1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]
1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]
आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य […]
माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर […]
गर्व हमें है इस भूमि पर,जिस पर हमने जन्म लिया कर्म है मेरा उसे संवारना,जिसने हमपर उपकार किया । मातृभूमि वह मेरी, जहाँ महावीर ने अवतरण लिया कर्मभूमि वह मेरी,बुद्ध ने जहाँ अहिंसा का वरण […]
कौन-सी मंजिल है अपनी किसे किधर जाना कहाँ है क्या है पहचान अपनी किस डगर से जाना यहाँ है । लौटकर भी आएँगे यहाँ पर या वही रम जाएँगे सोच लो रूक कर जरा क्या […]
शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ […]
जीवन दायनी ये नदियां पहुँचती हैं जब विकरालता के चरम पर लील लेतीं हैं उनकी ज़िन्दगियाँ जिन्दा रहते हैं जो इनके करम पर।। भूमि तो उर्वर कर जाती हैं पर कयी दंश भी दे जाती […]
बाढ़ —— करनी है कुछ जनों की,सजा कितनों ने पाई है नदियों का यह रौद्र रूप हमारे कर्मों की भरपाई है । प्रकृति के दोहन में रहे यूँ मदमस्त हम कितना भी पा ले लगता […]
मुझको मेरे होने का एहसास कराने आई तू। फिर से जीवन जीने का आस जगाने आई तू । तुझे देख खुद को देखती,तुझसे ही खुद को परखती देख तुझे मै और निरखती,तुझ संग मैं भी […]
तेरी सफलता के चमक के आगे सितारों की चमक फीकी हो ! तेरे कठिन मेहनत का फल नीले गगन से भी ऊँची हो! ऐसी हो तेरी जय गाथा तू आगे सफलता तेरे पीछे हो! मुकम्मल […]
आसमां में हैं जितने सितारे पङे उतने ही हैं तुझसे मेरे सपने जुड़े अपने जीवन को देना एक पहचान तू पूरे करना चुन चुन के अरमान तू। बेटियों से है माता की शक्ति बढ़ी अकेलेपन […]
शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साफ दिनों तक जो चली थी लङाई कितनों ने जान की बाजी लगाई थी 527 जवानो ने […]
दु:शासन दुर्योधन की जोङी कबतक गुल खिलाएगी एक दिन चौसर की गोटी खुद उनको नाच नचाएगी — दिन बदलते ही जिनकी फितरत बदले थोड़ी सी भी लाज नहीं,पलपल जिनकी हसरत बदले लाभहानि के सौदे पे […]
हम क्या हमारा व्यक्तित्व क्या। अनन्त ब्रह्माण्ड के प्रान्गन में , हम क्या हमारा अस्तित्व क्या । कब किसके गर्भ में, कैसे कौन पनप रहा कैसे कब कौन-सा किसका सुमन कहाँ किस उपवन में महक […]
प्रगति पथ पर दौङ लगाए चलो नव कृतिमान बनाए। पग- पग पर आने वाली बाधाओं से हंसकर अपनी पहचान बनाए।। चाहे जितनी डगर कठिन हो पर अपना विश्वास अडिग हो परिश्रम की मिठास की खबर […]
प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष ———*——*——– हर बालक को एक-सा, पालन पोषण,शिक्षा परिवेश मिले। समता,मानवता,बन्धुत्व,करूणा भरने वाला देश मिले। क्या बिगाड़ेगा उनका कोई जहाँ रहीम जौर्ज गणेश मिले। एक ऐसी धरा का नवनिर्माण करें जहाँ देश से […]
कुछ लोग हमारी संस्कृति को पिछड़ेपन का नाम देते हैं। हंस के पश्चिमी संस्कृति की उतरन थाम लेते हैं ।। घर हो या सङक शालीनता हो अपनी झलक नकल किसी और की क्यूँ करे, स्वसंस्कृति […]
सूनी- सूनी सङको पर सैनिक बनने का दम भरता है । सेना में भर्ती होने का हर जन में स्वप्न सलौना पलता है ।। तात हमारे कैसे माँ, अपने पैरों पर चलकर ना आए क्या […]
चलो आज खुद के लिए वक्त की तलाश करते हैं । हर जख्म को अलफाजो से ढक दुख दर्द को किसी दरिया में रख खुद को तराशने की खातिर खुद पर एक सरसरी नजर डालते […]
अनिश्चितता के सवालों में है मानव पङा कैसी होगी जिन्दगी, सुलसा भांति मुँह बाए खङा । कल की जिन्दगी का नहीं जन को पता खता क्या हुई हम से,मेरे रब जरा तुम तो बता जीवन […]
माँ मेरी ****** मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे विकल हुआ मेरा क्यूँ मन ,फिर आंचल लहरा दे मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे । छूट गये क्यू खेल- खिलौने, जिम्मेदारी से घिर गए सपने- […]
आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव […]
आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव […]
सफ़र ————- बंदिशो के आँगन में बुलन्दियो के आसमान तक यह सफ़र है, तेरी बेचैनी से,तेरी पहचान तक कहाँ थमी है,तेरी चुनौतियों की कंटीली डगर मंजिल तो पाना है ही,चाहे जितना लम्बा हो सफ़र सौन्दर्य,मातृत्व […]
जीवन की है कठोर डगर,बढने से पहले तू संवर लक्ष्य हासिल करना है अगर,खोल ले तीसरी नजर। मासूम तुम्हारा चित जितना ये दुनिया उतनी मासूम नहीं प्रश्न खङा होगा तुझ पे सरे शाम सुबह चारों […]
इतना चाहती हूँ इतना ना इतराया करो,बेरूखी में, ना दिन जाया करो यूँ दूर ना मुझसे रहो,बुलाने से पहले आ जाया करो क्यू खामोश हो या खुद में ही मदहोश हो चुप हो ऐसे तुम […]
आने से पहले ही गैर जीवन का पुरौधा बन गया जन्म से पहले ही जननी की कोख का सौदा हो गया अंश किसी का,गर्भ किसी का ,किसी और गर्भ में प्रत्यारोपित लोग कौन ,देश कौन […]
जागो हे भरतवंशी अलसाने की बेर नहीं । सहा सबकी साज़िशों को,करना है अब देर नहीं ।। शालीनता की जिनको कदर नहीं,विष के दाँत छिपाये है मौकापरस्त फितरत है जिनके,क्यू उनसे हम घबराये है फ़ौलाद […]
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