वो जितनी मोहब्बत से हमें देखते हैं काश ! उतना प्यार भी करते तो कैसा होता!
वो जितनी मोहब्बत से हमें देखते हैं काश ! उतना प्यार भी करते तो कैसा होता!
हम इतने भी सस्ते नहीं कि चंद पैसों में बिक जायें मेरे पापा कहते हैं:- मैं लाखों में एक हूँ
चंद दिन बचे हैं हम दूर चले जायेंगे कहे दे रहे हैं फिर लौट कर ना आएंगे
आज तो तुम्हें भी मेरी याद आई होगी जब तुमने मेरा इंतजार किया होगा और मैंने तुम्हें याद ही नहीं किया कमी महसूस हुई होगी जब तुम्हें मेरी जरूरत थी और हम बहुत दूर खड़े […]
वो मेरे जनाज़े के इंतजाम में लगे हैं उन्हें बता दे कोई कि अभी भी हम मरे नहीं बाकी है हममें सब्र आज भी।
वैसे माफ भी कर देते तुम्हें मगर तुमने इतने सितम किए कि अब माफ करने की गुंजाइश ना रही
रूबरू तुम हुए मगर अफसोस इतना है कि मेरे हो कर भी तुम मेरे ना हुए
गुजारिश की उसने पर मैने ना सुनी शिकायत की उसने मगर मैंने ना सुनी यही सोच कर….. कि उसने भी मेरी कहां सुनी थी जब हमें उसकी जरूरत थी….
इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले ही रह गए
तमाम इन्तज़ार के बाद वो आये थे उनकी नजरों ने बहुत शिकायतें की मेरी आँखों से
ऊर्जा पुंज ————- तुम ऊर्जा पुंज …..और तुम से बहता अविरल तेज! बन जाता है मेरे लिए प्रेरणा .. सृजन की। मेरे हृदय में बहने लगती है धारा….. जो जा मिलती है तुमसे….. और उपजने […]
आहुति ————— तुम्हारे साथ रागात्मक संबंध…. और वीणा के तार सा झंकृत मेरा हृदय….. तुम्हारा मेरा अद्भुत अनुराग …. और अंखियों की लुकाछिपी….. सुकून देती है। एक तारतम्य हमारे बीच….. और प्रेम की पंखुड़ियों से […]
इतना भी आसान नहीं होता पुरुष होना। जिम्मेदारियों का बोझ उठाकर हरदम मुस्कुराना होता है। एक पुरुष को सशक्त होना पड़ता है अपने परिवार के लिए। वह समस्याओं बाधाओं की शिकायत नहीं करता बल्कि खुद […]
मौन संवाद ईश्वर से ———————– हे ईश्वर! मूर्त रूप में विद्यमान प्रेम हो तुम। अस्पृश्य शब्द है ही नहीं शब्द कोष में तुम्हारे ! बेहद आलोकिक अनुभूति है तुम्हारे संसर्ग में, इस रंग बदलते आसमान […]
होली खेले रघुवीर बरसाने में ______________________ होली खेले मोसे रघुवीर बरसाने में, जाऊँ मैं जाऊँ कित ओर बरसाने में। रंग, अबीर हवा में उड़ायो, रंग मल मल के मुझे सतायो, हाथ पकड़ दिया मोड़ बरसाने […]
पलाश के फूल ——————- लाल बिछौना बनी बनस्थली जब अग्निदेव उतर आए। अपना अदभुत रूप दिखाने, पलाश के वृक्ष में आ समाए। झड़े जहां शीतल अंगारे, बाल चंद्रमा से छाए। धरती को सिंदूर दिया, बसंत […]
इस मंत्रमुग्ध सी बेला को आओ हसीं बनाते हैं जात धर्म को तज करके हम तिरंगा धारी बन जाते हैं मन में जब कोई मैल न होगा कौन हमें लड़ायेगा विश्व गुरु बन कर भारत […]
खामोशी से निकले ही नहीं क्यों निराशशून्य है मन क्या लाई थी जो खोकर के यूं उदासीन है तन पलकों में जो सपने हैं वह शायद पूरे हो भी जाएं जब आज ही नहीं मेरा […]
बैर भाव से ऊपर उठकर आओ रंग लगाते हैं, होली है त्यौहार मिलन का मिलकर इसे मनाते हैं।
बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।।
हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए
खत्म इन्तज़ार हो गया वो आ तो गए बुरा हो हया का हम सामने ही ना पड़े
जुनून हद में रहे तो अच्छा है बस मुहब्बत हद से बाहर होनी चाहिए
भीग जाओगे तो और रंगीन हो जाओगे वैसे भी हो हसीं कम नहीं।
आज कर देंगे तुम्हें इस तरह रंगीन ताऊम्र याद रखोगे मेरे रंग को
सबके रंग में रंग कर आऑगे तो हमारा रंग कैसे चढ़ेगा?
इन्तज़ार की हद खत्म होने को है किस राह में बैठे हो सब्र खोने को है
अँखियों का रंग अँखियों में जो डाल दिया। फिर क्योंकर हाथ गुलाल लिया
आशा रख वावरी ! वो आऐंगे। तेरे तन मन को रंग जाऐंगे।।
गुलाबी आँखों से यूँ मत देखो इश्क की फुहार से भीगने मत दो मुझे बहुत सर्दी लगी है आज।
होली के रंग में रंग लो ए रंगरेज़ मीठे- मीठे बोल से मन हर लो ए रंगरेज़ ।
जो लेके आओगे तू बाल्टी मैं भी रखूँगा सरोवर तैयार। रंगों से नहाएंगे साथ साथ यार।।
रंगों की बाल्टी और गुलालों की झोली। लेके आऐंगे तेरे घर ,मनाने हम होली।।
तिलक पसन्द होली है अपनी आकर तिलक लगा देना। प्रेम पर्व होली है इसको प्यार से सब मना लेना।।
बाल हत्या का ले के विचार ‘ हो गई अग्नि में होलिका सवार। उड़ गई वरदान की चादर अजर रहा बालक प्रह्लाद जल गई होलिका हो तार तार।।
नफरत भरे मन की होलिका न जलाई। तो तुमने क्या खाक होली मनाई।।
जल गई होलिका धू धू करके कैसे आज चौक में। ऐसे हीं जलते हैं दुष्ट भक्त जलाने के शौक में।।
बेरंग सी गोली को रंगीन बनाना है रूठे हुए अपनों को दोबारा मनाना है डेविड अकरम और गुरमीत लेकर सबको साथ सुजीत होगी पिचकारी से बौछार आज मनाएंगे त्योहार। गुजिया पापड़ और मठरी से स्वाद […]
मुद्दतों बाद वह घर आए हैं दिल तोड़ने के बाद पहली बार शहर आए हैं…….
एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए….
रंग मोहब्बत का ही चढा मुझ पर जो लगाया था किसी रोज़ तुमने अपने हाँथों से ना उतरा है कभी ना उतरेगा
कल मेरे घर रंग लगाने आओगे? फिर हमसे नज़रे चुराने आओगे? मागा था जो तोहफ़ा मैने तुमसे पहले वो ही प्यार तुम कल लौटाने आओगे?
किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।
बारीकियाँ होती हैं बहुत हाल-ए-दिल समझना इतना आसान नहीं कुछ इशारों में समझ जाते हैं किसी को जमाने लग जाते हैं
हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम देखते ही रह गए कुछ बात हो गई
आसमान की चादर में लिपटे अनगिनत सितारे हैं कौमुदी की आँच पर कई अरमाँ सुलग रहे हैं
गुमनाम ना होने देंगे पहचान को अपनी अब छोड़ दिया शौक तुझसे दिल लगाने का ।
उनकी यादों का पीछा करते-करते हम उन तक तो पहुंच जाएंगे पर ये तो बता ए खुदा! उनके दिल तक कैसे जाएंगे।
लगे हैं वह हमसे नजरें चुराने शायद उन्हें अपनी भूल का एहसास है चलो अच्छा है पता तो चला किसी चीज का तो एहसास है मोहब्बत का ना सही, भूल का ही सही।
दिल की बातें बोलती हैं चिट्ठियां राज कितने खोलती हैं चिट्टियां भावों को जीवंत बनाती हैं, आंखों को भिगोती हैं चिट्ठियां
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