हैरानी कुछ यूँ हुई कि उन्होंने हमें सर खुजाने का वक़्त भी नही दिया, जबकि वक़्त उनकी मुट्ठियों में भी नही देखा गया, लब पर जलती हुई सारी बात हमने फूँक दी सिवाय इस सिद्धांत […]

चलाओ टीवी, भिन्डी काटती हुई अंगुली का पसीना न पोंछते हुए प्रेमिका को मिलाओ फोन, बांटों दुःख ओम पुरी चले गए, सुनाओ निःशब्द रो लो तीन सौ आँसू लिखो डायरी में, बदलो तस्वीरें और बताओ […]

जीवन के इस सफ़र में प्रकृति ही है जीवन हमारा, बढ़ती हुई आबादी में किंतु हर मनुष्य फिर रहा मारा-मारा॥ मनुष्य इसको नष्ट कर रहा है जिंदगी अपनी भ्रष्ट कर रहा है, करके नशा देता […]

आँखों से बहता पानी कहाँ एक सा होता है कभी खुद के लिए रोता है, कभी खुदा के लिए रोता है ! कभी कुछ पा के रोता है , कभी कुछ खो के रोता है […]

मेरे जीवन का किसान बनकर, तूने सफलता के बीज़ बोए | अपने सपने बेचकर तूने, मेरे मामूली ख़्वाब संजोए | अक्षर का शुरूआती ज्ञान￰￰ देकर मुझे अपना शिष्य बनाया | अपना पेट काट -काट कर […]

कुछ ख्वाब ऐसे थे, कुछ ख्वाब वैसे थे, कुछ दिल के हिस्से थे, कुछ दर्द के किस्से थे, कुछ खुदा को समझाने थे, कुछ खुद को समझने थे, कुछ टूटकर रह गए, कुछ अश्क संग […]

मौला अपनी तू रहो मे, बैठे रहने दे छाओ मे एक दिन तो होगा कर्म ये भ्रम तो रहने दे ! चाहे सपनो को सपने रहने दे, लकिन अपने तो रहने दे शिकवे, शिकायत क्या […]

बचपन के  शहर मे जाने , क्यों  ख़ाली से मकान पड़े है सयानेपन के हर जगह पर ऊँचे-ऊँचे बंगले खड़े है कुछ आधुनिकता की आड़ मे लूट गए कुछ को मजबूरियों न लूटा है महँगे खिलौनो […]

चन्द्र मोहन किस्कु फूलों की खेती ********** दुनिया में अब बढ़ गया है हिंसा लोग मिलते ही लड़ते है झगड़ते है और हत्या के लिए हथियार हाथ में लेते है दुनिया में अब बढ़ रहा […]

समझाऊँगी क्या मैं तुझको बतलाऊँगी क्या मैं तुझको ! कभी तो अपना जान तू मुझको कभी तो अपना मान तू मुझको ! बस इतना-सा वादा कर दे बस इतना-सा सच्चा कर दे ! मुझको तू […]

साथी मेरी न्यारी है मुझको सबसे प्यारी है राज ये मेरे रखती है किसी को नहीं दस्ती है हर वो बात ये सुनती है जो दुनिया को चुभती है दोस्ती ये ऐसी सच्ची है जो […]

चार दिन की थी जिंदगी एक दिन का था बचपन उसमे थोड़ा-सा कच्चा था, थोड़ा-सा अच्छा था लेकिन वो ही सबसे सच्चा था , क्योंकि जिन्दा था बैखोफ मैं उसमे चाहे रोता था माँ की […]

जाने  कहां वो, सिलसिले  रह गये, कोई शिकवे ना गिले रह गये, अब जिंदगी पहुंच गई उस मुकाम पर, जहां तुम  तुम  ना रह गये, और हम  हम  ना रह गये। और हम हम ना […]

शाखों से टूटकर पते पतझड़ की निशानी दे गए! कल थे शान जिन दरख्तों की आज कदमो तले रुंद गए ! साए देते थे जो मोसफिरों को धूप मे आज अपने सहारो को भी छोड़ […]

चल रही है ठंडी हवाएं ,आँखों से बादल बरसेगा रात के आगोश में . मेरा मेहताब पिघलेगा मुद्दतों बाद फेंका है एक नजर का टुकड़ा उसने पतझड़ के मौसम में भी , अब तो गुलशन […]

नारी हूँ मै, नादान नहीं हूँ निस्छल हूँ , निर्लज नहीं हूँ ! पथ की उलझन सुलझाना चाहु पग के बंधन तोडना चाहु सिर्फ यही अपराध करु मै अपने मान की पहचान करु मै ! […]

कुछ ना होने का भी कुछ तो मतलब होगा यूँ ही तो नहीं कुछ ना हुआ होगा वो मतलब खोज लीजिए कुछ ना होना कुछ होने मै बदल जाएगा जिंदगी का ढंग आपके ढंग मे […]

अजीब है दुनिया अजीब बाजार है दुनिया जिंदगी का लिबास पहने मुर्दा है दुनिया ये रूह बेचकर रिवाज ख़रीदा करती है मन के अहसास जलाकर पथर पूजा करती है जात को अपनी पहचान बता , […]

मैं वो नहीं जो पास रहकर तुझे हँसाउगा मैं तो वो हूँ जो रहू या ना रहू लैकिन तेरी मुस्कुराहट की वजह कहलाऊँगा ! मैं वो नहीं जो उजालो मैं तेरा साया कहलाऊंगा मैं तो […]

वो कहने लगे रुख से पर्दा हम हटा नहीं सकते हम ने कहा तुम्हारे हुस्न को देखे बिना हम जा नहीं सकते वो कहने लगे इस से हमारी रुसवाई होगी हमने कहा होने दो गर […]

  जरा याद करो उस बलिया को जो बीर पुरूष की धरती है जीवन का हो उदय यहां रोशन कुर्बानी करती है   मंगल पांडे चितू पांडे चन्द्रशेखर जैसे बीर जहाँ शहीद हुये इस भारत […]

गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था, तन्हाइयों में मेरा तुझसे अब मिलना बहोत जरुरी था ! मिटाने थे वो गिले सिकवे हुए हम दोनों के दरम्यान, इस पत्थर से दिल का भी […]

लो फिर याद आ गया , वो बचपन सुहाना वो झूठ का रोना , वो सच का आँखों सी आलू का टपकना वो बेबाकी सी उदझ्ना सबसे. वो अपने साये सी भी डरना वो बारिश […]

” इंतज़ार ” सोचा भी न था मैंने वो मुलाक़ातें मेरे ख़्वाबों का मुक़द्दर बन जाएँगी उसकी बातें, उसकी यादें मुझे तड़पायेगी उसके नाम मेरी सांसों में बस जायेगा और __ हर रात मेरे ख़्वाबों […]

देश में उथल पुथल का माहौल बना है, जियो लेने को भी यहाँ भीड़ घना है, व्यस्त यहाँ इंसान हर रोज़ इस तरह सा, हज़ार का पत्ता भी अब हर ओर मना है। देश प्रेम […]

“हलाला देती बरबादी ?” मुद्दा तलाक का तीन तलाक लाना | बिना विचार किये महिला को हटाना || हजरत उमर का था वह रहा ज़माना | तीन तलाक पर चालीस कोड़ा लगाना || किस्सा था […]