Category: काव्य प्रतियोगिता

  • नये जमाने की नयी बेटियाँ

    कामयाबी के डगर पे चल पड़ी है,
    नये जमाने की नयी बेटियाँ।
    बेटी से नफरत करने वाले जालीम समाज,
    देख आसमां में छा गयी आज की नयी बेटियाँ।।
    वो जमाना गया जब हम जुल्म के शिकार थे,
    अब ईंट के जवाब पत्थर से दे सकती है बेटियाँ।
    हम से है जमाना जमाने से हम नहीं,
    यही एलान करती है आज की नयी बेटियाँ।।
    बेटी को जन्म से पहले ही माड़ने वाले,
    जरा सोच तेरी माँ भी किसी की रही होगी बेटियाँ ।
    क्या होता जब माड़ देती तुझे वह अपनी ही कोख में,
    जिसने तुझे जन्म दिया होगी वह उच्च विचार की बेटियाँ।।

  • mere dil

    मेरे दिल से आज एक आवाज आयी
    बोलै बहार मत जाना मेरे भाई
    वरना पुलिस करेगी पिटाई
    पुलिस और डॉक्टर कर रहे है कोरोना से लड़ाई
    कोरोना के चाकर में कुछ की रुक गयी है शादी और सगाई
    सबकी रुक गयी है कमाई
    सबको मिलकर हटानी है इस देश से कोरोना की परछाई
    सरकार की मनो बात जो उन्होंने है बताई
    आओ घर में रहकर जीते इस कोरोना की लड़ाई
    मेरे दिल से आज एक आवाज आयी

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • अब पछताए होत क्या (कोरोना)

    कोरोना से न करना यारी।
    यह है जान लेवा बिमारी।।
    कितने को डसा ए काला नाग।
    आज पर गया हम सब पे भारी।।
    क्यों सो चूके थे हम और तुम।
    चुपके से कोरोना का वार था करारी।।
    अच्छा होता काश!! हम संभल जाते।
    शायद ही देखने को मिलता ए महामारी।।

  • मेरे पास

    धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई
    मेरे दिल को लुभा जाता है कोई
    मेरे कान में मीठे स्वर बोल
    परछाई बन जाता है कोई
    मेरा मन ज़रा बेचैन है
    उसको ज़रा सा भी नहीं चैन है
    दर्शन दे मन शांत कर जाता है कोई
    धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • ♥️♥️वो माँ होती है ♥️♥️

    ♥️♥️mother’s day special♥️♥️

    जो नज़रो से परख ले
    वो माँ होती है ।
    दर्द को दिल में जो रख ले
    वो माँ होती है ।

    कर कोई काम तू बुरा
    खुदा से चाहे हो छुपा
    जो तेरा चेहरा भांप ले
    वो माँ होती है ।

    जो तुझको जन्म दे
    तेरे मुख को चूम ले
    हो तू कष्ट में तो रोती है
    वो माँ होती है ।

    जो कष्ट तेरे छीन ले
    चुभते काँटे बीन ले
    तुझपे प्यार वार दे
    वो मां होती है ।

    जब कभी तू उदास हो
    भले कोई ना पास हो
    जो सदैव साथ दे
    वो मां होती ।

  • Maa

    🌹*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*🌹 💕
    माँ- दुःख में सुख का एहसास है,
    माँ – हरपल मेरे आस पास है।
    माँ- घर की आत्मा है,
    माँ- साक्षात् परमात्मा है।
    माँ- आरती, अज़ान है,
    माँ- गीता और कुरआन है।
    माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,
    माँ- उस रब का ही एक रूप है।
    माँ- तपती धूप में साया है,
    माँ- आदि शक्ति महामाया है।
    माँ- जीवन में प्रकाश है,
    माँ- निराशा में आस है।
    माँ- महीनों में सावन है,
    माँ- गंगा सी पावन है।
    माँ- वृक्षों में पीपल है,
    माँ- फलों में श्रीफल है।
    माँ- देवियों में गायत्री है,
    माँ- मनुज देह में सावित्री है।
    माँ- ईश् वंदना का गायन है,
    माँ- चलती फिरती रामायण है।
    माँ- रत्नों की माला है,
    माँ- अँधेरे में उजाला है,
    माँ- बंदन और रोली है,
    माँ- रक्षासूत्र की मौली है।
    माँ- ममता का प्याला है,
    माँ- शीत में दुशाला है।
    माँ- गुड सी मीठी बोली है,
    माँ- ईद, दिवाली, होली है।
    माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,
    माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है,
    माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है।

    अंत में मैं बस एक पुण्य का काम करता हूँ,
    दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ।

    🙏 *हैप्पी मदर्स डे* 🙏

  • माँ

    Happy mothers day
    हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों
    डूबती नैया पार लगदे वो किनारा है दोस्तों
    माँ के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जायगा
    माँ के प्यार से सब ठीक हो जायगा
    सेवा करो माँ की जीवन का हर शून्य ख़तम हो जायगा
    अपमान मत करो माँ का वर्ण हर पुण्य ख़तम हो जायगा
    माँ शब्द बोलने से चारो धाम हो जायगा
    हर व्यक्ति बस यही गुण गाएगा दोस्तों
    हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों

    written by – himanshu ojha

  • मां तू मां है

    “माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम”
    ************************
    माँ तू जननी है,
    तूने मुझे,
    कोख में,
    पाला,
    नौ माह तक,
    जन्म दी,
    इस वसुंधरा का,
    दर्शन कराई,
    जननी हो न,
    खुद दुख सहकर,
    सुख का भोग कराई,
    हाँ माँ,
    नदियों के नीर की,
    निर्मलता की धार हो,
    शीतल चन्दन हो तुम,
    तू ही तो हो,
    मुझे चलना सिखाई
    मेरे हर पगो का सहारा बनी,
    मुझे बातें करना सिखाई,
    हाँ माँ,
    मुझे सिखाई बाते करना,
    मैं आपके बाग का,
    फुलवारी हुँ,
    हाँ माँ,
    आप खुद भूखी रहती,
    खिलाती मुझे,
    भर पेट भोजन,
    न अघाउँ तब तक,
    मेरे तुतली जुबा रोना,
    संगीत है आपका,
    खुद रहती बीमार,
    पिलाती दवा मुझे,
    आप तो ममता की,
    अथाह समुद्र हो,
    हाँ माँ,
    मुझे सूखे में,
    सुलाती,
    खुद गीले में सोती,
    रात-रात भर,
    केवल और केवल खुद,
    जगती,
    मेरे लिए,
    और सुलाती मुझे,
    हाँ माँ !!
    मेरे हर दर्द का अहसास,
    खुद ब खुद करती,
    हाँ माँ!!
    ममता की करती बौछर,
    और पूरी करती मेरी आस,
    आप तो विशाल बरगद हो,
    जिसमें ममता की,
    छायाँ फलती फूलती है,
    तेरे डाँट फटकार में,
    छिपी होती है प्यार,
    ममता की आँचल में,
    आश्रय दी मुझे,
    हाँ माँ !!
    मेरे बचपन से,
    यौवन तक का सफर,
    हर उस कष्ट में,
    हाँ,
    मुझे सहारा दी,
    मेरे हर बातों को,
    पहुँचती बाबुल तक,
    करती मेरे,
    ख्वाइस को पूरा,
    बचाती बाबुल के,
    डाँट से,
    ओ मेरी अच्छी माँ,
    प्यारी माँ,
    आप तो,
    ममता की सिंधु हो,
    मुझे काबिल,
    इंसान बनाने में,
    आपके हरेक,
    पसीने के बून्द है,
    ममतामयी,
    ओ प्यारी माँ,
    हाँ,
    हाथ है आपका,
    कहता है,
    इसलिए भीम,
    माँ तो माँ होती है,
    ओ प्यारी माँ,
    ओ मेरी भोली माँ,

  • इम्तिहा

    “इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम”

    “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम,
    मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े”

    “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का,
    दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते”

    “चिराग जलाते हुए जीने की तमन्ना लिए,
    दर्द बयाँ करू कैसे चिराग तु बुझाते चले”

    “डगर भी कठिन इम्तिहा की मौन है हम,
    मेरे परवर दिगार रहम नाचीज पे तू कर”

  • kuch baat to hai tum me

    Kuch baat to hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai

    Tumhari rooh ko meri rooh se har waqt milati hai

    Yaad me tumhari kabhi hasati hai to kabhi rulati hai

    Badi kambhaqt hai tumhari yaad sapne me bhi aa jaati hai

    Jaha jau waha tumhari parchai dikh jati hai

    Tumhare naino ki sundarta is dil me samati hai

    Tumhari katilana muskan pe jaan si atak jaati hai

    Kuch to baat hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai

  • आवारा सावन

    सावन के एक एक बूंद जो गिरा मेरे होंठो पे।
    कैसे बयां करू अपनी दास्तां इन सुर्ख होंठो से।।
    उन्हें क्या पता कब चढी सोलहवां सावन मुझ पे।
    आ कर एक मर्तबा देख तो ले क्या गुजरा है इस दिल पे।।
    बहकने लगे है मेरे कदम यही बेईमान फीजाओ में।
    उलझन में फंस गए हम इसी बरस के सावन मे।।

  • किसान

    बिन पानी बनी है भूमि बंजर ,
    नहीँ कर पाया है किसान खेती इसमेँ ,
    नहीँ बो पाया है बीज वो इसमेँ ,
    मिली है अमानत मेँ उसे भूमि बंजर ,
    हो रही है तकलीफ उसे ,
    नहीँ कर पाया है वो फसल उसमेँ ,
    बढ गया है कर्ज उस पे ,
    अब नहीँ है कोई उपाय उस पे , तो कर रहा आत्महत्या पेड पे ।

  • नारी

    “नारी”
    प्रकृति सा कोमल तुम,
    मेरु समान दृढ़ता लिए,
    नीर सा निर्मल हो तुम,
    नारी तुम न हारी हो ||

    अन्धकार की दीपक,
    निश्च्छलता की मूरत,
    सोये मन की आशा हो,
    नारी तुम न हारी हो ||

    वसुंधरा की शोभा हो,
    वात्सल्य मयी ममता,
    धिरजता की मूरत धर,
    नारी तुम न हारी हो ||

    अर्धनारेश्वर में तुम तो,
    नर नारी के रूप लिए,
    जननी तुम तो जननी,
    तुम बीन अधूरी सृष्टि,
    नारी तुम न हारी हो ||
    योगेश ध्रुव”भीम”

  • Haal Bataeye

    Samundar kehta hai nadi se zara mujhme mil jayeye
    Aaram se bathiye zara apna haal to bataeye
    Wo bole haal to bata denge zara ek cup chai to layeye
    Sirf chai se baat nhi banegi zara nashta bhi to khaeye
    Mata ji ki tabiyat kaisi haii ye bataeye
    Apne sath unko bhi humare leke ayeye
    wo sab to thik hai apna haal to bataeye

  • suneye meri kavita

    Shayri – Kiske khwaabo me raat bhar jag rahe ho
    Kya baat hai aaj bade khush lag rahe ho
    POEM
    Suneye zara meri kavita shuru me karta hu
    Garmi ka waqt hai thodi thandi baat me karta hu
    In dino sabki sundar kavitaye me padhta hu
    Kavita likhna ap sabse hi to me sikhta hu
    Fir jake apni kavita apke samne rakhta hu
    Desh ka naujavan hu
    Tirangee se pyar karta hu
    Ap sabhi ki tarah me bhi uspe marta hu
    Bharat mata ki jai har bar me yeh kehta hu
    Kisike liye bura na bolu har bar me yeh sochta hu
    Kaisi lagi meri kavita jo me likhta hu
    Kya kavita ke dhaage me shabd sahi pirota hu
    Suneye zara meri kavita shuru me karta hu

    THANK YOU

  • Desh Sankat

    Desh Sankat

    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya
    Kuch ko kar raha bimar or kuch ko maut ki nind sula gaya
    Ye sadko pe kaisa sanata hai chaa gaya
    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya
    Ab aya hai to use hume harana hai
    Markar nhi hath jodkar usse bhagana hai
    Bahar bulaye kitna par ghar par rehke use harana hai
    Khud to khush rehna or dusro ko khush karna hai
    Bure waqt me ekta banaye rakhna hai
    Desh ke veero me doctor upar aa gaya
    Khud ki janpar khel kar dusro ko bacha gaya
    Senik sarhad pe desh ki raksha hai karte
    Andar se police ne hai is bimari se bacha diya
    Sabji wala ho ya rashan wala ya ho newspaper wala
    In sab ne us waqt madat ki jab pura desh ghabra gaya
    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya

  • मां

    लिये छः ऋतुयें आये नया साल,
    हर ऋतु गुजरे मेरी संग मां के,
    त्यौहार मेरे न तुमसे, संग मां के,
    मेहनत मेरी ,उगले सोना मेरी माँ,
    समझता मैं खिलखिलाना मां का,
    सिसकता मैं देख सुखी धरा को,
    सुनी सुखी आंखे मेरी देखे अंबर,
    सुख गया वो भी जैसे भूख मेरी,
    जा रहा मैं अब उसके द्वारे,
    लिये जा रहा अपने शिकवे,
    सौप दिये जा रहा मां अपनी,
    विलाप मेरा भरेगा अंबर,
    बन बूंदे टपकेंगे मेरे आँसू,
    मेहनत से थाम लेना मेरी माँ,
    जा रहा मैं अब उसके द्वारे।

  • बसंत ऋतु

    बसंत ऋतु में जब बहा बसंती ब्यार।
    गिरने लगी आसमान से सावन के फुहार।।
    कहीं दूरऽ से जब कोयलिया मधुर गीत सुनाए ।
    दिल के बगिया में सैंकड़ों कलियां खिल जाए।।
    ए रिमझिम के नजारा लगता है कितना न्यारा।
    दिल में एहसास जगाए मीठा मीठा प्यारा प्यारा।।
    पतझर जीवन में साल भर पे आया बसंत बहार।
    यही मौसम में होता है किसी से किसी को प्यार।।
    कहे कवि — काश ऽऽ यह बसंत ऋतु न आता।
    सोंचो – सुखी डाली पे मेंहदी के रंग कैसे चढ पाता।।

  • ,,,,,, क्या कम है ?

    ,,,,,,क्या कम है (कविता) Independence day

    कौन कहता है हमारे वतन में, प्रेम की गंगा नहीं बहती है।
    हिमालय से गंगा, यमुना, और सरस्वती के मिलन ए क्या कम है?
    यही वो देश है जो कभी, सैकड़ों सपूतो ने लिया था जन्म।
    देश पर हो गये थे सभी कुर्बान,उनकी कुर्बानी की दास्तां अन्य दास्तां से कम है?
    हमारा आन तिरंगा बान तिरंगा शान तिरंगा ,
    तीन रंगो में लिपटी हमारी धरती माता, यही रंग भारत को
    भाता ,कितना मनोहर कितना प्यारा, यह तीन रंगा किसी अन्य रंग से कम है ?
    आजादी बनी हमारी एकता की निशानी,हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई, सभी को था आजादी प्यारा, बड़े ही लगन से देश में नया प्रभात उगाया, उन सभी के लगन अन्य लगन से कम है।

  • बीती रात, टूटी आश

    आश लगाई , दूर मेघालय में
    कर्जा लाया, बीज लगाया
    खेतो खलियानो में………
    बीता सावन ,भादो आया
    न आया बादल,
    खेतो खलियानो में……..
    बीती रात, टूटी आश,
    बैठा किसान,
    खेतो खलियानो में…….
    कुऐ सुखे, धरती प्यासी,
    न आया पानी ,नल कूपों में……
    चेहरा मुरझाया,
    पानीआया ,ऑखो में…….
    उदर दहक उठा,
    धुऑ ना उठा चूल्हो में……
    कोहराम मचा घरानो में….
    फन्दो पर झूला,
    लटक रहा किसान
    खेतों खलियानों में……।

  • चितचोर सावन

    ए साजन आम के बाग में,
    झूला लगा दे।
    अब की बरस
    सावन के मधुर गीत सुना दे।
    रिमझिम बारिश में
    भीगे है मेरा तन बदन
    मोरनी की भाँति
    मै बलखाउँ
    ऐसा एक धून बजा दे।
    चारो तरफ के रुत है
    प्रेम – ए- इकरार के
    सतरंगी रंग मन को लूभाए
    इन्ही रंगो से मुझे सजा दे।
    जब से सावन आए
    आए दिन बहार के
    प्रेम रस की मै प्यासी
    बस एक घूँट पिला दे।
    नींद चुराए
    चितचोर सावन के महीना
    इन झूलो की कतारो में
    मेरा भी झूला लगा दे।

  • सावन के फुहार

    पतझर के मौसम
    उस पे बसंत बहार
    आसमान से बरसे
    सावन के फुहार।
    कहीं मन जले
    कहीं ख्वाबो के
    आशियाना जले
    यही मौसम में होता है
    अपनो से अपनो का प्यार।।
    बिन पायल के
    पग में घूंघरू बजे
    कोयल की बोली
    साजन के याद दिलाये
    बड़ा दर्द जगाता है
    सावन के फुहार।

  • ऐसा भारत बनाए

    कविता
    ऐसा एक भारत बनाए
    नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया।
    तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।।
    आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए।
    चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा
    एक भारत बनाए।।

  • ऐसा भारत बनाए

    कविता
    ऐसा एक भारत बनाए
    नैतिकता क अभाव में, हमने जो स्वच्छता को अपनो से अलग किया।
    तरह तरह के बीमारियों को गले लगा कर, अपना अनमोल जीवन नष्ट किया।।
    आओ हिन्द देश के निवासी, स्वच्छता के एक नया संसार बनाए।
    चारो दिशाओं में हो हरियाली ही हरियाली ऐसा
    एक भारत बनाए।।

  • कोरोना से डरा ना

    कविता
    कोरोना से डरो ना
    स्वच्छता को अपनाओ, कोरोना को ठेंगा दिखाओ।
    जहाँ से आया हमारे देश में, उसे वहाँ भगाओ।।
    चारो तरफ मचा दिया कोहराम, परेशान हो गए हैं हम।
    महाकाल न रहे हमारे बीच, ऐसा एक माहौल बनाए।।
    समस्त नियम के पालन कर के, हम उस पर हावी हो जाए।
    मिटा सके न हम सब को, ऐसा एक पर्यावरण बनाओ।।
    बहुत सह लिए दर्द, अब दर्द हम से सहा नहीं जाता।
    स्वच्छता के हथियार बना कर, कोरोना पर तोप चलाओ।।
    कहे “प्रधुमन “कोरोना से क्यों डरना, ए देश के नौजवानो ।
    डरना हमने सिखा ही कब था, यही दास्तान उसे सुनाओ।।
    -_— प्रधुमन “अमित “

  • स्वच्छता

    स्वच्छता के डगर पे,
    देशवासीयो दिखाओ चल के।
    करोना भागेगा डर से,
    तुम और हम ही योद्धा है आज के।।
    पल दो पल के जीवन में,
    क्यों गँवाए हम जान के।
    बल बुद्धि दिया भारत ने,
    फिर क्यों रहे हम डर-डर के।।
    आओ बजाय ताली दो हाथों से ,
    प्रहरी जो बन बैठे हैं हमारे।
    अस्वच्छता के ब्यार मिटा के,
    आओ — स्वच्छता अभियान चलाए जम के।।

  • जब ही जीवन है

    कविता
    जल ही जीवन है

    मेघा रे मेघा रे जल बरसा दे ।
    पतझर जीवन खुशहाल बना दे।।
    गर जल नहीं तो यह संसार नहीं।
    एक बार धरती पर अमृत बरसा दे।।
    चारो तरफ है प्यास ही प्यास ।
    अपनी धारा से धरती की प्यास बुझा दे।।
    जल नहीं तो माटी में बल नहीं।
    जल बल से हमारी तकदीर बना दे।।
    बड़ी उम्मीद से सिंचा अपनी तकदीर को।
    हमारी मेहनत में नया रंग भर दे।।
    कहाँ गए वो रिमझिम के फुहार।
    अब की बरस खेतो में हरियाली भर दे।।

  • आज फिर से

    आज फिर से
    खिल जाने दो रात
    महकती हुई साँसों से भीगी
    तेरी हँसी की ख़नक
    उतर जाने दो
    एक बार फिर से
    रूह तक
    जैसे गूँज उठती हैं
    वादियाँ
    पर्वत से उतरती
    किसी अलबेली नदी की
    कल-कल से
    और तृप्त हो जाती है
    बरसों से प्यासी
    शुष्क धरा
    मन्नतों से मिली
    किसी
    धारा से मिलकर ।

  • छोटी सी मुलाक़ात

    वह छोटी सी मुलाक़ात
    विचरती रहती है अक्सर
    स्मृतियों में मेरी ।

    जब सिमट आए थे तुम
    मेरी पलकों के दायरे में,
    सकुचाते हुए,
    छोटे-छोटे कदमों से…
    मुस्कुराती हुई कोई बहार
    उतर आई हो
    किसी वीरान उपवन में जैसे ।

    सुनो न !
    एक बार फिर से भर दो
    मन की सूनी टहनियों में वही फूल
    तितलियों से एकाकी आकाश
    और फ़िज़ाओं में उन्हीं साँसों की महक ।
    सदियों तक रहेगा इंतज़ार
    कभी फिर से आ जाना
    उसी उपवन की देहरी पर,
    सकुचाते हुए,
    छोटे-छोटे कदमों से चलकर
    ऐ बहार !

  • होली

    चलो होली मनाते हैं
    सड़कों से पत्थर हटा कुछ गुलाल उड़ाते हैं
    चलो होली मनाते हैं।
    महरूम है बरसों से कोई बस्ती होली में
    वहां जाकर गुझिया पापड़ बांट आते हैं
    चलो होली मनाते हैं
    डर से बंद हो गई है खिड़कियां जिनकी
    प्रेम की थोड़ी बारिश से चलो उनको हंसाते हैं
    भूल कर सब कुछ चलो एक रंग में रंग जाते हैं
    चलो होली मनाते हैं चलो होली मनाते हैं ।

  • श्याम के रंग में राधा दीवानी

    प्रीत की डोरी बांधें चली आई,
    तुझसे श्याम होली खेलन चली आई।
    बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी,
    दीवानी राधे गोपियां सारी।
    बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो,
    कान्हा मुझे होठों से लगा लो।
    पिया के संग बांसुरी में है रहना,
    आज श्याम मोहे तुझे है रंगना।
    मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू,
    रंगों की नेह से मन बेकाबू।
    तू क्या नटखट हंसी उड़ाता?
    सबको तो उंगलियों पर नाचता।
    कौन सा जादू जादूगर सीखा,
    बरसाने तेरे रंग में भीगा।
    निमिषा सिंघल

  • श्याम के रंग में राधा दीवानी

    प्रीत की डोरी बांधें चली आई,
    तुलसी श्याम होली खेलन चली आई।
    बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी,
    दीवानी राधे गोपियां सारी।
    बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो,
    गाना मुझे होठों से लगा लो।
    पिया के संग बांसुरी में है रहना,
    आज श्याम मोहे तुझे है रंगना।
    मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू,
    रंगों की नेह से मन बेकाबू।
    तू क्या नटखट हंसी उड़ाता,
    सबको तो उंगलियों पर नाचता।
    कौन सा जादू जादूगर सीखा,
    बरसाने तेरे रंग में भीगा।
    निमिषा सिंघल

  • आई सुहानी होली

    देखो आई सुहानी होली।
    कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
    कण-कण में नया उल्लास है।
    आज धरती बनी रे खास है।।
    लाओ रंगों की भर-भर झोली।
    सब मिलकर हम खलेंगे होली।।
    देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
    नहीं काला रहे नहीं गोरा रहे।
    लाल पीले हरे छोरी छोरा रहे।।
    आज कोयल भी बनीं हंसोली।
    सब मस्ती में मस्त नव टोली।।
    देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
    न कोई राजा रहा न कोई रानी रही।
    सिर्फ खुशियाँ खुशी मस्तानी रही।।
    बाँह-बाँहों की बन गई डोली।
    हर तरफ है मस्ती की बोली।।
    देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।।
    हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई।
    लगते गले बन भाई-भाई।।
    देख ‘विनयचंद ‘ की लेखनी बोली।
    धवल मुख स्याह रंग से प्यार की बोली।।
    देखो आई सुहानी होली। कैसे रंगों की रंगी रंगोली।।

  • जवानों की होली

    जवानों ने खाई है, सीने पर अपने गोली
    ना भागे दिखाकर पीठ , प्राणों की लगा दी बोली
    आये दिन खेलते रहते, वो खून के रंग संग होली
    तब जाकर देश में बन पाती, रंगो वाली होली

    उनके लिए हर दिन ही, होली और दीवाली है
    खून बहे तब होली मनती, बंदूक चले तब दीवाली है
    बारुदों के ढ़ेर को समझे, वे तो अबीर गुलाले है
    तत्पर देश की रक्षा में, हरपल वो मतवाले है

    कारतूसों की जय माला पहन, विजय श्री वरने हुए खड़े
    शत्रु की पिचकारी छोड़ती गोलियां, फिर भी कभी नहीं है डरे
    बन प्रहलाद; दहन करने होलिका, दुश्मन सीमा में कूद पड़े
    फ़ाड़ दुश्मन का सीना रण में, नृसिंह बन वे है डटे

    ढाल बनाते बंकर को ऐसे, जैसे लठमार होली है
    कारण उनके ही तो हैप्पी, होली और दीवाली है
    परिचय अदभुत वीरता का देकर, अपना बना लिया हम गैरो को
    इस होली सब मिल नमन करें, हम देश के हर रणधीरों को
    देश के सच्चे हीरो को

  • Holi

    आहट पाकर फागुन की, पेड़ों ने ओढ़नी बासंती ओढ़ी
    धमाल फाग संग चंग बजाने, निकली मस्तानों की टोली
    हल्की फुल्की ठंड के साथ, मौसम करे आंख मिचौली
    धूम मचाओ, रंग उड़ाओ, क्यों कि आ गया है होली

    बच्चे निकले घरों से ले, हाथों में अबीर गुलाले
    लगी महिलाएं गोबर संग, बड़कुल्ले ढाल बनाने
    मिठाइयों की महफिल सजती, किसे छोडे होठों से लगा ले
    ऐसी है होली की मस्ती, सबको रंग में अपने मिला ले

    कोई खेले रंगो से, कोई खेले फूलों की होली
    बरसाने की लठमार होली, भूले ना हमजोली
    नाच उठी वृंदावनी गलियां, देख भक्तों की टोली
    रंग पंचमी ऐसा रंग जमाये, हर दिल हो holy holy

    बुरा ना मानो होली है, इस दिन बहुत हंसी ठिठोली है
    हर कोई इसके रंग में रंगता, ऐसी यह भंग की गोली है
    भुला कर पुराने गिले शिकवे, अपनों के बीच की चुप्पी तोड़ी है
    हां नाम इसी का होली है, हां इसी का नाम होली है

  • होली

    बजे ढोलक,बजे नगमे
    मचे हुड़दंग होली में
    रंगी धरती, रंगा अंबर
    उड़े है रंग होली में ।
    कोई गुब्बारे से खेले तो
    कोई मारे पिचकारी
    पड़ी है पान की छीटें
    चढ़े हैं भंग होली में।

    घुला है बाल्टी में रंग
    और तैयार पिचकारी
    आपकी राह देखे है
    सांवरे राधा तुम्हारी
    आपके आते ही हम
    आपको यूँ रंग डालेंगे
    भूल जाओगे तुम राधा
    याद आएंगे गिरधारी ।

    आपको रंग डालेंगे
    हाथ में रंग है पीला
    पहले सूखा लगाएंगे
    भर के पिचकारी में गीला
    आप जब गुस्से में आकर के
    हम पर तिलमिलाओगे
    आपका साँवला मुखड़ा
    कर देंगे बैंगनी-नीला।

    हमने पकवान और गुझिया
    बनाई आपकी खातिर
    मिठाई फूल और तोहफे
    मंगाए आपकी खातिर
    अपने घर को हमने है
    बनाया स्वर्ग से सुंदर
    अपने आपको हमने संवारा
    आपकी खातिर।

  • Holi

    HOLI

    rango ki fuhar hai ya aapas ka yeh pyar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    rang birange chere sab ke par chadta na koi rang
    kar door gile shikwe rahe sab ek dooje ke sang
    durriyan mitata paas bulata saal ka yeh tyohar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    bikhri khushiyan ghar aangan main jo rang chale holi ka
    jeeja sali ka khel yeh saath jaise daman choli ka
    masti bhari holi yeh devar bhabhi ki bhi takrar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    gujhiya papad ki mahak hai nasha hai isme bhang ka
    bachche bude kya jawan maja lete sab huddang ka
    naach gaan dhol bhangda khusiyon ka yeh izhaar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    kheli humne bhi jo holi woh bhi kya holi thi
    choote saathi jo aaj, kal unke saath toli thi
    dil main base sab aise aaj bhi, janmo ka yeh pyar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    rango ki fuhar hai ya aapas ka yeh pyar hai
    holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hai

    PANKAJ “PRINCE”

  • हुड़दंग करेगे होली में

    फिर आज गुलालों के खातिर
    बदरंग बनेगे होली में ।
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली में ।।

    न जानेगे कितने रंग नये
    चेहरों पर खिल जायेगे ।
    न जाने कितने टूटेंगे
    कितने दिल जुड़ जायेगे
    कितनो को तो तन्हा आकर
    तंग करेगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली मे।।2

    कुछ नये मुबारक आयेगे
    चाहत मे रंग लाने को
    कुछ दूर बहुत हो जायेगे
    यादो में तड़पाने को
    भींग किसी की बारिस में
    कुछ दंग करेगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली में ।।3

    क्या सच्चा है इस जीवन में
    रंग कौन सा झूठा है
    पर प्यार में दिल से न खेलें
    इस प्यार का रंग अनूठा है
    कुछ आँशू भी तो बरसेंगे
    बेरंग बहेंगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली मेँ।।4

    ✍रकमिश सुल्तानपुरी
    सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

  • सावन

    फुलवारी संग महकता सावन
    बाबगीयो मे खिलता सावन
    फल की मिठास जैसा सावन
    पवन संग उभरता सावन
    पतझड का है मौसम सावन
    चिडीयो का है मौसम सावन
    कोयल की गुंज सा मंधूर सावन
    कभी हषॆ से विभोरता सावन
    कभी ददॆ से सिकुडता सावन
    धरती को सहलाता सावन
    धरती पर छाता सावन
    हरीयाली,इठलाता,डोलता सावन
    धरती पर नया बदलाव लाता सावन

  • सुनते आए हैं…..

    सुनते आए हैं –
    अपनों का पर्व है होली

    मेरे आंगन जली होलिका
    मैं ही पंडित, मैं ही पूजा
    मैं ही कुंकुम, अक्षत औ” रॊली;
    सूनी गलियां, सूने गलियारे,
    सूने हैं आंगन सारे
    कौन संग मैं खेलूं होली!

    सुनते आए हैं –
    रंगों का पर्व है होली

    सुबह गुलाबी नहीं रही, अब
    सांझ नहीं सिंदूरी,
    धरती से रूठी हरियाली
    बेरंगा है अंबर भी;
    रंगों की थाल सजी, पर
    कौन रंग से खेलूं होली!

    सुनते आए हैं –
    खुशियों का पर्व है होली

    हर चेहरे पर भय-आशंका
    हर माथे पर काला टीका,
    थके हुए तन, हारे से मन
    सोच समझ पर पड़ा है ताला ;
    संदेहों के जालों में
    घिरा हुआ है हर आदम,
    कौन ढंग की खेलूं होली!

    सुनते आए हैं –
    अपनों का पर्व है होली !
    रंगों का पर्व है होली !!
    खुशियों का पर्व है होली !!!
    0य103य2020

    डॉ. अनु सोमयाजुला

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