Poonam singh, Author at Saavan - Page 3 of 5's Posts

Rimjhim savan ki barsat

रिमझिम सावन की बरसात उस पर आए तेरी याद…….. भीगी भीगी सावन की वो रात, हौले हौलै बारिश की वो रात, टिम टिम करते तारों की वो रात, पल पल आए तेरी यादों की बारात, जुगनू भी सम्मा जलाए उस रात, चंदा भी राह दिखाए उस रात. कोयल भी गीत सुनाए उस रात, मोर भी नाच दिखाए उस रात, याद आए सावन के झूलों की वो रात, याद आए तुमसे मुलाकात की वो रात | »

Ai savan ki fuhar

आई सावन की फुहार , छाई रूत में खुमार, घटाएं छाई है घनघोर, रह-रहकर दामिनी दमके, हवाएं मचा रही शोर, बारिश की लगी है झडी, जैसे झरनों की हो फुलझड़ी, भीगा भीगा सा ये रुत है , भीगा भीगा सा यह मन है, भीगा भीगा सा यह तन है, मयूरा नाच रहे छमाछम, कोयल भी लगा रही है तान | »

Tu man ki ati bholi ma

तू मन की अति भोली मां, दूजा नहीं तुझ सा प्यारा मां, ऊपर वाले की सूरत में, तू ही तू बस दिखती मां , मुझे जब नींद न आती , लोरी गा कर तू सुलाती मां, मुझे जब भी भूख सताती, झट से तू खाना दे देती, मुझे जब कोई कष्ट होता , खुद बेचैन हो जाती मां , तू ही मंदिर तू ही मस्जिद, तू ही है गुरुद्वारा मां , तेरे चरणों के सिवा और कहीं न जाना मां , ऊपर वाले की सूरत में , तू ही तू बस दिखती मां| »

Beba ankhe

उन बेवा आंखों का आलम मत पूछो, सूख गए हैं आंसू उन बेवा आंखों की , बसे थे जिनमें हजारों सपने, टूट गए है वे सारे सपने, बह गए हैं वे झरने सारे, चले गए हैं दिन बहार के , अब तो सावन भी लगे सुखा सा , होली दिवाली में अब वो बात कहां , जीवन भी लगे सुना सुना सा , अब पहले जैसी बात कहां , सजना सवरना भी लगे गुनाह सा , हर पल किसी को ढूंढती है वो आंखें …… »

Teri yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी , अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी , इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी , यह दुनिया विरान है बस तुझ बिन मेरी….. »

Tery yade

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को नहीं देखती हैं आंखें मेरी , अब चले भी आओ कि सूनी है आंखें मेरी , इन हवाओं से कह दो ना रास्ता रोके तेरी , यह दुनिया बिरान है बस तुझ बिन मेरी….. »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

Ek budhi lachar wah

एक बूढ़ी थी लाचार वह, थी भुख से बेचैन वह , बैठी थी सड़क किनारे वह, लिए हाथों में कटोरा वह, इस आस में कि पसीजे, दिल किसी का और देदे कटोरे में दो चार रु वह, पर अचंभा तो देखो , कि हो ना सका ऐसा , लोग आते रहे, लोग जाते रहे, पलट कर किसी ने देखा भी नहीं उसे , अजीब विडंबना है ईश्वर तेरी, कहीं दी इतनी गरीबी तूने तो कहीं दी जरूरत से ज्यादा अमीरी……. »

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