मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद आती है तो हौसले टूट जाते हैं
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद आती है तो हौसले टूट जाते हैं
गिनतियाँ करते हो मुझे याद कितनी बार करते हो हम तुम्हें कितनी दफ़ा ढूंढते हैं अपने आप में कभी ये भी गिन लिया करो ।
नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी।
रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए
बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]
चाँद छत पर से मेरे रोज़ यूं गुजरता है जैसे उसे मालूम हो कि उसी के जैसे मेरा यार दिखता है ।
तू मेरी आरज़ू था आरज़ू है और आरज़ू रहेगा । ये दिल कल भी तेरा था तेरा है और तेरा ही रहेगा ।
तमन्ना थी दिल में तुम्हें पाने की पर अफसोस तमन्ना ही रह गई ।
तुम्हारी शिकायत खुदा से करेंगे मेरी आँखों में तुम हमेशा आँसू बन के आये
कितनी दफा मैनें समझाया तुम्हें मुझें मत ठुकराओ मगर तुम ना समझे तुम ना बदले।
रास्ते में चलते हुए कुछ पीछे छोड़ देते हैं लोग । पैसे कमाने के लिए रिश्ते तोड़ देते लोग।
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं
खुशामदीद आपको बहुत व्यस्त हो आप थोड़ा वक्त हमें भी दे दीजिये इतना भी मशरूफ होना अच्छी बात नहीं साहिब
ज़िन्दगी की आरज़ू में मरते जा रहे हैं लोग पैसे के नाम पर क्या क्या गुनाह किये जा रहे हैं लोग
होलिका दहन में हम वैर भाव जाएंगे। कल निर्मल हृदय से होली हम मनाऐंगे।।
रोज मर्रा की जिंदगी में, बहुत कुछ सीखा हैं हमने, दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक, जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक, महेश गुप्ता जौनपुरी
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा सत् सत् है नमन तुम्हे पहला अक्षर निकला था जब वो था अर्पण मातृ तुझे तुम है जननी तु है वानी मेरी तुझसे ही है जीवन की कहानी सदा चले तुझसे […]
जिसे मैं देख गुनगुनाता हूं जिसे मैं देख मुस्कुराता हूं जिसके आगोश में मैं खो जाता हूं उसका हो कर मदहोश हो जाता हूं उसी का दीदार करके मैं खुद में ही खो जाता हूं […]
एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का […]
भस्म का श्रृंगार करके मृग छाल को धारण करके गले में सांपों का हार पहन के गंगा को जटा में बांध के तीनों लोक में हो देवों के देव हे नीलकंठ शंकर महादेव डमरु को […]
भाल लेकर तैनात रहो, भारत देश के जवानों तुम, जीभ खिंच कर काट लो, जो देश के खिलाफ बात करें। महेश गुप्ता जौनपुरी
ऐ स्त्री तू खुश मत हो! यह सम्मान का वक्त गुजर जाएगा कल से हर रोज तुझे परखा जाएगा……….
नारी तू अवतारी है देखने में तो एक है प्रतिक्षण रखती रूप अनेक है हर सांचे में ढल जाती है पल मे मां पत्नी बहन बेटी बन जाती है। तू त्याग की है मूर्ति समर्पण […]
तू मान है अभिमान है इस जग का पृतिमान बड़ी नेमतों से पृकृति ने संवारा है एक तुझे रच विधाता ने खुद को धरती पर उतारा है।
नवगीत आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा ? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा ? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने । जाति की […]
नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे […]
खुशबू चमन में बिखरी जा रही है धूप की लौ बढ़ती जा रही है । हवा ने खोल दीये हैं आसमान के पंख जमीं सा हम मिलते जा रहे हैं
महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]
पानी में भिगो कर गुलाब रखे हैं । लोगों के चेहरे पे नकाब लगे हैं । रूप की चांदनी फिरती है छतों पर खिड़कियों पर कितने लोग खड़े हैं
वक्त कटता जा रहा है दीये की लौ भी धीमी हो गई आंखों में नींद नहीं चैन नहीं हम क्या करें यही सोंचते रहे ओर सुबह हो गई
हम गरीब सही पर इज़्ज़त की खाते हैं तेरी तरह हम सरेआम मुजरा तो नहीं करते हैं ।
तू नही जानता है मेरे दिल पे क्या गुजरी है एक पथ्थर सीने पे लिये घूमती हूँ मैं
कमी कुछ भी नहीं थी मेरी आँखों में बस यार तेरे पीने-पिलाने का अंदाज़ बदल गया।
ऐतबार करने पर आते कर सकते थे मगर तुम्हें तो शौक था हमको रूसवा कर जाने का
अंज़ाम जो भी हो हम तो आगे बढ़ गए हैं तुम्हें जब से छोड़ दिया हमनें ।
कुछ नाखुश लगते हैं वो हमनें यूं ही कह दिया था एक दिन दोस्त बेवफ़ा होते हैं ।
एक दौर वो भी गुज़रा है मेरी बेखयाली का घण्टों रोते थे किसी को याद करके
मैने कहा…. मैने कहा कुछ भी नहीं उसने बहुत कुछ समझ लिया।
आंखें चार कर लो इस होली में अपने रंग में रंग लो प्रज्ञा को ना और तरसाओ होली में घर आना तो थोड़ा देर से आना बहुत सुन्दर ना लगना होली में है खास कुछ […]
कितने निर्मोही हो तुम एक बार भी नहीं सोंचते मेरे बारे में ना याद करते हो ना मिलने ही आते हो अब देखना ये हौ है तुम मुझ बिन होली कैसे मनाते हो।
थक के चूर हो चुकी हूँ तुम्हें याद करके अब और याद नहीं करना। अब बसा ले तू गैरों को घर में तेरे दिल में अब मेहमान नहीं बनना।
इतनी भी रंजिश ना मान मेरे यार कभी तो मै भी तेरे दिल की मेहमान हुआ करती थी याद कर…
तुम इस इन्तज़ार में बैठे हो हम याद करेंगे तो बता दें साहिब अब ना वो प्यार रहा ना कशिश रही ना तेरी वो दिवानी ही रही।
अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया।
अब तो दौर-ए -नफ़रत भी गुजर गया साहब मोहब्बत का जमाना तो हमे याद भी नहीं………..
ऐसे ना मुझे तुम देखो तेरी ही दिवानी हूँ हर रात सजाती मै अपनी आंखों में पानी हूँ
कभी कभी तो वक्त मिलता है हमें अपने ज़ज्बात बयां करने का बाकी फुर्सत कहां होती है हमें उनकी यादों से।
क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से।
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