किताबें ——– किताबे गुमसुम रहती हैं आवाज़ नहीं करती। सुनाती सब कुछ है लेकिन बड़ी खामोश होती है। छुपा लेती है सब कुछ बस, घुटन वो खुद ही सहती हैं। दफन कर लेती बेचैनी, दुख […]
किताबें ——– किताबे गुमसुम रहती हैं आवाज़ नहीं करती। सुनाती सब कुछ है लेकिन बड़ी खामोश होती है। छुपा लेती है सब कुछ बस, घुटन वो खुद ही सहती हैं। दफन कर लेती बेचैनी, दुख […]
🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला। जितना अधूरा उतना कामयाब अखंड ज्योति सा हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।”” – निमिषा🌺
शायर 🌺——🌺 शब्दों के तीरों से भरे तरकश सा व्यवहार करते हैं… शायर भी क्या खूब यार करते हैं। एक एक तीर से घायल हजार करते हैं, अपने टूटे दिल के टुकड़े समेटकर, जख्मों की […]
ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं। निमिषा सिंघल
कविताएं गढ़ना जानते हो, भावनाएं पढ़ना कैसे भूल गए? कुछ शब्द उधार ही मांगे थे, तुम उन्हे चूकाना भूल गए। लिखनी बराबर चलती रही, पर दोस्त बनाना भूल गए। हमने तो हंसी बस मांगी थी, […]
पहले पढ़ता था फर्क तूफान आते जाते थे जबसे गहराइयों से नाता जोड़ा है तेरे ध्यान में मग्न हो भीड़ में भी संसार से नाता तोड़ा है। निमिषा सिंघल
एक कलमकार ————- जीता है हर किरदार एक कलमकार! जिंदगी की हर कसौटी पर खुद को खुद ही कसता है। उसकी कलम उत्तम लिखे इसीलिए लगातार घिसता है। उसकी लिखी हर कहानी हर गीत श्रोताओं […]
कमाल हो तुम! कैसे जीते हो तुम? इस जहरीले नशीले अंदाज़ के साथ। कभी आग कभी पानी रोज़ ही लिखते हो एक नई कहानी । पल में तोला पल में माशा मोहब्बत का अक्सर बना […]
वो हंस रही थी मुझ पर मेरा कत्ल हो रहा था। इश्क का जारी फतवा सरेआम हो रहा था। आगोश में जब अपने भर लेना उसको चाहा। वो हर जगह थी दाखिल नज़दीक हो रही […]
कुरेदने ना देना इस दिल को मेरे। राख तले दबे अरमान, सुलग उठेंगे शोलो की तरह। झांकने ना देना इन आंखों में मेरी। इनमें तुम्हारा अक्स छपा है पहचान लिए जाओगे राधा की आंख में […]
तुम भी ना एक राग बन चुके हो जो बजता रहता है …. रेडियो सा मेरे हृदय के सितार से। आनंदित करता रहता है मेरी सात तालों से बंद हृदय कोठरी को। कभी तुम सुगंधित […]
चिरैया होगी! तुम अपने मां बाबा की। लाडली होगी! तुम अपने भाई और बहन की । समाज के भूखे भेड़ियों के लिए तुम बस एक शिकार हो। इज़्ज़त पर तेरी फिर बन है आई, फिर […]
अच्छे लगते हो मुझको तुम। जब झांकते हो इन आंखों में, गिर पड़ते गहरे सागर में, हम शोखी से भर जाते हैं । अच्छे लगते हो मुझको तुम। जब हंसी ठिठोली करते हो, मुझे देख […]
कृत्रिम सजावट जीने में, आत्मिक सुख तो नहीं ला पाती है। आनंद नाद की प्राप्ति तो प्रभु के चरणों में ही आती है। जब पा जाते खुद में खुद को तब एक कड़ी खुल जाती […]
पूस की रात ————- कड़कड़ाती सर्दी,सिसकती सी रात ठिठुरन, सिहरन आरंपार। पूस की रात जो हुई बरसात कांप उठी सारी कायनात। ना जाने कब होगी ये प्रातः। ठंड और कोहरे ने गला दिए हाड़ मांस। […]
तुम एक बुत! मैं संभावनाओं से भरा ताबूत। नहीं इरादा तोड़ने का तुमको नहीं इरादा हंसी छीनने का तुम्हारी। बात बस इतनी सी है समझानी मित्र के साथ परम मित्रता है हमें निभानी। तुम समझते […]
एक स्त्री! उड़ेल देती है सारा स्नेह खाना बनाने में। सभी की पसंद नापसंद का ध्यान रखते रखते, खुद को क्या पसंद है भूल ही जाती है। एक स्त्री! सबको स्नेह से खिलाने भर से […]
क्या हुआ? मुड़ क्यू गए? जब आए थे मुझसे मिलने! तो मिले बिना चल क्यों दिए? कुछ खोज रही थी तुम्हारी निगाहे मेरे चेहरे में! बंद आंखों से भी जान लिया मैंने। शायद बिना देखे […]
सरोगेट मदर( उधार का मातृत्व) जन्म तो दूंगी तुम्हें सहेजकर लेकिन मजबूर हूं देख नहीं पाऊंगी तुम्हें बेचकर। विप्पनतावश हारी हूं परिस्थितियों के आगे बेचारी हूं। मैं अपनी कोख का सौदा करने के लिए मजबूर […]
एक कलमकार ————- जीता है हर किरदार एक कलमकार! जिंदगी की हर कसौटी पर खुद को खुद ही कसता है। उसकी कलम उत्तम लिखे इसीलिए लगातार घिसता है। उसकी लिखी हर कहानी हर गीत श्रोताओं […]
हृदय नाद ———– आत्ममुग्ध हो कर खुद से प्रेम करो। हंसो! अपने आप पर। सुनो ! धड़कनों के संगीत को। दिशा भ्रमित होकर संगीत लहरिया कहां बह चली? उन्हे रोको ना पीछा करो बहने दो। […]
मरहम बन जाओ तुम ————————— ज़ख्मों को जलाओ तो कुछ उजाला हो। ख़ाक हो जाए हम किनारा हो। घाव की आह में सिसकियां बाकी, मरहम बन जाओ तो सहारा हो । ये दिल था ही […]
रोज हजारों अफसाने गढ़े जाते तुम्हारे रोने पर… खिलखिलाने पर… नगमे लिखे जाते, तुम्हारे फूल से होंठों के ….मुस्कुराने पर। तुम्हारे मिलन पर, बिछोह पर, प्रेम पर , बेचारगी पर….। हर पल हर कदम हजारों […]
छलक- छलक आंखों ने दिल का हाल जताया। गीले-सूखे जज्बातों को फिर आज जगाया। दिल की धड़कन ने मध्यम -मध्यम राग सुनाया। मैं जिंदा हूं! मुझको ऐसा एहसास कराया। एक कप की प्याली ने… … […]
कहा था तुमसे , किताब ना बनो ! पर नहीं माने तुम। शायद! अच्छा लगता होगा तुमको, किसी के द्वारा पढ़ा जाना। चौराहे पर इश्क लड़ाने का शौक है तुम्हे। जब देखो यहां वहां कबूतर […]
क्यू है राब्ता मुझसे? दूर चले जाने के बाद। आशिकी का नशा करते हो क्या? दिल जलाने के बाद। क्यों आज भी नजरें चुराकर चुपचाप देखते रहते मुझको ! क्या महसूस करना चाहते हो? तुम […]
ये कैसा जहरीला इश्क है तुम्हारा? लहू में गर्म शीशे सा फैल जाता है। सीने में हलचल मचाकर कर भी भला, खामोशी से कोई गीत गुनगुनाता है। गहरी कत्थई आंखों से मुझ में कुछ ढूंढते […]
ठगिया ——— कहा था ना मैंने ! दूर चले जाना मुझसे, फिर नहीं माने तुम! दिन के उजाले और रातों के अंधेरों में विचरण करते रहते हो खाली- पीली यूं ही दिल में मेरे। ईश्वरप्रदत्त […]
गुंजन है धड़कनों में! यह किसके पदचापों की आवाज है? क्या यह तुम हो? मेरे कालिदास! जिन्हें बंद आंखें भी पहचानती हैं। क्यों आए अचानक आज इतने चुपचाप? मेरे मन की आंखें और धड़कनों के […]
हे कांता! कौन सी मिट्टी से बनी हो तुम अपनी इच्छाओं का दमन कर कैसे रह पाती हो हंसती मुस्कराती तुम? वाकई बेमिसाल हो तुम। हे स्त्री! कैसे हर परिस्थिति में खुद को ढाल कर […]
चलो चांद पर चलकर बैठेंगे, कुछ नैन मटक्का खेलेंगे। क्या दिल में है अरमान तेरे! क्या दिल में है अरमान मेरे! तारों की छैयां बैठेंगे, हम आंखों में बस देखेंगे। तुम भी पढ़ना मैं भी […]
गिट्टू सी लड़की सांवली सी सूरत। लिए घूमती थी ढेर बच्चों की पंगत। कुछ लिए ढपली, कुछ गाते राग। मुंह और हाथों से बजाते थे वो साज। भूखा पेट रोटी की तड़प आवाज थी उनकी […]
आना मिलने बादलों के पार, शिकायतों का पुलिंदा भरा है दिल में मेरे। पिछले और उससे भी पिछले कई जन्मों में जो तुमने कुछ दर्द दिए थे! और मेरे आंसू निकल पड़े थे। उन सब […]
आधा चांद खिला होगा जिस दिन उस दिन मिलने आऊंगा। अपनी नीलकमल सी आंखों में मेरा इंतजार रखना। मैं चंद्रकांता का वीरेंद्र बनकर आऊंगा। महुआ के पेड़ से पक कर झड़े फूल से तैयार ताजी […]
कानों में ठूठे लगाए, बहर भट्ट सी! ज्ञान के प्रभाव से आत्मचित्त, मोहक सुवर्णा सी। चेहरे पर कठोर भाव, प्रेम में टूटी शहतीर सी। तापसी! बिन प्राणों के शवास सी। स्वरागिनी! खुद में डूबी आत्ममुग्ध […]
एक लम्हा गुजरा मेरे पास से, गुजर गई एक पल में मैं तुम्हारे आसपास से। और तुम जान भी न सके, कि हवा जो तुमको छू कर गई थी! वह मैं ही थी। सिहर उठे […]
तानाशाह से तुम! क्रोध की तीव्रता में कर देते…. सब कुछ हवन। बचपन में झेली गई मानसिक प्रताड़ना, ने बना दिया तुम्हे शिला, ज्यो थीअंदर से नरम। प्यार भी आंखें दिखा- दिखा करते हो, हंसी […]
वह घड़ी बड़ी अजीब थी! आजिज था मन खुद अपने आप से। क्या ना कहा ! क्या ना सुना! अपने आप से। बेचैन था दिल दूर जा रही पदचाप से। धुंधला रहा था वजूद ….. […]
बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]
बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]
बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]
सूर्योदय सी केसरी सुनहरी, रश्मिया तुम्हारी सखी सहेली। मोतियों सी जगमग हंसी तुम्हारी, सहस्त्र फूलों के इत्र सी महक तुम्हारी। दिलकश निगाहें होंठ अंगारे, घनघोर घटा सी जुल्फें तुम्हारे। चाल बड़ी मदमस्त नशीली सुंदरता की […]
दिलकशी से तुम मिले!!! निगाहों में अक्स तुम्हारा रोशन क्या हुआ! हजारों चिराग इस दिल में जल उठे। सर चढ़ रहे हो अजनबी हालत क्या बयां करूं हलचल सी मची दिल में तूफान में घिरा […]
जीवन मृत्यु सच जीवन का इनसे ना कोई बच पाया है। सब जानते हैं जाना है वहां! जहां परमात्मा का साया है। फिर भी भटके भटके रहते, लालच में हम अटके रहते। नहीं जान सके […]
काली कजरारी आंखों से जब मेघ बरसता है आंसू में बह कर वह नेह निकलता है खूबसूरत लगती हो तुम जब पौछती जाती हो दुपट्टे के कोने से उन आंसुओं की धारा बहता सा काजल […]
फितरत किसी इंसान की बदलती नहीं जनाब। चाहे जिंदगी में आ पड़े कितने भी अजाब। बचपन की आदतें समाई होती हैं इस कदर, बदला यदि खुद को तो नया इंसान ले जन्म। बचपन सुधारा जिसने […]
किताबें दोस्त थी मेरी, दुख सुख की साथी, अकेलेपन में किसी की कमी ना खलने देने वाली, हंसती मुस्कुराती। मुझे जहां भी कोई किताब मिल जाती मेरे पुस्तकालय में सुशोभित हो जाती। इंटरनेट ने तो […]
पार्थिव शरीर विह्वल हुए लोग शांत चेहरों में वेदना समाई है हसती खेलती कोई पुण्यात्मा परमात्मा से मिलने को आज अकुलाई है चार दिन का साथ छोड़ आज ऐसे जा रही मुसाफिर खाने से छूटकर […]
आंखों के सामने छा जाता है तुम्हारा सुरूर मुझे खुद पर ही होने लगता है गुरूर नींद भी अपना रास्ता भूल जाती है जब याद मुझे तुम्हारी इस कदर आती है कुछ यादें कुछ मीठी […]
मेरा मन विचलित था विह्वल था, कान्हा ने मुझे उबार लिया। अपना अद्भुत सा साथ दिया, भटकन को मेरी वही थाम लिया। मेरे अंतःकरण की शुद्धि की, मुझे बीच भंवर से निकाल लिया। कैसा अद्भुत […]
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