होली के रंग में रंग लो ए रंगरेज़ मीठे- मीठे बोल से मन हर लो ए रंगरेज़ ।
होली के रंग में रंग लो ए रंगरेज़ मीठे- मीठे बोल से मन हर लो ए रंगरेज़ ।
जो लेके आओगे तू बाल्टी मैं भी रखूँगा सरोवर तैयार। रंगों से नहाएंगे साथ साथ यार।।
रंगों की बाल्टी और गुलालों की झोली। लेके आऐंगे तेरे घर ,मनाने हम होली।।
तिलक पसन्द होली है अपनी आकर तिलक लगा देना। प्रेम पर्व होली है इसको प्यार से सब मना लेना।।
बाल हत्या का ले के विचार ‘ हो गई अग्नि में होलिका सवार। उड़ गई वरदान की चादर अजर रहा बालक प्रह्लाद जल गई होलिका हो तार तार।।
नफरत भरे मन की होलिका न जलाई। तो तुमने क्या खाक होली मनाई।।
जल गई होलिका धू धू करके कैसे आज चौक में। ऐसे हीं जलते हैं दुष्ट भक्त जलाने के शौक में।।
बेरंग सी गोली को रंगीन बनाना है रूठे हुए अपनों को दोबारा मनाना है डेविड अकरम और गुरमीत लेकर सबको साथ सुजीत होगी पिचकारी से बौछार आज मनाएंगे त्योहार। गुजिया पापड़ और मठरी से स्वाद […]
मुद्दतों बाद वह घर आए हैं दिल तोड़ने के बाद पहली बार शहर आए हैं…….
एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए….
रंग मोहब्बत का ही चढा मुझ पर जो लगाया था किसी रोज़ तुमने अपने हाँथों से ना उतरा है कभी ना उतरेगा
कल मेरे घर रंग लगाने आओगे? फिर हमसे नज़रे चुराने आओगे? मागा था जो तोहफ़ा मैने तुमसे पहले वो ही प्यार तुम कल लौटाने आओगे?
किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।
बारीकियाँ होती हैं बहुत हाल-ए-दिल समझना इतना आसान नहीं कुछ इशारों में समझ जाते हैं किसी को जमाने लग जाते हैं
हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम देखते ही रह गए कुछ बात हो गई
आसमान की चादर में लिपटे अनगिनत सितारे हैं कौमुदी की आँच पर कई अरमाँ सुलग रहे हैं
गुमनाम ना होने देंगे पहचान को अपनी अब छोड़ दिया शौक तुझसे दिल लगाने का ।
उनकी यादों का पीछा करते-करते हम उन तक तो पहुंच जाएंगे पर ये तो बता ए खुदा! उनके दिल तक कैसे जाएंगे।
लगे हैं वह हमसे नजरें चुराने शायद उन्हें अपनी भूल का एहसास है चलो अच्छा है पता तो चला किसी चीज का तो एहसास है मोहब्बत का ना सही, भूल का ही सही।
दिल की बातें बोलती हैं चिट्ठियां राज कितने खोलती हैं चिट्टियां भावों को जीवंत बनाती हैं, आंखों को भिगोती हैं चिट्ठियां
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद आती है तो हौसले टूट जाते हैं
गिनतियाँ करते हो मुझे याद कितनी बार करते हो हम तुम्हें कितनी दफ़ा ढूंढते हैं अपने आप में कभी ये भी गिन लिया करो ।
नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी।
रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए
बीती रात मैं तेरी यादों के आगोश में जाने लगी विरह की वेदना से मन को तड़पाने लगी आँसुओ से भीगा लतपत तन मेरा ओर मन मेरा सेज की सिलवट और नर्मी रूह को जलाने […]
चाँद छत पर से मेरे रोज़ यूं गुजरता है जैसे उसे मालूम हो कि उसी के जैसे मेरा यार दिखता है ।
तू मेरी आरज़ू था आरज़ू है और आरज़ू रहेगा । ये दिल कल भी तेरा था तेरा है और तेरा ही रहेगा ।
तमन्ना थी दिल में तुम्हें पाने की पर अफसोस तमन्ना ही रह गई ।
तुम्हारी शिकायत खुदा से करेंगे मेरी आँखों में तुम हमेशा आँसू बन के आये
कितनी दफा मैनें समझाया तुम्हें मुझें मत ठुकराओ मगर तुम ना समझे तुम ना बदले।
रास्ते में चलते हुए कुछ पीछे छोड़ देते हैं लोग । पैसे कमाने के लिए रिश्ते तोड़ देते लोग।
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
तुम कल मेरे घर आना जानम होली है थोड़ा घूंघट करके आना जानम होली है
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं
खुशामदीद आपको बहुत व्यस्त हो आप थोड़ा वक्त हमें भी दे दीजिये इतना भी मशरूफ होना अच्छी बात नहीं साहिब
ज़िन्दगी की आरज़ू में मरते जा रहे हैं लोग पैसे के नाम पर क्या क्या गुनाह किये जा रहे हैं लोग
होलिका दहन में हम वैर भाव जाएंगे। कल निर्मल हृदय से होली हम मनाऐंगे।।
रोज मर्रा की जिंदगी में, बहुत कुछ सीखा हैं हमने, दुनिया में ना जाने कितने हैं रंक, जीवन पर लगा यह कैसा अभिशप्त का कलंक, महेश गुप्ता जौनपुरी
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा सत् सत् है नमन तुम्हे पहला अक्षर निकला था जब वो था अर्पण मातृ तुझे तुम है जननी तु है वानी मेरी तुझसे ही है जीवन की कहानी सदा चले तुझसे […]
जिसे मैं देख गुनगुनाता हूं जिसे मैं देख मुस्कुराता हूं जिसके आगोश में मैं खो जाता हूं उसका हो कर मदहोश हो जाता हूं उसी का दीदार करके मैं खुद में ही खो जाता हूं […]
एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास तुम्हारे 💞दिल💞 के धड़कन का एहसास 🤝विश्वास🤝 के शब्दों का […]
भस्म का श्रृंगार करके मृग छाल को धारण करके गले में सांपों का हार पहन के गंगा को जटा में बांध के तीनों लोक में हो देवों के देव हे नीलकंठ शंकर महादेव डमरु को […]
भाल लेकर तैनात रहो, भारत देश के जवानों तुम, जीभ खिंच कर काट लो, जो देश के खिलाफ बात करें। महेश गुप्ता जौनपुरी
ऐ स्त्री तू खुश मत हो! यह सम्मान का वक्त गुजर जाएगा कल से हर रोज तुझे परखा जाएगा……….
नारी तू अवतारी है देखने में तो एक है प्रतिक्षण रखती रूप अनेक है हर सांचे में ढल जाती है पल मे मां पत्नी बहन बेटी बन जाती है। तू त्याग की है मूर्ति समर्पण […]
तू मान है अभिमान है इस जग का पृतिमान बड़ी नेमतों से पृकृति ने संवारा है एक तुझे रच विधाता ने खुद को धरती पर उतारा है।
नवगीत आजकल है खुब चलन में झूठ का ये क्रेज़ कैसा ? रंग सच का हो अगर तो रंग से परहेज़ कैसा ? धर्म की पिचकारियों में द्वेष का भर रंग ताने । जाति की […]
नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे […]
खुशबू चमन में बिखरी जा रही है धूप की लौ बढ़ती जा रही है । हवा ने खोल दीये हैं आसमान के पंख जमीं सा हम मिलते जा रहे हैं
महिला दिवस के अवसर पर कुछ शब्दों की अभिव्यक्ति करती हूँ महिला ही है सारी दुनिया आज मै सबसे कहती हूँ । महिला का सारा जीवन समर्पण में ही बीतता है और प्यार की उम्मीद […]
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