ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
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कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..#अक्स
“गुमराह ” #2Liner-36
Comments
8 responses to ““गुमराह ” #2Liner-36”
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bahut khoob..janaab
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तहे-दिल से शुक्रिया
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लाजवाब!!
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तहे दिल से शुक्रिया अन्जली जी 🙂
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Nice
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बहुत ही लाजवाब
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वाह वाह
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शानदार रचना प्रस्तुति
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