महफ़िल – ए – यारोँ में , थोड़ा अलग दिखा देते हैँ ….. मुझे , मेरे अल्फ़ाज …… फितरत बता देते हैं , मेरी …. मेरे अल्फ़ाज ….. मैं इंसान हूँ तो जायज़ हैं , […]

ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”; . कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……‪#‎अक्स‬ . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/

तलब ऐसी उठी दिल से….. की उन्हीं के तलबगार हो गए…. जमाने की जुबां पर …. किस्से हमारी मुलाकातों के बार – बार हो गए…. पता कर चुके थे , हैँ उनकी तरकश में इक […]

साँसे चल रही हैँ , बिन उसके.. आने वाला ,  जीने में मज़ा क्या… चाह लिया उसे , उसकी इजाज़त के बगैर ….. इसमें किया गुनाह क्या …. मोहब्त हैं उनसे , तभी मांगती हैं […]

थोड़ा मायूस हूँ , थोड़ा तन्हा हूँ .. कोई राह – ए – ख़ुशी बता दो…. ख़ुद की ख़ामोशी देख , ख़ामोश क़ायनात भी दिख रही हैँ ….. कोई मुस्कुराना सीखा दो …. बे – […]

चुनौती ज़िन्दगी का, कहता हैं, हूँ मैं हर मोड पर, लेकिन हम भी कुछ कम नहीं, इन्हीं चुनौतियों के सात जीना सीख लिया हैं, की कभी कबार लगता हैं की इनके बिना ज़िन्दगी अधूरी हैं. […]

कफ़स दिल में कुछ जज़्बात .. आबो संग बीता जाता हूँ ,  ” मैँ “….. पुष्प हूँ , खिलनें के लिए बना हूँ ….   फ़िर भी ना जाने क्यों , मुरझा जाता हूँ , […]

अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी…..   ए  – ग़ालिब…. जरा मुझे ये बता… उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है….   पंकजोम ” प्रेम “

कुछ ऐसा लिखूँ , की पढ़ने वाले को लगे … मेरा एक – एक  अल्फ़ाज , गहरा हैँ … खों जाये वो मेरे अल्फाज़ो की महफ़िल में .. लगे उसे , मानो आज वक़्त , ठहरा हैं.. यादगार हों जाये उसके लिए , मेरी हर इक सुखनवरी …. एहसास हो , जैसे….. रौनक के पहरे से रोशन उसका , चेहरा हैं ..   पंकजोम ” प्रेम “

दिल बेचैन हुआ , तो उसके दीदार का दिया दिलासा हैं ….. जाने वाले कल चले गए , लेकिन आज भी उनके लौट आने की …. छोटी सी आशा हैं ….. अब कोई तो बने सुराही – ए – मोहब्त …. क्योंकि ये सुख़नवर बहुत , प्यासा हैं ….   पंकजोम ” प्रेम “

वक़्त लगता हैं यहाँ , इंसान को इंसान समझने में ……. वक़्त लगता हैं यहाँ , पत्थर को भगवान समझने में …… आधी उम्र बीत जाती हैँ सोचने सोचने में .. क्योंकि वक़्त लगता हैं यहाँ , जीने के अरमान समझने में …..   पंकजोम ” प्रेम “

मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…!

ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं ….. इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं … साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें ….. समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..   पंकजोम ” प्रेम “

“इन्तजार” ! बहुत ‘मतलबी’ लफ्ज़ है ना ‘साहब’ ?? ღღ__रख लो तो अमानत, दे-दो तो इक ज़मानत; . ღღ__चाहो तो मोहब्बत, सोचो तो सिर्फ नफ़रत, काट तो दो तो इक उम्र, और जी लो तो […]

कल मैंने अपनी प्रेमिका के उतर दिल में , चाहत का ज़खीरा देखा ….. अपने जिल्ले – सुभानी के इंतजार में , उस चाँद का मायूस चेहरा देखा .. स्वागत में उसने आब संग बिछा दी पलकें , मैंने हर इक आब पर नाम , मेरा देखा …   पंकजोम ” प्रेम ”  

मेरे माधव ही नहीं आप सब … राह – ए – क़ामयाबी में , मेरी तरह एक मुसाफ़िर भी  हो …. भरने फ़लक – ए – क़ामयाबी पर ऊंची उड़ान …… मेरे संग उड़ने वाले […]

देखकर उसकी मुस्कान , ख़ुशी से भर जाता हूँ , मैं ….. उसकी एक झलक पाने …. कुछ भी कर जाता हूँ , मैं….. वो क्या जानें , मेरा हाल – ए – दिल .. […]

दिल जब कश्ती – ए – मोहब्त पर सवार होता हैँ….. तब उनसे मुलाकात करने को दिल बेक़रार होता है…. दीदार कर उस अप्सरा का , मैंने भी मान लिया … ” एक नज़र में […]