उस पल को तो आना ही था, तुझको विदा हो जाना ही था, ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी, जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था, बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी, तुझको बहु बन […]
उस पल को तो आना ही था, तुझको विदा हो जाना ही था, ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी, जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था, बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी, तुझको बहु बन […]
अपने ग़म और खुशियों के बीच दूरी रखता हूँ, मैं राही अंजाना मगर सबकी ख़बर रखता हूँ।। राही (अंजाना)
तैरने निकला था समन्दर ने मुझको सहसा डरा दिया, फिर लहरों ने ही कश्ती को मेरी साहिल दिला दिया।। राही (अंजाना)
आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]
जुवाएँ पर बदजुबानी पर बात लिये फिरते,, जो खुद गिरा — वो मुझे क्या गिराने की बात करते।।
अगर हुई गलती मुझे माँफ करो, हर गलती मेरी शर्मनाक है, या तुम मार गिरावो या माँफ करो। गलती किया इसलिए माँफी माँग रहा, अगर लगता गलती– गलती का अनुमोदन है तो इसे भी स्वीकार […]
Lost in the perfect scent She was sitting a little bent He held her hands Her heart begun to dance They stared each other for a while She took him to walk for a mile […]
ईश्वर ने भी अंक सात को बड़ा ही शुभ बनाया है सात दिनों में इस जगत का सुन्दर निर्माण कराया है संग सात फेरों के लेकर रिश्ते वचन निभाते हैं सात दिनों के एक सप्ताह […]
ये मेरे आइने को भी आजकल न जाने क्या हो गया है मेरी छवि को छोड़ कर आपकी छवि दिखाने लगा है।।
क्यों जन्म लेने से पहले ही, मार देते हो मुझको क्या मुझको हक़ नही, इस दुनिया में जीने का भूल गए हो तुम, ज़रा अपनी आँखों को खोलो गौर से देखो तुम्हें भी किसी औरत […]
काश हम खुशियों के पल को यूँ ही रोक पाते गमों की एक भी परछाईं को आप को न छूने दे पाते।।
मेरी खुशियों और गमों का भी हिसाब रखते हैं, न जाने क्यों लोग मुझसे इतना प्यार करते हैं।। राही (अंजाना)
हक मेरे भगवान पर सारे बाशिंदों का है, किसी एक के घर का वो पहरेदार नहीं।। राही (अंजाना)
अब घर में बिजली का मेरे बिल नहीं आता, तेरे प्यार की रौशनी में हर कोना घूम लेता हूँ।। राही (अंजाना)
सारे आईने अपने घर से बाहर निकाल फैंके, तुम्हारी आँखों में ही जब चेहरा अपना देख लिया।। राही (अनजाना)
अच्छा बनने के लिए जरूरी नही कि मै अच्छे कपडे पहनूँ मै जानती हूँ कि मेरा दिल सच्चा है मुझे दिखावे की कोई जरूरत नही तुमको अगर जानना है मुझको तो मेरी अच्छाइयों से जान […]
बनाकर कठपुतलियों को अपने इशारों पर नचाते हैं धागों से चारों तरफ फिर उनको बाँधते हैं बेजान सी होकर भी सबके मन को लुभाती है अपने मनभावन नृत्य से वो पैसे कमाती है।।
जब से तेरे प्यार के मौसम की चपेट में आया है, राही पर किसी मौसम का कोई असर नहीं होता।। राही (अंजाना)
अच्छा बनने के लिए अच्छे लिबास पहन लूँ, ये कौन सा पैमाना है मेरी पहचान का। राही (अंजाना)
लौट कर आते ही नहीं जाने वाले इस डर से, लोगों को रुखसत करना ही छोड़ दिया मैने।। राही (अंजाना)
इस दुनिया में मकान बनाना तो बहुत आसान है लेकिन मकान को घर बनाना उतना ही मुश्किल ।।
जब भी कुछ माँगता हूँ तो हर बार तू मुझको देता है कभी न करता उदास तू मुझको झोली तू मेरी हर वक़्त भरता है कैसे करूँ मैं शुक्रिया अदा तेरा ये दिल हर वक़्त […]
हर किसी को एक ही तराजू में न तोल तू बन्दे ईश्वर ने हर एक को कुछ न कुछ अलग दिया है।।
ज़िन्दगी एक अनसुलझी पहेली सी नज़र आती है, कभी किसी कि सगी तो कभी सौतेली सी नज़र आती है, रूठना रूठ कर मान जान जाना इंसानों की फितरत होगी, पर ज़िन्दगी गर रूठ जाए तो […]
ये जो दुनिया छोड़ के चले जाते हैं पहले से कुछ भी न बताते हैं जाने कहाँ और कैसे रहते हैं कुछ भी खबर न हमको बताते हैं कैसा है नया आशियाना उनका सब के […]
ए हर वक़्त व्यस्त रहने वाले दोस्त कुछ वक़्त हमारे लिए भी निकाल फिर न कहना कि तुम क्यों रुसवा हो गए अभी हमने कुछ भी न कर पाई बात।।
ऐसा तपा के सुन्न किया है तेरी तड़प ने कि अब नहीं लगती मुझे गर्मी-सर्दी
ऊपर से टपक रही है छत नीचे सीलन आ गई दीवारों में दाम किसी काम के मिलते नहीं चाहे हम खुद भी बिक जाएँ बाज़ारों में।
व्यवहारिक” शब्द सुनते ही मीठा सा भान होता है व्यवहारिक इंसान का समाज में बड़ा मान होता है इन्हें सामाजिक परम्पराओं का खासा ज्ञान होता है ऐसे इंसान को अपने मान पर बड़ा गुमान होता […]
जब– जब जाता तेरे मोहल्ले मे , तेरी वो अवाज की गुँज उठ जाता मेरे शीने मे।
इस तरह तेरे भवर मे मंडरा रहा हूँ, लग रहा की तेरी पायल की झन्यकार मेरे आगे– आगे मंडरा रहा हो
हर चीज की सही कीमत चुकाने की औकाद रखता हूँ , लेकिन तेरी सही कीमत कोई लगाये तो।
इस मतलबी दुनिया मे सभी दौलत कमाते फिरते अगर इस दुनिया से मिला मुझे मजदुरी की रूप शिर्फ छाले।
आसमान देखते ही सिहर जाता, जब गुनहगारे पंछी को खुले आसमान मे फिरते देखता।
आसमान देखते ही सिहर जाता, जब गुनहगारे पंछी को खुले आसमान मे फिरते देखता।
ये सतरंज की दुनिया भी क्या गजब है, दो –डाई घर चलने वाले राजा और रानी कह लाते।
मै अपना कीमत नही जानता, तु अपना बता दे, अगर मै नही चुका पाया, तो मुझे गिरवी रख ले लेकिन !मेरे प्यार को लौटा दे
बहुत देर से खड़ा हूँ तेरे पर , कोई है तो सुनो— कह दो उन्हे जाकर जख्म पर पट्टी बधवाने आया हूँ तेरे दर पर
आसमान देखते ही सिहर जाता है, गुनहेगार पंछी को जब खुले आसमान मे देखता हूँ।
खुशियों की दुकाने भरने की खातिर, दर्द की तस्वीरें खरीदी जाती हैं, खुद की तारीफों के पन्ने भरने को, क्यों सरेआम न्यूज़ बटोरी जाती हैं।। राही (अंजाना)
ओस की बूंदों सी वो मुझको नज़र आती है, जब छूने चलों उसको तो वो झट से छटक जाती है, पेड़ पौधों पर हक ऐ प्यार जताती है मगर, मेरी मौजूदगी सी भी जैसे दुश्मनी […]
हर एक काम में हुनर अपना दिखाती है, हर मुश्किल से जैसे लड़ना सिखाती है, जल्द ही गिरकर उठते नहीं हम लोग, वो हर बार बढ़कर हौंसला बढ़ाती है, खुली आँखों जिसे ठोकर मारते हैं […]
वो मेरे घर में मेरे साथ नहीं रहती, वो मेरी होकर भी मेरे पास नहीं रहती, वो है मगर दूर मुझसे रहती है, वो दिल है तो धड़कन मेरी साथ नहीं रहती।। राही (अंजाना)
जख्म हो तो मरहम लगाना ही पड़ता है, दिल में कुछ तो छुपाना ही पड़ता है, बोल दो हर बात ज़ुबा से जरुरी तो नहीं, कभी खामोश भी तो हमें ही हो जाना पड़ता है।। […]
दिल लेकर भी जब मेरा चैन नहीं आया उन्हें, उन्होंने मेरे ख्वाबों को भी अपने नाम कर लिया।। राही (अंजाना)
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