जिस दिशा में दृष्टि जाती, दिखता तम ही तम है दूर करदे शीघ्रता से, तेरे उर में जो अहम है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

खेल खेलने बैठा तो खिलाड़ी न मिला, एक बन्दर को उसका मदारी न मिला, ज़िन्दगी की बिसात में हम कुछ फंसे ऐसे, कि हमारी चालो को कोई जबाबी न मिला।। राही (अंजाना)

दौड़ते परायी है जो अपनी मंजिल छोड़ कर कठिन है रास्ता कदम रखना सोच कर साथ न कोई आएगा अकेले तुझे जाना है जग मेरी मंजिल नहीं कुछ पल का ठिकाना है रास्ता पहचान लो […]

भवर मैं पहुंचा तो, सोचा मुझे आएगा कोई बचाने किनारे पर भीड़ थी लाखों की, कुछ चेहरे कुछ जाने अनजाने देखती रही दुनिया मुझको न आया कोई बचाने -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

बरखा जरा प्यार बरसा दे कब से प्यासा अंतर है तू प्यास बुझा दे बरखा जरा प्यार बरसा दे बरस बरस बरखा मेरी कितने तुमको बरस गए सिंधु की एक बूँद को हम कबसे तरस […]

मैं गा रहा हूं, तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ मैं जा रहा हूँ , तुम संग संग आजाओ जाऊंगा न छोड़ कर, गाऊंगा न बिन तेरे मैं भवर मैं, तुम पतवार बनके आओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]

संसार मैं रहना है, संसार मैं जीना है मिलती हैं कुछ खुशियां, कुछ गम भी पीना है कभी होंठों पर मुस्कान कभी आंसू पीना है संसार मैं रहना है संसान मैं जीना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा […]

मैं गीत क्या रचूंगी, तुम प्रेरणा न बनते मेरे निष्ठुर उर मैं, वन वेदना न उठते मैं गीत क्या रचूंगी तुम प्रेरणा न बनते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-