चल साथी हाथ बढ़ाएं ,मिलकर सबको पार लगाएं क्या हुआ जो कोई छोटा क्या हुआ जो कोई रूठा हम अपना कर्तव्य निभाएं मिलकर सबको पार लगाएं। कर्म पथ पर चलने वाले मन में बैर न […]

राह भूल सी गई है हमको जो छोड़ आओ, तो बात बने मंज़िल की सरहद पर दीया जो छोड़ आओ, तो बात बने मेरी तेरी या उसकी बातें जो छोड़ आओ, तो बात बने ढाई […]

कहीं पिचकारी का धार कहीं रंगे गुलाल। कहीं फूलों की होली कहीं हुरदंगे धमाल।। कहीं होली लठमार फिर भी प्यार का त्योहार। प्यार हीं प्यार ।। होली में यार।।

आहट पाकर फागुन की, पेड़ों ने ओढ़नी बासंती ओढ़ी धमाल फाग संग चंग बजाने, निकली मस्तानों की टोली हल्की फुल्की ठंड के साथ, मौसम करे आंख मिचौली धूम मचाओ, रंग उड़ाओ, क्यों कि आ गया […]

हिन्दी गजल- निभाते चले गए | हम अपनी वफा निभाते चले गए | वो मुझसे दूरिया बढ़ाते चले गए | शामिल था उनकी खुशी ओ गम | मेरे वक्त वो मुंह चिढ़ाते चले गए | […]

हिन्दी गीत- देख लेना | कीमत मेरी मोहब्बत तुम समझ न पाओगे | याद मे मेरी तड़पते रह जाओगे देख लेना | जिंदगी मुझसा दोस्त शामिल न कर पाओगे| तन्हाइयों ढूंढते रह जाओगे मुझे देख […]

हिन्दी गीत- तेरे रूप का सिंगार करूँ | तेरे रूप का सिंगार करूँ | तुझपे दिल निसार करूँ | आंखो मे काजल लगा दूँ | पांवो मे पायल पहना दूँ | तेरी बांहों दिल बहार […]

बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। […]

रंगों का त्योहार मनोहर होली आई होली आई। प्रेम प्रसून के गुलदता ले होली आई होली आई ।। दया का पानी प्रेम के रंग को दिल दरिया में घोलो रे। मधुर मनोरम मस्त मिठाई भर […]

मन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन? तुझे काया मिली इतनी माया मिली, तेरी राहों में बिखरा है मधुवन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन। इतना सुन्दर- सा घर […]

गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल […]

दिलों का खेल मत खेलो न कोई इसमें जीता है। सभी बदनाम होते हैं, दर्द-ए-जाम पीते हैं मुनासिब अब यही होगा कोई दिल को लगाए ना, दिलों की दिल्लगी करके खुद को यूं सताए ना।

आज की होली का रंग बस लाल है यह खून है या गुलाल है दिल वालों का शहर आज वीरान है लोगों के पागलपन देखों रोटी कीमती और सस्ती अभी जान है मौत पर आज […]

बेहिसाब दर्द देकर मेरी रूह को वो मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने आया है उससे पूछो मरहम ही है नमक छिड़कने तो नही आया है।

सड़के फैली, नदियां सिमटी क्या अच्छा संदेश गया घट गई सर्दी ,बढ़ गई गर्मी और भंवर में देश गया अपने कर्तव्यों से हटकर अपना हित ही सोंचा है चंद पैसों के खातिर भविष्य देश का […]

1. पहली ही सीढ़ी पर एहसास हुआ, सर पर खुला आसमां हो भले ही अब – पैर तले ज़मीन नहीं 2. चाहे-अनचाहे उग आए हैं संबंधों में अपरिचय के विंध्याचल ; हम भी जो पा […]

उम्मीदों की मंज़िल है समझौतों का रास्ता है नाराज़ हो रहे अपने हैं कुछ बुने कुछ टूटे सपने हैं अंधेरे का वास्ता है, उजाले का रास्ता है फिर भी, हालात बदल जायेंगे जज़्बात संभल जायेंगे […]

आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को […]

फिर आज गुलालों के खातिर बदरंग बनेगे होली में । अंग अंग पर रंग सजा हुड़दंग करेगे होली में ।। न जानेगे कितने रंग नये चेहरों पर खिल जायेगे । न जाने कितने टूटेंगे कितने […]