कभी गुजरती थी जिंदगी
धीरे धीरे, कभी साइकिल पे, कभी पैदल
इक बचपन क्या गुजरा
जिंदगी को जैसे पर लग गये
Category: शेर-ओ-शायरी
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जिंदगी को जैसे पर लग गये
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इलज़ाम #2Liner-82
ღღ__कुछ और इलज़ाम बाकी हों, तो वो भी लगा दो “साहब”;.अभी ना-काफ़ी हैं सितम तुम्हारे, मोहब्बत में, जाँ से जाने को!!…#अक्स. -
तुम नहीं हो पास मगर तन्हाँ रात वही है
तुम नहीं हो पास मगर तन्हाँ रात वही है!
वही है चाहत यादों की बरसात वही है!
हर खुशी भी दूर है मेरे आशियाने से,
खामोश लम्हों में दर्द-ए-हालात वही है!Composed By #महादेव
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“बरसात” #2Linerr-81
ღღ__बिन मौसम बरसात यूँ, जला रही है मुझको “साहब”;
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जैसे शमाँ जलाती है, अपने परवाने को बुला के पास!!….#अक्स.
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सुकूं का बदन आज खस्ता बहुत है
सुकूं का बदन आज खस्ता बहुत है !
लुटेरों का दुनिया में दस्ता बहुत है !!
है सब कुछ यहॉ पर अभावों का ताना !
मिले कुछ नही पर व्यवस्था बहुत है !! -
मुझको हरवक्त़ तेरी प्यास रहती है
मुझको हरवक्त़ तेरी प्यास रहती है!
तेरी आरजू धड़कनों में बहती है!
मेरी मंजिल बन गयी है याद तेरी,
हर अश्क में तस्वीर तेरी रहती है!Written by #महादेव
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“आदत” #2Liner-80
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ღღ__रात के सन्नाटे की, कुछ ऐसी आदत लगी है “साहब”;
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कि सुबह के शोर में हमसे, अब और जिया नहीं जाता!!….#अक्स.

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दर्द ए अश्क
तेरा ज़िक्र तो हर जगह होता है
दर्द ए अश्क आंखों में जो भरा होता है -
तेरी पहली नज़र का रंग
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ღღ__तेरी पहली नज़र का रंग ही, अब तक उतरा नहीं “साहब”;
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हम किससे खेलें होली, हमपे कोई रंग डालता नहीं !!…..
#अक्स.
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हाल ए दिल
क्या कहे जो अब तक न कहा
क्या सुने जो इन कानों से अब तक न सुना
क्या बात होती गर
बिना कहे बिना सुने
समझ लेते हाल ए दिल -
प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है
प्यास तेरी चाहत की बेशुमार आजकल है!
मेरी नजर में हरपल आती तेरी शकल है!
खामोश़ हो गया हूँ गम-ए-जुदाई से मगऱ,
साँसों’ में तेरी दौड़ती तस्वीर की नकल है!Composed By #महादेव
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“रंग” #2Liner-79
.ღღ__क्यूँ उड़ा-उड़ा सा लगता है, तुम्हारे चेहरे का रंग “साहब”;.सब लोग तो कर रहे हैं, कि रंगों का त्यौहार आया है !!…..#अक्स.
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“मोहब्बत” #2Liner-….78
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ღღ__ना कोई उम्मीद, ना तड़प, ना ही इंतज़ार किसी का;
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कितना अच्छा होगा वो जहाँ, जहाँ मोहब्बत नहीं होगी !!….अक्स.

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khamosh
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!
khamosh hai ye pal
ye waqt khamosh haiajeeb sa hai shor
par awaaj khamosh haishabdo ka laga hua hai mela
par matlab khamosh haikholun bhi tau jubaan kis liye
maksad jo khamosh haibahut gehri baatain hoti hai
par maayane khamosh haiik skoon sa hai iss khamoshi main bhi
issi liye meri jubaaan bhi khamosh haikhamosh hai ye pal
ye waqt khamosh hai@@ SAGAR @@
20/03/16 ::7:47 PM -
तेरे दिल का गरूर
तेरे दिल का गरूर -
ख्वाब – 5
ख्वाब मेरे दुश्मन तो नही
पर तब वोह मुझको चुभते हैँ
जब रूह तड़प कर उठती है
वोह जलता है कुछ अन्दर से
…… यूई
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ख्वाब – 4
कुछ ख्वाब कभी रुक जाते हैँ
ता-उमर बना घर पलकों तले
हां बाहर से वोह दिखते नही
अन्दर से पल पल तड़पाते है
…… यूई
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ख्वाब – 3
दिन के ख्वाब रातों में
रातों के ख्वाब दिन में
गर ना दिलाएँ याद अपनी
तो ज़िन्दगी हो जाए अपनी
…… यूई
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ख्वाब – 2
रात के ख्वाब सुलाते हैं
दिन के ख्वाब रुलाते हैँ
मंज़िर वोह खुली आँखों के
अन्दर से काट काट कर जाते हैँ
…… यूई
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ख्वाब – 1
रात के ख्वाब ना दिन में कभी मुझे सताते हैं
दिन के ख्वाब क्यों रातों को बेकरार कर जाते हैं
…… यूई
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ए ज़िन्दगी – 1
ए ज़िन्दगी
ए ज़िन्दगी तुझे हर हाल में
चाहने की कसम हमने खाई है
…… यूई
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मोहब्बत कहां लफ़्जों में बयां होती है
मोहब्बत कहां लफ़्जों में बयां होती है
नज़रों का निशाने कहां अल्फ़ाज खिंच पाते है -
काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए
काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए
घटा-ए जुल्फ मैखाना वलवला-ए रंगे चश्म शराब हो गए!?
-रमेश -
“सज़ा”#2Liner-78
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ღღ__ख़ुदा से माँगते क्यूँकर, भला हम, दुआएँ उनके रोने की;
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वो इश्क करने लगें किसी से, सज़ा को इतना ही काफी है!!…..#अक्स.
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कबसे चेहरा नहीं देखा!! #2Liner-77
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ღღ__कल फिर आईने ने मुझसे, ये पूछ ही लिया “साहब”;.कि कहाँ रहते हो आज-कल, और कबसे चेहरा नहीं देखा!!…..#अक्स.
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“प्यार” #2Liner-76
ღღ__प्यार को अशआरों में, बयान करना बड़ा मुश्किल है;
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ये तो अच्छा हुआ, निगाहों की हर बात वो समझते रहे!!….#अक्स.

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दिलकशी
दिलकश ख्यालों से दिलकशी का सबक कुछ यूँ सिखा गये हो ,
हुज़ूर ! अब तो दिलकशी लफ्ज से भी डर लगने लगा है
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पेश ए खिदमत्
पेश ए खिदमत् में तो है ही ये दिल आपके हुज़ूर, मारना है तो मार ही दो ना ,
यूँ तड़पाना गैरों को किसी बड़प्पन की निशानी तो नहीं, -
Woh hame apna deewana samajhne lage
Ek black face wali ladki ko dekhke arj kiya he.
Hum dekhte the unko to log pagal samjhane lage.
Hum ishq krne lage unse to rahnuma samajhane lage.
Baton hi baton me humne kah diya unko.
To woh hame apna deewana samajhne lage.
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“यादें” #2Liner-75
ღღ__सुलगती रहीं तुम्हारी यादें “साहब”, कल फिर से रात भर;
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मैं जलता रहा तमाम रात, फिर से आंसुओं की बारिश में !!….#अक्स
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लफ़्जों का खेल
लफ़्जों का खेल तो देखो
कभी हंसाते है, कभी रूलाते है -
जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं
दिन पे दिन गुजरते जा रहे है,
मगर जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं -
“आखिरी ख्वाहिश” #2Liner-74
ღღ__चलो मिल ही लेते हैं “साहब”, फिर कभी न मिलने को;.यही ख्वाहिश बची है दिल में, इक आखिरी ख्वाहिश की तरह!!….#अक्स.
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तेरा सजदा – 117
तेरा सजदा – 117
कोई तेरी खुदाई में घुल, ख़ुद को खुदी भुलाई है
कोई अपनी खुदी में घुल, तेरी खुदी भूलाई है
…… यूई
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तेरा सजदा – 116
तेरा सजदा – 116
कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला तुझमें जान बसाई है
कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला दुनिया में जान बसाई है
…… यूई
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तेरा सजदा – 115
तेरा सजदा – 115
कोई जग की बेजड़-सोचें छोड़, तेरी ही सोच मन मन्दिर रचाई है
कोई जग की सब सोचे जोड़, सिर्फ़ तेरी सोच ही बस भुलाई है
…… यूई
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तेरा सजदा – 114
तेरा सजदा – 114
कोई मन डोर तुझमें बंधवा खुदी ख़ुद से गँवाई है
कोई मन डोर ख़ुद में बंधवा खुदी स्दीवी गँवाई है
…… यूई
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तेरा सजदा – 113
तेरा सजदा – 113
कोई तेरे इश्क में पूरा सौदाई है
कोई तेरे इश्क में भी हरजाई है
…… यूई
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तेरा सजदा – 112
तेरा सजदा – 112
कोई मुश्क़िल हर पार कर तुझको स्दीवी पा जाता है
कोई मुश्किलों का राग आलाप तुझको खो जाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 111
तेरा सजदा – 111
कोई काँटों पे चल समा तुझमें जाता है
कोई फूलों की राह भी ना चल पाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 110
तेरा सजदा – 110
कोई तेरी जटिल राह् को अटल इरादों से पार कर जाता है
कोई तेरी जटिल राह् में कुछ कदमों में ही बहक जाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 109
तेरा सजदा – 109
कोई तुझमें सिमट कर सकून पाता है
कोई तन में सिमट कर सकून पाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 108
तेरा सजदा – 108
कोई तेरी आग में ख़ुद को जला जाता है
कोई ख़ुद की आग में सबको जलाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 107
तेरा सजदा – 107
कोई तेरी रोशनी में जीवन भर जीता है
कोई तेरी रोशनी को जीवन भर खोता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 106
तेरा सजदा – 106
कोई तेरे पावन इश्क़ की रो में सर झुका कर बैठा रह्ता है
कोई ख़ुद की दुनियावी चाहतों में नशों में लिप्त रह्ता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 105
तेरा सजदा – 105
कोई अपनी हर सफलता को तेरी दुआ कह जाता है
कोई अपनी हर सफलता में ख़ुद की दुहाई देता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 104
तेरा सजदा – 104
कोई ग़ुरबत के वक्त को तेरी रज़ा मान हाथ जोड़ जाता है
कोई दौलत की माया में ख़ुद के गुणगान गाता रह जाता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 103
तेरा सजदा – 103
कोई तुझे पाने के इंतज़ार में ही मस्त रह्ता है
कोई ख़ुद की चाहों को पाने में ही खोया रह्ता है
…… यूई
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तेरा सजदा – 102
तेरा सजदा – 102
कोई तेरी जूठन को भी चूम कर अपनाता है
कोई तेरे प्रशाद में भी स्वाद ढूंढ़ ना पाता है
…… यूई
