काव्य प्रतियोगिता

गांधी मशाल

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी —————— 🙈🙉🙊 बाहर से गंभीर धीर,👴 जज्बों से थे तूफानी।🌋 अंग्रेजों के पैर उखाड़ गए, वो नाम था गांधी।🤓 अल्पाहारी, शाकाहारी, 🌿🌾 सत्य निष्ठ, अवतारी,👼 बैरिस्टर से साधु बन गए, मानवता के पुजारी ।👤 आजादी के आंदोलन में थी, उनकी भागीदारी ।👥👥👥👥 सत्य अहिंसा पथ पर चलना, 👣👣 माना जिम्मेदारी। चंपारण ,खेड़ा, के नायक, गांधी थेआंदोलनकारी ।👀 जेल भरो आंदोलन की , कर डाली थ... »

‘गांधी’ एक विचारधारा

गांधी जी पर कविता तो हर कोई रचते हैं। आओ बापू के विचारों पर चर्चा करते हैं। बापू ने कहा था बुरा मत देखो। मैं मुँह फेर लेता हूँ, देख कमजोरों पर अत्याचार होते। मैं आँखें फेर लेता हूँ, देख शोषण और भ्रष्टाचार होते। मुझे वो कागज का टुकड़ा भाता है। जिस पर छपा बापू मुस्कुराता है। बुरा तो मैं देखता ही नहीं, मुझे बस हरा ही हरा नजर आता है। बुरा कर, ईश्वर से हम क्यों नहीं डरते हैं। आओ बापू के विचारों पर चर्च... »

महात्मा गाँधी

गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में देश था बिलकुल सड़ गया | तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा, जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया | कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे, जनक्रांति लिए वो आगे बढ़ गया | अंग्रेज देना चाहते थे धोखा, पर वो पूर्ण स्वराज पर अड़ गया | बर्तानिया सरकार के खिलाफ, शोले भड़क रहे थे हर मन में | जलाकर विदेशी वस्तुएँ , आजादी की आग लगा दी हर जन में | भारत छोड़ो आंदोलन का तूफान ऐसा चलाया, और... »

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया खट्‌ खट्‌ की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में राष्ट्रहित में ध्वजा फहराक... »

महात्मा गांधी

गांधी नहीं सिर्फ नाम है, वो देश का मान है नोटों पर देख तस्वीर, ना सोचो खास इंसान है वो हममें से ही आने वाला बिल्कुल आम इंसान है सिर्फ और सिर्फ भारत में ही, बसती उनकी जान है आंख पर चश्मा, हाथ में लाठी, सत्य अहिंसा पहचान है नायक नहीं वे जननायक, अंग्रेज़ो मे खौफ उनकी पहचान है हर जन गण में जगाना प्रेरणा, उनकी ताकत का राज है कठिनाईयों को पीठ नहीं दिखाना, सीखने की जरूरत उनसे आज है मुख पर राम; दिल में रा... »

महात्मा गांधी

कारण जिसके हर हिंदवासी, आजाद हवा में रहता है कारण जिसके आज विदेश में, सर उठा के भारत चलता है उस मां भारत के वीर पुत्र को, श्रद्धा सुमन चढ़ाने आया हूं मै उस आंधी जिसका नाम था गांधी कि गाथा गाने आया हूं 2 अक्टूबर 1869 , पोरबंदर बड़ा हर्षाया था करमचंद और पुतलीबाई के, घर पर मोहन आया था हां करी शैतानी; अठखेली, और कई बदमाशी भी जब पकड़ी राह सत्य के पथ कि, मिली सिर्फ शाबाशी ही वे प्रेरणापुंज वह राष्ट्रकुं... »

महात्मा गाँधी

हर साल मेरी पुस्तक (हिंदी)मे, पाठ महात्मा गाँधी का होता है, बापू का व्यक्तित्व याद है पर, असल जिंदगी मे कोई असर नहीं इसका होता आता है | बापू फिर से आकर, देश बचा लो, क्रांति बिगुल बजाकर | तुमने जो जलाया उम्मीद का दीया, मशाल वो बन गया था | दुगने लगाना के आगे तब, हर किसान तन गया था | भुखमरी, महामारी से अंग्रेजो को क्या लेना था, अकाल पड़ कर देश शमशान बन गया था | लाठियोंऔर गोलियों के प्रहार से, देश का क... »

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधीजी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया खट्‌ खट्‌ की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में राष्ट्रहित में ध्वजा फहर... »

सच

* सच * अब तो बाज़ारों में बेचारी सच्चाई सिसकियाँ भरती हैं कोई भी ख़रीददार नहीं उनका जो भी आता है बेईमानी , मक्कारी ख़रीद कर ले जाता है हां , कभी कभार भूला भटका कोई जिस्म आ जाता है ‘ सच ‘ ख़रीदने न तन पर पूरे कपडे़ कमबख़्त पेट भी पीठ से चिपकी हुई फ़िर भी ख़रीदने आ जाते हैं सच चंद ऐसे ही लोगों से सच्चाई की झोपड़ी में सब्र ओ सुक़ून की अंगिठियां जलती हैं तभी तो वो आज भी बापू ( गांधी ) के इ... »

Page 2 of 3123