विक्स के इन्हेलर से ली हुई एक लंबी श्वास, ज्यों श्वासनली के बंध दरवाजे खोल देती है! तुम्हारे पुराने कपड़ो में से आती महक, दिल के उन बंध कमरो के ताले तोड़ कर, तुम्हारी यादो […]
विक्स के इन्हेलर से ली हुई एक लंबी श्वास, ज्यों श्वासनली के बंध दरवाजे खोल देती है! तुम्हारे पुराने कपड़ो में से आती महक, दिल के उन बंध कमरो के ताले तोड़ कर, तुम्हारी यादो […]
जब तू साथ होती है सब अच्छा ही लगता है , तेरा गुस्सा यूँ हो जाना मुझे अच्छा ही लगता है ! तेरी आँखों की गहराई में डूबां हूँ मगर फिर भी , तेरा बाबू […]
मेरे हसने और रोने मे तेरी याद आती है , मेरे जगने और सोने मे तेरी याद आती है ! तेरी अमृत भरी आँसूं को क्या मालूम मेरी जां, सम्न्दर पार विराने मे तेरी याद […]
ढूंढते क्या हो हमें अब, इन वीरान कूचों मे मिलने की खुवाईश हो, तो हमारे कब्र पर चले आना…………!! D K
आँखों से आंसू गिर पड़े आज, इस यकीन लव्ज़ को सुन कर के कभी हमने कहा था उस से मोहोब्बत यकीन का दूसरा नाम है………….!! D K
इस चाँद की शख्शियत भी कुछ काम नहीं तुझ से ज़ालिम जब भी मन करता है देखने को, कम्बख्क्त ये नज़र नहीं आता……………!! D K
मुझे भी शौख हुआ था इस मोहोब्बत का साहिब जब गए इसको खरीदने, तो पूरी ज़िन्दगी ही बैचनी पड़ी……………!! D K
न जाने कैसे और कब इस घर की तस्वीर बदल गई के कभी मरीज़-ऐ-मोहोब्बतो का यहाँ जमघट लगा करता था………….!! D K
कुछ ज़ख़्म हमको ताउम्र याद रह जाते है साहिब के वक़्त भी हार जाता है, उन जख्मो के आगे…………..!! D K
न मोहोब्बत, न साथी और न कोई घर अपना शर्म आती है हमें खुद को, एक इंसान कहते हुए……………!! D K
तन्हाई खुद-बा-खुद बन गयी हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा चलो कोई ये तो नहीं कहेगा अब, ये तन्हा है दुनिया में………………..!! D K
इस खेल मे हारे तो इतना रोना आया है तुमको सोचो मोहोब्बत की बाज़ी हारते, तो क्या होता……………..!! D K
बहुत ही अजीब थी हमारी बंदिशे-ऐ-मोहोब्बत साहिब न वो हमको कैद कर सके, और न हम कही फरार हो सके…………!! D K
बड़ी ही ज़िल्लत-ऐ-ज़िन्दगी मिलती है इस इश्क़ मे साहिब हो अगर शौख-ऐ-चाहत दिल में, तो कर के देख लेना………………!! D K
हमारी आँखों को वो कभी गौर से देखता देखता साहिब तो वो भी रूबरू, रोने के सबब और जागने की खुमारी से होता……….!! D K
मेरे दर्द का आलम गुजर गया है! तेरी बेरुखी का जख्म भर गया है! कोई नहीं है मंजिल न राह कोई, चाहतों का हर मंजर बिखर गया है! #महादेव_की_कविताऐं'(21)
मैं अकेला ही चलूँगा । शीश पर तलवार मेरे, पाँव में अंगार मेरे, या काटूँ या फिर जलूँगा । मैं अकेला ही चलूँगा ।। तुम न मेरा साथ देना, हाथ में मत हाथ देना, अब […]
जिंदगी भी मीठी सुपारी के दाने-सी हो गई है | कुछ देर तक भरपूर मिठाश देती है | लेकिन हलक से उतरते ही गला दुखा देती है | 😛 😀 [It’s humorous. Don’t try to […]
जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है जिंदगी कभी कभी पानी में भी […]
जब सुनाई नहीं देती यहाँ किसी को चीख भी किसी की, तो कौन सुनकर आऐगा आगे यहाँ अब खामोशी की आवाज तेरी, जिस तरह मुश्किल है बहती हवा को छू पाना, उसी तरह मुम्किन नहीं […]
Tu kaun hain, Meri padchai kya, Tujhe apna kahun, Ya phir padaya… Tu kaun Hain, tera ghar hain kaha, Dur bahut dur jana ab yahan, Teri adat thi kabhi Abhi bhi hain, Yaden teri mere […]
सिर्फ देख लूँ एक बार उसे करीब से, फिर इन हाथों में मैंने कोई जाम नहीं लेना है॥ छलक जाए गर मेरी आँखों से अश्क तो समझ लेना, उसी ने कहा था के मेरा […]
हमारी खामोशियों का प्यार एक हिस्सा है, जो कभी खत्म न हो वो तेरा मेरा किस्सा है! तेरे जज्बातों ने ही मुझको कायर बना डाला, तुझे पाने की जिद ने मुझे शायर बना डाला !!
मैंने सूरज को आज फिर से चढ़ते देखा है, आसमान से परिंदों को उतरते देखा है ! जो कल तक ईमानदारी की बात करते थे, उन्हें चन्द सिक्कों के लिए लड़ते देखा है !!
………………….…Few lines on life …………………..…… Kabhi gam to kabhi khushiyon ki saugat hai zindagi. Kabhi dhoop to kabhi chhaon mein tahalatee ek aash hai zindagi . . ….. Kudrat ka diya ek anmol sa uphaar […]
इस नफरत भरी सियासत में, कुछ बिक गये,कुछ डर गये ! पर फक्र करतें हैं आज उनपर, जो फिर जमीर के साथ घर गये!!
Kahte hai ummid pe kaayam hai.. Bas yahi soch ke tera hath thama hai.. Shayad Teri lakiro se Mil k kuch ummide fir muskura uthe
सत्य! यों देखो तो सत्य यहाँ कुछ भी नहीं; सब छलावा है, मिथ्या है | जिस साये को मान साथी हम चलते है यहाँ, साथ छोड़ देता है वह साया भी निशा के तम में […]
मुझको तेरी याद कहाँ फिर से ले आई है? हरतरफ ख्यालों में फैली हुई तन्हाई है! भटके हुए हैं लम्हें गम के अफसानों में, साँसों में चुभती हुई तेरी बेवफाई है! #महादेव_की_कविताऐं’
जिंदगी कुछ रूकी रुकी सी है सांसे कुछ थमी थमी सी है मायूस है मोहब्बत मेरी पुराने सायों से डरी हुई सी है
ताजुब नहीं मुझे तेरे बदल जाने से ओ बेवफा के कुछ लोग बदल नहीं सकते फितरत-ऐ-दिल अपना………….!! D K
अपनी मोहोब्बत का हमने तमाशा भी खूब किया एक बेवफा ने हमको इश्क़ मे बेहताशा भी खूब किया सोचा था मर कर अब हम किधर जाएंगे, मगर उस बेवफा ने काम-ऐ-दिलासा भी खूब किया……………….!! D […]
इंसा, इंसा को क्या देता है जख्म और सिर्फ दगा देता है पिला कर घूँट धोके का सबको ये बड़े आराम से सबको सुला देता है करता है विश्वास घात चंद रुपयों के खातिर दिल […]
झाँक रहा था मैं एक रोज ईश्वर की खिड़की के भीतर, किन्तु दंग रह गया निज प्रतिबिम्ब देख उस खिड़की में! अनायास ही कोई अनहद नाद उठा मस्तिष्क में: ‘देख ले दर्पण यह, देख ले […]
माँ ही एक ऐसा बैंक है यारों, जो हर दुःख सुख के भाव सहेजे, कभी भी देदे नोट पुराने रक्खे जो पल्लू में लपेटे, पापा मानो क्रेडिट कार्ड कभी न करते जो इनकार, खुद वो […]
हाथों से बनाया जिनको मैंने आज वही मुझको बनाने लगे, बनाकर मूरत मेरी दुकानों में मुझको वो सजाने लगे, कितनी बदल गई उस इंसा की नियत जो मोल लगाकर मेरा खुद को अमीर बनाने लगे, […]
बन्द कर अपने जज़्बातों के सभी दरवाजों को, लगाये लब्जों पर हम खांमोशी के बड़े तालों को। देखो किस तरह ढूंढने में लगे हैं हम कचरे में छिपी अपनी जिंदगी की चाबियों को॥ यूँ तो […]
बन्द कर अपने जज़्बातों के सभी दरवाजों को, लगाये लब्जों पर हम खांमोशी के बड़े तालों को। देखो किस तरह ढूंढने में लगे हैं हम कचरे में छिपी अपनी जिंदगी की चाबियों को॥ […]
चलो चलकर फिर उसी जगह, नये रिश्तों की शुरुआत करें ! दो आँखें तेरी दो मेरी हों , आओ मिलके आँखे चार करें!!
भोर था प्यार अब दोपहर हो गया, स्वपन का था महल खँडहर हो गया! करूँ जितना प्रयास पर मिलता नहीं, तुम्हारा प्यार नहीं काला धन हो गया!!
पहली मोहोब्बत का तकाज़ा क्या करे हम वो मिला था हमको बहारों की तरह दीवानगी इस से बढ़ कर और क्या होगी हमने चाहा था उसको तलबगारों की तरह खता क्या हुई एक छोटी सी […]
—————————- यूँ थककर ना बैठ मुसाफ़िर अभी तेरी मंज़िल नहीं आई शायद–चलेगी कुछ देर और तेरे संघर्ष की लड़ाई………. थककर यूँ बैठ गए अगर— राहे भी आसान ना होगी ज़मानें की रुसवाईयाँ भी– राहों की […]
जितना व्यस्त रखना है रख लो खुद को , नहीं तो मेरी यादें तुम्हे सब कुछ भुला देंगी ! नफरत करनी हो तो जरा दिल को मजबूत रखना , नहीं तो मेरी खामोशियाँ भी तुम्हे […]
कहीं कोहरे की धुंध के पीछे छुप गए हैं मेरी सफलता के सभी रास्ते, जितना भी करीब जाता हूँ उतने ही दूर मेरे रास्ते नज़र आते हैं, यूँ तो दायरा है मेरे इर्द गिर्द कितनी […]
आज भी मैं तेरी राहों को देखता हूँ! बेकरार वक्त की बाँहों को देखता हूँ! जुल्मों सितम की दास्ताँ है मेरी जिन्दगी, आरजू की दिल में आहों को देखता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं'(24)
वो सुबह न आये जिसमे तुझको टूट कर बिखरता देखूं, तेरे रगो में न कभी मैं जुदाई का जहर उतरता देखूं, मांगा है जिसे मैंने भी हर चौखट पर खुदा की, वो पल ही न […]
मेरा मन ये कहता था के यह फिर इस बार नहीं होगा, मैं आगे बढ़ गया हूँ अब फिर पीछे कदम नहीं होगा, फिर मन में जिज्ञासा थी फिर कुछ पाने की आशा थी, एक […]
सम्भाल कर रक्खी थीं जो तेरी यादें, चलो आज उनको सरेआम करते हैं। मन ही मन में जो बस गई है दिल में, आओ अब तेरी उस तस्वीर को खुलेआम करते हैं। तेरी इजाजत के […]
मेरे दिल और दिमाग की जद्दोजहद में कलम की स्थिति गम्भीर देखो, दोनों अपनी अपनी ओर खींचे कैसे कलम की डोर देखो, लिखने को लिख दूँ मैं अपने मन की हर एक पीर देखो, पर […]
रौंद कर निकल भी जाऊ आगे सबसे, मगर अपनों के ऊपर चलने का हुनर कहाँ से लाऊँ, बनाने को तो बनाए रहूँ रिश्ते सभी, मगर जो रिश्तों को जोड़े रक्खे वो डोर कहाँ से लाऊ, […]
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