मै और तुम ————- अतीत के फफोले, मरहम तुम। अध्याय दुख के सहारा तुम। तपस्या उम्रभर की, वरदान तुम। बैचेनिया इस दिल की, राहत तुम। दिल में फैली स्याही, लेखनी तुम। अक्षुष्ण मौन इस दिल […]

🇮🇳सीतापुरिया अवधी भाषा:-🇮🇳 घर ते निकरई मा जियरा डेराति हई कोरोना वायरस खाए जाति है।😩😩 हरि घंटा हम हाँथ धोइति हन खाना- पीना हम संतुलितई खाईति हन खाँसी आवई मा जियरा डेराति है कोरोना वायरस […]

सोचता हूँ अक्सर कि तुमको देखे बिना पता नहीं कितनी सदियाँ गुजर गयीं हों जैसे और तुम अभी भी बुन रहे होगे मेरी दुनिया से परे मेरे लिए कुछ और इल्ज़ाम कि जब अचानक किसी […]

FacebookWhatsAppTwitterEmailCopy LinkShare सर्दी खाँसी हो जाती है बहुत तेज ज्वर आता हांथो पैरों का दर्द बढ़ता ही जाता है पहले सूखी खाँसी आती है फिर ज्वर ज्वलंत हो जाता है बचाव:- बचाव ही निदान है […]

वन-वन भटका खोज में, गूलर के फूल के। आखिर खोज न पाया मैं सिवा एक उसूल के।। फूल नहीं होता इसमें होते केवल फल अगणित। बिन फूलों के फल कहाँ से बोलो आए अगणित।। जैसे […]

मैं जानती हूँ कि तुम भी मुझे ही गलत ठहराओगे कुछ कहने से कोई फायदा नहीं—- मैं कह भी दूँ मैं सही थी पर तुम कहाँ मानोगे— तुमने जो जिम्मेदारी दी थी उसी को पूरा […]

मै जानती हूँ मुझमें गुस्सा थोड़ा ज्यादा है पर मै दिल की बुरी हूँ जरूरी तो नहीं….. बड़ो के आगे झुकना चाहिए पर हमेशा मैं ही झुकूं ये जरूरी तो नहीं…. आग दिल में लिये […]

हर दर्द का इलाज है जहान में पर अपनो के दिए ज़ख्म कहाँ भरते हैं टूट जाते हैं जो रिश्ते तो फिर कहाँ जुड़ते हैं कैसी कश्मकश है जिंदगी में जो प्रिय होते वही बिछड़ते […]

तुम्हारी चादर में लिपटे कुछ शक के दाग थे। तुम मेरी मंज़िल और तुम्ही हमराज थे। क्या थे दिन और क्या लम्हात थे। कुछ अंजाम और कुछ आगाज़ थे। इल्जाम लगा किस्मत और हालात पर […]

जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]

वो मुझे कुछ यूँ चाहता था कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे—— उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई जिसमें पहला नाम भी मेरा था […]

मैं बनूँ फूल बगिया का तमन्ना है यही है मेरी। भला हो मुझसे जगिया का तमन्ना है यही मेरी।। बीच झाड़ी लताओं के लाल पीले गुलाबी -सा। हरे उपवन की हरियाली में मस्त झूमूँ शराबी-सा।। […]

आज फिर से खिल जाने दो रात महकती हुई साँसों से भीगी तेरी हँसी की ख़नक उतर जाने दो एक बार फिर से रूह तक जैसे गूँज उठती हैं वादियाँ पर्वत से उतरती किसी अलबेली […]

बादल गरज़ यूं रहे थे के बरस ही जायेंगे बिज़ली कड़क के हमको तेरी याद दिला रही कुछ बर्फ के टुकड़े पड़े है सड़क पर—– बूँद तो बरस रही हैं स्नेहिल झीसियाँ थी पड़ रही […]

अब जीवन का अवकाश रहेगा कल से मेरे पास रहेगा __________क्षुब्ध होकर अपंग से तेरे बोल के टेसू अब ना सूखेगे मेरे आँगन में ______कुसुम का बंदन ना महकेगा प्राणवायु के दामन में गलियारों की […]

हम मुर्दा हैं या जीवित तुम्हें कोई फर्क नहीं तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं के हम किस हाल में रहते हैं सब दिल का खेल है तुम्हें मेरे जीवन की भी खबर नहीं […]

अम्बर झुका हुआ है और वसुंधरा है बसंती कोपल की तरह प्रस्फुटित हो रहा है मन हर शाख पर खिल रहा है सुमन । हर पत्ता बूटा भीगा है लतपत है उपवन वृन्त से पृथक […]

ख़ुशी से मेरा पता दे रही है यह कैसी उदासी है जो दिल छू रही है सब छोड़ गए मेरा साथ पर यह नहीं छोड़ती जानती हूं यही है मेरी हमराज़ कोई जिंदगी में नहीं […]

वह छोटी सी मुलाक़ात विचरती रहती है अक्सर स्मृतियों में मेरी । जब सिमट आए थे तुम मेरी पलकों के दायरे में, सकुचाते हुए, छोटे-छोटे कदमों से… मुस्कुराती हुई कोई बहार उतर आई हो किसी […]

भिगोकर बादाम दूध में केसर छिड़क दिया खुदा ने कुछ यूं ही तुमको बनाया होगा अफसोस ना कर तेरा रंग श्याम है मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं जो दिल के काले होते हैं