उनकी आहटों पर फिर फिसला मेरी तमन्नाओं का हार है खिसक रहे थे जो सपनें आज हाँथ में आया वही लम्हात है….. प्रेम-पिपासु हूँ जी भर के पिला दे साकी टपक रही जो तेरे होठों […]

आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है सिसकियाँ भी खामोश हैं….. लफ्जों में मिठास है गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई बींद के इन्तज़ार में….. बीती जा रही है स्वर्ण रात्रि […]

तुम मिटाती रहो मेरे प्यार के सबूत मैं सबूत जुटाता रहूंगा। तुम कितना भी मेरे ख्वाबों से बचना चाहो मैं हर रात ख्वाबों में आता रहूंगा।

स्वप्न में रोज लिखती हूँ तुम्हारे नाम की कविता, कहीं कोई देख ना ले बस इसी चिंता में रहती हूँ, इसलिए उन सबूतों को मिटाकर ही मैं जगती हूँ।

हमारी ओर से शुभरात्रि कह देना उन्हें कविता, साथ ही यह भी कह देना कि सपने में चले आना। कहीं पर बैठ करके प्यार की दो बात कर लेंगे। जागते में हमें संसार मिलने ही […]

आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव […]

सफ़र ————- बंदिशो के आँगन में बुलन्दियो के आसमान तक यह सफ़र है, तेरी बेचैनी से,तेरी पहचान तक कहाँ थमी है,तेरी चुनौतियों की कंटीली डगर मंजिल तो पाना है ही,चाहे जितना लम्बा हो सफ़र सौन्दर्य,मातृत्व […]

जगमग ये संसार सारा शोरो गुल से भरा, डरा डरा सा सहमा सा मौन हूँ मै दुनिया सारी मतलबी सी सबकी अपनी है पहचान मैं सोचु एक पल बैठ जरा दुनिया में आया किस लिए […]

प्यार के चक्कर में पड़ मेरी तरह प्यारे, अरे तू भी वियोगी कवि न बन जाना कहीं प्यारे। जरूरत है नए उत्साह की कविता लिखे कोई, इस कमी को कलम से आज, पूरी कर मेरे […]

बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बरसती है , आंखों से मेरी । तूने क्यों की रुसवाई , जज्बातों से मेरे। बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बूंदें तू धूप सा चुभता रहा, मैं […]

भरी दोपहरी की धूप में जिस तरह सूखने की बजाय गीला हो जाता है पसीने से बदन, ठीक उसी तरह भरी बरसात में हरा-भरा न होकर सुख गया है मन।

बहुत-बहुत सुंदर है वो, प्यार का समंदर है वो , फीखा है हर रिश्ता , पर उसका कोई तोड़ नहीं, देखी होगी आपने बहुत सी देवियां , पर मेरी मां की कोई होड़ नहीं, मेरी […]

लौट कर आयें है हम सावन पर सावन के महीने में घटायें हो घनघोर बरस रही हैं शुष्क धरा पर दे रहीं है जन्म हरित काया को सावन के महीने में हम भीं दे कुछ […]

सुना है हमने अपने वतन पे, अपने वतन की कहानियाँ। तिलक पटेल आज़ाद छोड़ गए थे, अपनी कई निशानियांँ।। खेले – पले हुए थे, अनेक वीर जवां, थी यही धरती माँ की मेहरबानियाँ । कर्ज […]

किसी भी हाल में तुझसे नहीं पीछे रहूंगी मैं, तू लिखना रात भर कविता, सुबह जग कर पढूंगी मैं। तेरी हर एक कविता पर हंसूगी और और रोऊँगी, लिखेगा जो भी बातें तू मनन करती […]

प्यार के चक्कर में मत लिख सैकड़ों कविता, ये सब तो पूर्व में कह कर गए हैं सब वियोगी कवि। तब भी पसीजा क्या कभी दिल बेवफाओं का। कलम मत घिस वियोगों पर नए योगों […]

मुझे अपना बनाने में इस कदर देर मत तू, न जाने मन मेरा चंचल किसी से और जुड़ जाये। मुझे बस लाभ दिखता है इसलिए देर मत कर अब न जाने कब पलट जाऊं न […]

चाय की चुस्कियों पर ही तुम्हारी याद आती है, बाकी तो व्यस्तता है, जो मुझे दिन भर सताती है। जिस दिन अधिक शक्कर पड़ी हो खास कर उस दिन, तुम्हारी याद आती है, दिन भर […]

गम भी क्या चीज है जो इतनी कविताएं लिखवाता है मुझसे किसी की वेबफाई पर मुझे कवि या कवि सा बना देता है। नित नया दर्द उभर कर, मेरी पंक्तियों में शामिल हो जाता है। […]

भोर हो रही है धीरे-धीरे सूरज की धमक बढ़ रही है, थोड़ा किनारे हो जा बादल के टुकड़े, आज पूरी तरह चमकने दे उसे, तू इक्कट्ठा कर आज अपने सारे अंश कल बरस लेना पूरी […]

जब तलक मानव को मानव मात्र से, भेद की नजरों से देखूं तब तलक। जब तलक समभाव मेरे में न हो, तब तलक कविता कहूँ तो झूठ है। कर्म मेरा नीच है तो कवि नहीं, […]

ज़िन्दगी कभी अज़ीब सी भंवर उठाती है चहुँ और पानी तो नज़र आता है न जाने नाव क्यों न चल पाती है झकझोरती हैं ख्वाइशें दिल में दबी उसके पंख फड़फड़ाते तो है पर वो […]

ज़िन्दगी अबूझ पहेली सी है कभी बहुत करीब एक सहेली सी कुछ उठते सवाल उलझे से नहीं मिलते जवाब सुलझे से बड़ी शिद्दत से अगर खोजें तो कुछ हल पाने में आसानी होगी ज़्यादा बुद्धिमत्ता […]

मेरे अपनों से ही तो प्रेरित हैं मेरे शब्दों की गहराईयाँ वर्ना हर बात पर अक्सर हम बेज़ुबां हो जाते थे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

आँखों की नमी देखकर हम, नज़रें उनसे चुराने लगे, वो फिर से कही रो ना दें, हम खुल कर मुस्कुराने लगे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

ये राहें ले ही जाएंगी मंज़िलों तक हौसला रख कभी सुना है अँधेरे ने सवेरा होने ना दिया ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

तेरी यादों को सलाम करता हूँ और अब मैं रात्रि को विराम देता हूँ। नींदे है छत पर सोई हुई, मगर मैं अपनी आँखों को आराम देता हूँ। चलो ठीक है अब तुम्हारी यादों को […]

इस काँच में कहाँ से आई दरारें? उस रात जब जोर से आँधी आई थी तब खिड़कियाँ आपस में गले थी। और चीख-चीख कर अपने मिलन की खुशी प्रकट कर रही थी और सावन के […]

बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है? फूलों से रंगत चुराई, या फिर कलियों से नूर पाया है। बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है? तितलियों से ली शरारत या भंवरों […]

तुम्हें याद है वह बूढ़ा बरगद? जिसके तले हम सपने सँजोते थे कल्पनाएं करते थे। अपने भविष्य की अनगिनत और एक दूसरे के कंधे पर सर रखकर रो लेते थे। तुम्हें याद है मेरे पास […]