Author: Rishi Kumar

  • झूठ

    माँ ही है संतान मोह में,
    सबसे से लड़ जाती है|
    जिसकी माँ खुद जज वकिल बने,
    उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है|

    लाख गुनाह छिप जाते है,
    बस माँ के आ जाने पर|
    दंड के संग संस्कार सिखाती
    प्यार से घर लाने पर|

  • कंघी

    कविता- कंघी
    ——————

    कभी इसको
    रख गोदी मे रोटी देती थी,

    कभी इसको
    काजल कंघी तेल कराती थी,

    कभी इसको
    कंधो पर रख कर,
    मेले कि शैर कराती थी,

    थक! जाता था, लाल मेरा जब,
    रख सर पर गठरी गोदी मे लेके,
    कभी अपने मैके जाया करती थी|

    कभी इसको
    झूठ दिलाशा दे करके,
    खुद कामो मे लग जाती थी|

    बड़ा हुआ जब लाल मेरा,
    क्या क्या रंग दिखलाता है|

    कभी भुखे पेट मै सोती हु
    कभी कपड़ो के लिए रोती हु|

    है ऐसा कोई साथ निभाये,
    माँ से बढ़कर कोई प्रित दिखाये,
    मत माँ को डायन कहना भाई,
    माँ ही है जो हर दुख सहके,
    किसी स्त्री का शौहर तो,
    किसी बच्चे का बाप ,बनने खातिर
    दूध दही भोजन संग पेड़ा खिलाये|

    ऋषि कुमार “प्रभाकर ”

  • लायक

    रोया हूं बहुत चादर में मुंह छुपा कर के,
    लायक हूं ना लायक नहीं,
    जो मरा नहीं किसी के प्यार में,
    गले में रस्सी का फंदा लगा करके|

    वह छोड़ दी तो कोई बड़ी बात नहीं,
    मेरे साथ मेरा परिवार है ,
    इससे बड़ी कोई बात नहीं|
    प्यार करने के लिए बहन भाई मां बाप है-
    जिसे मैं समझूं ओ मुझे न समझे
    उससे बड़ा कोई मूर्ख नहीं|

  • बेदर्द

    बेदर्दो से मत आस लगाओ,
    कि तुम्हारे दर्द के मल्हन बनेंगे|
    पराए काम आ सकते हैं,
    वक्त पर अपने साथ छोड़ जाएंगे|

  • जख्म

    हर जख्म छिपा करके
    हंसने की कोशिश कर रहा हूं|
    काश समझ लिया होता उसे भी,
    जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं|

  • बादशाह

    कविता- बादशाह
    ———————
    सजग प्रहरी बनने के लिए,
    फिर से कलम उठाया हूं…
    अब हमें रोक लो,
    लोकतंत्र के बादशाहो तुम!

    ना धरना पर बैठूंगा
    ना संपत में आग लगाऊंगा|
    बस कलम उठाया हूं-
    कलम की भाषा में
    तुम्हें तुम्हारी औकात बताऊंगा|

    सारी घोटाला करतूत तुम्हारी,
    देशभक्त हो-
    देशभक्त की यह पहचान तुम्हारी|
    ना रंग ना कपड़े से,
    ना डंडा ना भगवा से,
    ना मंदिर ना मस्जिद से,
    ना बौद्ध मठ ना गुरुद्वारे से,
    पहचान तुम्हारी तब होगी,
    जब हर नारी सुरक्षित होगी|

    कई मोतियों की माला स्त्री,
    कई गले कि शान है,
    मत प्रशंसा करो इस माला की ,
    नेता इस माला के ना काबिल है|

    सबके लिए यह बात नहीं,
    इस माले का जो अपमान किया|
    कहे “ऋषि” वह स्त्री से ना जन्मा,
    वह मुर्गी के अंडे की औलाद हुआ|

    — ऋषि कुमार “प्रभाकर”

  • पिता का सपना

    हे प्रभु भक्त तेरा हूं,
    मत दे दुनिया की दौलत मुझको|
    दे जा मुझको अनमोल खजाना,
    ना इसके सिवा कुछ चाहत मुझको|

    कई पीढ़ियों से हाथ है सुना,
    दादा बाबा परदादा से |
    लाल दिए हो लाली दे दो,
    दुआ मेरी है जगत विधाता से|

    वह दिन सब कोई रोते थे,
    दुर्भाग्य साली समझते थे|
    शोक सभा हो घर में मानो ,
    जब सुनी कलाई पाते थे|

    उमा रमा सुधा कहू,
    या सीता कह के बुलाऊंगा|
    बिक जाए ,चाहे घर का हर एक कोना,
    बेटे जस पढ़ाऊंगा|

    इतना साहस तेज शिखा दू,
    संस्कारों के फूल खिला दू|
    जहां रहे सभ्यता की खुशबू फैले,
    बेटी है ऐसे संस्कार मैं दू|

    है बेटा बेटी दे दो,
    बहना का प्यार मिले यह अवसर दे दो|
    कुछ घर के बच्चे ,अपनो को नाना कहते,
    बच्चों को मामा-
    हमें नाना बनने का अवसर दे दो|

    सपना देख रहा हूं प्रभु,
    यह दिन भी सब सच हो जाए,
    आश टिकी है तुझ पर ही,
    प्रभु सपना सच हो जाए|

  • परख

    तेरे प्यार का दर्पण हूं,
    मुझे पर रखना छोड़ दे|
    कब तक सताएगी तू मुझे,
    अब मुझे परखना छोड़ दे|(1)

    इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं
    तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं|
    आ गले लगा जा फिर से मेरे,
    मत परख अब समय नहीं|(2)

  • कलम

    बादशाह बनने के लिए,
    कितने झूठ बोलोगे|
    जमाना आपका भक्त होगा,
    पर मेरी कलम की धार से रोओगे|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍

    मेरी कमी बताने का कष्ट करें

  • बहन

    कविता- बहन
    ——————-
    पता उसे तेरा बसेरा,
    डाल पे किससे होता है|
    यह भी पता था आना जाना,
    कब कब तेरा होता है|

    बोल सकी ना तेरे कारण,
    भैया तुझको कहती है|
    देख हंसी को वह भी हस्ती,
    तेरी जान कहीं तो बसती है|

    वह न कभी तुझे टोक रही थी,
    ना तुझसे कभी पूछ रही थी|
    देखा तुझको संग में उसके,
    कभी ना तुझको डांट रही थी|

    बात यहीं पर खत्म नहीं,
    राज यहीं पर खत्म नहीं|
    जान रही थी सब कुछ तेरा,
    कभी मात-पिता से बोली नहीं|

    अपने प्यार कि कीमत जस,
    यदि समझ लिया होता ,उसका भी|
    आज जमाना गाली देता-
    यह जगत चुप होता-
    यदि समझ लिया होता उसको भी|

    ना फंदे को सिंगार बनाती,
    ना हत्या की कदम उठाती|
    समझ लिया होता रोना उसका,
    ना घर से भागने की तैयारी करती|

    मिल हत्या कर दी उसकी तुमने,
    क्या प्यार ही उसका खता रहा|
    आंख लड़ आया तुमने भी था,
    तेरे लिए क्या सजा रहा|

    जाति धर्म का दीवार तोड़ दो,
    गरीब अमीर का साथ जोड़ लो|
    कहे “ऋषि” सब जन से,
    खुलकर उसकी इच्छा सुन लो|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि- ऋषि कुमार “प्रभाकर”
    पता -ग्राम पोस्ट ,खजूरी खुर्द -खजरी ,
    थाना- तहसील कोरांव ,
    जिला- प्रयागराज
    पिन कोड 21 2306

  • धरना प्रदर्शन

    उठो फिर से मेरे यारो, यहाँ कुछ काम करना है|
    शहर है जाम यदि यारो, कही से राह देना है
    लड़ो सरकार से भाई, हमें इतराज ना तुमसे|
    पर परवाह करो मेरी भी,एक जुड़ी जान है मुझसे||

  • विद्या

    कविता -विद्या
    ——————–

    प्रेम करो तुम विद्या से, जीवन कांटों में खिल जाएगा|
    जो विद्या को ना चाहे
    ओ पाछे पछताय|
    चढ़त जवानी गदहा बने,
    ढोय ढोय मर जाय|

    बालू कंकड़ मोरम ढोए,
    लादे सर पर पाथर|
    ईट ईट तो दिन भर ढोए,
    रात के सोए बाहर|

    पिठ लदा छऊवन माटी,
    तो सर सर सोटा खाय|
    बाल काल जो बीहड़ भागे,
    कल नारी शरण रह जाय|

    चिपों चिपों कह भूख के मारे,
    ना मिले सेव ,तू घास घास खाय|
    तेरे बल पर मालिक राज करें,
    राजन दूध दही घी खाय|

    ताक सिनेमा ताश जो खेलें,
    तुम ताक ताक मरी जाय|
    करो नकल यह कौन बनाया,
    तेरे ताकन से अरब पति हो जाय|

    मान रहा हूं यह भूल तेरी थी,
    अब भूल न करना संतान के संग|
    बीड़ी खैनी मदिरा मान को छोड़ो,
    पाई पाई जोड़ो शिक्षा के संग|

    यदि आज सभालो अपना जीवन,
    कल उगता सुरज बन जाएगा|
    हार मिलेगी “ऋषि” हजारों,
    एक दिन मंजिल मिल जायेगा| प्रेम………
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    नाम-ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • कविता

    कविता- ज्योति पासवान
    ——————————–

    आज लूटी है उस की ज्योति ,कल तेरी ज्योति लूट जाएगी|

    आंख की ज्योति ,
    घर की ज्योति!
    ज्योति चाहे जिसकी हो|

    भारत मां को कहने वाले,
    भारत माँ अब पुकार रही है|
    कब तक लूटोगे दामन मेरे मेरे,
    माँ दामन मे आसूं पोछ रही है|

    पाला हू रख दामन मे तुम्हे,
    दुनिया मुझसे पूछ रही है|
    भारत माँ क्या औलाद तेरे है,
    कुछ घर के ज्योति छीन रहे हैं|

    क्या खता थी उसकी आज बता दो|
    मैं मां हूं बेटा मुझसे कह दो||

    यदि हर घर में ज्योति नहीं|
    बिन ज्योति जग का तम दूर नहीं||

    सिसक सिसक कर रोती है|
    पकड़ के आंचल पूछ रही है||
    भारत मां बेटे तेरे|
    खींच रहे क्यू पल्लू मेरे|

    कहे ऋषि अब तो सुधरो ,
    भारत माँ बिन बेटी हो जाएगी|
    आज की बेटी कल की माँ है
    मिलके करो सम्मान सभी
    नहीं भारत मां की इज्जत लूट जाएगी||
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    नाम-ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • वजह

    कविता- वजह
    ——————-
    तन मे तुम हो, मन मे तुम हो
    दिल में तुमको रखता हूं|
    चाहे जितना मुझे भुलाओ,
    निस दिन तुम पर मरता हूं|

    जीने की वजह मेरी हो
    मरने की वजह मेरी हो|
    अब खुश मै बहुत हुआ ,
    कविता लिखने की वजह मेरी हो|

    प्यार मिले तो अच्छा है,
    हंसी मिले तो अच्छा है|
    यार मेरे सब गाली देते,
    क्या उसमे ऐसा रखा है|

    मैं भी हंसके कहता हूं,
    बिन याद किये ना सोता हूँ|
    रात गुजारा पर छत पर बैठे
    कभी बैठ बैठ के सोया हू|

    जब-जब यादों में वह आए,
    पल भर की हंसी सताती है|
    लिख दूं कितना शायरी कविता,
    यह दिल से आवाज आती है|

    अब ना मिले तो अच्छा है,
    खुद से शिकायत करता हूं|
    चाहे जितना नफरत कर लो,
    सच दिल में तस्वीर तुम्हारी रखता हूं|

    तस्वीर तुम्हारी काफी है|
    बस मुस्कान तुम्हारी काफी है|
    अब मैं तुमको पाऊ चाह नहीं,
    दिल मे तस्वीर रहे काफी है|

    हो सच मुच तुम कितनी सुन्दर,
    जग को कल कौन बताये|
    जब जग को छोड़ोगी तुम,
    “ऋषि ” कि कविता ही तेरी महीमा गाये|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • डर था

    कविता- डर था
    ———————
    पागल था
    पागल हूँ
    पागल ही रहुंगा,
    यह तुम्हारी सोच है|

    तेरी नजरो मे ,
    सब कुछ था|
    बस इंसान नहीं
    जानवर था|

    इंसान बनने कि कोशिश में,
    तेरे मुख से गाली खाया|
    फिर भी मै हारा नही,
    आखिरी बार कोशिश करने आया|

    थक गया हू, पिट गया हूँ,
    खुद की नजरो मे गीर गया हू|
    प्यार मे आदत से लाचार हू,
    फिर भी तुम्हे पाने को-
    खुदा कि चौखट पर गया हू|

    इतना गीर गया अपनी नजरो मे,
    प्रभु से! नजर न मिला पाया|
    डर था कही डाट न खाऊ प्रभु से,
    शीश झुका के फरियाद सुनाया|

    प्यार का पहला पन्ना हसना है,
    दुजा कभी कभी रोना है|
    बोले पुजारी फिर मुझसे,
    प्यार मे सब कुछ होना है|

    प्यार किये हो यदि सच्चा,
    बिन मोल बिको है अच्छा|
    हर बार हार कर खुश कर दो,
    इससे नहीं है कुछ अच्छा|

    दर्द सहो पर ना सहने दो,
    रोओ तुम उसे ना रोने दो|
    मालुम है जब दर्द की छमता,
    कभी दर्द उसे ना होने दो|

    हरि चरणों से ना “ऋषि” रुठे,
    मिलेगी वह यह विश्वास न टुटे|
    विश्वास प्रेम की उर्जा है,
    बिन उर्जा के सब कुछ टुटे|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • चादर

    कविता- चादर
    ——————

    रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ|
    सर सर टप टप आंसू बहता ,
    रिम झिम सावन जस होता||
    मिल न सके फिर , फिर से कदम,
    छोड़ गयी ओ , है एक गम ||

    प्यार मिला न उससे हमको,
    आज भी हम क्यू रोते है|
    शाम शुबह क्यू चेहरा उसका,
    आखो मे क्यू सजते है||

    फिर क्या होती हालत मेरी,
    दर्द को सह सह रोते हैं|
    डाट मिला जब जब घर से,
    याद में उसके होते हैं|

    छिप छिप रोता चादर संग मै,
    रोता रहता यारो संग मै|
    देख के हालत बोले सब,
    रब क्या कर दू इसके संग मै|

    माग रहा हूँ तुमसे दुआएँ,
    हम सब किससे फरीयाद सुनाएं
    आज निभाए यार कि यारी,
    सुनले खुदा,हम फरियाद सुनाये|

    इतना गहरा दर्द को सहके,
    फिर भी भुला नहीं उसको|
    जब जब देखा अपनी हालत,
    दिआ श्राप नही देख के उसको|

    प्यार किया हू हर दर्द सहूगा
    तेरे खुशियों खातिर हर धाम चलुगा|
    नहीं चाहिए तेरे खुशियों का संदेशा,
    तेरे खुशियों के खातिर दुआये कर दूगा|

    कभी आई नही मेरे सपनो मे,
    यह बात अमल मे लाता हू|
    उसके लिए सब कुछ झुठा,
    हम बिन याद किये ना सोता हू |रुक रुक……
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • पहला प्यार

    कविता- पहला प्यार
    ————————–
    ना शीतल मे चांद अजोरी, ना खुशबू मे बेला है|
    प्यास लगी पानी की
    जहर मिल गया |
    मांगा जिसे दुआ में,
    वही मुझपे कहर होगा गया|

    दिल दुख रहा है,
    होठ रो रहा है|
    आखों मे आंसूए भी,
    आखों मे चुभ रहा है|

    मिल जाय मुझे चाहत नहीं,
    खो जाय मुझे चाहत नहीं|
    आकर मेरे दिल को समझा दे,
    मत रो मै तेरे किस्मत मे नही|

    देने का मैंने वादा कर लिया,
    इस जनम मे साथ निभाऊंगा|
    मेरी तकदीर हो मेरा पहला प्यार हो,
    गर्लफ्रेंड नही पत्नी तुम्हे बनाऊंगा|

    एक बात सुनना बाकि है,
    एक बात पुछना बाकि है|
    पुरुष प्रगति मे स्त्री का हाथ है,
    वह हाथ मेरे हाथ मे रख दो,
    अब जग को दिखाना बाकि है| ना शीतल……

    हर संसार छोड़ दूगां,
    मजहब कि हर दिवार तोड़ दूगां|
    तेरी खुशियो के खातिर,
    खुद को निल्लाम कर दूगां|

    प्यारा सा परिवार होगा,
    सुन्दर सा घर द्वार होगा|
    बस इजाजत मिल जाय अगर तुम्हारी,
    हर जन्मो मे हमारा साथ होगा|

    दो वक्त की रोटी होगी,
    शानों शौकत तुम्हारी होगी।
    मै राजा नहीं!
    रानी बनाके रखूंगा,
    मिले अगर साथ तुम्हारा,
    पलको के छाओं मे छिपा के रखूंगा|

    तेरे हर नखड़े को उठाउगा,
    हर बार तुझसे हार जाउगा|
    मत करो प्यार को स्वीकार,
    मै इनकार कभी न कर पाउगा|

    मेरे किस्मत मे एक मोड़ है,
    मेरे आखों मे तेरा ही प्यार है|
    मिलने दो आखो से आखों को,
    तेरे आखों मे मेरा संसार है| ना शीतल…….
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • पहचान

    कविता- पहचान
    ——————–
    सुन्दरता मे सुन्दर हो,
    खुदा की बनाई मूरत हो,
    खुद पे इतना निर्भर हो,
    जब जब कोई समझाये अपने बच्चों को,
    बस आप ही उनके लिए उदाहरण हो|

    बिन चोट सहे, पत्थर मूरत बन नहि सकती,
    बिन अग्नि मे तप ,सोना कगना बन नहीं सकती|
    व्यर्थ जवानी होगी तुम्हारी,
    यदि गैरो के लिए मिसाल नहीं बन सकती|

    सोचो कल संग क्या ले जाओगी,
    चिता पर कफ़न छोड़ कुछ ना पाओगी|
    सारी मेहनत मिट्टी मिट्टी होगी,
    यदि जग मे इतिहास नहीं लिख पाओगी|

    परिवार भी होगा,
    घर द्वार भी होगा,
    हो जग कि हर खुशी तुम्हारी,
    ऐसा कुछ करना होगा|

    खुद अपने आप से लड़ना होगा,
    सभल के पथ पर चलना होगा|
    बन जाओ राही एक अनोखी,
    जग के लिए ऐसा कुछ करना होगा|

    उम्र जवानी प्यार निशानी,
    छोड़ो ए सब दुनिया दारी|
    ऐसा पालो अपने जीवन को
    जहाँ सुख से सोये दुनिया सारी|

    कहे “ऋषि” बड़ आस लगाए,
    हो तुम भीम दिवानी यह बात
    सुहाए|
    रच दो जग मे इतिहास नया,
    जग की महिलाओं मे, आपकी पूजा हो जाऐ|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता, ग्राम -पोस्ट खजुरी खुर्द, खजुरी
    थाना- तह. कोरांव
    जिला-प्रयागराज, पिन कोड 212306

  • दुआ

    कविता- दुआ

    बदुआ या समझ,
    या दुआ तु समझ|
    जैसा कहके है छोड़ी मुझे,
    वैसा पाके समझ|

    जो दिया है मुझे,
    वही देता तुझे|
    खुशियाँ है ना मिली,
    ना मिलेगी तुझे|

    रोता रहता था मै,
    रात भर जब वहाँ|
    रोना तुझको पड़ेगा,
    हस्ती रहती जहाँ|

    है खुदा से दुआ,
    ना ऐ छोड़े इसे|
    आज मिट्टी तु कर ,
    है नाज चेहरे पे इसे|

    रात बीती मेरी,
    आसूओ के सहारे|
    तेरा जीवन भी बीते,
    शोक सहारे|

    समझ पाइ अगर,
    मेरी बात समझ|
    जैसी करनी तेरी,
    वैसी भरनी समझ|
    ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍

    कवि- ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता- खजुरी खुर्द ,थाना-तह., कोरांव ,जिला-प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
    पिन कोड 212306
    मो.. 9044960945

  • माखन

    कविता- माखन
    ————————

    नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला|

    मैं सह लूंगी बात तुम्हारी,
    आए शिकायत रोज तुम्हारी|
    सुन सुन के मै हार गयी हू,
    गगरी फोरा सब की सारी,

    घर का ही तो माखन चुराए,
    बाल सखा संग माखन खाए|
    खा ले बेटा दुख नहीं मुझको,
    दुख तो मुझको माखन गिराए|

    डांट में तेरे प्यार छिपा है,
    माखन से मीठा हाथ तेरा है|
    कानों को तूने जब-जब पकड़ा,
    माना हमने प्यार मिला है|

    देख जरा तू अपना साथी,
    छोड़ तुझे वे भाग चले हैं|
    कर ले मिताई मुझसे बेटा,
    दूध दही सब तेरे लिए है|

    बिगड़ गया है इनके संग|
    छोड़ दे बेटा इन सब का संग|
    जो करना है तो घर में कर ले,
    मत कर बेटा सब के संग|

    सब कोई तुझको न जान सकेंगे,
    ना बेटा तुझको पहचान सकेंगे|
    समझ ले बेटा मेरी ममता की कीमत,
    कोई तुझको डांटे हम सह न सकेंगे|

    प्रेम रतन धन अनमोल खजाना,
    आजा मेरे मदन गोपाला|
    जब जब आउ इस दुनिया में,
    हो मेरा बेटा तू नटखट लाला|नटखट लाला………

    कवि -ऋषि कुमार “प्रभाकर ”
    पता- ग्राम खजुरी खुर्द ,थाना-तह.कोरांव
    जिला- प्रयागराज, उ. प्र.
    पिन कोड 212360

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