Rishi Kumar's Posts

कन्या दान करोगे

आया है, नवरात्र का दिन, एक विनती, सबसे से करते हैं,| श्रध्दा और, विश्वास भी हो, प्रेम और, पूजा पाठ भी हो | मूर्ति विसर्जन करना भाई, प्रदूषण का ध्यान भी हो| ज्योति जलाओ, प्रेम दिखाओ, मां के भवन में आनंद मनाओ, नव दिन सब ध्यान धरो, कोविड नियम का पालन करो| संकल्प दिलाओ, सब ले लो भाई, माँ के नव दिन चरणों में, नारी सुरक्षा का संकल्प उठाओ, बैठे माँ के नव दिन चरणों में| दो वर्षीय बेटी, रेप में मर जाएँ, फि... »

डांट

कविता- डांट —————– ओ शब्द गूंज रहा, सामने होकर, सौ सवाल कर रहा| सुधर गए, समझ गए, संभल गए, या किसी की बातों में, फिसल गए, नारियल से सीख, गन्ने से सीख, क्रोध, ग्लानि घृणा महसूस हो, चला जा गाँवों में कुम्हार की थपकी से सीख ——————— ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

मेरा मित्र

कविता- मेरा मित्र ———————– मेरा मित्र- कमी बताया करता है, जब भी मिला हूं उससे, पढ़ कर मेरे चेहरे को, हकीकत बताया करता है| मेरी गलती – खुद न समझ सका, दे न सका धोखा ओ, जो था वही दिखा सका, उसे सच दिखाने की बिमारी है सख्त पहरेदार मेरा, गुनाह करने से डरता हूं, चेहरा कैसे दिखाऊंगा, सत्य हठी निष्पक्ष मित्र मेरा, डरता नहीं, सत्य ही दिखाएगा| साफ़ रहो, ब... »

हराम है

कविता -हराम है ——————- हराम है, आराम मेरा, आ आराम करले, जाॅन हैरान मेरा| ख्याल रखले, एक पल मेरी, तुझसे भिन्न न पहचान मेरी| तेरे ख्याल में, खुद ख्याल खो बैठा हूं, हे आत्मा- खुद पहचान बनाने में, तुमसे पहचान बनना, आज भूल बैठा हूं| ————————– ***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”—- »

बड़ी फ़िक्र थी

कविता- बड़ी फ़िक्र थी —————————— बड़ी फ़िक्र थी उसे मेरी, सौ बार समझाती थी, कालेज समय से आया करो, कमियाँ रोज बताया करती थी| नाखून बड़े हैं बाल बड़े, कालर इतना गंदा है, जगह देख क्यों नहीं बैठते हाथ तुम्हारा साफ नहीं है| शर्ट में कैसे धूल लगी, क्रोध में आकर चिल्लाती थी, बटन खुली हैं हीरो बनोगे, खुली बटन बंद करती थी| खूब खर्च करो पैसा, खुद क... »

गटर

कविता-गटर —————– प्यास थी सरिता की, पोखर भी, नसीब ना| सोचा था, अपना भी, विशाल सा, घर होगा| रंग बिरंगी, दुनिया में प्यारा सा कुनबा होगा| चढ़ गिरि से झाँक रहा, निर्झर दिख जाए| रुक रुक उतरा मैं दौड़ चला सीटी, देख गटर रोने लगा, शहर संग- गटर भी सुखा था| साथी सब तितर बितर हो बिछड़ गये थे, भटक भटक- दम तोड़ दिये थे| दम छूट गया, गटर किनारे, जहाँ का पता मिला, वहां पानी न ... »

कालेज का पहला दिन

कविता- कालेज का पहला दिन —————————————– कालेज का, पहला दिन, एक अनजाने से , पहचान हुई, पता नहीं था , उसके बारे में- फिर भी दिल के, पास हुई, दिल का धड़कना, बढ़ गया मेरे, जब उसकी नजरें, मेरे चेहरे पर हुई| झूठ हसी- हसता चेहरा बनाया, डरता था मन ही मन, कहीं कुछ बोल न दे, मै घायल हुआ- जब उसने, चेहरे पर मुस्कान दिखाया, मै ... »

कालेज का नियम

मुक्तक- कालेज का नियम ——————————— अनजाने से पथ पर, एक अनजाने से पहचान हुई, दो दुनिया के थे दोनों, मानों अंबर का मिलन धरती से हुई| देखा उसको पहली बार, भूल गया खुद होशो हवास, सारी खुशियां संग संग थी, पपीहा बन देख रहा- अब स्वाति बरसे तो बुझती प्यास| एक मिनट दो मिनट, बीत गये चालीस मिनट, टीचर आये चले गए, भुल गया कालेज का नियम| —... »

सबका समय

कविता- सबका समय —————————– सब का समय आता , सबको समझ न आता है, आया जिसको समझ अगर, खुद को समझा पाया है, छोड़ दिया वह, सब से लड़ना, खुद के लिए या- भारत मां के लिए लड़ता है| मान सम्मान, कुल का गौरव, पद प्रतिष्ठा, खुद का एक रिकॉर्ड बने, उन से लड़ना बंद किया, खुद कि नजरों में, खुद जिनकी न पहचान बने| दश बाई दश के, बन्द कमरे में, ले किताब वह हाथो... »

वर्ष पुरानी

कविता -वर्ष पुरानी ————————– आज अचानक, कुछ खोज रहा था, कई वर्ष पुरानी कॉपी मिलती है| मैं साफ किया उसे, फिर खोल उसे पढ़ने लगा, पढ़ते-पढ़ते, मै रोने लगा| उसमें पड़ा गुलाब संग एक खत था, सूख गया गुलाब पर, खत यादें ताजा कर डाला, कॉलेज की मेरी दोस्ती, खत ने सब कुछ कह डाला| उसमें कुछ ऐसी बात लिखी थी| परसों कॉलेज आओगे, मत लंच बॉक्स लाना, परसों जन्मदिन ... »

विरह वियोग

कविता- विरह वियोग —————————— अब हम किससे अपना दर्द कहे, कहां हम जाएं की- अपने दर्द की दवा मिले| जब भी चेहरा याद आता है, शृंगार रस के सपनों में डूब जाता हूं, जैसे ही चेहरा दुख देता है- विरह वियोग में हो जाता हूं| उसकी एक गलती- आंखों में आंसू भर देती है, मेरा सच्चा साथी, कलम कॉपी, हस के हमसे कहता है, उठा मुझे और भड़ास निकाल ले, या मन में उठ... »

कसम

कविता- कसम ——————- सौ बार कसम मैने खाई , फिर खुद ही उसको तोड़ा था, जब जब होती नादानी मुझसे, रब के आगे रोया था, दिल खोल के कहता- हर एक बातें, प्रभु गलती मेरी माफ करो, नादानी और जवानी मे, अज्ञानी और सयानी मे, भुल गया था सपत मै अपना, भुल किया खुद हाथो से| ना चोरी किया ना हत्या किया, ना जग मे कोई कुकर्म किया, मात पिता औरों के संग, खुद कि बहना या गैरो के संग, अपनों ज... »

पिता पुत्री का संवाद

कविता- पिता पुत्री का संवाद ————————————- तेरे खातिर दर-दर भटके, हर धर्मों का चौखट चुमू, आजा बेटी मां के सूनी आंचल में, मैं सीता मरियम नाम से बोलूं| तुमको पाने के खातिर मैं, कहां-कहां नहीं जाता हूं , चारों धाम कि यात्रा करके, तू आए सब से विनती करता हूं| मान सरोवर बालाजी के धाम गया, शिर्ड़ी चौखट अंबे मां के शरण गया, मैहर मां कि... »

सोना बाबू

हास्य कविता,सोना बाबू ————————- रात रात जग के हम पढ़ाई करते थे| मेरे पड़ोसी- फोन पकड़ के चुमा करते थे| आया समय जब पेपर का, वो रोया करते थे| सोना बाबू फेल हुए, बाबू लड़की से- कोचिंग करते थे| रात रात जागकर, वो उपदेश देते थे, चटनी खा के जीवन गुजरे, लाखों में वह बात करते थे| बड़े घरे के बिगड़े बच्चे, पैसा खूब उड़ाते हैं| खैनी गुटखा सिगरेट पीते- रोज सिनेम... »

सयानी

कविता- सयानी ———————– तेरी एक ज़िद से, सभी रो रहे हैं| पापा मम्मी चिंता करके, ओ भी रो रहे हैं| इण्टर के बाद दीदी, घर से ही बाहर हो SSC मे जाॅब बा, देके गई दिलासा हो| चाह मेरी हम भी पढ़ले, पैसा नाही घरे बा| कब तक नोकरी मिली दीदी, पुछे लोगवा सारा बा| बैंक वाला नोटिस भेजे, खेती क उधार बा | भारी वर्षा पाला से, खेती सब बेकार बा| धान विकि कम भाव से, सेठ से... »

कोरोना काल मे

मत अजमा मेरी मोहब्बत को तेरी एक झलक पाने को, सौ बार तेरी गलियों से गुजरा हू, जब सब छोड़ दिये शहर को- कोरोना का काल मे, तेरी कसम ! तुझसे मिलने के लिए सौ बार पुलिस का डंडा खाया हूं| अब भी तुझे यकीन नहीं, एक दिल दर्द बयां करता हूँ, जब सब जगह बन्द पड़ा था… आना जाना, जब राशन मेरा खत्म हुआ, कई रात मै बिस्किट खाकर- कई रात मै भुखे पेट ही सोया हू| बस यह आशा लेकर जीता था एक दिन समझ तुम जाओगी किसी मोड़... »

एक बात बोलू

कविता- एक बात बोलू —————————– एक बात बोलू.. क्या जरूरत थी, एक फोटो के खातिर- इतना सजने कि! जो अपनी सुन्दरता से चांद को भी कायल करदे, जग के सब अन्धो को भी अपनी जुबां से घायल कर दे| उसको चार दिवारी मे रखकर, कई घंटो का समय लगाकर, नख से लेकर शिखा तक, ले ली फोटो- हर विधि से उसे सजाकर| मेरा दिल कह रहा है, इन्हें दिल मे रखलू, इस मट्टी के मूरत को... »

किताब मेरी

कविता-किताब मेरी —————————- इतनी खूबसूरत तो नहीं है । जो तेरे लिये दिन रात तड़पता हूं । तू किताब मेरी,बसी तुझी में जान है तभी रात भर जग जग के पढ़ता हूं। जिसने किया बेवफाई तुझसे , उसकी जिंदगी संवर नहीं सकती| जिसने सहा नहीं तेरे राह का ठोकर, जमाने में उसकी कीमत हो नहीं सकती| थूक देंगे जमाने के लोग तुझ पर, अगर तुझे जमाने का ज्ञान नहीं | चूम लेगे ज... »

क्या गिरा पाओगे?

हमें क्या गिरा पाओगे, हमें क्या मिटा पाओगे, जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो, कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो, आज खुश है हमें छोड़ कर, यारों हम भी खुश हैं उसे छोड़कर|😊🙂 ✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍ ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

कुछ भी

कुछ भी उसमें खास नहीं था, फिर भी उसे दिल में बसाया था, कोई हमसे छीन ना ले.. हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था मेरी तकदीर है, मेरी जन्नत की लकीर है, खुदा आज भी उसका इंतजार है, यदि दुआएं मेरी तुझे कबूल है| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ ऋषि कुमार “प्रभाकर” »

शिद्दत

कविता- शिद्दत ——————- बड़ी शिद्दत से उसे चाहा था, खुदा से दुआओं में उसे मांगा था| पर समझ न सकी हमको यारो, वह भरी महफिल में हमें रुलाया था| उसके होठों की मुस्कुराहट ही , मेरे जीवन के पतवार बन गए| हम प्यार में थे पागल इतना, सबकी नजरों में बदनाम हो गए| हर खता छिपा ली उसकी मैंने, उसकी नजरों में शैतान बन गए| जो दोस्त थे कल वजीर मेरे आज वही उसके दिल मे, बादशाह बन गए |... »

तेरी खता

कविता – तेरी खता ————————- तेरी खता फिर से तुझे, बदनाम कर सकती| तेरे लफ्जों के कारण ही, तुझे शैतान कह सकती| कहां अगर तू ये सच्चाई, तुझे बदनाम करते हैं| करें सबसे शिकायत जो , तुझे ओ ,इंसान कहते हैं| करना ना भलाई तू , नहीं तू भी ये रोएगा| मिला शब्दों में गाली जो| कहीं तू भी ये पाएगा| तेरे रिश्ते की कीमत को, ओ अपने भाव में समझे| तुझे गद्दार कहके ओ... »

जर्जर

हमें प्यार की बीमारी हो गई, याद में उसके शरीर जर्जर हो गई| अब हमें चार कंधों की जरूरत नहीं, शमशान एक व्यक्ति ले जाए ऐसी मेरी शरीर हो गई| वर्ष पहले नींद छूट गई थी, कुछ समय बाद भोजन छूट गया| बस नजरें बची थी उसे देखने को, जब मैं मरा वह आशा टुट गया| तब जमाने के लोगों को पता चला, मरा क्यों जब मेरे जेब से खत मिला| वह आखिरी खत था उसका, खत संभालने या प्यार करने का सजा मिला| मत प्यार करो ऐसा खुद को मिटा दो... »

प्यार है या जख्म

कविता- प्यार है या जख्म ————————– क्या कसूर था मेरा, बस आके एक बार बता जा| खुश है- आ उन्नीस बरस का प्यार बता जा| करले तुलना प्यार से अपने, अब पूछो जरा मन सम्मान से अपने| पाके हसले निस दिन सपने, आ देख दशा, सपने डरते निस दिन अपने| हालात ने मोड़ा नहीं, हालात को तू ने मोड़ दिया मोड़ दिया | मिली खुशी तुम्हें ,सोच जरा, मां बाप को किस हाल में छोड़ दिय... »

कुछ नहीं

हमें आता जाता कुछ भी नहीं, सिर्फ शब्दों में खेल रहा हूं| परिणाम का हमें कुछ पता नहीं, मीठा खट्टा बोल रहा हूं| शब्द आन मान शान हैं, शब्द शब्द वेदी बाण है| शब्द राजाओं की तलवार यदि, भिखारियों की ढाल और पहचान है| शब्द सिंहासन दे सकता है, शब्द ही सब कुछ ले सकता है| बनो गवार ज्ञानी चाहे, शब्द ही जान ले दे सकता है| मां के शब्दों में संस्कार भरा है, पापा के शब्दों में प्यार भरा है| बढ़ा हुआ जब लाल वहीं, ... »

महबूब

जूम गूगल मीट पे क्लास चल रही है | नेटवर्क भी सही नहीं, फिर भी बात हो रही है| मोर मोरनी बिछड़ गए, राधा बन घर रो रही| है गरीबी की मार से, खुद फोन नहीं ले पा रही| स्वाभिमान नहीं वह छोड़ रही, प्रेमी से ना कुछ बोल रही| अब गूगल जुम पर देख देख कर, रो रो कर जीवन गुजार रही| करके सिंगार सभी वह आती है, प्रेमी को वह देख रही है| हाय गरीबी हाय कोरोना, खुद को वह धिक्कार रही है| मन को वश में करके, . करती खूब पढ़ा... »

सलाह

लाखों की डिग्री लेकर, खोज सके न वैक्सीन| कवि खोज दिए कलम से अपने, कोरेना का ऐतिहासिक सीन| नेता की नियत बताएं, डॉक्टर मिल करते खेल| लिवर किडनी गुर्दा ही बेचे, कोरोना में गजब ही खेल| »

झूठ

माँ ही है संतान मोह में, सबसे से लड़ जाती है| जिसकी माँ खुद जज वकिल बने, उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है| लाख गुनाह छिप जाते है, बस माँ के आ जाने पर| दंड के संग संस्कार सिखाती प्यार से घर लाने पर| »

कंघी

कविता- कंघी —————— कभी इसको रख गोदी मे रोटी देती थी, कभी इसको काजल कंघी तेल कराती थी, कभी इसको कंधो पर रख कर, मेले कि शैर कराती थी, थक! जाता था, लाल मेरा जब, रख सर पर गठरी गोदी मे लेके, कभी अपने मैके जाया करती थी| कभी इसको झूठ दिलाशा दे करके, खुद कामो मे लग जाती थी| बड़ा हुआ जब लाल मेरा, क्या क्या रंग दिखलाता है| कभी भुखे पेट मै सोती हु कभी कपड़ो के लिए रोती हु|... »

लायक

रोया हूं बहुत चादर में मुंह छुपा कर के, लायक हूं ना लायक नहीं, जो मरा नहीं किसी के प्यार में, गले में रस्सी का फंदा लगा करके| वह छोड़ दी तो कोई बड़ी बात नहीं, मेरे साथ मेरा परिवार है , इससे बड़ी कोई बात नहीं| प्यार करने के लिए बहन भाई मां बाप है- जिसे मैं समझूं ओ मुझे न समझे उससे बड़ा कोई मूर्ख नहीं| »

बेदर्द

बेदर्दो से मत आस लगाओ, कि तुम्हारे दर्द के मल्हन बनेंगे| पराए काम आ सकते हैं, वक्त पर अपने साथ छोड़ जाएंगे| »

जख्म

हर जख्म छिपा करके हंसने की कोशिश कर रहा हूं| काश समझ लिया होता उसे भी, जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं| »

बादशाह

कविता- बादशाह ——————— सजग प्रहरी बनने के लिए, फिर से कलम उठाया हूं… अब हमें रोक लो, लोकतंत्र के बादशाहो तुम! ना धरना पर बैठूंगा ना संपत में आग लगाऊंगा| बस कलम उठाया हूं- कलम की भाषा में तुम्हें तुम्हारी औकात बताऊंगा| सारी घोटाला करतूत तुम्हारी, देशभक्त हो- देशभक्त की यह पहचान तुम्हारी| ना रंग ना कपड़े से, ना डंडा ना भगवा से, ना मंदिर ना मस्जिद से, ना... »

पिता का सपना

हे प्रभु भक्त तेरा हूं, मत दे दुनिया की दौलत मुझको| दे जा मुझको अनमोल खजाना, ना इसके सिवा कुछ चाहत मुझको| कई पीढ़ियों से हाथ है सुना, दादा बाबा परदादा से | लाल दिए हो लाली दे दो, दुआ मेरी है जगत विधाता से| वह दिन सब कोई रोते थे, दुर्भाग्य साली समझते थे| शोक सभा हो घर में मानो , जब सुनी कलाई पाते थे| उमा रमा सुधा कहू, या सीता कह के बुलाऊंगा| बिक जाए ,चाहे घर का हर एक कोना, बेटे जस पढ़ाऊंगा| इतना सा... »

परख

तेरे प्यार का दर्पण हूं, मुझे पर रखना छोड़ दे| कब तक सताएगी तू मुझे, अब मुझे परखना छोड़ दे|(1) इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं| आ गले लगा जा फिर से मेरे, मत परख अब समय नहीं|(2) »

कलम

बादशाह बनने के लिए, कितने झूठ बोलोगे| जमाना आपका भक्त होगा, पर मेरी कलम की धार से रोओगे| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ मेरी कमी बताने का कष्ट करें »

बहन

कविता- बहन ——————- पता उसे तेरा बसेरा, डाल पे किससे होता है| यह भी पता था आना जाना, कब कब तेरा होता है| बोल सकी ना तेरे कारण, भैया तुझको कहती है| देख हंसी को वह भी हस्ती, तेरी जान कहीं तो बसती है| वह न कभी तुझे टोक रही थी, ना तुझसे कभी पूछ रही थी| देखा तुझको संग में उसके, कभी ना तुझको डांट रही थी| बात यहीं पर खत्म नहीं, राज यहीं पर खत्म नहीं| जान रही थी सब कुछ त... »

धरना प्रदर्शन

उठो फिर से मेरे यारो, यहाँ कुछ काम करना है| शहर है जाम यदि यारो, कही से राह देना है लड़ो सरकार से भाई, हमें इतराज ना तुमसे| पर परवाह करो मेरी भी,एक जुड़ी जान है मुझसे|| »

विद्या

कविता -विद्या ——————– प्रेम करो तुम विद्या से, जीवन कांटों में खिल जाएगा| जो विद्या को ना चाहे ओ पाछे पछताय| चढ़त जवानी गदहा बने, ढोय ढोय मर जाय| बालू कंकड़ मोरम ढोए, लादे सर पर पाथर| ईट ईट तो दिन भर ढोए, रात के सोए बाहर| पिठ लदा छऊवन माटी, तो सर सर सोटा खाय| बाल काल जो बीहड़ भागे, कल नारी शरण रह जाय| चिपों चिपों कह भूख के मारे, ना मिले सेव ,तू घास घास खाय... »

कविता

कविता- ज्योति पासवान ——————————– आज लूटी है उस की ज्योति ,कल तेरी ज्योति लूट जाएगी| आंख की ज्योति , घर की ज्योति! ज्योति चाहे जिसकी हो| भारत मां को कहने वाले, भारत माँ अब पुकार रही है| कब तक लूटोगे दामन मेरे मेरे, माँ दामन मे आसूं पोछ रही है| पाला हू रख दामन मे तुम्हे, दुनिया मुझसे पूछ रही है| भारत माँ क्या औलाद तेरे है, कुछ घर के ज... »

वजह

कविता- वजह ——————- तन मे तुम हो, मन मे तुम हो दिल में तुमको रखता हूं| चाहे जितना मुझे भुलाओ, निस दिन तुम पर मरता हूं| जीने की वजह मेरी हो मरने की वजह मेरी हो| अब खुश मै बहुत हुआ , कविता लिखने की वजह मेरी हो| प्यार मिले तो अच्छा है, हंसी मिले तो अच्छा है| यार मेरे सब गाली देते, क्या उसमे ऐसा रखा है| मैं भी हंसके कहता हूं, बिन याद किये ना सोता हूँ| रात गुजारा पर छ... »

डर था

कविता- डर था ——————— पागल था पागल हूँ पागल ही रहुंगा, यह तुम्हारी सोच है| तेरी नजरो मे , सब कुछ था| बस इंसान नहीं जानवर था| इंसान बनने कि कोशिश में, तेरे मुख से गाली खाया| फिर भी मै हारा नही, आखिरी बार कोशिश करने आया| थक गया हू, पिट गया हूँ, खुद की नजरो मे गीर गया हू| प्यार मे आदत से लाचार हू, फिर भी तुम्हे पाने को- खुदा कि चौखट पर गया हू| इतना गीर गया अपन... »

चादर

कविता- चादर —————— रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ| सर सर टप टप आंसू बहता , रिम झिम सावन जस होता|| मिल न सके फिर , फिर से कदम, छोड़ गयी ओ , है एक गम || प्यार मिला न उससे हमको, आज भी हम क्यू रोते है| शाम शुबह क्यू चेहरा उसका, आखो मे क्यू सजते है|| फिर क्या होती हालत मेरी, दर्द को सह सह रोते हैं| डाट मिला जब जब घर से, याद में उसके होते हैं| छिप छिप रोता च... »

पहला प्यार

कविता- पहला प्यार ————————– ना शीतल मे चांद अजोरी, ना खुशबू मे बेला है| प्यास लगी पानी की जहर मिल गया | मांगा जिसे दुआ में, वही मुझपे कहर होगा गया| दिल दुख रहा है, होठ रो रहा है| आखों मे आंसूए भी, आखों मे चुभ रहा है| मिल जाय मुझे चाहत नहीं, खो जाय मुझे चाहत नहीं| आकर मेरे दिल को समझा दे, मत रो मै तेरे किस्मत मे नही| देने का मैंने वादा कर लिया, ... »

पहचान

कविता- पहचान ——————– सुन्दरता मे सुन्दर हो, खुदा की बनाई मूरत हो, खुद पे इतना निर्भर हो, जब जब कोई समझाये अपने बच्चों को, बस आप ही उनके लिए उदाहरण हो| बिन चोट सहे, पत्थर मूरत बन नहि सकती, बिन अग्नि मे तप ,सोना कगना बन नहीं सकती| व्यर्थ जवानी होगी तुम्हारी, यदि गैरो के लिए मिसाल नहीं बन सकती| सोचो कल संग क्या ले जाओगी, चिता पर कफ़न छोड़ कुछ ना पाओगी| सारी म... »

दुआ

कविता- दुआ बदुआ या समझ, या दुआ तु समझ| जैसा कहके है छोड़ी मुझे, वैसा पाके समझ| जो दिया है मुझे, वही देता तुझे| खुशियाँ है ना मिली, ना मिलेगी तुझे| रोता रहता था मै, रात भर जब वहाँ| रोना तुझको पड़ेगा, हस्ती रहती जहाँ| है खुदा से दुआ, ना ऐ छोड़े इसे| आज मिट्टी तु कर , है नाज चेहरे पे इसे| रात बीती मेरी, आसूओ के सहारे| तेरा जीवन भी बीते, शोक सहारे| समझ पाइ अगर, मेरी बात समझ| जैसी करनी तेरी, वैसी भरनी ... »

माखन

कविता- माखन ———————— नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला| मैं सह लूंगी बात तुम्हारी, आए शिकायत रोज तुम्हारी| सुन सुन के मै हार गयी हू, गगरी फोरा सब की सारी, घर का ही तो माखन चुराए, बाल सखा संग माखन खाए| खा ले बेटा दुख नहीं मुझको, दुख तो मुझको माखन गिराए| डांट में तेरे प्यार छिपा है, माखन से मीठा हाथ तेरा है| कानों को तूने जब-जब पकड़ा, मा... »

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