बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते, बात नसीब की थी कुछ ना कर सके।
बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते, बात नसीब की थी कुछ ना कर सके।
मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं, याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।
बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें, आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।
हम वो ही हैं, बस जरा ठिकाना बदल गया हैं अब, तेरे दिल से निकल कर, अपनी औकात में रहते हैं।
जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए, बस, जिंदगी ऐसे जीओ कि रब को पसंद आए। ?
सबने कहा, बेहतर सोचो तो बेहतर होगा, मैंने सोचा, उसे सोचूँ, इससे बेहतर क्या होगा।
काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, वो आके गले लगा ले मेरी इज़ाजत के बगैर।
ये कमबख्त दोस्त, उम्र की चादर खींच कर उतार देते हैं ये कमबख्त दोस्त ही है, जो कभी बूढा नहीं होने देते हैं दोस्तों से रिश्ता रखा करो जनाब, तबीयत मस्त रहेगी ये वो हकीम […]
✍✍ये मतलबी दुनिया मे मेरा कोई ना अपना मिला,, जो मिला लिबाज की तरह बदल कर दर्द दे निकल पड़ा।।✍✍✍
✍✍जो लिबाज की तरह बदल गये जवाने उसी को बहादुरी दी,, जो इंसानयत पर डटे रहे जवाने उसी को गाली दी✍✍✍
मैं ज्यादा तो नहीं थोड़ी सी बात तुझसे कहना चाहता हूँ, यार तो तुम अब भी लंगोटिया हो, बस समय के फेर में थोड़ा तुमसे कम रूबरू हो पाता हूँ विद्यालय के गलियारों में लम्हें […]
✍✍काश मेरे हाथ मे किश्मत का लकीर होता ,, तो शायद तुम्हारा ही नाम होता।।✍✍ ज्योति
वेदो की ऋचाएं भारत से, वेद ज्ञान भारत से -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विश्व वंदिनी ,जग जननी मेरी भारत माता तम हर के, जग को प्रकाश दिखलाता -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
जय जय भारत माँ, मन तू आरती गा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
शांति दूत को मत छेड़ो, क्रांति दूत बन जायँगे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ऐ जमीं,ऐ सरहदें ऐ बैर भाव कैसा हम जो मिलेंगे मिटटी में तो तुम भी मिलोगे खाख में -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विजयी रहे भारत मेरा, न हो दुश्मन का पहरा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
क्या मरेगा दुश्मन, होंसले जो बुलंद हैं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चलते जाते ,बढ़ते जाते डरते नहीं हैं जख्मो से -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
सेना बड़ी ही मत वाली, इसकी अनोखी शान है भारत की सेना पर, हमको बड़ा अभिमान है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मेरा प्यारा है तिरंगा, जिसके आगे झुकता शीश सदा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
विश्व विजयी मेरा भारत, इसकी सदा ही शान रहे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
धुल चाटना अरियों को , जब समय दुर्गम आए भारत माँ की कीर्ति को, युग युग तक गया जाये -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
एक माँ के लाल नहीं तुम, भारत माँ के लाल हो अरी के लिए तुम, त्रिशूल और कृपाण हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
देखो भारत के जवानो, आस तुमसे भारत को तुमसे भारत भविष्य है, विश्वास तुमपर भारत को -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
युवा शक्ति है,साहस है,योद्धा है युग निर्माण की नीव है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
तुम सुधरोगे,देश आगे बढ़ेगा युवा जो बदलेगा,सारा विश्व बनेगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
मोबाइल लैपटॉप हैं प्रगति के साधन, दुरूपयोग करोगे,बनेगे ये बाधक -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
एक हाथ में सिगरेट, एक में है मोबाइल कैसे बदलेगा फिर, अपने देश का हाल -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
दादी नानी की कहानी, अब कहीं गम हो गयीं मोबाइल इंटरनेट में, बाल अबस्था खो गयी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
ये तन माटी का दिया, आत्म ज्योत जलानी है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
धुप निकलती है कहीं, कहीं पे दिखती है छाओं नगर नगर भारत के सुन्दर, सुन्दर हैं सरे गांव -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
चंचल मन को रोक ले, ये विनाश कर जायगा तू कुछ नहीं कर पाएगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
समय की अहमियत समझो, इसको करो न तुम बेकार आता नहीं ये बार बार -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बर्फ पहाड़,और भूकंप डटे वीर हमारे शत्रु उर मचे हड़कंप, चलें वीर हमारे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
कुर्बानियां देकर बीर आए चले गए, अपनी विरासत हम सबको सौंप गए -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
बरस रही है बरखा, देने को मन सन्देश -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
वाह रे इंसान, इन्सां की पहचान नहीं कब तक भटकेगा, तुझे तेरी पहचान नहीं -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
पाप बढ़ गया बहुत धरा पर, कान्हा तुमको आना होगा आतंक ,अनीति ,अत्याचार से, धरा को मुक्त करना होगा कान्हा तुमको आना होगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-
समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर, एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….
ab ke sawan bhege sab agan ak mera hi ghar sukha rah gaya nazar main tere sabhi aa gaye ak main hi bezud sa khada rah gaya –inspired not fully by me
तुझको इतना याद किया, मैं खुद को ही भूल गया, तेरे ख्वाबो में सोया था, के मैं उठना ही भूल गया।। राही (अंजाना)
tera phone aya hi nahin mera intezar khatam hua hi nahin aj bhi jata hun jaha milna tha kabhi par mukkdar ne teri rubaru laya hi nahin
बहुत कुछ भूलने लगा हूँ मैं, एक तुझमें ही घूमने लगा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
अगर मै कुड़ा-कागज होता , तो मेरा कोई ना सुबह होता ना शाम होता, ना घर होता ना परिवार होता, शिर्फ मेरे साथ रास्ते का धुल होता,,,,, अगर मै कुड़ा–कागज होता, कभी पढ़ने का काम […]
ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मानव तेरा हजार रूप देखे,, कभी रावण बनते कभी कंश बनते देखे, कभी राम बनते देखे कभी Krishna बनते देखे,, लेकिन जब -जब देखे सच्चाई पर मरते देखे, मानव तेरा हजार रूप देखे।। जे पी […]
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