गजल
October 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
ए दोस्त मत घबराना कभी मेरे परछाईं से भी,
तेरा नाम हम लब तक लाया नहीं करते।
कोई खेल नहीं है इश्क या इबादत,
ये बेशकीमती जज्बात है यू जाया नहीं करते।
एक बार पलक उठाए तेरे दिल में उतर गए,
खुदा जानता है
अब किसी महफिल में पर्दा उठाया नहीं करते।
कैद में रहते रहते जो अपना हुनर खो दे,
ऐसे परिदे को कभी भी
पिंजरा खोल कर हम उड़ाया नहीं करते।