhadouria

  • “ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी” #2Liner-94

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    ღღ__ख़ानाबदोश-सी ज़िन्दगी ही, लिखी है नसीब में “साहब”;
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    कुछ लोगों का इस जहाँ में, अपना ठिकाना नहीं होता!!…..‪#‎अक्स

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  • “इंतज़ार” #2Liner-93

    ღღ__इंतज़ार लम्बा ही सही “साहब”, पर मैं समझौता नहीं करता ;
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    हमसफ़र वो ही बनेगा मेरा, जिसे भी मेरी ज़रूरत हो!!…..‪#‎अक्स‬

  • “ख़याल” #2Liner-92

    ღღ__सुना है कि तुमको, बहुत ख़याल है मेरा “साहब”;
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    मैं भी जा रहा हूँ खुद को, तेरे पास छोड़ के आज!!….‪#‎अक्स‬

  • और अब नेशनलिज्म

    पहले घर वापसी, फिर बीफ़ और अब नेशनलिज्म
    और क्या क्या होगा, जो होना बाकी है

  • “गुफ्तगू” #2Liner-82

    ღღ__वो तो अहद-ए-वफ़ा की खातिर, तुमसे मिलता रहा हूँ साहब;
    .
    वरना गुफ्तगू…..वो भी तुमसे…..क्या मज़ाक करते हो!!….‪#‎अक्स‬
    .
  • दीया हूँ मैं तू ज्योति बनकर जलने की कोशिश कर

    न जा तू दूर थोडा पास आ मिलने की कोशिश कर,
    जरा हँसकर के मेरे साथ तू चलने की कोशिश कर,
    काश बदल जाए इरादा जो अभी तक था तेरे दिल में,
    दीया हूँ मैं तू ज्योति बनकर जलने की कोशिश कर।

    कुलदीप विद्यार्थी

  • माना वो सिकन्दर था

    माना वो सिकन्दर था
    उसका भी मुक़द्दर था
    हमने अपने हाथों से उजाड़ा
    कुछ अपने भी तो अंदर था

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