अपने विश्वास  को पतंग की उंचाईयों तक पहुचा दो , अपने दिलों में आप एक मोहबत्त का दीप भी जला दो ! माँ बाप के पैरों को छूकर जरा आशीर्वाद भी ले लो , गजक,तिल के […]

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो? #महादेव_की_कविताऐं’

तुम्हारी याद में खोकर बहकना खूब आता है , हकीकत में मुझे फिर भी संभलना खूब आता है ! तुम्हारी जान इस पानी के जिस मछली में बसती है , उसी मछली के जैसे अब मचलना […]

ख्यालों में मेरे अब आती हो तुम ही, हक मुझपे पूरा जताती हो तुम ही! कैसे करूँ मैं अब तुमसे ये नफरत, मेरे पे ही जाँ अब लुटाती हो तुम ही!!

अर्सों के बाद मुलाकात जरुरी है समझता हूँ , मेरे बिन तेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ ! इन्तजार में जो सुख चुके हैं तेरे आँख केआँसू , उनके न निकलने की मज़बूरी मैं समझता हूँ […]

दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! गुजरे हुए हालात की रवानी होते हैं! होते नहीं हैं रुखसत यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं! #महादेव_की_कविताऐं'(24)

विषय – नारी के प्रति पुरुष की सोच लेख – रीता जयहिंद ✍? पुरातन समय में पुरुष की सोच नारी के प्रति सिर्फ घर के कामकाज और सिलाई, कढ़ाई, बुनाई वगैरह तक सीमित थी । […]

तेरी याद कभी कभी मुस्कान देती है! चाहत की निगाहों में तूफान देती है! टूटे हुए इरादे भी जुड़ जाते हैं सभी, जिन्द़गी को ख्वाबों का जहाँन देती है! #महादेव_की_कविताऐं’

बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग आखरी रस्म की कदर करी उन सब ने हमें कांधा देने आये कुछ लोग रस्म-ऐ-बफा सब निभा नहीं सकते है काबा पर […]

हसरत-ऐ-दिल हमारी बस इतनी थी लोगो के वो अपने कूचे से एक बार तो बाहर आते रोते, बिलखते और गम से कराहते और उनकी आँखों से आंसूं बेशुमार आते………….!!    (d k)

चल अम्बर अम्बर हो लें.. धरती की छाती खोलें.. ख्वाबों के बीज निकालें.. इन उम्मीदों में बो लें.. सागर की सतही बोलो.. कब शांत रहा करती है.. हो नाव किनारे जब तक.. आक्रांत रहा करती […]