तेरा सजदा – 73 कोई किसी का दिल ना दुखाता कोई सबको खून के आँसू रुलाता ….. यूई
तेरा सजदा – 73 कोई किसी का दिल ना दुखाता कोई सबको खून के आँसू रुलाता ….. यूई
तेरा सजदा – 72 कोई जीवन से तुझे कमा जाता कोई जीवन को यूँ ही गँवा जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 71 कोई तेरे मन की रज़ा को समझ जाता कोई ख़ुद के मन को भी जान ना पाता ….. यूई
तेरा सजदा – 70 कोई प्यार पर दुनीया का विश्वास बड़ा जाता कोई प्यार को हर दिल से मार मुकाता ….. यूई
तेरा सजदा – 69 कोई तेरी हर शय से प्यार निभाता कोई तेरी हर शय को मार मुकाता ….. यूई
तेरा सजदा – 68 कोई जीवन भर तेरी दुनिया को सज़ाता कोई जीवन भर उसको विकृत करता ….. यूई
तेरा सजदा – 67 कोई पल पल तेरे नाम से डरता कोई तेरे नाम से लोगो को डराता ….. यूई
तेरा सजदा – 66 कोई हर पल तेरे सरुर में रह्ता कोई हर पल ख़ुद के ग़रूर में रेह्ता ….. यूई
तेरा सजदा – 65 कोई खुद की खुशियाँ है चाहता कोई अपनी ख़ुशियाँ लुटाना है चाहता ….. यूई
तेरा सजदा – 64 कोई तुझसे मुश्किलों के हल है चाहता कोई तुझसे खुशियों के फल है चाहता ….. यूई
तेरा सजदा – 63 कोई खुद के लिए उपहार है चाहता कोई दूसरों पर न्योछावर कर जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 62 कोई खुद के लिए तेरा प्यार है चाहता कोई सबके लिए तेरा प्यार है चाहता ….. यूई
तेरा सजदा – 61 कोई तेरी अनुकंपा है चाहता कोई दूसरों पर दया है लूटाता ….. यूई
तेरा सजदा – 60 कोई टूट के तुझको भजता कोई टूट कर तुझको भजता ….. यूई
तेरा सजदा – 59 कोई दिल खोल तुझे भजता कोई दिल खो के तुझे भजता ….. यूई
तेरा सजदा – 58 कोई तेरी भाषा में तुझे भजता कोई खुद की ही भाषा में भजता ….. यूई
तेरा सजदा – 57 कोई आजन्म तुझमें विश्वास जगाता कोई बीच राह् में तुझे छोड़ जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 56 कोई बंधनों में तुझको है ध्याता कोई सब बंधन तोड़ तुझे रिझाता ….. यूई
तेरा सजदा – 55 कोई आँख बंद कर तुझमें रमता कोई आँख तेरी में है जा बसता ….. यूई
तेरा सजदा – 54 कोई तेरे दिल में है चाहता बसना कोई तेरे मन चाहता है सजना ….. यूई
तेरा सजदा – 53 कोई दूसरों को बछाने हेतू काँटों का ताज पहनता कोई दूसरों को गिराने हेतू काँटों की राह् बनाता ….. यूई
तेरा सजदा – 52 कोई अपने धन के लिए तुझे धियाता कोई दूसरो के दर्दों के लिए तुझे धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 51 कोई पल पल तेरे शुक्र में जीता कोई पल पल शिकायतों में जीता ….. यूई
तेरा सजदा – 50 कोई तेरी ताकत को नमन कर सर झुकाता कोई अपनी ताकत बढाने को सर झुकाता ….. यूई
तेरा सजदा – 49 कोई जो दिया तूने उसका आभार जताता कोई जो ना दिया उसकी शिकयात जताता ….. यूई
तेरा सजदा – 48 कोई खुद के लिए तेरे पास है आता कोई सबके लिए तेरे पास है आता ….. यूई
तेरा सजदा – 47 कोई पल पल तेरा शुकर है मनाता कोई अगले ही पल तुझे भूल जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 46 कोई बोल के तुझको अपने पाप भूलाता कोई लालच दे तुझे अपने पाप भूलाता ….. यूई
तेरा सजदा – 45 कोई दिल ही दिल में तुझे जपता कोई बोल बोल मंतर तुझे जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 44 कोई तुझे रंग रंग कर धियाता कोई खुद को रंग कर है धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 43 कोई बाल मुंडवा कर धियाता कोई बाल बड़ा कर धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 42 कोई तुझे छंदों में धियाता कोई शब्दों में काम चलाता ….. यूई
तेरा सजदा – 41 कोई पानी में खुद को डूबोता कोई पानी में तुझको डूबोता ….. यूई
तेरा सजदा – 40 कोई मन्दिर में तुझे सज़ाता कोई मस्जिद से तुझे बुलाता ….. यूई
तेरा सजदा – 39 कोई घंटी बजा कर तुझे धियाता कोई ढोल पीट कर तुझे रिझाता ….. यूई
तेरा सजदा – 38 कोई लंबे जीवन के लिए आता कोई इससे छुटकारा पाने को आता ….. यूई
तेरा सजदा – 37 कोई इस जन्म को तेरे पास है आता कोई अगले जन्मो के लिए है आता ….. यूई
तेरा सजदा – 36 कोई आशीर्वाद ले कर है धियाता कोई आशीर्वाद दे कर है धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 35 कोई सफेद कपड़ों में तुझे सज़ाता कोई बस खुद को ही खूब सज़ाता ….. यूई
तेरा सजदा – 34 कोई अकेले में बैठ तुझे धियाता कोई भीड़ में नाच तुझे धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 33 कोई सिक्कों से तुझे तुलाता कोई सिक्कों में खुद तुल जाता ….. यूई
तेरा सजदा – 32 कोई पक्षियों को पूज तुझे धियाता कोई पक्षियों को मार तुझे रिझाता ….. यूई
तेरा सजदा – 31 कोई ख़ुद को धागे बाँध कर धियाता कोई तुझको धागों में बाँध धियाता ….. यूई
तेरा सजदा – 30 कोई तुझको सब दे कर खुश होता कोई तुझसे सब ले कर खुश होता ….. यूई
तेरा सजदा – 29 कोई तरतीब से तुझे धियाता कोई बिन तरतीब तुझमें समाता ….. यूई
तेरा सजदा – 28 कोई तेरे पास रो कर आता कोई तेरे से दूर् हो रोता ….. यूई
तेरा सजदा – 27 कोई छप्पन भोग से तुझे रिझाता कोई अंग अपना काट तुझे चड़ाता ….. यूई
ज़नाब बदल सी गयी है जिन्दगी कुछ यूँ वक्त की दरकार में, यादों की बहार में, मिलन की दरार में ,और तेरे इन्तजार में,
ღღ__ख़ुद से है, खुदा से है या तुझ से है “साहब”; . जाने क्यूँ, इक नाराज़गी-सी रहती है आज-कल!!….#अक्स .
रात के ख्वाबों में भी उसका सहारा चाहिये, दिन के हर लम्हात में उसका इशारा चाहिये, हुजूर वो भी इन्सान है शैतान नहीं ,उसकी पलकों को भी तो दरिया का किनारा चाहिये,
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