ये कमबख्त दोस्त, उम्र की चादर खींच कर उतार देते हैं ये कमबख्त दोस्त ही है, जो कभी बूढा नहीं होने देते हैं दोस्तों से रिश्ता रखा करो जनाब, तबीयत मस्त रहेगी ये वो हकीम […]

मैं ज्यादा तो नहीं थोड़ी सी बात तुझसे कहना चाहता हूँ, यार तो तुम अब भी लंगोटिया हो, बस समय के फेर में थोड़ा तुमसे कम रूबरू हो पाता हूँ विद्यालय के गलियारों में लम्हें […]

पाप बढ़ गया बहुत धरा पर, कान्हा तुमको आना होगा आतंक ,अनीति ,अत्याचार से, धरा को मुक्त करना होगा कान्हा तुमको आना होगा -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)

अगर मै कुड़ा-कागज होता , तो मेरा कोई ना सुबह होता ना शाम होता, ना घर होता ना परिवार होता, शिर्फ मेरे साथ रास्ते का धुल होता,,,,, अगर मै कुड़ा–कागज होता, कभी पढ़ने का काम […]

ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मानव तेरा हजार रूप देखे,, कभी रावण बनते कभी कंश बनते देखे, कभी राम बनते देखे कभी Krishna बनते देखे,, लेकिन जब -जब देखे सच्चाई पर मरते देखे, मानव तेरा हजार रूप देखे।। जे पी […]