पानी में भिगो कर गुलाब रखे हैं । लोगों के चेहरे पे नकाब लगे हैं । रूप की चांदनी फिरती है छतों पर खिड़कियों पर कितने लोग खड़े हैं
पानी में भिगो कर गुलाब रखे हैं । लोगों के चेहरे पे नकाब लगे हैं । रूप की चांदनी फिरती है छतों पर खिड़कियों पर कितने लोग खड़े हैं
वक्त कटता जा रहा है दीये की लौ भी धीमी हो गई आंखों में नींद नहीं चैन नहीं हम क्या करें यही सोंचते रहे ओर सुबह हो गई
हम गरीब सही पर इज़्ज़त की खाते हैं तेरी तरह हम सरेआम मुजरा तो नहीं करते हैं ।
तू नही जानता है मेरे दिल पे क्या गुजरी है एक पथ्थर सीने पे लिये घूमती हूँ मैं
कमी कुछ भी नहीं थी मेरी आँखों में बस यार तेरे पीने-पिलाने का अंदाज़ बदल गया।
ऐतबार करने पर आते कर सकते थे मगर तुम्हें तो शौक था हमको रूसवा कर जाने का
अंज़ाम जो भी हो हम तो आगे बढ़ गए हैं तुम्हें जब से छोड़ दिया हमनें ।
कुछ नाखुश लगते हैं वो हमनें यूं ही कह दिया था एक दिन दोस्त बेवफ़ा होते हैं ।
एक दौर वो भी गुज़रा है मेरी बेखयाली का घण्टों रोते थे किसी को याद करके
मैने कहा…. मैने कहा कुछ भी नहीं उसने बहुत कुछ समझ लिया।
आंखें चार कर लो इस होली में अपने रंग में रंग लो प्रज्ञा को ना और तरसाओ होली में घर आना तो थोड़ा देर से आना बहुत सुन्दर ना लगना होली में है खास कुछ […]
कितने निर्मोही हो तुम एक बार भी नहीं सोंचते मेरे बारे में ना याद करते हो ना मिलने ही आते हो अब देखना ये हौ है तुम मुझ बिन होली कैसे मनाते हो।
थक के चूर हो चुकी हूँ तुम्हें याद करके अब और याद नहीं करना। अब बसा ले तू गैरों को घर में तेरे दिल में अब मेहमान नहीं बनना।
इतनी भी रंजिश ना मान मेरे यार कभी तो मै भी तेरे दिल की मेहमान हुआ करती थी याद कर…
तुम इस इन्तज़ार में बैठे हो हम याद करेंगे तो बता दें साहिब अब ना वो प्यार रहा ना कशिश रही ना तेरी वो दिवानी ही रही।
अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया।
अब तो दौर-ए -नफ़रत भी गुजर गया साहब मोहब्बत का जमाना तो हमे याद भी नहीं………..
ऐसे ना मुझे तुम देखो तेरी ही दिवानी हूँ हर रात सजाती मै अपनी आंखों में पानी हूँ
कभी कभी तो वक्त मिलता है हमें अपने ज़ज्बात बयां करने का बाकी फुर्सत कहां होती है हमें उनकी यादों से।
क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से।
चलो तुम जीत जाओ हमें हराकर यही खुशी है तुम्हारी तो हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें ।
बड़ी शिद्ददत से लगे है वो हमे हराने मे हमे भी अब अंजाम का इंतजार है……….
रात गुजर जाती है तुम्हारे खयालातों में तुम रोज़ ही कह देते हो मिलने आऊंगा … किस गली से होकर आओगे ये भी तो बताते नहीं हो!
सुन्दर हैं तेरी आँखों के फसाने….. रोज़ कुछ सुनाते हैं आंखें बंद हो जाती हैं मगर हम देखते ही रह जाते हैं…….
श्याम मेरे तेरा साँवला रंग मेरे मन को मोह गया तू दिल में मेरे बसा रहा और आंखों का काजल बहता रहा ….
चल साथी हाथ बढ़ाएं ,मिलकर सबको पार लगाएं क्या हुआ जो कोई छोटा क्या हुआ जो कोई रूठा हम अपना कर्तव्य निभाएं मिलकर सबको पार लगाएं। कर्म पथ पर चलने वाले मन में बैर न […]
राह भूल सी गई है हमको जो छोड़ आओ, तो बात बने मंज़िल की सरहद पर दीया जो छोड़ आओ, तो बात बने मेरी तेरी या उसकी बातें जो छोड़ आओ, तो बात बने ढाई […]
धानी चूनर ओड़ कर ब्रज में होली खेलूँगी मैं तो अपने श्याम संग राधा बनकर डोलूँगी
गहराई का आलम न पूछो दोस्त ! सहारा तिनके को है या तिनके का सहारा किसी को न मालूम………
सदाकत की नुमाइश लगाना जरूरी है क्या मेरी वफ़ा पर यकीन करना इतना भी मुश्किल नहीं
नजर को भी नजर लग जाएगी उसकी नुमाइश इतना भी ना करो…….
क्या हुआ हम बेईमानों की बस्ती में है हमने अपना ईमान कहां भेजा है अभी तक।
गुमनाम सा हो गया है मेरा आशियां इन दिनों क्यूँ कि मैं तो बैठी थी तेरा घर बनाने में
रफ्ता-रफ्ता चलते जा रहे हैं मंज़िल की ओर….. खुशी तो बहुत है फकत इतना गम है हम भी तेरे जैसे होते जा रहे हैं…
गज़ब इम्तहान है मेरी बेसब्री का…. लोग उतना ही सुनाते हैं जितना हम सुनते जाते हैं….
मुझे कोरा ही रहने दो इस होली में…… क्यूँ की कुछ लोग रंग से नहीं लहू से होली खेलने में लगे हुए हैं. …… 🇮🇳जय हिंद जय भारत 🇮🇳
पत्थर मत हटाओ मेरे रास्ते से अब तो पत्थरों पर चलने की आदत हो गई है
सिर्फ़ बात की ही बात है किसी की आंखें भी किसी के दिल का राज़ है
हम सबकी खुशियों में शामिल होते हैं मगर मेरी अच्छाई का ये आलम है मेरे जनाज़े में भी शामिल होने से कतराते हैं लोग…..
कहीं पिचकारी का धार कहीं रंगे गुलाल। कहीं फूलों की होली कहीं हुरदंगे धमाल।। कहीं होली लठमार फिर भी प्यार का त्योहार। प्यार हीं प्यार ।। होली में यार।।
राम कह लो या कह लो तू श्याम। जब तक मन शांत नहीं तेरा सुन वावरे ना हीं सुख ना हीं शांति ना हीं मिलेगा आराम।।
आहट पाकर फागुन की, पेड़ों ने ओढ़नी बासंती ओढ़ी धमाल फाग संग चंग बजाने, निकली मस्तानों की टोली हल्की फुल्की ठंड के साथ, मौसम करे आंख मिचौली धूम मचाओ, रंग उड़ाओ, क्यों कि आ गया […]
अपनी गलतियों का किस्सा ना हर बार दोहराएंगे, कह दिया अलविदा तुम्हें अब शायद ही लौट कर आएंगे ।
एक जरूरी बात याद कीजिये नहीं है इलाज़ किसी हक़ीम के पास… इश्क़ ला-इलाज़ है, बस एहतियात कीजिये ।।
हिन्दी गजल- निभाते चले गए | हम अपनी वफा निभाते चले गए | वो मुझसे दूरिया बढ़ाते चले गए | शामिल था उनकी खुशी ओ गम | मेरे वक्त वो मुंह चिढ़ाते चले गए | […]
हिन्दी गीत- देख लेना | कीमत मेरी मोहब्बत तुम समझ न पाओगे | याद मे मेरी तड़पते रह जाओगे देख लेना | जिंदगी मुझसा दोस्त शामिल न कर पाओगे| तन्हाइयों ढूंढते रह जाओगे मुझे देख […]
हिन्दी गीत- तेरे रूप का सिंगार करूँ | तेरे रूप का सिंगार करूँ | तुझपे दिल निसार करूँ | आंखो मे काजल लगा दूँ | पांवो मे पायल पहना दूँ | तेरी बांहों दिल बहार […]
बजे ढोलक,बजे नगमे मचे हुड़दंग होली में रंगी धरती, रंगा अंबर उड़े है रंग होली में । कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मारे पिचकारी पड़ी है पान की छीटें चढ़े हैं भंग होली में। […]
रंगों का त्योहार मनोहर होली आई होली आई। प्रेम प्रसून के गुलदता ले होली आई होली आई ।। दया का पानी प्रेम के रंग को दिल दरिया में घोलो रे। मधुर मनोरम मस्त मिठाई भर […]
मन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन? तुझे काया मिली इतनी माया मिली, तेरी राहों में बिखरा है मधुवन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन। इतना सुन्दर- सा घर […]
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