बाहर कितनी खामोशी है अंतर्मन द्वंद सा मचा कहां? चेहरा हंसता सा दिखता है आंखों में नमी, दुख छुपा कहां? जीव्हा कुछ ना कुछ बोल रही शब्दों में फिर वो रवानी कहां? तुम भी जी […]
बाहर कितनी खामोशी है अंतर्मन द्वंद सा मचा कहां? चेहरा हंसता सा दिखता है आंखों में नमी, दुख छुपा कहां? जीव्हा कुछ ना कुछ बोल रही शब्दों में फिर वो रवानी कहां? तुम भी जी […]
बचपन जिस आंगन में बीता, वह बस एक पड़ाव था मंजिल का। उन रास्तों से आगे बढ़कर, मंजिल तक जाना बाकी था। जिस घर में उस ने जन्म लिया क्या पता था!! यह घर उसका […]
इश्क का बुखार बड़ा ही लज्जतदार। आत्मा पर हो जाता एक जुनून सा सवार। कर देता अच्छे खासे इंसान को बेकार। हंसता खेलता इंसान लगने लगता बीमार मीठा जहर यह बड़ा ही असरदार। पीना हर […]
तजुर्बों का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
तजुर्बा का नाम जिंदगी है। कभी दुख कभी दिल्लगी है। किताबों से मिलता ज्ञान अधूरा है। पूरी जिंदगी ही तजुर्बों का चिठ्ठा है। यादों में ना जाने किस-किस का किस्सा है। सुखो के साथ दुखों […]
मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल
एक चाहत भरी नजर दिल में रोशनी सी भर गई तुम्हें याद करना इंतहा इबादत बन गई हर अक्स में तुम्हे खोजना जुनून बन गया चेहरा तुम्हारा मेरे लिए आईना बन गया तुम्हें दूर जाते […]
रहस्यवाद का जामा पहने स्त्री! एक अनसुलझा रहस्य! उलझे हुए धागों की एक गुत्थी। शायद! पुरुष के लिए एक मकड़जाल। पर हर स्त्री अपने आप में हैं बेमिसाल। कभी वह खुली किताब बन जाती , […]
हर शख्स से हर अक्स से विनती मेरी हर सांस से हर जात से हर पात से हर शहर ग्राम और प्रांत से। धरती हमारी मां है यह भारत हमारा है वतन। सोचो मगर क्यों […]
नदियां हैं जीवनदायिनी, उज्जवल है मोक्ष प्रदायिनी। कचरा ना इन में डालो तुम, बर्बादियों ना पालो तुम। शीशे सी साफ हो जब झांको तुम । सुंदर धरा यह हरी भरी लगती है तुमको भी भली। […]
रोज सुबह बच्चों को उठाती, कभी-कभी पानी छिड़काती। एक-एक करके काम निबटाती, बीच-बीच में लेती जाती , हम सब के झगड़ों में रस। बीच में कहती हो गया बस, पढ़ो लिखो ना लडों भिडो। पड़ […]
बोलियां बतिया तेरी , काजल भरी गहरी काली अखियां तेरी। दिल को चकमक सा कर गई, भीनी मुस्कुराहटें भर गई, मनमोहिनी ,चितचोरनी जादू भरी तेरी हंसी, मुझमें से मुझको खींच ले गई मैं अवाक सा […]
देना चाहती हूं सूखे होंठो पर हंसी, निराश डूबती सी आंखों में रोशनी, सूखे उलझे बालों में नमी, हारी सी जिंदगी को जीत की खुशी, छोटी- छोटी सी वस्तूए मिल जाने पर चेहरे पर छाई […]
गहरी काली आंखों में डूब जाना चाहता हूं। तुमको बस तुमको यूं ही देखना मैं चाहता हूं। तेरे बस तेरे ख्यालों में खो जाना चाहता हूं। तेरी बस तेरी हंसी की खनक सुनना चाहता हूं। […]
गणपति विसर्जन ——————— श्रद्धा व सम्मान दिया, गणपति को घर में विराजमान किया। रोज ..मोदक, मेवा खिलाते रहे, गणपति जी को… जी भर मनाते रहे। वस्त्र, आभूषण उन्हें हम चढ़ाते रहें , लाड सारे उन्हें […]
बैठे-बैठे मुस्कुरा रहे हो हमसे तुम कुछ छुपा रहे हैं आंखें हैं आईना धड़कनों का उनमें हाल-ए-दिल पढ़ा रहे हो। निमिषा सिंघल
नन्ही मुन्नी गुड़िया सी मीठी-मीठी गुड़िया सी। बातें करती गपर – गपर वो हंसी तो खिलती धूप मगर । लड़ती ,भिडती, हंसती खिलती जैसे धूप छांव हंसती खि लती। लड़ने में झांसी रानी है हंसने […]
सोचा था क्या हम सब ने! ऐसा घ्रणित समाज, हर दूसरा चेहरा वहशी घिनौना आज। लगता कि जैसे हो गए सब मानसिक रोगी दहशत की बोलती है अब हर जगह ही तूती सब धर्मों के […]
नारी है अबला नारी है शक्ति । नारी है ममता नारी है पूजा । नारी का एक रूप है बेटी जो तपती दोपहर में ठंडी हवा है रेगिस्तान में आशा का पानी । नारी सदा […]
तन्हा बैठे ना जाने कुछ सोच कर आ जाती हंसी कुछ बातें कुछ यादें कुछ गुज़रे लम्हे अकेलेपन का फायदा उठाकर घेर लेते चुपचाप अचानक जैसे कोई आंखों पर हाथ रखकर सामने आकर मुस्कुराया हो […]
सावन की पहली बारिश जब तपती सूखी सी धरती को, पहली बूंदों से छू लेती , तब लगता जैसे हंसती हो कमसिन सी नार अकेले में । साड़ी में लिपटी सोई हुई , जैसे चटक- […]
आरक्षण बनाम वोटों की राजनीति __________________________ आरक्षण उन लोगो के लिये था जो पढना चाहते हैँ पर पैसे से लाचार है। लेकिन अपने निजी स्वार्थ व वोटो के राजनीति के चलते नेताओ ने इसे जातिवाद […]
एक-एक मोती से एक, फिर माला बन जाएगी धीरे धीरे करो पहल तो क्रांति देश में आएगी। याद करोगे बलिदानों को , देशभक्ति जागेगी। आग हृदय में बुझ गई जो फिर अंगारे बना दो। देशवासियों […]
अनहोनी यह कैसी है ! काली छाया जैसी है। हंसते हुए फूल से चेहरे , मुरझा गए एक ही पल में । काल की कराल गति से, विमुख हुए प्रिय जनों से। अपशगुनी ये कैसी […]
आठों प्रहर के बाद ,सूर्य देव देखो उग रहे। प्रहरो के चक्र में फंसे हुए से दिख रहे। ऐसे ही मनुष्य को लगाने पड़ते फेरे हैं, जन्म- मृत्यु चक्र से निकाले प्रभु के डेरे हैं। […]
पाषाण से दरिया बनने दो , मुझे अपने हक में लड़ने दो। मैं छुईमुई सी गुड़िया नहीं , मुझे लक्ष्मीबाई बनने दो । आजाद परिंदा बनने दो, ना काटो पंख मुझे उड़ने दो। निमिषा सिंघल
रंग के बहाने पी को आज छुआ जाए सखी! चलो भंग के बहाने कुछ बहक – बहक जाएं सखी ! बहकने -महकने का आज लुफ्त उठाएं सखी ! रंग के बहाने थोड़ा आज जिया जाए […]
खुश रहना हंसना तुम सीखो। दुखों से भी लड़ना तुम सीखो । तूफानों को झेलना सीखो। चट्टानों सा बनकर देखो । आकाश में उड़ते पंछी देखो। कैसे नदिया बहती देखो। काम करें सब अपना सीखो। […]
पूर्णता की खोज संपूर्ण होने के लिए , पूर्ण होने के लिए। नये मार्ग ढूंढता रहा आगे ही मै बढ़ता रहा। पर बाद में समझा ये शब्द। मोक्ष प्राप्ति ही पूर्णता है, जग में फैली […]
संगीत दिलों में बजता हैं जब, धड़कने सुरीली हो जाती। हर आहट एक मीठी दस्तक, चेहरे पर हंसी खिला जाती। खुद से बातें करते रहना, खोए खोए से यूं रहना, बात करें यदि तुमसे कोई, […]
जीवन में मिले थे लोग बहुत, कुछ छूट गए कुछ साथ चले। कुछ से अद्भुत सा रिश्ता मिला, कुछ ने अनसुलझे एहसास दिये। कैसा आत्मीयता का बंधन था, शायद पिछले जन्म का चंदन था। जो […]
जिंदगी के सुरों में यदि तासीर चाहिए, तो वफा ईमानदारी और बस प्यार चाहिए। वरना सारे सुर , बेसुरे नजर आएंगे। प्रेम को वो सौंदर्य पूर्ण … समुंद्र सी गहराईया ना दे पाएंगे। इंद्रधनुषी रंग […]
मेरी बूढ़ी नानी आंखों पर चश्मा , सन से सफेद बाल , सुंदरता की आज भी मिसाल। कांपती सी आवाज, थोड़ा कम सुनते से कान लेकिन आज भी उनका व्यक्तित्व, है बेमिसाल प्यार और दुआएं […]
महात्मा गांधी —————— 🙈🙉🙊 बाहर से गंभीर धीर,👴 जज्बों से थे तूफानी।🌋 अंग्रेजों के पैर उखाड़ गए, वो नाम था गांधी।🤓 अल्पाहारी, शाकाहारी, 🌿🌾 सत्य निष्ठ, अवतारी,👼 बैरिस्टर से साधु बन गए, मानवता के पुजारी […]
बेचैनियां ,मदहोशियां आती रही,जाती रही । आवारगी सी इस दिल पर छाती रही, गुनगुनाती रही, हम नशे के पैमाने में….. डूबते- उभरते रहे, यादें….. इस कदर दिल को कभी जख्म कभी मलहम लगाती रही। निमिषा […]
शांति की ओर .. प्रकृति में खो जाओ, मंत्रमुग्ध से हो जाओ । कुछ पल डूबे रहो जल में , बैरागी से बन जाओ। तृष्णा त्यागो , चलो प्रेम की ओर । मन के कानों […]
बेटियां रोशन हर घर जहां जन्म लेती हैं बेटियां 👩🎓 🧑होती हैं दो कुलों की रक्षक यह बेटियां 👩🔬 घर-भर की रौनक ये खिलखिलाती बेटियां👩🚒 भाई पर लुटाती जान भी ये बेटियां🧒👧 दो परिवारों के […]
मां क्या-क्या दुख सहती है, हर फरमाइश पूरी करती है । हर हुकुम बजाती रहती है, खुद से बेपरवाह रहती। बच्चों की चिंता करती है , अलार्म क्लॉक सी जगती है अपने सपनों को छोड़ […]
पाषाण युग दिखावे की संस्कृति , दिखावे का प्यार। प्रचार पाने को , हर कोई तैयार। कैसा यह संसार ! बदलता बातें पल पल सच बन जाता झुठ यहां हर कदम कदम पर पत्थर से […]
इश्क आंखों में डूबा रहता है, रोम- रोम में रहता है। लबों को छूकर जाता है , जग में तन्हा कर जाता है। सरगोशी सी कर जाता है, गुपचुप सी हंसी दिलाता है। जाने क्या […]
कर्म ही पूजा और न दूजा , किस्मत का दरवाजा। किया कर्म तो सोई किस्मत का खुल जाए ताला। भाग्य बदल कर रख दो अपना , कर्म करो और साथ लो अपना। रेखाओं पर गर […]
रात के छम सन्नाटे में, एक भय की आहट है। घबराहट की दस्तक है कोई है का एहसास है कल क्या होगा की सोच है । बीते कल जो जिंदगानिया शां त थी, आज उनमें […]
तुझ में पाया था प्रेम बहुत , सार्थक लगता था जीवन कुछ, आंखों में प्रेम की बारिश थी, कुछ कही- अनकही गुजारिश थी । मन भीग गया तन भीग गया, ऐसी वो सुहानी बारिश थी। […]
बीते लम्हों की बारिश है , इन आंखों से गुजारिश है , यह खुली किताब ना बन जाए , मुझको रुसवा ना कर जाए निमिषा सिंघल
तुम नदिया सी. . .. मैं वृक्ष हरा.. तुम जलधारा, मैं तरस रहा। तू मस्त मगन लहराती सी, बहती जाती इठलाती सी। गहरी कत्थई सी, आंखों में अपना ही अक्स ढूंढता हूं । खुद को […]
फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]
फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]
रिश्तो की क्या है परिभाषा ? क्या मान है? क्या है मर्यादा ? बीती बातें युग बीत चले, रिश्ते मानों को भी खो चले। रिश्तो में ना अब वह सच्चाई है । ना पहले जैसी […]
आसमान में उगता सूरज दिखता है , स्वर्णिम भारत का सपना, फिर सच्चा होता दिखता है। हुकुमत शाही अफसरों ने त्यागी, कर्म योग की अब है बारी, सरकारी तंत्र सुधरता दिखता है । स्वर्णिम भारत […]
जब कभी ,अकेले बैठकर , किसी पुरानी बात पर मुस्कुराएंगे। तब आप ,अपनी उन्मुक्त हंसी पर, खुद ही चौक जाएंगे। दिले किताब से धूल झाड़ कर तो देखिए , बस एक पन्ना जरा पढ़ कर […]
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