अज्ञानता का जीवन विष समान, गुरु मिले देते हैं अमृत का खान। गुरु के चरणों को छूकर करो रसपान, ज्ञान के भण्डार का तुम करो सदैव सम्मान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कान्हा के बंशी के तान पर, सुध बुध खोए वृन्दावन के नर नारी। मधुबन के बागियां में गाय चराते कान्हा, बंशी बजाकर मन मोहित करते दुनिया सारी।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

काल चक्र देवी देवताओं का उपहार है, महापुरुषों का जीवन सदैव स्वीकार करो। कर्म को अपने करते रहों मन को शांत रखो, दुश्मन को प्रणाम करो दोस्त से ज्यादा प्यार करो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कांटे को जो बोता है वहीं उसे है कांटता, फूलों की महक को पाने में कांटे में लिपटा रहता। मानव जीवन को अपने करके व्यर्थ, सपनों का राह वह सदैव खोजता है ।। ✍महेश गुप्ता […]

मन को अपने खुश रखना सिखों, जीवन को अपने जीना सिखों । विकट परिस्थितियां सुलझ जायेगी, दर्द में भी तुम मुस्कुराना सिखों।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

निन्दक को सौंप सम्राज अपना, दुश्मन से भी प्यार का चेष्ठा रखना। गले लगाकर निन्दक को प्यार लुटाओ, पानी पानी हो जायेगा छोड़ कर बदले की भावना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नफ़रत इंसान को इंसान नहीं बनने देता, जीवन के राह में नेक इंसान नहीं बनने देता। कर्मों के आधार पर बंट जाता है इंसान, प्रेम की बोली भाषा से मिलता है पहचान, ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

निंदक के चाल में पनपता है चतुराई, निंदक के भाषा को तू समझ लें भाई। भोला इंसान बनकर कब तक देगा धोखा, अभी से सम्भल जा इसी में है भलाई।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नफ़रत की फनस को आओ पैरों से रौंदे, खुशीयों की झलक को आओ मिलकर जी ले, मेरा देश मेरा वतन है प्यार सिखाता, नफ़रत को प्यार में बदल कर आओ जी ले।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

खुदकिस्मत हो निन्दक साथ दे गया, इतिहास गवाह है निन्दक बर्बाद कर गया। हौसलों को तोड़ना फितरत था उनका, निन्दक मेहरबान था आबाद कर गया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

निन्दक को भविष्य की चिंता नहीं होता, खुद को अच्छा बनाना फितरत नहीं होता। उनके खून में निंदा हैं समाहित होता, जिसके बदौलत वह खुद को महान समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कर्मभूमि पर न्योछावर करके, अपनों को जो गले लगाते है। निष्ठावान से जो धर्म सेवा करते, जग सदैव वीरों को गले लगाती है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सत्य राह पर चलो आहिस्ते आहिस्ते, झूठ फरेब को खदेड़ो दौड़ा दौड़ा कर। धर्म कर्म निती पर रखकर विश्वास, हे मानव दिखलाओ कुछ अलग कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ जीवन को खुशहाल बनाओ, धरा को सुसज्जित करके वायुमंडल को स्वच्छ बनाओ। वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ तन मन को प्रफुल्लित कर जाओ, सुखी धरती पर वृक्ष लगाकर बादल से वर्षा करवाओ।। […]

देवव्रत का भीष्मप्रतिज्ञा या धृतराष्ट्र का अंधापन। गंधारी के आँखों की पट्टी या कुन्ती का अबलापन।। किसको दोषी कहूँ मैं आखिर सब हैं कारण महाभारत के। सबके जिद ने नाश किया अगणित जन गण भारत […]

तप रही धरा को सुसज्जित फिर से करना है, वृक्षारोपण करके धरा को हरा भरा बनाना है। वृक्षारोपण का संकल्प इंसा को लेना होगा, वायुमंडल को बचाने के लिए वृक्ष लगाना होगा।। महेश गुप्ता जौनपुरी

सोचा था जो वो पुरा ना हो सका बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना सका टुटते बिखरते देखता रहा मैं कुछ कर ना सका […]