NIMISHA SINGHAL's Posts

भटके राही

भटके राही क्यू भटके हो??क्यू बिखरे हो?? क्यू बहके हो??क्यू खोये हो?? टुकङे जो देश के कर दोगे, कत्ल उम्मीदो का कर दोगे। बरबादी देश की करके तुम, ममता की छाया क्या पाओगे?? दो जख़ की आग मे जल कर तुम, जीते,जी हीे मर जाओगे। गर हो ना सके,इस माँ के तुम, तो लानत ऐसे जीवन पर। आजा़दी!आजा़दी!आजा़दी! मतलब भी क्या? तुम जानोगे, तुमको जो मिली आजा़द हवा़, मूल्य क्या तुम पहचानोगे?? इस प्रेम मयी धरती माँ पर, क्यू जह़... »

मां

मातृ दिवस :::::::::::::::: माँ जैसा …कोई ना जग में, तोल तराजू ..रख सब इसमें। तब भी पलड़ा …पार ना आये, ममता की ..कीमत ना पाये। ममता का हैं ..मोल निराला, एक हँसी.. जग वारा सारा. सुंदर रिश्ता.. माँ बच्चो का, हँसी, रूलाई ,भोलेपन का। मीठी झिड़की ..आँखे दिखाना, बात -बात मे फिर धमकाना। पीछे से धीरे मुस्काना, पापा का फिर डर दिखाना .. खनखनाती ..खुशियों भरा ये, मधुर तरंगो से है सजा ये। आओ फिर से प... »

शमा और लौ

शमा और लौ ———- नवयोवना शमा और चमकती लौ एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो। लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई, शमा को हर घड़ी दबाती गई। साथ तो दिया! पर हाय री धोखेबाज, शमा को , तिल-तिल जलाती गई। खुद नवयौवना सी च ह च हा ती रही जिस्म उसका तमक कर गलाती गई। आखरी सांस तक साथ तो दिया लाश के ढेर पर मुस्कुराती रही ये कैसा याराना!! ये कैसा अज़ीब सा रिश्ता था!! हंसते- हंसते कब वो शमा की गोद में समा गई और सो ग... »

शहीदों के घर होली

होली आई रे, आई रे ,होली आई रे। यादों की धूल उड़ाती सी , खूनी मंजर दोहराती सी, चहरों की फीकी रंगत पर रंगों का जामा चढ़ाती सी फिर देखो होली आई है। मन मस्त नहीं उदासी है, अखियां दर्शन की प्यासी है , चंद सांसों की मोहताजी है , जख्मों की यादें ताजी हैं । गुजिया मठरी रंगीन हुई, आंखें भी सब रंगीन हुईं, कड़वी यादें शमशीर हुई , खुशियां धरती में लीन हुई, उन सूनी- सूनी अंखियों में, बीती होली रंगीन हुई । कुछ ... »

शहीदों को नमन ( पुलवामा अटैक 14 फरवरी 2019)

तुम लाल देश के गर्व हमें, शौर्य गाथा हम गाएंगे। तुमने जो लहू बहाया है , इस देश का मान बचाया है, घर-घर में अलख जगाया है । खाली ना उसे जाने देंगे , साथी हम कदम बढ़ाएंगे । दुनिया के मानचित्र से हम , आतंक का नामोनिशान बनी, भूमि को बंजर कर देंगे, एक जवान के बदले में अंगारे बन कर बरसेंगे । बुजदिल आतंकी खेमों में बिजली बन कर हम दोडेंगे । बुजदिल कायर आतंकियों के, लाशों के ढेर लगा देंगे। जलते उफनते जज्बातो... »

जिंदगी

जिंदगी की तेज रफ्तार गाड़ी , बिना रुके चलती चली जाती है। दुख सुख के स्टेशनों पर , नहीं एक क्षण भी गवाती हैं। जब देख खुशी थमना चाहा , दुख देख वहां से भागना चाहा , रफ्तार ना अपनी बदली तक, यूं ही चलती रही आगे ब ढ़ चढ़ । सुनकर भी हाहाकारों को सुनकर खुशी के नगाडों को पलके गीली तो करती है होंठो पे हंसी भी खिलती है। आंखों कानों पे हाथ धरे वो दौडी_ दोडी जाती है। आवाज़ें दे थक जाते हम पीछे दौड़ नहीं जा पात... »

मेरी मां

निस्वार्थ प्रेम की सूरत हो , भगवान की कोई मूरत हो , बरसे आंखों में जिसके दुआ ,आशीर्वादो से भरा कुंआ। सूखी धरती में वर्षा हो , तुम तेज धूप में छाया हो । तूफानों में डूबती नैया की माता तुम ही पतवार भी हो। मां की गोदी में सिर रखकर चिंता छूमंतर हो जाती , बच्चों पर मुसीबत आने पर भगवान से भी मां टकराती। बच्चों की भोली बातों पर जाती बलिहारी प्यारी मां , रास्ते में पड़े हुए कांटों को आंचल से झढ़ाती प्यारी... »

अस्तित्व की खोज

बेकल ,बेचैन, गुमनाम सा कोई है , जो मुझ में तुझ में और हम सभी में हैं। चाहता है जो मिल जाए एक पहचान , जाने मुझे सभी लोग सिर्फ नाम से मेरे। प्यासी फिरी पहचान की मदिरा की खातिर , ताउम्र भटकी अस्तित्व की खोज में, ज्ञान का जो तीसरा फिर नेत्र खुल गया , भगवान के जो ध्यान में तन मन यह हो गया , सारी पहचाने होने पाने का दुख तमाम खो गया। निमिषा सिंघल »

बाल कविता

बाल कविता

मेरा बेटा ———– गोलू मोलू गप्पा सा, गुस्सा जैसे हलवा सा, अकड़ -मकड़ दिखलाता है , हंसाओ तो सब भूल जाता है। लड़ने को हरदम तैयार , बहन को करता बहुत प्यार लेकिन अकड़ दिखाता है, रोब खूब जमाता है। प्यार से सब कुछ देता है गुस्से में सब लेता है। हंसता रहता हरदम ऐसे फूल हंसा हो खिलके जैसे ।ख बातें करता बड़ी-बड़ी परीक्षा लेता घड़ी-घड़ी , अच्छा मम्मी जरा बताओ क्या है मतलब यह समझाओ । सु... »

बाल गीत

तूफानों से लड़ना होगा , कांटों पर भी चलना होगा फूलों सा महकना होगा, सूरज का चमकना होगा, दुनिया को बदलना होगा , जग से आगे चलना होगा । १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया, अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया। भ्रष्टाचार मिटाना होगा , शांति मंत्र सिखाना होगा , चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा। २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा , लहर -लहर लहराना होगा , परचम फिर... »

बाल गीत

तूफानों से लड़ना होगा , कांटों पर भी चलना होगा फूलों सा महकना होगा, सूरज का चमकना होगा, दुनिया को बदलना होगा , जब से आगे चलना होगा । १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया, अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया। भ्रष्टाचार मिटाना होगा , शांति मंत्र सिखाना होगा , चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा। २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा , लहर -लहर लहराना होगा , परचम फिर... »

बाल गीत

तूफानों से लड़ना होगा , कांटों पर भी चलना होगा फूलों सा महकना होगा, सूरज का चमकना होगा, दुनिया को बदलना होगा , जब से आगे चलना होगा । १.भ्रष्टाचार घोटालों ने हम सबको पीछे फेंक दिया, अगवा और डकैती ने दुख चैन सभी का लूट लिया। भ्रष्टाचार मिटाना होगा , शांति मंत्र सिखाना होगा , चोर,लुटेरे, डाकू सब का तांडव हमें मिटाना होगा। २. आन तिरंगा मान तिरंगा समझो तो है जान तिरंगा , लहर -लहर लहराना होगा , परचम फिर... »

गरीबी

कूड़े की किसी ढेर में खोया हुआ बचपन । भुट्टो को बेचने के लिए दौड़ता बचपन कोयले की खदानों में डूबता हुआ बचपन आटे की चक्की ओं में पिसता हुआ बचपन । बर्तन कहीं पर मांजता मेला हुआ बचपन। झाड़ू कहीं बुहारता मैला हुआ बचपन। कालीन कहीं बुनता छी दता हुआ बचपन, कपड़ों के ढेर में कहीं छिपता हुआ बचपन। फसलों को काट – काट ढेरी बन चुका बचपन। स्टेशनों पर चीज भेजता बिकता हुआ बचपन। चाहा था उसने भी मिले उसको भी ए... »

लाडो रानी

घर घर की रौनक लाडो रानी , जिद करके सुनती जो रोज कहानी। चिपकती है मुझसे जैसे फेविकोल , आंखें घुमा ती है वहगोल -गोल । डांट लगाते पापा हंस जाते, चाहते तब भी डांट ना पाते । सोनी ,मट्टो, हंसिनी ,मानो मन करता रोज नए नामों से पुकारो । भाई की लाडली लेकिन लड़ा की , हक की लड़ाई में दमखम दिखाती । छेड़ती भैया को हंसती वो जाती, झगड़ा होने पर शिकायत लगाती । डांट पड़वाकर ही चै न पाती। वरना टप टप आंसू टपकाती। मम्... »

कि जनता आती है

भोली जनता को बहुत ठगा , सब ठग विद्या बिसरा देंगे। झूठे वादे भी किए बहुत, सच का आइना दिखा देंगे। जनता ही मिलकर न्याय करे, काले कारनामों की सुनवाई करें। अपनी करनी जाने वह सब, तब ही तो मिलकर एक हुए। दुश्मनी भूल सब हुए खडे , बेशर्मी से अब भी है अडे। भाषा भी उल जलूल हुई , घबराहट का यह आलम है। नेताजी माफ करो, कचरा सब साफ करो कि जनता आती हैं। निमिषा सिंघल »

गुरु शिष्य

नटखट नन्हेचुलबुल पांडे , भोली बातों से जो रिझाते ,अक ड दिखा के डर से भोले बन जाते। डांटने वाले आंखें दिखाते मन ही मन मंद मंद मुस्कुराते, और कभी हंसी रोकते रोकते फट पड़ती हंसी के ठहाके लगाते । बेहद प्यारे चटपटे करारे पटाखे। गाल है जैसे फूल ऐसे गुब्बारे लाड़ लड़ाते अपना बनाते शहद में डुबोकर बातें बनाते नन्ही नन्ही छोटी मोटी लड़ाई बात-बात में जो अकड़ दिखाई । दिनभर फैसलों में बीत जाता समय जब गुरु के स... »

दोस्ती

यह दोस्ती अनमोल है बेजोड़ है यारों सुनो, तोहफा है भगवान का यारों सुनो, दोस्ती हसीन है महजबीं है यारों सुनो। बांधी हुई एक डोर है यारों सुनो। गमो को पीछे छोड़ दें है वो दवा यारों सुनो। दुख दर्द को जो दे भुला यारों सुनो रोशन जहां उन सब का है एक दोस्त भी जो सच्चा है , यारों सुनो। निमिषा सिंघल »

मौन संवेदना

तेरे नैनों में मेरे नैनों से कल कुछ कहा था , तुम्हें याद है !! कि भूल गए तुम ! वह गहरी बात जो शायद तुम जुबां से ना कह पाते , समुंद्र से गहरे मन को बिधतै, नाजाने कौन सा पथरीला रास्ता पार करके , कैसे पहुंच गए सात तालो से बंद उस मन मंदिर में ! और एक दीप भी जला आए, चुपचाप अचानक , नैनो ही नैनो में एक ग्रंथ की रचना हुई प्रकृति मौन थी धरा अचंभित । गगन चमत्कृत सा देख रहा था , पूरा ब्रह्मांड साक्षी था पर ज... »

वहशी समाज

सोचा था क्या हम सब ने! ऐसा रोगी समाज । हर दूसरा चेहरा जैसे घिनौना आज , लगता कि जैसे हो गए मानसिक रोगी, दहशत की बोलती है अब हर जगह तूती। हर कोई आज जग में , अस्मत का भूखा बैठा । गिद्ध सी निगाहें जैसे एक्स-रे करेगा , मां-बाप गुरु भाई सब हो गए कसाई, इंटरनेट व मोबाइल नहीं असली प्रलय मचाई। लगता है बाढ़ राज्यों में नहीं पूरे देश में है आई । राक्षसों की पूरी फौज को अपने साथ बहाकर लाई। निमिषा सिंह »

आह्ववाहन

देश वासियों जागो, जागो जागो जागो, इतने बलिदानों से आजादी जो पाई, मूल्य उसका पहचानो, जागो,जागो,जागो। बीत गया जो काल कठिन था,। मुश्किल था रहना जीना। अपनी नहीं थी धरती हमारी, अपना नहीं था ये आसमां। बलिदानों के बल पर पाई, आजादी की सांसे। मूल्य उसका पहचानो, जागो जागो जागो। निमिषा सिंहल »

विधाता

शक्ति जो है विधाता , फिर खेल है रचाए । कल तक थी,नदियां सूखी , आज बाढ़ बन डराए। कुछ गाव ,कस्बे डूबे , कुछ जूझ रहे अभी भी। पसरा है उनकी आंखों में मौत का सन्नाटा। कुछ लोग लेते आनंद कुछ बन गए तमाशा , कैसा प्रकृति तेरा यह खेल है निराला। इंसान जब भी चाहा भगवान बन के देखें, उत्पत्ति खुद ही कर ले, वह बस में मौत कर ले। तब तक प्रलय मची है, भगवान ने जताया। एक शक्ति है विधाता , जिसका नहीं कोई सानी निमिषा सिघल »

प्रेम

प्रेम —— एक उलझन एक तड़पन, एक मीठी सी आग है ये। दो दिलों के बीच सुलगती है, चाहत का आगाज है ये। हर शय में लगता है वो ही हैं, हर पल उनकी आवाज सी है। मेरे दिल में उनकी दस्तक है, हर धड़कन पर एक छाप सी है। लगता कि मिलने आओ तुम, या फिर से हमें बुलाओ तुम । भर लो यु अपनी बाहों में , कि सारा जहां भुलाओ तुम, फिर हमें छोड़ ना जाओ तुम , फिर हमें छोड़ ना जाओ तुम निमिषा सिंघल »

अनहोनी

अनहोनी ———– अनहोनी यह कैसी है , काली छाया जैसी है । हंसते हुए फूल से चेहरे , मुरझा गए एक ही पल में । काल की कराल गति से विमुख हुए प्रिय जनों से , अपशकुनी यह कैसी है , मौत के तांडव जैसी है। हरी भरी थी घाटी जो, अटी पड़ी है लाशों से , रुदन मचा है चारों ओर , दहशत देखो कैसी है। हर तरफ बेबसी ,लाचारी , हाय यह घटना कैसी है । अपने प्रिय जनों से मिलने को, कातर आंखें ये कैसी हैं। निमि... »

प्राकृतिक आपदा

एक व्यक्ति की व्यथा ————————– बिखरे टूटे सपने लेकर , सब कुछ खोकर बिखरा सा था। अनमना,अजनबी, बेजान सा था, अंदर से शायद मृत सा था, फिर से जीवन शायद सपना था। जो अपने थे जग छोड़ चले , कोई कहीं दबा को कोई बहता गया। मन पर सौ मन का पत्थर था, बस अवाक मैं देखता रह गया। आंखों से झर झर झड़ी बहे , दिल में दुखों का सैलाब से था। एक तूफा मेरे अंदर था , एक तूफा... »

मायका

मायका कुछ अक्स उभरते यादों से , कुछ शब्द गूंजते कानों में , बचपन की चौखट को छूकर , कुछ नाम महकते इन हवाओं में। निम्मी, नीमु,निमिया की धुन अक्सर बजती इन कानों में । बहुत दूर सुनाई सी देती जैसे मिश्री धुन इन कानों में । जब भी उन गलियारों से गुजरो, बचपन वापस आ जाता है । मन मस्त मगन हो जाता है, बारिश की पहली बूंदों सा, मेरे मन को बहुत भिगोता है । मन मस्त मगन हो जाता है निमिषा सिंघल »

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ——————————— नन्ही -नन्ही कोमल कोपल, जीवन जीने के मांगे पल । पर हाय! दुष्ट मनोविकारी मन, समझे कुलदीप हीउत्तम। निर्दयी दानव.. वह नर पिशाच, जो लील गया उस जीवन को। पर हाय! कलेजा कांपा ना , अपने ही हाथों बलि देकर!! जो समझे ना वरदान उसे, अरे हाय!अभागा बेचारा। अपने ही हाथों फोड़ा हो, जिसने नसीब का पिटारा । ओ बदनसीब! तू... »

मेरी बिटिया

मेरी बिटिया ————— नन्ही मुन्नी गुड़िया सी, मीठी-मीठी पुड़िया सी । बातें करती गपर- गपर। वो हंसे तो खिलती धूप मगर। लड़ ती, भिड़ती, रोती ,हंसती जैसे धूप- छांव हंसती खिलती। लड़ने में रानी झांसी है, हंसने में ना कोई सानी है । जब बोले तोजैसे फूल झड़े , जब रोए तो आंसू अनमोल लगे मेरे दिल की वह तो रानी है, मेरी बिटिया बड़ी सयानी है। नन्हीं है लेकिन मददगार , करने को हर काम तैया... »

इतिहास बदलना ही होगा

इतिहास बदलना ही होगा ——————————– बस बहुत हुई झूठी गाथा , मियां मिट्ठू ज्ञान भी बहुत हुआ। स्वर्णिम इतिहास के गाथा का, झूठ लिखकर अपमान भी बहुत हुआ असली सेनानी गायब हैं, इतिहास के स्वर्णिम पन्नों से। शाही ठाटों में लीन थे जो, बन बैठे मसीहा सबके दिलों के। बिना खडग बिना ढाल के, आजादी हमको मिलती रही। पर्दे के पीछे स्वतंत्रता सेनानियों की,... »

कर मचाए शोर

चोर मचाए शोर ——————- चोर मचाए शोर -शोर जी , अजब देश का हाल, गाल बजाकर गाना गाए, चोर -चोर का शोर मचाए अंदर से बेहाल। मुंह के यह वाचाल मति गई इनकी मारी । शिकंजे में फंसने को बुला रही तकदीर तुम्हारी । सत्तर साल कड़ी मेहनत से मटका बोया, पाप की गगरी भर- भर कर उसे खूब संजोया। कोड़ा पड़ा जो एक बार दिल कप -कप रोया। छलक -छलक पापो ने अपना आपा खोया । जाल में फंस कर चिड़िया... »

मौन स्वीकृति

मौन स्वीकृति

आंखो ने आंखो में झांका, ना जाने क्या-क्या कह डाला। अदृश्य लिखावट पढ़ ली मैंने, मौन स्वीकृति गढ़ ली मैंने। निमिषा »

मौन स्वीकृति

मौन स्वीकृति

आंखो ने आंखो में झांका, ना जाने क्या-क्या कह डाला। अदृश्य लिखावट पढ़ ली मैंने, मौन स्वीकृति गढ़ ली मैंने। निमिषा »

बरगद

बरगद —— बरगद का एक पेड़ पुराना। जैसे हो कोई बूढ़ा नाना। लम्बी – लम्बी दाड़ी वाला, बड़े तने के कुर्ते वाला। दैर सारी भुजाओं वाला। बंदर कूदे सब डाल- डाल, खीचे डाली और पात-पात। चीखे चिड़िया करे गीत गान, कूदे गिलहरियां पिद्दी पहलवान। लगता नाना के नाती हैं, सब के सब यहां बाराती हैं अपनी मस्ती में चूर हैं सब, बालों को खीचे जाते हैं। नन्हें बच्चों की तरह यहां, गन्दा घर भी कर जाते हैं बर... »

बरगद

बरगद —— बरगद का एक पेड़ पुराना। जैसे हो कोई बूढ़ा नाना। लम्बी – लम्बी दाड़ी वाला, बड़े तने के कुर्ते वाला। दैर सारी भुजाओं वाला। बंदर कुदे सब डाल- डाल, खीचे डाली और पात-पात। चीखे चिड़िया करे गीत गान, खुदे गिलहरियां पिद्दी पहलवान। लगता नाना के नाती हैं, सब के सब यहां बाराती हैं अपनी मस्ती में चूर हैं सब, बालों को खीचे जाते हैं। नन्हें बच्चों की तरह यहां, गन्दा घर भी कर जाते हैं बर... »

मन की बात सुने फिर कौन!!

मन की बात सुने फिर कौन! ———————————- काले धंधे राह अंधेरी मन दोहराए माने कौन!!!! बात पते की स्वदेशी चीजें , देश का मान बढ़ाएं कौन!! नारी सम्मान हमारा अभिमान, अत्याचार मिटाए कौन!! देश गर्त में डूबा जाए, उसको सम्मान दिलाए कौन !! जो सम्मान दिलाने आए उसके लिए हाथ बढ़ाएं कौन!! देश की रक्षा हम सबकी सुरक्षा, कंधों पर भार उठाएं कौन!! जिम्मे... »

मैं की बात सुने फिर कौन!!

मन की बात सुने फिर कौन! ———————————- काले धंधे राह अंधेरी मन दोहराए माने कौन!!!! बात पते की स्वदेशी चीजें , देश का मान बढ़ाएं कौन!! नारी सम्मान हमारा अभिमान, अत्याचार मिटाए कौन!! देश गर्त में डूबा जाए, उसको सम्मान दिलाए कौन !! जो सम्मान दिलाने आए उसके लिए हाथ बढ़ाएं कौन!! देश की रक्षा हम सबकी सुरक्षा, कंधों पर भार उठाएं कौन!! जिम्मे... »

ऐसा मेरा देश हो जाए

ऐसा मेरा देश हो जाए —————————- आओ भारत नया बनाए, सपनों का संसार बसाये। नए महल सा देश सजाएं, उन्नति का परचम फहराए। चारों तरफ हरी हो धरती, स्वस्थ सड़क हर जगह हो दिखती । धुली साफ सी रहे यह धरती, सुलभ भली सी लगे जिंदगी। धुआं प्रदूषण कहीं ना फैले, स्वच्छ हवा की न नैमत ले ले। स्वच्छ हवा और शुद्ध वातावरण, सुंदर हो हम सब का आचरण। वैज्ञानिक परचम लहराए, ... »

ऐसा मेरा देश हो जाए

ऐसा मेरा देश हो जाए —————————- आओ भारत नया बनाए, सपनों का संसार बसाये। नए महल सा देश सजाएं, उन्नति का परचम फ। चारों तरफ हरी हो धरती, स्वस्थ सड़क हर जगह हो दिखती । धुली साफ सी रहे यह धरती, सुलभ भली सी लगे जिंदगी। धुआं प्रदूषण कहीं ना फैले, स्वच्छ हवा की न नैमत ले ले। स्वच्छ हवा और शुद्ध वातावरण, सुंदर हो हम सब का आचरण। वैज्ञानिक परचम लहराए, खिला... »

बचपन

नन्हा ,सलोना सा, प्यारा सा बचपन । मासूम भोला नटखट सा बचपन। वह चंदा का तारों का सूरज का मेला । वह जादुई परियों में नन्हाअकेला। वह दादी के किस्से ,वह नानी की कहानी । वह भाई बहनों की मीठी छेड़खानी। वह बारिश के आने पर झूम जाना वह खूब नहाना और कश्ती तैराना। वह मिट्टी के तेल से चलता स्ट्रीमर, वह बुढ़िया की मीठे बालों के गोले ,वह मिट्टी के बर्तन बड़े ही अनोखे , वह मेला, वह रेला ,वह झूले झूलना । वह गुड़िय... »

शिक्षक

शिक्षक साधारण व्यक्तित्व ..पर बेहद रोचक। आदर्शों की मिसाल, अज्ञान का आलोचक । राष्ट्र का निर्माता ..प्रगति का द्योतक । ज्ञान का भंडार… जलता हुआ दीपक। उजाला फैलाए… कठिनाइयों का मुक्तक। विद्यार्थी जीवन में हर पल सहायक। मासूम दिलों का होता वह नायक। संस्कृति, सभ्यता, न्याय का परिचायक। समय से ताल मिला चलता अध्यापक। हर गलत कदम रोकता होता वह अनुशासक। मीठी झिड़की ,हल्की थपकी, सम्मान के होता वह ... »

सावन

सावन ———- बारिश की रिमझिम बूंदों ने, कुछ इस तरह मन हर्षाया । जैसे सूखे प्यासे होठों ने ठंडा मीठा जल हो पाया । उल्लासित है . .हर वृक्ष लता, कलियां झुंढो में रही ठ ठा। गुनगुन का है संगीत बजा, धरती ओढ़े परिधान हरा । कितना सुंदर है दृश्य यहां पेड़ों पर छाई नहीं छटा। केसरिया घन बन घूम रहे, हवाओं के संग डोल रहे। टप- टप का है संगीत बजा । पेड़ों पर छाई नई छटा। आंखें चाहे पीले जहां । दिल ... »

माखन चु रई या

माखन चुरैया __________ मीठी मुस्कान तेरी अजब तेरी लीला। बांके बिहारी तू है छैल छबीला। तीखे नयन तेरे करे हैं इशारे, बांसुरी बुलाए मुझे सांवरे के द्वारे। आजा कन्हाई यशोदा दुलारा, तुझको पुकारे सखा, बृजबाला। भोली सी सूरत माखन चुरैया मुरली बजा के उड़ाई सबकी निंदिया। लड्डू सा. .. लड्डू सा लगे वह लड्डू गोपाल । आजा कन्हैया हम सबका दुलारा। तुझको पुकारे अधीर बृजबाला, आजा कन्हैया हम सबका दुलारा। दुष्टों का न... »

शिक्षक

शिक्षक साधारण व्यक्तित्व ..पर बेहद रोचक। आदर्शों की मिसाल, अज्ञान का आलोचक । राष्ट्र का निर्माता ..प्रगति का द्योतक । ज्ञान का भंडार… जलता हुआ दीपक। उजाला फैलाए… कठिनाइयों का मुक्तक। विद्यार्थी जीवन में हर पल सहायक। मासूम दिलों का होता वह नायक। संस्कृति, सभ्यता, न्याय का परिचायक। समय से ताल मिला चलता अध्यापक। हर गलत कदम रोकता होता वह अनुशासन। मीठी झिड़की ,हल्की थपकी, सम्मान के होता वह ... »

Hindi Kavita

बादल जीवन फिर लाए तो ——————————– मधुर मंद -मंद बयार चली, नजरों में भर कर प्यार चली। धरती के सूखे बालों को सहलाती, चिंतित सी नार चली । पीछे पीछे मस्ताना सा, बादल आया दीवाना सा, मुख देख धरा का ठिठका वो, चिंतित हो अश्रु भर लाया । बादल ने पूछा देवी तुम! एकटक शून्य सी आंखों से, यूं किसे निहारा करती हो? जर्जर कपती सी काया से, क्या मुझे पु... »

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