जितना पास बुलाया वो उतना दूर होता गया, रात का अन्धेरा रौशनी में चूर होता गया, खुदा की बनाई इस मशहूर दुनियाँ में, इंसा खुद इंसा के हाथों ही मजबूर होता गया।। राही (अंजाना)
जितना पास बुलाया वो उतना दूर होता गया, रात का अन्धेरा रौशनी में चूर होता गया, खुदा की बनाई इस मशहूर दुनियाँ में, इंसा खुद इंसा के हाथों ही मजबूर होता गया।। राही (अंजाना)
मै आज भी वही हूँ, जैसा तुमको पसंद है। लेकिन हम वैसा भी नही, जैसा तुम्हारे पिता का पंसद है। तुम मेरी पहली प्यार थी, लेकिन मै क्या करू रिस्ते और नाते दौलत के तलवार […]
आजाद भारत के आजाद परिंदे न रहे, हम अपने ही देश के बाशिंदे न रहे।। राही (अंजाना)
हर रोज़ मेरी इज़्ज़त को तार-तार किया जाता है, ये गुनाह मेरे साथ क्यों बार-बार किया जाता है।। राही (अंजाना)
मुझे मरे गुनाहों की कोई सफाई नहीं देनी, मुझे तुम्हारी मोहब्बत में उम्र कैद मंजूर है।। राही (अंजाना)
बहुत तरक्की कर ली मेरे गांव ने मगर, मेरी गरीबी का बादल छटा ही नहीं।। राही (अंजाना)
कोई माहौल कोई मौसम नहीं देखता, जब प्यार सच्चा हो तो कोई पर्दा नहीं देखता।। राही (अंजाना)
तेरी यादों के आँगन में मेरा मन खिल जाये, जैसे खुली हवा में कोई पंछी मण्डराये, तेरी समृति की छवियों का जब लगे मेला, मेरा शांत उम्मीदों का फिर मन भर जाए।। राही (अंजाना)
तसल्ली है के तुम मुझे याद नहीं करती, मेरी तस्वीर को रखकर उससे प्यार नहीं करती।। राही (अंजाना)
टूटकर बिखर जाने को तैयार रहती है, गर कच्ची हो चिनाई तो दीवारों में दरार रहती है, इस ज़मी पर आकर मुम्किन है मोहब्बत की गिरफ्त में आना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी यूँही ख़ाकसार रहती […]
जब जी चाहे बुला लेता हूँ, मैं तेरी यादों को अपना बना लेता हूँ, पहुंचता नहीं जब कोई पैगाम मेरा तुझतक, मैं हवाओं को फिर अपना गुलाम बना लेता हूँ।। राही (अंजाना)
किस्मत को अपनी तू कस मत, देदे ढील तू अपने अरमानों को, सोते हैं तो सो जाएँ किस्मत जगाने वाले, जागने दे तू हर घड़ी अपने ख़्वाबों को, किस्मत को अपनी… बदलती नहीं है हाथों […]
आओ किताबों के पन्नों से बाहर निकल चलते हैं, काले अक्षरों से निकल रौशनी की ओर चलते हैं, बहुत पढ़ लिए विषय इन किताबों के, आओ हकीकत के दो पन्ने पलट कर देखते हैं।। राही […]
गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]
वो बचपन वाला मैदान आज भी मेरे इंतज़ार में मुझसे मिलने को तरस रहा है, अब तो बादल भी गुस्से में है मेरे यार मेरे न होने पे वो सिर्फ गरज रहा है, सिर्फ गरज […]
बहुत कुछ सपना सजाया था !मैनै, लेकिन जिसके लिए सजाया, वो पराये का मेहदी हाथो मे सजाये थे।।
कुछ तो जरूर होगा उन प्यारी सी आँखों में, सपने तो उसके भी होंगे उड़ने के आसमानों में। सहमी तो वो भी रहती होगी उस अनजानी भीड़ में, घर से दूर उस बिन पहचानी सी […]
जब रात स्वप्न में मैं सोया था, एक गहरे समन्दर में खोया था, दूर दूर तक सच कुछ नहीं था, मैं एक झूठी दुनियाँ में रोया था, राही (अंजाना)
रात रात भर जाग कर आगे बढ़ने की होड़ चल कपट से जो जीता ये तेरी जीत नहीं संभल जा ऐ बंदे जीत के भी तेरी हार हुई -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
परिणाम न देख मनुज कर्म कर बस कर्म कर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
राग द्वेष अरु पाखंड कारण विनाश के प्रचंड -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मानव मानवता सीखो मत होड़ करो तुम बढ़ने की मत काव्य का अपमान करो देश हित काव्य सृजन करो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
स्पर्धा नहीं कोई , ऐ साहित्य सर्जन है दुरूपयोग न करेंगे ये आत्म सर्जन है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जल ही जीवन है , बूँद बूँद बचाओ जल को न व्यर्थ बहाओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या करूँ क्या न करूँ उथल पुथल सी होती है मन में हर दम एक गति सी होती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
काश मैं होती तितली रानी सबके मन को भाया करती रंग बिरंगे पंखों से मैं बच्चों को भी खूब लुभाती दुनिया भर में घूमा करती न कोई बंधन में मैं बंधती खुले गगन की सैर […]
जागो मनुज जागो , जनहित में कल्याण करो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कण कण वास तेरा मन है निवास तेरा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
प्रारम्भ है तो अंत है , सफल छन तो जीवंत है तू विजयी अरिहंत है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या लक्ष्य है नहीं , बढ़ोगे कैसे ,चढ़ोगे कैसे गिर गिर कर फिर उठोगे कैसे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जाति पाती का भेद नहीं , बस सम दृष्टि हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वृक्ष से सीखो फल देना,छाया देना मोल न लेना ,अडिग रहना -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विषमय जीवन में , जीत के जो हारा है हारा फिर जीता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तू कहाँ में यहाँ चल वहां ,सुख जहाँ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मनोदशा,चुन दिशा भागे निशा ,मिले उषा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या कारण, क्यों अकारण मनुज मनुज से चिढ़ता -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे वसुधा के, प्राण प्यारों स्वच्छ रखना इस धरा को स्वच्छ भारत हम बनाएं जन जन को यह समझाएं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सुन्दर वन उपवन भारत में हमने यहाँ जन्म लिया प्रभु ने हमको धन्य किया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ऐ पृथ्वी ,ऐ धरा सुचि वसुंधरा है मात मेरी ,है मात तेरी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
हे सुमन तुम कितने सुन्दर , सुरभित करते तन और मन -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कांटे हैं जहाँ, चुभने दो फिर पुष्प ही तो मिलना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मौका तो दो एक बार खुद को सही साबित करने का क्यों दूसरों से सुनी बातों पर विश्वास कर बैठते हो।।
आतंकी जवानों को रोज गोली मार रहे हैं जनता द्वारा चुने नेता देश को खा रहे हैं ढोंगी बिना वजह ही, मुद्दे खड़े कर रहे हैं स्वार्थ सिद्धि को खुदा को रिश्वत दे रहे हैं […]
काश मेरे सपनों को हकीकत की शक्ल मिल जाये बिन पंखों के आसमान छूने का हौसला मिल जाये यूँ तो खोये रहते हैं दिन भर खवाबों में ही शायद फिर कुछ हकीकत में जीना सीख […]
उसका मुख देखना जारी रहा, मेरा प्यार उस पर भारी रहा। राही (अंजाना)
गमों के आसमान का तू परिंदा क्यों है, झूठी उम्मीदों की ज़मी पर तू ज़िंदा क्यों है, सिकोडे हैं हौंसलों के तू क्यों पर अपनें, उम्मीदों पर न टिके तू वो वाशिंदा क्यों है।। राही […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.