पाबंदियों की धज्जियां उङाते, सीधे-सीधे संक्रमण को आमंत्रण देने निकल पङे । गजब की परिस्थितिया, चारों तरफ मंडराते मौत के बीच खुद को चुनौती देने निकल पङे । संकटकालीन दौर में जीते, मन बेचैन जिगर […]

अपनी सुताओ को वह ज्ञान दे दे माँ की तरह उन्हें भी थोङा प्यार वो दे दे। दोष उनका क्या जो हदन में अकेले हैं दूर सुत उनका क्यूँ स्वप्नों से खेले हैं । बङी […]

एल एसी में शान्ति, विश्वास बहाली को हम प्रतिबद्ध हैं मातृभूमि की अखंडता, संप्रभुता की रक्षा को तत्पर हैं । हमारा भारत शान्ति का हिमायती, हिंसा से दूर रहता है बातचीत से ही मसले सुलझाने […]

मैं पीङ तेरी अपनाना चाहती हूँ तेरे आँसूओ की वज़ह जानना चाहती हूँ ।। तेरी साधना, तपस्या, त्याग के भाव को बस अपने में समाना चाहती हूँ ।। तेरी करूणा वात्सल्य ममत्व के गुणों को […]

किसी की रूसवायी की वज़ह क्यूँ बनें ऐ मेरी जिंदगी, चलो हम ही चले जाते हैं । औरों की परेशानी का सबब क्यूँ बने किसी की आँखों की चुभन क्यूँ बने तेरा चैन यूँ ही […]

ऐ जिन्दगी ! कभी तो तू मेरी होती जिधर को मैं कहती, उधर रूख़ करती ।। तू जिधर इशारा करती, मुङ जाते हैं उधर तेरे आगे अपनी मर्जी चलती है किधर काश! बस एक बार […]

आज का यह भारत प्रतिफल है उनके अथक प्रयासों का सावित्री बाई फूले जो थी शिक्षिका, उनकी शिक्षा नीतियों का भूलेगी कैसे भारत की बेटियां, ऋणी है जिनकी संकल्प शक्ति का जिनके जज़्बातो से, बल […]

लडकियों की पथप्रदर्शिका थी जो घर से निकल पाठशाला का रूख करवायी थी जो पति ज्योतिबा संग शिक्षा की अलख जगाने चली थीं जो तमाम बाधाओं पे पार पाते हुए, पहली पाठशाला बालिकाओं की खोली […]

बबीता मैम , बहुत सारे शिक्षकों का मुझे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ परन्तु आपनें मुझे जीवन जीना सिखाया आपने । मैं तो कुछ भी नहीं थी परन्तु आपने मेरी सुप्तावस्था की क्षमताओ को उजागर किया आपने […]

मंजुषा से नैतिकता की शिक्षा ** ** ** ** ** ** ** सिर्फ जननी-जनक कहलाने के नहीं अधिकारी हम विवेकशील, कर्तव्यपरायण कहाते मनुजधारी हम है मनुज पशु नहीं, क्यूँ दिखाये अब लाचारी हम बच्चों को […]

गमगीन है हिन्दुस्तान ———————- प्रणवदा थे राजनीति का एक जीता-जागता, सजीव संस्थान निधन,राजनीति ही नहीं, जनता के लिए भी बङा नुकसान । गुणी, पढ़े लिखे, सादगी की थे जो जीती-जागती प्रतिमान इस दौर में ढूँढे […]

क्यूँ बारम्बार किया जाता महिलाओं के साथ घृणित अपराध, कयी तरह की वेदना-संताप से गुजरती,जिनसे होता बलात्कार । हर कानून बौना सावित, हर जायज कोशिश जा रही बेकार, थमता दिखता नहीं, दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा […]

गंगा बहती है जहाँ *************** रीषिमुनियो की तपोभूमि बसती हैं वहाँ सबसे पावन भूमि है मेरी गंगा बहती है जहाँ ।। हरदिन से जुड़ी एक कथा, बयां होती है जहाँ हर कथा नैतिकता की पाठ […]

जन्म भूमि की ओर चलें ******************* इस बेगाने शहर में मरने से अच्छा अपनी जन्म भूमि की ओर चलें । भूख की जंग में मरने से अच्छा मिट्टी की सोनी खुश्बू के बीच रहें। एक […]

खुले में शौच से मुक्ति का दावा, बिलकुल निराधार घोषित करने से, कार्ययोजना लेती कहाँ आकार ।। स्वच्छ भारत अभियान का सच बताता ग्रामीण सङको के किनारे चलना मुश्किल होता ताजुब हमें तब होता, जब […]

मेरा गाँव ————– गाँव मेरा, हां वही गाँव है जहाँ सर्दी में धूप,गर्मी में शीतलता की छाँव है । अपनेपन का हर जङ चेतन से व्यवहार है हर गली हर टोले में छिपा अब भी […]

हर माँ शिशु के जीवन को संवारती खुद को खोकर, हर पहलू को निखारती । की कभी वह, स्वपहचान की भी अनदेखी कभी गहरी निद्रा पलकों पे इसकी नहीं देखी एक हल्की सी आहट, थोड़ी-सी […]

अलगाव, अवसाद से निकलने को , तैयार हो अपनी सोंच बदलने को । खुद को आकने, अंतर्मन में झांकने को , नये हुनर सीख तैयार, बेहतर करने को । भविष्य की अनिश्चितता हमेशा से कायम […]

स्वप्नों के बीज पर ही कर्म फल लगते हैं स्वप्न सीढ़ियों पर चढ लक्ष्य के फल चखते हैं । बगैर स्वप्न देखे कहाँ हम आगे बढ़ते हैं बगैर इसके कहाँ उपलब्धियाँ हासिल करते हैं । […]

कठिन पथ पे चलकर, फतह हासिल करने की तू प्रतीक बन जा ! स्वमेहनत से कुछ ऐसा कर, सभी के मन की तू मुरीद बन जा ! अनेक रंगों से सजे, संग- संग गुजारे खट्टे- […]

बस अब और नहीं, गये अब दिन तुम्हारे हैं हमने हंस हंस के, जो अपनाये अंगारे हैं ये अंधेरे में सने पूनम की जो रातें हैं दिये तुमने, पर यही अब संग हमारे हैं । […]

ना जाने बसता कहाँ * ———-*——–*——–* सङको पे चलता कहाँ वह संक्रमण से अनजान है भय व भूख को साथ लिए वो भी एक इन्सान है जानता है यह सफ़र शायद हो अंतिम सफ़र चल […]

एक ऐसा जहाँ, देवी नहीं बस इंसान समझा जाता हो देवी का दर्जा देके न छल, नारी से किया जाता हो। आसमां पे बिठा के अस्तित्व पर भी बन आया है बाहर तो क्या घर […]

हे प्राणदायनी नारी ************* हे प्राणदायनी नारी,तेरी करूण कहानी आँचल में है करूणा,पर आखों में पानी । हर युग में क्यू नारी ही सतायी जाती है विरह वेदना सहती,अग्नि में उतारी जाती है कदम -कदम […]

प्रथम मौलिक जन-जन के गुरु प्रबंधन के पुरोधा,नवाचार की शुरू आस्था के आकाश पर सूर्य से बिराजमान हैं धर्म के धरातल पर रचे कृतिमान हैं मातृभक्ति की वज़ह से पिता की भी की अवहेलना पिता […]

कुछ पाना हमारा मकसद न हो देने की लत खुद को लगाते चलें जीवन हमारा यह रहे न रहे दूसरों का जहाँ चलो बसाते चले । हमने देखा दुनिया की भीड़ में भी हम अकेले […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- खुशी खूबसूरती और खैर- ख़ैरियत के साथ चलो मनाते हैं देश की स्वतंत्रता की वर्षगांठ । आजादी सौगात नहीं,अमर शहीदों की विरासत है रक्त बून्द से सिंचित,करना हमें जिसकी हिफाज़त […]

35: *स्वविजय करो * ****************** स्वयं दीप बनों । स्वयं नियमन करो ।। सभ्य, ज्ञानी, जागरूक हो तुम । खुद,खुद का संचलन करो ।। परस्पर सुरक्षित दूरी का,ध्यान रखते हुए । खुद सतर्क रहो ,नियमों […]

राघव भक्तों के सदियों तक के बलिदान, संघर्ष और तपस्या का परिणाम अयोध्या की पावन भूमि का शिलान्यास और फिर भव्य मन्दिर का निर्माण । कितने भक्त मन में निर्माण की आस लिए कर गये […]

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार ! जनमाष्टमी आए सबके जीवन में हर बार ! मोर मुकुट तेरो सिर पे सोहे तू जन -जन के मन मोहे तेरो महिमा अपरमपार कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार! देवकीसुत […]

वो मुकाम पाऊँ! बस एक ही तमन्ना है जीतेजी ही नहीं मरके भी सबो के काम आऊं सारी खुबिया हो मुझमें पसंद बनू हर मन की वो मुकाम पाऊँ ! दिया तो बहुत कुछ है, […]

जीवन गढ़ने का अधिकार कहाँ *******************? इन्सान हैं कुछ भी मुश्किल नहीं चाह ले अगर क्या मुमकिन नहीं लव कुछ भी कहे चाहे जैसे भी रहे पर मन से वो हमेशा साथ रहे अपने हमेशा […]

41: महत्वाकांक्षा की क्षुधा ******************* अपनी जिद की बलि वेदी पर, नौनिहालो को कुर्वान मत होने दो । अपनी महत्वाकांक्षा की क्षुधा को , बस शान्त रहने दो ।। अधूरे स्वप्न अपने वंश के , […]

मेरा वजूद भी तेरा ———***——- मेरा वजूद भी कहाँ रहा मेरा इसपर चढ़ा हर रंग तुम्हारा है । छूटे माँ पापा, कहाँ मैका अब मेरा तेरा घर ही अपना बसेरा है ।। मैं ही नहीं,कहाँ […]

39: बहना की मुराद ************* बहना की मुराद हुई पूरी भाई का आना था जरूरी बरसों से चाह थी उस सावन की जिसकी पूर्णमासी को भाई की सूनी कलाई पे, होगी मंगल कामना की रेशम […]

46: अरमान ———***—– विभिन्न धर्मों की मिली-जुली गूंज सदियों से हमारी माटी के कण-कण में विद्यमान है । हमसब के मन-मन्दिर में बसते, जन-गण के नायक बस श्रीराम हैं ।। जहाँ मन्दिरों के घंटे,मस्जिदों की […]

मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा […]

रामलला ******* खत्म हुआ वनवास रामलला का शुरू हुआ निर्माण भव्य मन्दिर का पुत्र भाई तात नृप सखा का स्वरूप निभाते तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो राम कहाते मानवता प्रेम मित्रता सद्भाव का पाठ […]

मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है […]

अहिल्या पत्थर बनायी जाती है —————******—————— करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है । हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।। युग युगांतर से यही,बस होता आया है अहम तुष्टि हो नर […]

दुनिया में छाया कैसा मंजर है धरा सूनी सूनी लागे खोया-सा अंबर है कोविड 19 से हर तरफ मचा हहाकार है बस एक संजीवनी बूटी की फिर से दरकार है ।। कहाँ छिपे हो संकट […]

वृत्ति मान्गकर जीवन यापन करने वाले के अंतरंग द्वारिकाधीश थे निज हाथों से सुदामा के चरण पखारते सच्चे मित्र श्रीकृष्ण थे ।। मित्रता हो ऐसी जहाँ भेद न कोई रह जावै मित्र का दुख स्वदुख […]

विदेशी वस्तुओं का क्यू ना बहिष्कार करें आज से ही एक नया युग का सूत्रपात करें ।। विदेशी वस्तुओं का,सिलसिलेवार ढंग से, सरकार तहकीकात करे चिन्हित वैसी विदेशी वस्तुओं से जनता का साक्षात्कार करें फिर […]

3: इन्सानियत कहाँ जिनसे जीवन के गुल खिले, मरते ही शूल हो गये जिन्दगी जीने की चाह में क्यूँ, मशगूल हो गये ।। यह ऐसी महामारी है जिसने इन्सानियत में सेंध लगाई है अमानवीय बन […]

आज हम कहाँ और कहाँ है हमारी संवेदना भूल गयें अपनों को,कहाँ कैसी है वेदना ।। भूल बैठे उन भावनाओं को जब किसी मृत के शव पर लिपटकर रोया करते थे देते अंतिम विदाई, सुध […]

जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो […]