Category: शेर-ओ-शायरी
Ek black face wali ladki ko dekhke arj kiya he. Hum dekhte the unko to log pagal samjhane lage. Hum ishq krne lage unse to rahnuma samajhane lage. Baton hi baton me humne kah diya […]
ღღ__सुलगती रहीं तुम्हारी यादें “साहब”, कल फिर से रात भर; . मैं जलता रहा तमाम रात, फिर से आंसुओं की बारिश में !!….#अक्स
लफ़्जों का खेल तो देखो कभी हंसाते है, कभी रूलाते है
दिन पे दिन गुजरते जा रहे है, मगर जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं
ღღ__चलो मिल ही लेते हैं “साहब”, फिर कभी न मिलने को; . यही ख्वाहिश बची है दिल में, इक आखिरी ख्वाहिश की तरह!!….#अक्स .
तेरा सजदा – 117 कोई तेरी खुदाई में घुल, ख़ुद को खुदी भुलाई है कोई अपनी खुदी में घुल, तेरी खुदी भूलाई है …… यूई
तेरा सजदा – 116 कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला तुझमें जान बसाई है कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला दुनिया में जान बसाई है …… यूई
तेरा सजदा – 115 कोई जग की बेजड़-सोचें छोड़, तेरी ही सोच मन मन्दिर रचाई है कोई जग की सब सोचे जोड़, सिर्फ़ तेरी सोच ही बस भुलाई है …… […]
तेरा सजदा – 114 कोई मन डोर तुझमें बंधवा खुदी ख़ुद से गँवाई है कोई मन डोर ख़ुद में बंधवा खुदी स्दीवी गँवाई है …… यूई
तेरा सजदा – 113 कोई तेरे इश्क में पूरा सौदाई है कोई तेरे इश्क में भी हरजाई है …… यूई
तेरा सजदा – 112 कोई मुश्क़िल हर पार कर तुझको स्दीवी पा जाता है कोई मुश्किलों का राग आलाप तुझको खो जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 111 कोई काँटों पे चल समा तुझमें जाता है कोई फूलों की राह भी ना चल पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 110 कोई तेरी जटिल राह् को अटल इरादों से पार कर जाता है कोई तेरी जटिल राह् में कुछ कदमों में ही बहक जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 109 कोई तुझमें सिमट कर सकून पाता है कोई तन में सिमट कर सकून पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 108 कोई तेरी आग में ख़ुद को जला जाता है कोई ख़ुद की आग में सबको जलाता है …… यूई
तेरा सजदा – 107 कोई तेरी रोशनी में जीवन भर जीता है कोई तेरी रोशनी को जीवन भर खोता है …… यूई
तेरा सजदा – 106 कोई तेरे पावन इश्क़ की रो में सर झुका कर बैठा रह्ता है कोई ख़ुद की दुनियावी चाहतों में नशों में लिप्त रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 105 कोई अपनी हर सफलता को तेरी दुआ कह जाता है कोई अपनी हर सफलता में ख़ुद की दुहाई देता है …… यूई
तेरा सजदा – 104 कोई ग़ुरबत के वक्त को तेरी रज़ा मान हाथ जोड़ जाता है कोई दौलत की माया में ख़ुद के गुणगान गाता रह जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 103 कोई तुझे पाने के इंतज़ार में ही मस्त रह्ता है कोई ख़ुद की चाहों को पाने में ही खोया रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 102 कोई तेरी जूठन को भी चूम कर अपनाता है कोई तेरे प्रशाद में भी स्वाद ढूंढ़ ना पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 101 कोई बिना ख्वाहिश के आजन्म तुझ्से मिलते रह्ता है कोई बिना ख्वाहिश के कभी याद भी ना तुझे करता है […]
तेरा सजदा – 100 कोई बंद आँख कर तेरे मन में उतर जाता है कोई खुली आँखों से भी तुझे ना जान पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 99 कोई तेरे सामने कुछ भी ना बोल पाता है कोई तेरे सामने इच्छाओं का पिटारा खोल जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 98 कोई आँख खुलते ही तुझको सामने पाता है कोई आँख खुलते ही पहले ख़ुद को धियाता है …… यूई
तेरा सजदा – 97 कोई ख़ुद में भी तुमसे ही मिलता है कोई सब में भी ख़ुद से ही मिलता है …… यूई
तेरा सजदा – 96 कोई हर वक्त में बस तेरा ही रह्ता है कोई हर वक्त में बस ख़ुद का ही रहता है …… यूई
तेरा सजदा – 95 किसी का तुझसे मिलके जीना हो जाता है किसी का बस ख़ुद में ही जीना रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 94 कोई मैं से तूं हो गया है कोई तूं को मैं कर रहा है …… यूई
तेरा सजदा – 93 कोई हर पल तुममें सिमटा रह्ता है कोई हर पल ख़ुद में सिमटा रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 92 कोई अपनी दुआओं का असर तुमपे जमा गया है कोई अपनी दुआओं की खाली पोली खोल गया है …… यूई
तेरा सजदा – 91 कोई तुमसे मिल कर थम गया है कोई तुमसे मिल कर चल गया है …… यूई
तेरा सजदा – 90 कोई औरन के दर्द को हरता रह्ता कोई औरन को दर्द में डालता रहता …… यूई
तेरा सजदा – 89 कोई तेरे मन की ख़ुशियों में ही खुश रह्ता कोई ता उमर ख़ुद की ख़ुशियाँ लोच्ता रह्ता …… यूई
तेरा सजदा – 88 कोई तेरे नूरानी नूर में रौशन रह्ता कोई दुनियावी नूर में खोया रह्ता …… यूई
तेरा सजदा – 87 कोई तेरे इशक की इबादत में नाच्ता रह्ता कोई वासना की झमेलों में बंधा मरता रह्ता …… यूई
तेरा सजदा – 86 कोई तेरी बँदगी मैँ झुका हुआ रह्ता कोई ख़ुद की बँदगी में खोया रह्ता …… यूई
तेरा सजदा – 85 कोई सबको यहा ख़ुद सा ही पाता कोई किसी को यहा ख़ुद सा ना पाता …… यूई
तेरा सजदा – 84 कोई तेरी पहचान यहां ख़ुद बन जाता कोई ख़ुद की पहचान भी ना बना पाता …… यूई
तेरा सजदा – 83 कोई सब में कोई फर्क ना ढूंढ़ पाता कोई ख़ुद सा कोई को ना ढूंढ़ पाता …… यूई
तेरा सजदा – 82 कोई सब में तुझको देख् पाता कोई ख़ुद मेे ही ना तुझे देख् पाता …… यूई
तेरा सजदा – 81 कोई पल पल तेरी पहचान बनता कोई ख़ुद की भी पहचान गँवा जाता …… यूई
तेरा सजदा – 80 कोई ख़ुद को तेरे अन्दर समा जाता कोई ख़ुद के अन्दर ही उलझा रह्ता …… यूई
तेरा सजदा – 79 कोई तुझको ख़ुद पे नाज़ करा जाता कोई ख़ुद को ही दागदार करा जाता …… यूई
तेरा सजदा – 78 कोई इस जीवन से ईमान बना कर जाता कोई इस जीवन से ईमान गिरा कर जाता […]
तेरा सजदा – 77 कोई तेरे सामने आ तुझसे नज़रे मिलाता कोई तेरे सामने आ तुझसे नज़रे चुराता …… यूई
तेरा सजदा – 76 कोई तेरे पास सर उठा कर आता कोई तेरे पास सर झुका कर आता …… यूई
तेरा सजदा – 75 कोई गहन मुश्किलों में ईमान ना गिराता कोई रंगीनियों में डूब जीवन बिताता …… यूई
तेरा सजदा – 74 कोई अपनी रूह को तुझमें समाता कोई अपनी रूह को दागदार कर जाता ….. यूई