मीलों सफ़र करने के बाद तुझ तक पहुँचे फिर भी मीलों के फासले हैं
मीलों सफ़र करने के बाद तुझ तक पहुँचे फिर भी मीलों के फासले हैं
कुछ तुम सुनाओ कुछ मैं सुनाऊँ कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ चुरा कर कुछ पल तन्हाईयों से खेलें आँख-मिचौनी कुछ तुम गुनगुनाओ कुछ मैं गुनगुनाऊँ गूँज उठेगी शहनाईयाँ मन के झर्झर खंडहरों में फिर […]
आहिस्ता-आहिस्ता रखना कदम इन नाजुक पगडंडियों में वक्त सो रहा है रात के सन्नाटे में चांदनी रात के आँचल तले खोया है कांच के सपनों की दुनिया में तुम्हारे क़दमों की इक आहट से कहीं […]
कभी बनकर कोई ख़्वाब मेरी निंदिया तू चुरा लेता कभी बनकर हवा का झोंका आँचल को तू खींच लेता बता तो सही तू है कौन कभी बारिश की बूँद बनकर कोमल बदन को भिगो देता […]
हिमालय के उतुंग शिखर से सिंह ने भरी ऊँची दहाड़ है तूफान क्या टकराएगा उससे जो स्वयं फौलादी पहाड़ है सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा सौगंध इस […]
तुम्हारा मासूम सा चेहरा दिल तो धड़का सकता है मगर दिल चुरा नहीं सकता
फिर मन करता है तुमसे बात करने का मगर करेगें नहीं तुम्हें छोड़ने का फैसला ना बदलेंगे
उनके देखने का अंदाज़ कातिलाना है जब देखते हैं तो एक बिजली सी दौड़ जाती है
राज़ी हो गए वो और हमने रंग लगा दिया क्या हुआ अगर आज दूसरा दिन था…
तुझे महसूस करने की कोशिश की मगर महसूस कुछ भी ना हुआ ना जाने क्यूँ तेरे जाने के बाद आँख भर आई
करूँ कितना भी श्रिंगार मगर जानती हूँ मैं तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ
करूँ कितना भी श्रिंगार मगर जानती हूँ मैं तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ
बार- बार रोंकती हूँ मैं खुद को मगर उनकी सादगी पर मर ही जाती हूँ
दर्मियां उनको हमने पा करके ना हमने पाया और ना खो पाये
वो आये और हमें मुस्कुरा के देखते रहे हम नाराज़ थे आँख उठा के भी नहीं देखा उनको
तेरी अदा ने हमको दीवाना कर दिया मुझे मेरी ही दुनिया से बेगाना कर दिया आज सोचते हैं कि काश ना मिले होते तुझसे काश कि ना फना होते तुझपे।
ढो रही हूं एक बोझ सिर से लेकर पांव तक खोज रही हूं एक दिशा धूप से मैं छांव तक मीलों सा लंबा सफर जिंदगी का है मेरी फिर भी रुकी है वहीं जहां शुरू […]
मेहनत में जुटे हैं जी जान से हम तो परीक्षा की घड़ी में कहीं और मन ना भटके तर्जनी के छूने से ढहने का डर है तप की तपन बिना है कच्चे मटके
मेरे रंग धरे के धरे ही रह गए वो आये और मेरी बेचैनी बढ़ा के चल दिए
तुम जाते हो तो वापस भी आ जाते हो हम जिस दिन चले गए दिल में क्या ख्वाब में भी ना आएंगे
वो जितनी मोहब्बत से हमें देखते हैं काश ! उतना प्यार भी करते तो कैसा होता!
हम इतने भी सस्ते नहीं कि चंद पैसों में बिक जायें मेरे पापा कहते हैं:- मैं लाखों में एक हूँ
चंद दिन बचे हैं हम दूर चले जायेंगे कहे दे रहे हैं फिर लौट कर ना आएंगे
आज तो तुम्हें भी मेरी याद आई होगी जब तुमने मेरा इंतजार किया होगा और मैंने तुम्हें याद ही नहीं किया कमी महसूस हुई होगी जब तुम्हें मेरी जरूरत थी और हम बहुत दूर खड़े […]
वो मेरे जनाज़े के इंतजाम में लगे हैं उन्हें बता दे कोई कि अभी भी हम मरे नहीं बाकी है हममें सब्र आज भी।
वैसे माफ भी कर देते तुम्हें मगर तुमने इतने सितम किए कि अब माफ करने की गुंजाइश ना रही
रूबरू तुम हुए मगर अफसोस इतना है कि मेरे हो कर भी तुम मेरे ना हुए
गुजारिश की उसने पर मैने ना सुनी शिकायत की उसने मगर मैंने ना सुनी यही सोच कर….. कि उसने भी मेरी कहां सुनी थी जब हमें उसकी जरूरत थी….
इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले ही रह गए
तमाम इन्तज़ार के बाद वो आये थे उनकी नजरों ने बहुत शिकायतें की मेरी आँखों से
ऊर्जा पुंज ————- तुम ऊर्जा पुंज …..और तुम से बहता अविरल तेज! बन जाता है मेरे लिए प्रेरणा .. सृजन की। मेरे हृदय में बहने लगती है धारा….. जो जा मिलती है तुमसे….. और उपजने […]
आहुति ————— तुम्हारे साथ रागात्मक संबंध…. और वीणा के तार सा झंकृत मेरा हृदय….. तुम्हारा मेरा अद्भुत अनुराग …. और अंखियों की लुकाछिपी….. सुकून देती है। एक तारतम्य हमारे बीच….. और प्रेम की पंखुड़ियों से […]
इतना भी आसान नहीं होता पुरुष होना। जिम्मेदारियों का बोझ उठाकर हरदम मुस्कुराना होता है। एक पुरुष को सशक्त होना पड़ता है अपने परिवार के लिए। वह समस्याओं बाधाओं की शिकायत नहीं करता बल्कि खुद […]
मौन संवाद ईश्वर से ———————– हे ईश्वर! मूर्त रूप में विद्यमान प्रेम हो तुम। अस्पृश्य शब्द है ही नहीं शब्द कोष में तुम्हारे ! बेहद आलोकिक अनुभूति है तुम्हारे संसर्ग में, इस रंग बदलते आसमान […]
होली खेले रघुवीर बरसाने में ______________________ होली खेले मोसे रघुवीर बरसाने में, जाऊँ मैं जाऊँ कित ओर बरसाने में। रंग, अबीर हवा में उड़ायो, रंग मल मल के मुझे सतायो, हाथ पकड़ दिया मोड़ बरसाने […]
पलाश के फूल ——————- लाल बिछौना बनी बनस्थली जब अग्निदेव उतर आए। अपना अदभुत रूप दिखाने, पलाश के वृक्ष में आ समाए। झड़े जहां शीतल अंगारे, बाल चंद्रमा से छाए। धरती को सिंदूर दिया, बसंत […]
इस मंत्रमुग्ध सी बेला को आओ हसीं बनाते हैं जात धर्म को तज करके हम तिरंगा धारी बन जाते हैं मन में जब कोई मैल न होगा कौन हमें लड़ायेगा विश्व गुरु बन कर भारत […]
खामोशी से निकले ही नहीं क्यों निराशशून्य है मन क्या लाई थी जो खोकर के यूं उदासीन है तन पलकों में जो सपने हैं वह शायद पूरे हो भी जाएं जब आज ही नहीं मेरा […]
बैर भाव से ऊपर उठकर आओ रंग लगाते हैं, होली है त्यौहार मिलन का मिलकर इसे मनाते हैं।
बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।।
हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए
खत्म इन्तज़ार हो गया वो आ तो गए बुरा हो हया का हम सामने ही ना पड़े
जुनून हद में रहे तो अच्छा है बस मुहब्बत हद से बाहर होनी चाहिए
भीग जाओगे तो और रंगीन हो जाओगे वैसे भी हो हसीं कम नहीं।
आज कर देंगे तुम्हें इस तरह रंगीन ताऊम्र याद रखोगे मेरे रंग को
सबके रंग में रंग कर आऑगे तो हमारा रंग कैसे चढ़ेगा?
इन्तज़ार की हद खत्म होने को है किस राह में बैठे हो सब्र खोने को है
अँखियों का रंग अँखियों में जो डाल दिया। फिर क्योंकर हाथ गुलाल लिया
आशा रख वावरी ! वो आऐंगे। तेरे तन मन को रंग जाऐंगे।।
गुलाबी आँखों से यूँ मत देखो इश्क की फुहार से भीगने मत दो मुझे बहुत सर्दी लगी है आज।
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