शाम से ढूंढती थी मैं तुझको तू न जाने कहाँ खो गया मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी तू नफ़रत का आसमान हो गया।
शाम से ढूंढती थी मैं तुझको तू न जाने कहाँ खो गया मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी तू नफ़रत का आसमान हो गया।
तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा करने आऊंगा जरूर ना उतरा है ना उतरेगा तुम्हारी आँखों का सुरूर
संकल्प लें कि समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे, बेटा हो या बेटी सभी को एक साथ पढ़ाएंगे।
आज 14 जुलाई है, फरवरी नहीं जो तेरे लिए शायरी लिखूँगा मैं डूब चुका हूँ पहले भी किसी आँखों में अब बार-बार थोड़े ही डूबूंगा।
झुकी हुई नज़रें उतनी ही हसीन लगती हैं, जितना खुली हुई शराब की बोतल।
दौलत चाहे जितनी कमा लो पर शोहरत कमाने में जमाने लग जाते हैं।
सुविचार:- कभी-कभी अपनी बात पर अटल रहने से झुक जाना ही अच्छा होता है। जैसे जब आँधी आती है तो बड़े पेड़ गिर जाते हैं। क्योंकि वह अपनी अकड़ में होते हैं परंतु छोटी-छोटी झाड़ियां […]
किसी की अहमियत हमें तभी होती है जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है। ——————————————– और किसी की चाहत हमें तभी होती है जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है।
नारी का सम्मान करो हर पल आने ना दो उसकी आँखों में आँसू, ना धन चाहे ना दौलत चाहे वह तो है प्रेम-पिपासु।
तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या? तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या? जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?
यह विपक्ष की कैसी राजनीति? अपने आप ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं। अपने नेताओं की फोटो खुद ही फाड़ते हैं और जब उनके नेता दूसरी पार्टी में जाते हैं तो ताने सरकार को […]
सीमा पर यह बम बारूदें बंद करो लड़ना है तो सामने आकर जंग करो हम भारतवासी हैं तुम को धूल चटा देंगे तुमको तुम्हारी सीमा पर आकर मिट्टी में मिला देंगे
अत्याचार खत्म करने का एक ही है उपाय घर-घर में शिक्षा का करें प्रचार-प्रसार। शिक्षा ही वह दीपक है जो हर घर में उजाला करती है शिक्षा ही है जो जानवर को इंसान बना देती […]
रक्तरंजित इश्क में हज़ार होते हैं ख्वाब मगर पूरे नहीं होते।
ख्वाब सो जाते हैं छत पर जब तू उदास होता है। जब तू मुस्कुराता है तो सुकून पास होता है। काव्य सौंदर्य:-मानवीकरण
तेरी मोहब्बत में कुछ यूँ हुआ असर एक-एक पल शताब्दियों सा लगता है।
मेरे हृदय में तेरे नाम से कुछ यूँ स्पंदन होता है मेरी आँखों से आँसू बहते हैं जब-जब तू रोता है।
तुझसे धोखा खाकर प्यार में कुछ यूँ असर हुआ मुझ पर पीछे मुड़कर नहीं देखता हूँ मैं जिसे छोड़ आया बस छोड़ आया।
हकीकत कुछ इस तरह बयां हुई मेरे होठों से मैं तुझसे मिलकर अकेला हो गया। काव्य सौंदर्य:- विरोधाभास
तेरे प्यार में झरनों से बहता जा रहा हूँ मैं। न जाने किस सागर की ओर जा रहा हूँ मैं। उपमा अलंकार
बेशक तुम खूबसूरत हो पर इतना बुरा मैं भी नहीं हूँ जो तुम मुझे छोड़ कर चली गई बस तुम्हारी कसम ने जिन्दा रखा है मुझे वरना मैं यह नश्वर शरीर कब का छोड़ कर […]
मैने कोशिश बहुत की तुमको मनाने की पर तुम मुझे छोड़ कर चली गई। और बसा ली जाकर तुमने अपनी दुनिया मेरे रकीबों के साथ। मेरा दिल तोड़कर न जाने क्या मिल गया तुम्हें! पर […]
तुम्हें याद है वह उधार वाला वादा? याद है तुम्हें एक कप चाय का वादा जो तुमने किया था मुझसे कभी और आज तक पूरा नहीं किया मुझे भी याद है और तुम्हें भी याद […]
डूब जाने दे मुझे अपनी झरने- सी आँखों में इन्हीं में है मेरी ख्वाहिशें इन्हीं में है मेरी मोहब्बत डूब जाने दे मुझे अपनी झरने-सी आंखों में मुझे देखना है है क्या इनके पार एक […]
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से कभी वंचित नहीं होता मैं आज भी किसी और के ख्वाबों में नहीं खोता।
उनकी आहटों पर फिर फिसला मेरी तमन्नाओं का हार है खिसक रहे थे जो सपनें आज हाँथ में आया वही लम्हात है….. प्रेम-पिपासु हूँ जी भर के पिला दे साकी टपक रही जो तेरे होठों […]
आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है सिसकियाँ भी खामोश हैं….. लफ्जों में मिठास है गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई बींद के इन्तज़ार में….. बीती जा रही है स्वर्ण रात्रि […]
यही अंजाम होना था मेरी मोहब्बत का जब पथ्थर से पसीजने की उम्मीद लगाये बैठे थे
कभी तो खैरियत पूछ लिया करो मेरी क्या पता आज तुम्हारा हूँ, कल किसी और का हो जाऊँ।
मुझे दोस्ती भी पसंद है और दुश्मनी भी। पर जो भी करना शिद्दत से करना, क्योंकि मुझे हर काम में वफादारी पसंद है।
E-Dil Tu Kyun Rota Hai ! yah Duniya Hai Yahan To Aisa Hi Hota..
है आज भी दरिया मेरे दिल में तेरी मोहब्बत का, तू जब चाहे डूब कर देख ले।
तुम मिटाती रहो मेरे प्यार के सबूत मैं सबूत जुटाता रहूंगा। तुम कितना भी मेरे ख्वाबों से बचना चाहो मैं हर रात ख्वाबों में आता रहूंगा।
काश! कुछ देर तू मेरे पास बैठता मैं तेरी आँखों में डूब जाता। तेरा नशा यूँ चढ़ता मैं शराब तक भूल जाता।
काश! कुछ देर तू मेरे पास बैठता मैं तेरी आंखों में डूब जाता। तेरा नशा यह चढ़ता मैं शराब तक भूल जाता।
स्वप्न में रोज लिखती हूँ तुम्हारे नाम की कविता, कहीं कोई देख ना ले बस इसी चिंता में रहती हूँ, इसलिए उन सबूतों को मिटाकर ही मैं जगती हूँ।
अधूरा रह गया मैं तेरे ख्वाबों को पूरा करते-करते कितना जी गया मैं तेरी आरजू करते-करते।
आज 13-7 है.. पर तेरा साथ कब मिलेगा मुझे? यही खुदा से पूछता रहता हूँ मैं
मोहब्बत पूरी हुई चलो अब जख्म गिनते हैं। जो अरमान टूटे उन्हें फिर से बुनते हैं।
हमारी ओर से शुभरात्रि कह देना उन्हें कविता, साथ ही यह भी कह देना कि सपने में चले आना। कहीं पर बैठ करके प्यार की दो बात कर लेंगे। जागते में हमें संसार मिलने ही […]
मिलने को तो दुनिया में कई चेहरे मिले… पर तुम-सी मुहब्बत मैं खुद से भी ना कर पाया…
चला जाऊंगा जैसे खुद को अकेला छोड़कर.. मैं रात में उठकर यूँ खुद को देखता हूँ..
धुन सुकून की और धमाके का धंधा… मयस्सर खुशियाँ उसे जो दौलत में अन्धा…
किस्मत हम अपनी खुद लिखते हैं खुदा तो बस लिखने में मदद करते हैं।
हर किसी की निगाहों में उठते-उठते कई लोग दुनिया से उठ गए हमने जब से छोड़ दी दुनिया की फिकर अपने जहान के बादशाह बन गए।
अंदाजे से नापिए किसी इंसान की काबिलियत को, क्योंकि ठहरे हुए दरिया अक्सर गहरे होते हैं।
आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव […]
पहाड़ों में भी पंखे चल रहे हैं आज गर्मी है, सभी एक दूसरे से जल रहे हैं, आज गर्मी है। किसी के पास पैसा है तो उसको आज गर्मी है, किसी को पद मिला है […]
सफ़र ————- बंदिशो के आँगन में बुलन्दियो के आसमान तक यह सफ़र है, तेरी बेचैनी से,तेरी पहचान तक कहाँ थमी है,तेरी चुनौतियों की कंटीली डगर मंजिल तो पाना है ही,चाहे जितना लम्बा हो सफ़र सौन्दर्य,मातृत्व […]
जगमग ये संसार सारा शोरो गुल से भरा, डरा डरा सा सहमा सा मौन हूँ मै दुनिया सारी मतलबी सी सबकी अपनी है पहचान मैं सोचु एक पल बैठ जरा दुनिया में आया किस लिए […]
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