मेरा रक़ीब

मेरा दिल ही मेरा रक़ीब है,
मैं भुलना चाहता हूं, उसे
और ये याद करता रहता है।

Comments

16 responses to “मेरा रक़ीब”

  1. वाह वाह, क्या बात कही है आपने, very nice

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏🙏 बहुत बहुत धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      Thank you 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. बहुत ख़ूब ,क्या कहने

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार प्रज्ञा जी 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

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