बड़े बड़े भामाशाह और उद्योगपति का
संस्कार को मार दिया कोरोना ने मति
सोनू सूद नमन है आपके प्रेरणा को
मजदूर के हातालो को बखूबी समझा
महेश गुप्ता जौनपुरी
बड़े बड़े भामाशाह और उद्योगपति का
संस्कार को मार दिया कोरोना ने मति
सोनू सूद नमन है आपके प्रेरणा को
मजदूर के हातालो को बखूबी समझा
महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ आंदोलन को चलाना है,
वृक्षारोपण से धरा को हरा भरा बनाना है ।
मिलकर आओ सभी धरा के प्रकृति प्रेमियों,
वृक्ष कटने से हम सभी प्रहरी को बचाना है।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
नयन की भाषा सब कह जाते,
वाणी भले ही बात छिपाते ।
प्रेम उपज को कोई बांध ना पाये,
टूटते रिश्ते भी दर्द में प्यार पाते।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वियोग स्वीकार करके हार ना मानो,
प्यार में अपने आप को मार ना डालो।
हे प्रियतमा मेरे बातों को तुम समझो,
खुद को तड़पा कर अब जान ना लो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ज्ञानी को ज्ञानी बनने दो,
व्याधान वालों से सावधान रहों।
बहुत मिलेंगे ज्ञानी राहों में,
अपनी सुर में सबको बहने दो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नयन पर ही करते विश्वास सभी,
जीवन के सारे घटनाओं पर ।
लड़कर हमें अब जीतना होगा,
संसार के सारे समस्याओं पर।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मोह माया के चक्कर में पड़कर,
ना करो ज्ञान की धारा को चौपट ।
सिखों और सिखाओ समाज को,
ना करो अपने ज्ञान से तुम कपट।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना,
इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना।
मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार,
नहीं तो मुंह तोड ज़बाब देकर है सबक सिखाना।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा,
बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा।
जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे,
करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा,
बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा।
जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये बैठे,
करनी कथनी के चक्कर में जलता दिया बुझा रहा।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
राज की बात बताऊं मैं एक,
शेर के खाल में बैठा भेडीयां।
दो शक्ल लिए घुम रहा है,
बनकर देखो कोई बहुरूपिया।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नर नारी के वेष में आया कोई छलिया,
तन मन को करके वश में ठगा मुझे ठगिया।
अन्तर्मन के लिलाओ से बनाया भेष अद्भुत,
मग्न होकर अपने अधर्म के बल से नाचे भेड़िया।।
🙏महेश गुप्ता जौनपुरी
आंखों के सामने घुम रहे हैं भेड़िया,
सोच समझ के परख लो ऐंसे छलिया।
बकरें के संग बकरा बनकर कब तक खेलोगे खेल,
उठा कर डण्डा पीटकर छुड़ा दो अपना गलियां।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आस्तीन के फन को रौद कर रख दो,
गुलाब के पंखुड़ियों को मसल कर रख दो।
हर नकाब को अब तुम बेनकाब कर दो,
कातिल को सरेआम बीच बाजार में निलाम कर दो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ख्वाहिशों को थोडा सा हवा दो,
जिंदगी को लाड प्यार दुलार दो।
कुर्सियों के चक्कर में ना पड़ो,
सत्ता को हथिया थोड़ा सा हवा दो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
फकिर बन अलाप ना गाओ,
जीवन को अपने खुशहाल बनाओ।
चिंता फिक्र की गठरी बनाकर,
भटके हुए राह को फिर से अपनाओ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
फकिर बन अलाप ना गाओ,
जीवन को अपने खुशहाल बनाओ।
चिंता फिक्र की गठरी बनाकर,
भटके हुए राह को फिर से अपनाओ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कपटी छलिया को बेनकाब करने आया हूं,
आशा का एक नया दीप जलाने आया हूं।
तीर और फरसा को म्यान में ही रखकर,
बातों बातों से दुश्मन को अपना बनाने आया हूं।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कलयुगी संसार में फकिर बना लुटेरा,
ज्ञान की बातें करके झोले को अपने संभाला।
धन दौलत की चाह में दोस्त के गले को काटा,
बनाकर कर सतरंगी चेहरा खेल रचा है सारा।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ख्वाहिशों में ना जाने कितने मर गये,
ज़मीर को अपने बेंच नरक चले गये।
सत्ता को हथियाकर भी बेचैन रहें,
खुशीयों को पाने के लिए अपने आपको खो गये।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
छल कपट को मिटाना सबके बस की बात नहीं,
स्नेह का ज्योति जलाना सबके बस की बात नहीं।
नर नारी के शब्दों का राह भाव से मिट नहीं सकता,
गुनहगार के धब्बे को मिटाना सबके बस की बात नहीं।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
भाव तुम्हारे सुंदर है,
जग को प्यार सिखाओ।
सत्य अहिंसा का पालन कर,
जग में एक नया राह बनाओ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दीप जलाने की बात हो करते,
कुछ करके पहले तुम दिखलाओ।
स्नेह प्रेम लुटाकर दिल को जीतों,
फिर बड़ी बड़ी बात सिखाओ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अंधेरे से डरकर ना भागो,
उठो मोह को त्याग कर जागो।
धरा को रोशन करके प्यारे,
कटुता के झोंके से राह ना त्यागो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मुखिया घर का समझदार हो,
भले पास में कम पैसा हो ।
पालन पोषण करके परिवार का,
धीरज बंधाने वाला मुखिया हो।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
मन की बात मन में ना रखों,
कह दो मेरे मित्र तुम आज।
एक चिट्ठी लिखकर भेज दो,
लाज शर्म की गठरी बांध आज।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल की बात कागज पर ना लिख सकें,
दिल और मन की बात करत मोहे लागे लाज।
अपनी वेवसी किसको सुनाएं बता दो मेरे नाथ,
दिल मन की बात दबी रह गयी हुई बावरी आज।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी,
ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले।
मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी,
आस हमारे टूट रहें आंखों के बनकर आंसू सखी।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कृष्ण कन्हैया छलिया तेरे,
कितने हैं अद्भूत रुप।
किया बांवरा नर नारी को,
बता दो कितने हैं स्वरुप।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मोर मुकुट मुरली वाले,
महिमा तेरी बड़ी निराली।
बंशी के धुन पर प्यारे,
छा जाता चारों तरफ हरियाली।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे मोहन प्यारे नंदकिशोर की छवि निराली,
मेरे तन मन में बसती नंदकिशोर की प्रतिबिंब।
चित चोर मुरली धारी करें मेरे दिल पर सवारी,
अद्भुत सुरत श्याम सलोने गाथा गाते हम सब।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे गिरधर गोपाल मेरे हैं भगवान,
दुजा कोई नहीं है मेरा अभिमान ।
मेरे नंन्दकिशोर के माथे सोहे मोर मुकुट,
यशोदा दुलारे कृष्ण कन्हैया हैं मेरे शान।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कहीं धूप कहीं छाया
यही तो है प्रभु की माया
जिसे कोई समझ ना पाया
वो है संसार की मोह माया
अनावश्यक गाड़ी मत चलाओ
एसी का बटन ना दबाओ
ओजोन परत में और छेद ना करो
ओजोन परत के छिद्र को और ना बढ़ाओ
जल को ना बर्बाद करो
याद तुम राजस्थान करो
पीने का जल है पर्याप्त ही
ना व्यर्थ इसे बर्बाद करो
जो सच बोलता है
उसे परेशानियों का सामना
हमेशा करना पड़ता है
परंतु जब सच्चाई आती है
सबके सामने तो सबको
उसे नमन करना पड़ता है
एक तरफ मजदूर परेशान दूजी ओर किसान
फिर सब कहते हैं देखो मेरा देश महान
मजदूरों की समस्याओं को
सिर्फ एक ही व्यक्ति ने समझा है
सोनू सूद ने बन फरिश्ता उनको घर पहुंचाया है।
धरती का श्रृंगार है हरियाली
पेड़-पौधे लगाकर चारों तरफ फैलाओ खुशहाली
पेड़ पौधे लगाओ चारों तरफ फैलाओ हरियाली
इस तरह करो पर्यावरण की रखवाली
इंसा के भावनाओं में तर्क बहुत है,
प्रेम और बैर में फ़र्क बहुत है,
सेवा धर्म प्यार से उपजे प्रेम का संगीत,
कांटे चाटे स्वान से उपजता ईष्र्या में प्रेम है।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार,
गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार।
दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे,
झूठे विचार को सच्चा समझे प्रभु भक्ति खोवे।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सदैव बचकर रहना दो विचारों वाले प्राणी से,
मोह माया के संसार में छल ही जाते हैं ये।
अपने झूठे वादों में सबको रखना चाहते,
खुद के घिनौने इरादों से राज करना चाहें ये।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
स्वार्थ के चक्कर में पड़कर,
बल बुद्धि विद्या खो देता इंसान।
अपने द्धारा बनाये कटिलें जाल में
फंसकर कैद हो जाता इंसान।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेहनत करते जाओ
परिणाम अपने आप ही मिल जाएगा
जो बोया है वही तो मिलेगा
बिन मेहनत कोई क्या पायेगा?
बहरूपियों से क्या डरना
जब सर पर हाथ है मां का
उसके पैरों तले है आसमां
जिसके सिर पर हाथ है मां का
गिरगिट के रंग को समझ,
अपने आप को अलग रखना।
संसार के चतुर प्राणी का,
याद रखो साथ बहुत है खलता।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहरूपियों को पहचानने की आदत डालो,
अपने आप पास के शोहदों को कम मत आंकिए।
चेहरे से दिखते मियां मिट्ठू मन के काले रहते,
समय के बदलते चक्र में याद इतना रखिए।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
घात लगाये बैठे हैं स्वार्थ के सारे पुजारी,
बचकर रहना मेरे अनमोल मित्र तुम।
ये दुनिया में बहरूपिए के शक्ल में बहुत है,
जालसाज कुत्ते भेड़िए से बचकर रहना तुम।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
लोभ मोह माया में खोता है इंसान,
मदिरा के लत में जलाता है इंसान।
खुद के महानता में अंधा होता है इंसान,
संसार के कलह से मर जाता है इंसान।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
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