Category: मुक्तक

  • मानवता

    मानवता की पगडंडी को,
    कब तक लेकर चलोगे प्यारे।
    नारी के स्वरूप को अलग ना करो,
    कुछ निकम्मों के वजह से देश हारे।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मोटी मलाई

    हर नेता का काम यही है,
    जेब भरना इमान यही है।
    मोटी मलाई खाना फितरत है,
    नेता का काम जालसाजी यही है।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • प्रेम की खूशबू

    बगिया से मनमोहक फूल झड़ना,
    आशिको के टूटे दिल मिलना।
    बीच बाजार में दिल का मचलना,
    प्रेम की खूशबू से जहां को सुगंधित करना।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नेता जी

    नेता जी के चाल चलन को देख,
    जनता हुयी सर से पांव तक परेशान।
    काली करतूतों का देख नेता जी का,
    नीम हकीम खतरे में जान यहीं है पहचान।।

    ✍महेश‌ गुप्ता जौनपुरी

  • आकाश पाताल

    नियती और नियती से चलता यह संसार,
    आकाश पाताल भूमण्डल है एक विचार।
    जीव जन्तु जगत विज्ञान आधार बनें भगवान,
    दया धर्म अधिकार से बदलता ये संसार।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कोरोना

    कोरोना के प्रकोप में सब अंधेरे नगरी हो गया,
    टका शेर बाजी का भाव भी तेज हो गया।
    दिन के उजाले में अंधेर नगरी का हुजूम दिखा,
    बादशाह योध्दा और याजा में भी डर समां गया।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बादल

    जो बादल‌ गरजे सो बरसे नहीं,
    विष का प्याला पीकर तरसे नहीं।
    जीवन में बहुत कुछ आता जाता रहेगा,
    अनुभव को अपने ब्यर्थ समझे नहीं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • अंधेर नगरी

    अंधेर नगरी को उजाला करने आये हैं,
    दीप जलाकर अंधेरा मिटाने आये हैं।
    एक दीप जलाकर आओ मेरे साथ मित्र,
    अंधेर नगरी को स्वर्ग की नगरी बनाने आये हैं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दुःख दर्द

    गरज गरज कर आंखें दिखलाते,
    बरसने की बस तुम बातें करते।
    प्यार मोहब्बत से समस्या हल करके,
    अपने सारे दुःख दर्द पीड़ा को कहते।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • डर

    डर भय तो एक बहाना है,
    उछल कूद करना इनका मकसद।
    कोरोना का जंजाल है आया,
    बचकर रहना कोरोना के जिद से।।

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  • हौसला

    हौसला सुबह शाम बढ़ा रहे है,
    कोरोना को हम सब भगा रहे हैं।
    करके जागरूक लोगों को दोस्त,
    अपने पराये को जागरूकता सीखा रहे हैं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • शादी

    शादी विवाह गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं,
    सत्य झूठ का इस संसार में कोई मेल नहीं।
    जीवन साथी सोच समझ कर चुनना साथी,
    यह जीवन बहुत अनमोल है दुबारा मिलेगा नहीं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • आप भले जग भला

    आप भले तो जग भला का,
    आलाप रटते सुबह और शाम।
    बड़ी बड़ी करके बातें ज्ञानचंद,
    बैठ कर ठेके पर पीते जाम।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बहते पानी

    बहते पानी में हाथ मलने वाले बहुत हैं,
    सेखी बघार कर इठलाने वाले बहुत हैं।
    टांग बझाकर खिंचना फितरत है इनका,
    बच कर रहना संसार में दोमुंहे सांप बहुत हैं।।

    ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

  • घर जले

    इंसान में टसन की अग्नि बहुत है,
    बढ़ते कदम को रोकने की जहोजहत बहुत हैं।
    किसी का घर जले तो तापने वाले बहुत हैं,
    सुखी परिवार को देख कर जलने वाले बहुत हैं।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दुनिया भयी बाबरी

    कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं
    यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और हर संभव सावधानी रखनी चाहिये
    लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुये, बेपरवाह, बिना किसी काज के घूमते आपको हर जगह मिल जायेंगे, इसी स्थिति पर दो लाइन प्रस्तुत हैं –

    दुनिया भयी बाबरी, छोड़ समझ को संग
    बैठ के देखत रहो, अब तरह तरह के रंग

  • जिंदगी मेरा

    मत जलाओ अपनी जिंदगी ये दोस्त,
    प्यार मोहब्बत में पड़कर मेरे दोस्त।
    अपने हुनर को परख कुछ पेड़ रोप दो,
    छांव फल देकर शीतल तुम्हें करेगा दोस्त।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • कर्ण

    महादानी कर्ण ने दान किया कवच और‌ कुण्डल,
    बाधाओं से लड़कर हार कभी ना माने।
    सूर्य का उपासना करके अटल रहे वचन पर,
    दिव्य शक्ति देकर इन्द्र को महादानी कर्ण कहलाये।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • नौ कि लकड़ी

    नौ की लकड़ी नब्बे खर्च हुआ इस लाकडाउन में,
    कोरोना के प्रहार से फिसल गये महामारी में।
    पेट के लिए भाग दौड़ लगाते जान पर बाजी लगा,
    टेट को भरकर रखने वाले कंगाल हुए महामारी में।।

    ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

  • गिरेबां

    गिरेबां अपनी जब भी झांकता मैं।
    हर बार पाता, कहाँ तू और कहाँ मैं।
    आईना मैं भी देखता हूँ, वाकिफ़ हूँ,
    और भी बेहतर हैं ‘देव’ तुझसे जहाँ में।

    देवेश साखरे ‘देव’

  • # लाॅकडाऊन

    मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद।
    गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद।
    शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं,
    समय बिताने का अवसर मिला सुखद।

    देवेश साखरे ‘देव’

  • मतलबी दुनिया

    मेरी जलती चिता पर लोग रोटी सेंक लेते हैं
    सहारे की जरूरत पर मेरा ही टेक लेते हैं
    जमाने ने मुझे समझा किसी माचिस की तीली सा
    जला करके दिया अक़्सर जिसे सब फेंक देते है।
    शक्ति त्रिपाठी “देव”

  • भीगी भीगी रातों में

    भीगी भीगी रातों में जब याद तुम्हारी आती है
    सच कहता हूं यार मेरे ये आंखें जल बरसाती हैं
    कैसे कह दूं दोस्त मेरे की मुझको तुमसे प्यार नहीं
    प्यार असीमित है तुमसे ,इसमें कोई इनकार नहीं
    व्यथित हृदय कुंठित होकर बस , तेरा नाम बुलाता है
    सिवा तेरे इस नाजुक दिल को नहीं और कुछ भाता है।
    रात रात भर रोता हूं बस तेरी याद सताती है
    सच कहता हूं यार मेरे ये …………………….
    सोच था की फूल खिलेगा मेरे दिल की धरती पर
    किन्तु उगा है नागफनी अब मेरे दिल की परती पर
    अपने इस छोटे दिल में कुछ पीर छुपाए बैठा हूं
    इन आंखों को देख असीमित नीर छुपाए बैठा हूं
    कैसे तुझे बताऊं कि तू कितना मुझे रुलाती है
    रात रात भर रोता हूं बस तेरी याद सताती है
    सच कहता हूं यार मेरे ये………………………..
    Shakti Tripathi DEV

  • दिल खिलौना

    बारीकियों से पढ़ मेरे दिल की किताब को
    गलती से कोई पन्ना कहीं छूट ना जाए।
    मिट्टी का खिलौना तुम्हें लगता है दिल मेरा
    पर ऐसे खेलना कहीं ये टूट ना जाए।
    Shakti Tripathi “DEV”

  • पराया शहर

    कोई दवा देता है, कोई देता ज़हर
    किसपे करे एतमाद, नहीं खबर
    कौन अपना यहां, कौन पराया
    सारा जहां है अपना, पराया शहर

  • क्या दूं उस सरकारी अफ़सर को

    क्या दूं उस सरकारी अफ़सर को?
    जो मांग रहा है हजार का हर्जाना
    मेरी दो सो की दिहाड़ी से

  • किरादार

    अपने अपने किरदार निभाकर,
    मार भगाओ कोरोना को ।
    सांस लेंगे कोरोना को भगाकर,
    ये ठान लिया है अब हमने ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सफर मेरा

    चलते चलते सफर पर,
    हमसफर को ढूंढ लिया।
    तेरा साथ पाकर मैंने,
    जग को मैंने जीत लिया।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ललकार

    अभी अभी तो ललकारा है,
    युध्द अभी भी बाकी है ।
    सम्भल जा तू अत्याचारी,
    अभी तेरा अंत बाकी है।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • द्रोपदी

    भरी सभा में कुलेल ना करता,
    द्रोपदी को बीच सभा में तो ।
    युध्द का प्रचंड नौबत ना आता,
    दुर्योधन नारी को अगर देवी समझता।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सफर

    चलते चलते राहों में मिला मुझे हमसफर,
    सुख दुःख को बांटकर किया सांझा दर्द को।
    मिला मुझे अनोखा तोहफा हमसफर,
    भूल गये हम सारे मुसीबतों के मर्ज को।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • उडान

    मेरे उड़ान को पंख लगा दो,
    मेरे सपनों को उजागर कर दो।
    दिल से दिल का रिश्ता जोड़कर,
    मुझे अपना हमसफर बना दो ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मेरा राह

    मेरे राहों के हमसफर हो तुम,
    दोस्त कम हमसफर ज्यादा हो तुम।
    संग संग जो तुम मेरे रहते बनकर दीप,
    परछाई में साथ निभाते हमसफर हो तुम ।।

    ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी

  • रिश्ता

    रिश्ते का बागडोर संभाल,
    हमसफर को चुन लिया।
    तुम्हें देख हो गया कंगाल,
    अब लो मेरे हमसफ़र संभाल।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • मरते दम

    हाथ को पकड़ा है हमसफर का,
    तो साथ निभाऊंगा मरते दम तक हमसफर का।
    तुम साथ छोड़ने की बात ना करो हमसर,
    हम दिल से साथ निभाते हैं हमसफर का।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • हमसफर

    हमसफर तो मैंने लिया है चुन,
    साथ निभाते रहना मेरे साथी तुम।
    रिश्तों में कोई खटास पनपे तो सुन,
    हक से निपटारा करना मेरे हमसफर तुम।।

    ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सफर

    सफर में चलने के लिए हमसफर चाहिए,
    दिल से दिल का रिश्ता जोड़े दिलवर चाहिए,
    अपनों को अपनों से जो जोड़कर रखें,
    सुख दुःख में साथ निभाये ऐंसा दोस्त चाहिए।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • ठोकर मार

    फूल खिले हैं तब जब हमसफर मिलें,
    रिश्तें जुड़े हैं तब जब प्यार मिलें।
    ठोकर मार गिराने वाले हैं बहुत,
    दोस्त समझ साथ निभाने के लिए मिलें।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • युध्द

    युध्द को कब तक टाला जायें,
    भाले को कब तक संभाला जायें।
    रिश्तों को कब तक पाला जायें,
    युध्द लड़कर अब विराम लगाया जायें।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • पथिक

    पथिक ही सही हमसफर तो बनोगें,
    मेरे जीवन के दोस्त तो बनोगें।
    राह दिखाकर मेरे संग तो चलोगें,
    मुझे अपना समझ गले तो लगा लोगें।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • त्रिशुलधारी

    त्रिशुलधारी भोले भण्डारी काशी के अविनाशी,
    डम डम डमरू बाजे मदमस्त नाचे काशीवासी।
    गले में सर्प का माला धारण किये भोले भण्डारी,
    झूम झूम कर गा रहें है पृथ्वी लोक के वासी ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • फैशन

    कहां थे और कहां हम पहूंच गये,
    माडर्न के चक्कर में सब कुछ भूल गये।
    पीढ़ियों का अन्तर ना हम समझ सकें,
    फैशन के दौर में बहुत कुछ खो गये ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • झूठ

    झुठा मैं नहीं कुछ लोग हो गये है,
    अहम में सब आगे बढ़ गये है ।
    कौन अब किसे समझाये भला,
    सब अब समझदार हो गये है ।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • बदलता दौर

    बहुत कुछ बदल दिया बदलते दौर ने,
    रिश्तें की मिठास और अपनों का प्यार ने।
    पीढ़ी दर पीढ़ी चली एक नई सोच लेकर संग,
    आज की सोच को बदल दिया आपने।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • महाकाल

    सदैव हाथ रखते अपना भोले भण्डारी,
    करूणा निधान है मेरे भोले बाबा भण्डारी।
    काशी के है रखवाले भक्तो के है प्यारे,
    हर हर महादेव नाम गुंजे काशी में भोले भण्डारी।।

  • परिवर्तन

    परिवर्तन ही संसार का नियम है,
    समझो मेरे मित्र यार ।
    बूढ़ा बाप अब भी प्यारा है,
    बदल जाये भले ही दौर।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • दुःख

    सबके दुःख को पल में हरते,
    मेरे भोले बाबा भण्डारी।
    नीलकंठ मनोकामना पुरा करते,
    बड़े दयालु मेरे बाबा है भण्डारी।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • सत्य

    सत्य के राह चलते रहना,
    कभी ना होना दूर।
    मुसीबत को भांपते रहना,
    झूठ का दामन देना छोड़।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • तौर तरीके

    तौर तरीके दुनिया दारी,
    नारी है सब पर भारी।
    नारी से ही चलता संसार,
    नारी समर्पण है कल्याणकारी।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

  • काल

    ये काल की गति मेरा बचपन लौटा दें,
    गांव की पगडंडी खोया कल लौटा दें।
    बहुत याद आते है वे गुजरे हुए पल
    ये मेरी जिंदगी तुम मेरा अतीत लौटा दो।।

    ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी

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