तुम्हें चाहा था आवाज सुनकर
मुस्कुराती थी तेरे ख्वाब बुनकर
अब जान गयी दर्द क्या होता है
अक्सर हँस देती थी इश्क की बात सुनकर।
Category: शेर-ओ-शायरी
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तुम्हें चाहा था
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हालात
तमाशा देखने वाले आ गये,
मेरे शहर मे कहां से ये लोग आ गये।
सबूत देना होगा सबको अपने मौजूद होने का,
आज कुछ अपने भी ऐसे हालात आ गये। -
हालात
तमाशा देखने वाले आ गये,
मेरे शहर मे कहां से ये लोग आ गये।
सबूत देना होगा सबको अपने मौजूद होने का,
आज कुछ अपने भी ऐसे हालात आ गये। -
यूँ ना मिला कर
यूँ ना मिला कर
रकीबों की तरह
साथ चल फलसफ़े
की तरह……
हिचिकियाँ रात भर आईं….
और सोने ना दिया
तूने याद किया हो
जैसे दिलबरोँ की तरह…. -
मेरी प्रेरणा तुम हो
मेरे लफ्जों में तभी तक दम है
जब तक तुम हो, तब तक हम हैं।मेरी प्रेरणा तुम हो,मेरी कविता तुम हो
जब तक दिल है तब तक तुम हो। -
तुम चले जाओगे
तुम चले जाओगे तो मेरी सांस चली जाएगी
दर्द रह जाएगा,आवाज चली जाएगी।
ज़िस्म रह जाएगा रूह चली जाएगी । -
तेरी नज़र
खामोश सा अफसाना
है राज़ कोई गहरा
ना जान सके कोई
वो चीज़ है तेरी नज़र -
इजाजत है
इजाजत है आपको!
मेरे बारे में कुछ भी सोचिए
बेवफ़ा सोचिए,अदावती सोंचिये
आपकी तरह हमसे यूँ
लफ्जों की दगेबाज़ी नहीं होती। -
आओ तो जरा
साल भी खत्म होने को आया,
सब आये पर तुम न आये।
इंतजार चार दिन और है तुम्हारा,
फिर आये तो फिर क्या आये??? -
तेरे बिन मुझे कुछ चाह कहाँ
वो तख्त कहाँ वो ताज कहाँ
वो कलगीधर सा शाह कहाँ।
हे दशमपिता हे गुरु गोविन्द
तेरे बिन मुझे कुछ चाह कहाँ।।
,,,,,,,,कोटि कोटि प्रणाम,,,,,,,,, -
Baarish
ए बारिश तेरे रूप अनेक, तू समझ किसे ही ना आती
कभी तरसाए मौसम में, कभी बेमौसम बरस जाती
आते जाते आँसू कभी , खुशी और गम के दे जाती
कल्पना तेरे बिना जीवन की, संभव ना हो पाती -
Sathi
ख्वाबों में जिसको देखा था मैंने, हकीकत में साथ वो रहने लगा है
सोचा था साथ कौन देता है अब, हर कदम साथ वो चलने लगा है
दिल की बातें किसे सुनाती, बिन बोले सब कुछ समझ लेता है
करता नहीं कोई नशा मै तो, सुरूर बन फिर भी छाने लगा हैं -
अपराध
अब न रह विस्वास किसी पे,
जब अपने ही दरिन्दगी में उतर आयें।
अपराध बढ़ रहा चरम पे,
कैसे रुके कोई बतलायें।। -
पत्थर
जनाब!अपने दिल को सम्हाल कर रखिये,
दुनिया से आप इसको जरा बचा कर रखिये।
असर हुआ है अगर इस पर किसी की बात का,
तो अपने दिल को पत्थर-सा का बना कर रखिये। -
मीठा दर्द
यूं न मेरी मोहब्बत को रुसवा कर,
ज़माने ने बहुत दर्द दी है।
बस एक बार मिल रूह से रूह तक,
चले जायेंगे हम यहाँ से ज़माने से किसे हमदर्दी है।।
नवीन द्विवेदी -
चंद शेर
चंद शेर /मुक्तक
लाख करो साजिस बुनियाद हिन्द कोई हिला सकता नही |
क्रांतिबिरो बलिदान जवानो सहादत कोई भुला सकता नहीं |
श्याम कुँवर भारती [राजभर]भारत की मिट्टी माथे तिलक चंदन लगाएंगे हम |
मातृभूमि के चरणों वंदनऔर सिस झुकाएँगे हम |
खाया नमक इस धरती नहीं नमक हरामी करेंगे |
जान जाये तो जाये बदला नमक चुकायेंगे हम |
श्याम कुँवर भारती [राजभर]अखंड भारत खंड खंड क्या टुकड़े गैंग करेंगे |
छप्पन इंची सिनावाला नेटवर्क इनका हैंग करेंगे |
श्याम कुँवर भारती [राजभर]हिला ना सकागे बुनियाद भारत जितना ज़ोर लगाके देख लो |
जल जाओगे खुद ही ताबे हिन्द मजहबी आग लगाके देख लो |
श्याम कुँवर भारती [राजभर]है चट्टानी फौलादी इरादा नाम दुनिया हिदुस्तान रहेगा |
टकराएगा जो हमसे नामो नीसान ना चीन पाकिस्तान रहेगा |
श्याम कुँवर भारती [राजभर]लहराएगा दूर गगन मगन हमारा झण्डा तिरंगा |
थर्राएगा दूर दुशमन जय पतित पावनी माता गंगा |
श्याम कुँवर भारती [राजभर] -
मेरे ख़ुदा
मेरे ख़ुदा मुझको बता,
सब कुछ तो तेरे खाते में दर्ज़ है।
तारीफ़ तेरी हो या फिर मेरी,
इसमें क्या हर्ज़ है।। -

लम्हों को जी लो
लम्हों को जी लो
दिल कहता है
जो आज में जीता है
वो ही कल खुश रहता है ।
तो मुस्कराईये और
अपना कल बनाइए । -
अपना ख्याल
भूल तो गये ही हो आप मुझे……
पर ठीक से अपना ख्याल रखना।।
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प्रिय
तेरी हँसी- वादियों का मारा हूँ मैं,
तुझे जिस्मों-जान तक उतारा हूँ मैं।
प्यार करके कहती हो,
शादी-शुदा हूँ मैं।
तो कान खोलकर सुन लो,
दो बच्चों का बाप होते हुए,
अभी तक कुँवारा हूँ मैं।:-अमोद कुमार राय
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मंजिल
कभी तो मिल ही जाओगी ए मंजिल!
यूं रोज तड़पाना अच्छी बात नहीं -
ये प्यार
मुहब्बत जता के इनकार नहीं किया जाता।
जमाने को बता के प्यार नहीं किया जाता।। -
इशारा
जीने को इशारा दे दो
डूबते को सहारा दे दो
अर्सा हुआ तुझे देखे हुए,
इन नजरों को नजारा दे दो। -
इशारा
जीने को इशारा दे दो
डूबते को सहारा दे दो
अर्सा हुआ तुझे देखे हुए,
इन नजरों को नजारा दे दो। -
ज़िन्दगी
जी लो जीभर के
ज़िन्दगी की आरज़ू है
जो मिला है
अच्छा है
जो ना मिला
उसकी जुफ्तज़ू है -
🌹🌹🌹इशारा🌹🌹🌹
जीने को इशारा दे दो
डूबते को सहारा दे दो
अर्सा हुआ तुझे देखे हुए,
इन नजरों को नजारा दे दो।⚘⚘⚘⚘ -
भोर
अंधेरों में इतना कहाँ जोर है ।
आ रहा है सूरज हुआ भोर है।। -
कभी तो
कभी तो इन गलियों में
आकर तो देखो,
माना बहुत अन्धेरा है ।
शायद तुम्हारे आने से
मेरा जहान रौशन हो जाये। -
प्यार
ढ़लते दिसंबर के साथ इश्क़ भी तेरा ढ़ल गया।
तू तो कहता था कि बिना मेरे
तेरा मन कही नही लगता….अब तू बता कि वो तेरा प्यार कहाँ गया?
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हीरा की तरह
तु दिखी मुझे हीरा की तरह,
हुआ प्यार मीरा की तरह,
मिले हम सरफिरा की तरह,
बाप तेरा खा गया खीरा की तरह,
मैं पेट में बना पीड़ा की तरह,
उसने निकाल दिया जलजीरा की तरह। -
मेरा प्यार
तुम मेरे पास रहो या रहो मुझसे दूर।
मेरा प्यार कम न होगा करुँगा भरपूर।। -
ये मौसम सुहाना
ये मौसम सुहाना
फिजा भीगी
तेरी यादें हैं छायी
काले बादल
हों जैसे। -
आदत
हमारी आदत नही है
यूं ही किसी की
तारीफें करना
तुम हो ही इतने
अच्छे की हम
शायर हो गये। -
खुशियाँ
अब तो बन गई किस्मत
जब से मिल गयीं ख़ुशियाँ -
Tumhe Aur Tumhari Yaadein
Apni khaamiyo ka harzaana bhar Kar,
Un par kaam kar rahi hu main…
Tumhe aur tumhari yaadein bhula Kar,
Ab aage badh rahi hu na main… ❤ #Sheetal -
महफ़िल
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल मे,
निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी।देखेंगे जब सब तुम्हारे होठो पर हल्की-सी हँसी,
महफ़िल मे हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।। -
अधूरी नज्म
लफ्ज़ो में कहाँ बयां होती है
मोहब्बत जब बेहिन्तहा होती है
हम ही थे जो ये खता कर बैठे
अब नसीब में बस अधूरी नज्म होती है -
पहचान
तशरीफ़ कैसे रखे अभी फ़रमान बाँकी हैं।
हाले दिल क्या कहे अभी पहचान बाँकी है।। -
भारतीय नौ सेना दिवस
बादलो की गरज हो या मौसम तूफानी है
देश की रक्षा में जाने कितने देते कुर्बानी है
दुश्मनों से कह दो आंख न उठे गलती से
समुंद्री लहरों पे खड़ा हर शेर हिंदुस्तानी है! -
आरज़ू
आरज़ू नही रखता कि पूरी कायनात मे मशहूर हो शक्सियत मेरी।
जनाब! आप जितना जानते हो बस उतनी ही है पहचान है मेरी।। -
आखिरी मुलाकात
रात भर होंठों पर मुस्कान,
भोर से ही सीने में गुलों का खिलना था
बात कोई नई न थी,
बस इस शाम अपने हमदर्द से मिलना था ।ख़ैर,शाम ढ़लने के साथ ही,
सौ रूपये लिए घर से निकल पड़ा
सुनसान सड़कें, आबादी कम
रिक्शा न मिला तो पैदल ही चल पड़ाढ़ीले-ढ़ाले कपड़े,चमड़े की चप्पल
पर सरगर्मी साँसे लिए चलता रहा,
कदम दर कदम,मर्तबा तर मर्तबा
उससे मिलने की खुशी में पिघलता रहाधड़कने तेज़, साँसे उससे भी तेज़
न थका, न रुका बस ठंड से लड़ता गया,
तभी एक रिक्शा मिला और उम्मीद भी
तेज़ी से उसकी घर की तरफ बढ़ता गयामुस्कान लिए,मैंने रस्ते में सोचा
क्यों न कुछ ले लू उसके ख़ातिर?
हाँ, मिलना कोई नई बात नहीं थी
फिर भी बेतहाशा मोहब्बत हैं उससे आखिर ।ख़ैर, छोड़ दिया इस ख्याल को मैंने
और कुछ देर बाद,उसकी गली में उतर गया
रात हो चुकी थी,अकेला मैं और मेरा ईश्क
उस चाँदनी की रंगों में निखर गया।कुछ गाड़ियों का शोर और कीड़े की आवाज़
और उस प्रचंड ठंड में बस उसका इंतजार था
वो जल्दी आ जाती फिर हाल पूछता
और बताता उसे कि मुझे उससे कितना प्यार था।शशि की चंचल किरणों में उसके चले आने का दृश्य
मानों सुकून की साड़ी पहने स्वयं सती आ रही हो
श्याम खुले केश,पैरों के छोटे पायल का शोर
मानों सारी खुशियों को साथ लेती आ रही हो।सुन ऐ हमदर्द,मेरी जान हो तुम
तुम ही वसुंधरा,मेरा आसमान हो तुम
मेरा ख्याल,मेरी जिंदगी,मेरा खिताब हो तुम
और मेरे फ़कीरी रूह की आखिरी ख्वाब हो तुमतुम ईमान हो,मेरा सम्मान हो
तुम ही सुख,तुम ही मेरा ज्ञान हो
इन विलखती पंक्तियों की जान हो
बस प्रेम नही,तुम मेरी पहचान होमेरे हृदय की तिश्नगी को समझो और विचार करों
कुछ आहें भरो ,
दो पल सोचो
और ये प्यार मेरा स्वीकार करो“क्या हैं जल्दी इसमें इतनी?
सब्र की आग में जलना ही जय हैं
छोड़ गए अगर कभी मुझे तुम
क्या होगा हमारा? यही भय हैं।”तो सुनों,प्रतिज्ञा हैं पूनम पावन चंद्र की
कि ये प्यार न कभी मिट पाएगा
हर साँस से ये बढ़ते-बढ़ते
मेरे साथ मृतिका में मिल जाएगाबातों में न कोई मिथ्य
पाक हूँ मैं और ये इश्क गुरूद्वारा है
बस सहमति की देरी हैं
फिर वर्तमान सहित,भविष्य हमारा हैंइतने में हँस कर वो बोली
“पगले,प्यार मुझे भी हैं तुझसे
और हाँ, कुछ अधिक ही हैं
जितना तू करता हैं मुझसे।”खुशियों की सीमा न थी,
और दर्द का शहर तबाह था
हाथ थामें नाच रहे थे,
वो चाँद भी गवाह थाफिर शर्म की सीमा को लांघ के
बाहों में उसको भर लिया
सदियों के इश्क का अंजाम देख
हमदर्द को हमसफ़र कर लियादो पल के लिए सिर पीछे कर
उसके माथे को मैंनै चूम लिया
और उसकी अफ़ीमी आखों को देख
मध्य चाँदनी में झूम लियाश्याम रात और विमुग्ध चंद्र भी
हमारे प्रेम को देख शर्मा गया
फिर खींच लिया उसने खुद को दूर
सच कहूँ तो मैं घबरा गयाहाथ थामें कहा उसने
“अब लौट जाओ,काफी हुई रात अभी
फिर इसी जगह बढ़ेगी कहानी
आगे भी तो करनी है मुलाकात अभी”बस इतना कहकर पीछे मुड़े वो जाने लगी
ऐसे उसे देखने का दुख अपार था
चीख़ कर मैंने कहाँ “फिर मिलेंगे”
मुझे क्या पता,वो आखिरी बार था ….अब,
मेरी सूर्ख आँखें उन अफ़ीमी आखों को तरसती है
वो आखिरी मुलाकात को याद कर प्रतिरात बरसती हैं
हम फिर न मिले,न दास्ताँ बढ़ी आगे
और उस रात को याद कर,हर रात सिसकती हैंसोचता हूँ कि उस रोज़ काश
कुछ दे दिया होता,तो कुछ बात रहती
प्यार का तोहफा भी और
आखिरी निशानी के तौर पर उसे याद रहतीउसे ढ़ूँढ़ने,कई बार गया,बार बार गया
पर उसका वहाँ न कोई निशान मिला
उसकी गलियों ने अंत में विलख के कहाँ
लौट जा,तेरे हमदर्द को नया जहान मिलाअब,
हर घड़ी,हर क्षण पीड़ाग्रस्त
चाँद मुझे मेरी प्रतिज्ञा याद दिलाता हैं
देर निशा,उसकी बातों को सुना
मुझको अपनी ही बाहों में सुलाता हैंअब,
प्रतिदिन प्रेम के प्रलय को शान्त कर,
दुर्वासा की तरह,उस रब को शाप देता हूँ
क्षण में बदल दिया सब कुछ मेरा
बस चाँद को ज़ख्मों का हिसाब देता हूँखुशी और उसके समान
दुख और प्रेम भी अनुकूल हैं
सच्चे स्नेह का सुखी सार निकले
हर बार,ये सोचना भूल हैंकहानी नहीं, बस मुलाकात अधूरी हैं
कि अगर इश्क हैं तो बेवफ़ाई भी जरूरी हैं
हैं आज मैं और चाँद दोनों आधे
हाँ,पर हूँ खुश कि मेरी मोहब्बत पूरी हैंमगर उम्मीद हैं अब भी कण-कण में
मिलेंगे फिर उसी चाँदनी तल में
मैं, तुम और वो विमुग्ध चंद्र
और जी लेंगे ये जीवन उसी पल में ….-ब्रजनंदन गुप्ता।
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मेरा चेहरा
जब भी तेरा नाम लेकर तुझको कोई बुलाएगा।
मेरा चेहरा तेरे मन के परदे पर नजर आएगा।। -
जुल्फ़े
इन खुली जुल्फों में न जाने
कितने राज छुपे होते है
कभी चाँद कभी रातें तो
कभी तारे फूल बनके सजे होते है
वो लट आँखों से होठो तक गुजर
जाए तो संमा बदल देती है
न जाने कितने लोगों के उस
काली रात में ख्वाब जगे होते हैइन खुली जुल्फों ने ज़माने को
प्यार का कायल बना दिया
लिखना मेरी फितरत में नही था लेकिन
आपने मौसम को कातिल और
मुझको शायर बना दिया -
जुल्फ़े
खुली जुल्फों में न जाने
कितने राज छुपे होते है
कभी चाँद कभी रातें तो
कभी तारे फूल बनके सजे होते है
वो लट आँखों से होठो तक गुजर
जाए तो संमा बदल देती है
न जाने कितने लोगों के उस
काली रात में ख्वाब जगे होते है -
यूं ही चलते चलते
निगाहों के पैमाने से शख्शियत भांप लेते है,
राह चलते ही बुलंदियों के कद मांप लेते हैं।।जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता,
वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥सरहदें बदलती हैं दिनरात अपनी,
चलो समझौता, सुलह, करार करें ॥मेरे वश में नहीं है, तुम्हारी सजा मुकर्रर करना ।
तुम ही कर लो जिरह औ फैसला मुकम्मल कर लो ॥वह चलते पानी से बह जाते हैं,
थोड़ा गर उनको आजमाते हैं ॥अपने वजूद से यूँ कतराते हैं,
आइना देख के भी घबराते हैं ॥ऐसा भी नहीं कि कोई
रंजिश है उन्हें हमसे,
दुश्मनों से वफादारी
बस निभानी थी उन्हें ।।जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
हम उफ्फ़ भी करें तो गुनाह हो जायेये जो इश्क का इक कतरा,
तेरी आंखों से झलका है ।
मयस्सर है ना मुकद्दर में ,
जमाना इससे जलता है ॥मेरी हसरतों का क्या, कटी पतंग हैं ।
वो लूटने की बात, मन की उमंग है ॥कांटों का काम है चुभते रहना,
उनका अपना मिज़ाज होता है,
चुभन सहकर फिर भी सीने में,
कोई गुल उसका साथ देता है ।@ नील पदम्
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यूं ही चलते चलते
निगाहों के पैमाने से शख्शियत भांप लेते है,
राह चलते ही बुलंदियों के कद मांप लेते हैं।।जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता,
वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥सरहदें बदलती हैं दिनरात अपनी,
चलो समझौता, सुलह, करार करें ॥मेरे वश में नहीं है, तुम्हारी सजा मुकर्रर करना ।
तुम ही कर लो जिरह औ फैसला मुकम्मल कर लो ॥वह चलते पानी से बह जाते हैं,
थोड़ा गर उनको आजमाते हैं ॥अपने वजूद से यूँ कतराते हैं,
आइना देख के भी घबराते हैं ॥ऐसा भी नहीं कि कोई
रंजिश है उन्हें हमसे,
दुश्मनों से वफादारी
बस निभानी थी उन्हें ।।जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
हम उफ्फ़ भी करें तो गुनाह हो जायेये जो इश्क का इक कतरा,
तेरी आंखों से झलका है ।
मयस्सर है ना मुकद्दर में ,
जमाना इससे जलता है ॥मेरी हसरतों का क्या, कटी पतंग हैं ।
वो लूटने की बात, मन की उमंग है ॥कांटों का काम है चुभते रहना,
उनका अपना मिज़ाज होता है,
चुभन सहकर फिर भी सीने में,
कोई गुल उसका साथ देता है ।@ नील पदम्
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चलते चलते
जलने वालों का कुछ हो नहीं सकता,
वो तो मेरी बेफिक्री से भी जल बैठे ॥@नील पदम्
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संयम दिवस
एड्स दिवस बनाने वाले
काश! संयम दिवस भी बनाया होता।
बह्मचर्य का पालन करके
समय से पहले ना कोई जान गवाया होता।। -
मेरा प्यार होगा
तेरी गिलाओं का बदला मेरा प्यार होगा।
तू हीं मेरा पिछला और तू हीं
अगला मेरा प्यार होगा।।
