रंग

हे रंगरेज़
बावरी मत समझ लेना
बात बार-बार दोहरांयू तो
यह अदा है इज़हार की
मुकम्मल नही हूँ,
हूँ कुछ अधूरी सी
रंग दोगे जो अपने रंग में
इबादत पूर्ण हो जाएगी।।

Comments

17 responses to “रंग”

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    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत आभार

  2. Geeta kumari

    हूँ कुछ अधूरी सी
    रंग दोगे जो अपने रंग में
    इबादत पूर्ण हो जाएगी।।
    _________ बहुत सुंदर अभिव्यक्ति लिए हुए कवि अनु जी की बहुत ही उच्च स्तरीय रचना उम्दा प्रस्तुति

    1. Anu Singla

      सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी

  3. बहुत सुंदर रचना, गागर में सागर भरा है वाह

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

  4. प्रेम की बेकरारी को पूर्णतया
    स्पष्ट करती ये पँक्तियाँ……
    प्रेम की सच्ची इबादत……
    ————-सुन्दर प्रस्तुति, भावपूर्ण रचना।।
    __________होली की शुभकामनाएं अनू जी आपको।।

    1. Anu Singla

      सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
      होली की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं 🌷

      1. धन्यवाद आपको भी बधाई

  5. उत्तम लेखन बहुत ही सुंदर पंक्तियां

    1. Anu Singla

      सहृदय धन्यवाद

    1. Anu Singla

      Thanks o lot

  6. vikash kumar

    Great

    1. Anu Singla

      Thanks g

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