बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]

ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा सत् सत् है नमन तुम्हे पहला अक्षर निकला था जब वो था अर्पण मातृ तुझे तुम है जननी तु है वानी मेरी तुझसे ही है जीवन की कहानी सदा चले तुझसे […]

जिसे मैं देख गुनगुनाता हूं जिसे मैं देख मुस्कुराता हूं जिसके आगोश में मैं खो जाता हूं उसका हो कर मदहोश हो जाता हूं उसी का दीदार करके मैं खुद में ही खो जाता हूं […]

एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का […]

भस्म का श्रृंगार करके मृग छाल को धारण करके गले में सांपों का हार पहन के गंगा को जटा में बांध के तीनों लोक में हो देवों के देव हे नीलकंठ शंकर महादेव डमरु को […]

नारी तू अवतारी है देखने में तो एक है प्रतिक्षण रखती रूप अनेक है हर सांचे में ढल जाती है पल मे मां पत्नी बहन बेटी बन जाती है। तू त्याग की है मूर्ति समर्पण […]

तू मान है अभिमान है इस जग का पृतिमान बड़ी नेमतों से पृकृति ने संवारा है एक तुझे रच विधाता ने खुद को धरती पर उतारा है।

नवगीत आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा ? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा ? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने । जाति की […]

नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे […]

खुशबू चमन में बिखरी जा रही है धूप की लौ बढ़ती जा रही है । हवा ने खोल दीये हैं आसमान के पंख जमीं सा हम मिलते जा रहे हैं

महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]

आंखें चार कर लो इस होली में अपने रंग में रंग लो प्रज्ञा को ना और तरसाओ होली में घर आना तो थोड़ा देर से आना बहुत सुन्दर ना लगना होली में है खास कुछ […]

कितने निर्मोही हो तुम एक बार भी नहीं सोंचते मेरे बारे में ना याद करते हो ना मिलने ही आते हो अब देखना ये हौ है तुम मुझ बिन होली कैसे मनाते हो।

थक के चूर हो चुकी हूँ तुम्हें याद करके अब और याद नहीं करना। अब बसा ले तू गैरों को घर में तेरे दिल में अब मेहमान नहीं बनना।

तुम इस इन्तज़ार में बैठे हो हम याद करेंगे तो बता दें साहिब अब ना वो प्यार रहा ना कशिश रही ना तेरी वो दिवानी ही रही।