Category: Other

  • adda

    Khola mon khola chithi
    Seye bristi makha smriti
    Seye Coffee seye adda
    Seye sporso amay kore Aschorcho

    Phirey ashuk na seye bela
    Jakhun tumi sudhu amar
    Tomay khapabona kotha dichi
    Eye jibon bastotay thomkey darak na somoy

    Eye kabla boka chele take
    Nijer korey newar jonno
    Anek shukran,
    Tomar kotha eney daye ajo muskaan

  • नए साल की नई कविता

    एक नई कविता”अंग्रेजी न्यू ईयर”के आगमन पर
    …समर्पित
    (डा0दिलीप गुप्ता,घरघोड़ा.रायगढ़.छ0ग0)
    0
    **स्वागत हे नव वर्ष
    क्या लेकर आए हो..
    विषाद की बोरियां
    या बिंडलों मे हर्ष !!
    या ओढ़कर भेंड़ की खाल आये हो !!
    समस्याओं की नई “जाल”लाए हो !!
    0
    हे नए साल
    न आना जुबान से कंगाल…
    मीठलबरा,बेशरम कर जोरे
    खड़े हो जाते हो
    दांत निपोरे…
    झूठे आश्वासन औ वादे न दे जाना..
    दे के भाषण ,गरीबों का राशन
    औ पशुओं का चारा न पचा जाना !!!
    0
    हे नव वर्ष
    भ्रष्टाचार के चरमोत्कर्ष
    पिछली बार,कई चमत्कार दिखलाए
    कागजों में बनाई बडी बड़ी योजनाएं..
    बांध नहर व् पूल
    हस्पताल सड़कें व् स्कूल
    योजना तो ,कागजों में
    अखबार औ टी वी में नायाब थे.
    पर गरीब जमीं की छाती से गायब थे!!!!!
    देशी खातों में गढ़ गए.
    जेबों व् पेटों की भेंट चढ़ गए..
    विदेशी खातों की और बढ़ गए….?
    0
    याद है! पिछले साल एक रात में
    रिमझिम बरसात में
    आफिस में लड़े थे,
    सरकारी बंगले में पीकर…
    धुत्त पड़े थे……
    पतित पावनि गंगा के देश में
    रक्षक के वेश में,,
    एक गरीब,आदिवासी विधवा से
    करके बलात्कार..
    हो गए फरार
    मत आना खबरदार
    बनके ऐसे तहसीलदार !!!?
    0
    नव वर्ष,तुम आना जरूर
    पुलिस ठाणे में..
    कोई पीड़ित न डरे
    जुर्म के खिलाफ..रपट लिखाने में.
    लुच्चों का खाकर माल..
    सच्चों पे मत चढ़ जाना नए साल !
    0
    और कहीं ऐसा न हो कि
    बेआबरू हो रही हो …कोई सीता
    औ तू बैठा हो
    मुफ़्त की दारु पीता!
    लूट जाए जब ….”सारा”
    नशे में खुद भी डुबकी लगाले
    बहती गंगा की धारा……
    सुबह साड़ी के छोर से
    पेड़ या पंखे में लटकी मिले
    सीता मिले दुबारा ???
    0
    हे नव वर्ष:इस बार दिलो दिमाग में आओ
    टोपी औ कुर्सी को सद राह दिखलाओ
    खा पी कारण सोए 5 साल
    न कुतरें देश के नाक कान गाल
    न झुकाएं देश भाल……!
    0
    देश के अस्पतालों में जरूर आओ
    हर पीड़ा का मरहम बन जाओ,,
    पिछले दिनों की तरह नहीं कि…
    ए सी बंगले में पी विदेशी मस्त रहे,
    गरीब.डायरिया डिसेन्ट्री औ
    मलेरिया की मातसे त्रस्त रहे
    ….मरीज क्या झूलते पर्दो को
    दुखड़ा सुनाए हस्पताल में
    या जोंक खटमल की तरह
    रक्त चुसू प्राइवेट डॉक्टर की
    शरण में जाए..नए साल में !!!??
    0
    न रहे लूट डकैती न दंगा
    रोज आना अखबारों में,
    छापे रहना नित न्याय प्रेम
    दुनिया के समाचारों में ,,
    कोई लाज न हो सामूहिक
    बलात्कार की शिकार ..
    औ आरोपी अंधे कानून की
    लूली पकड़ से फरार ??
    0
    न हो कहीं कचड़ा कहीं खाई
    नाली सफाई ताल खुदाई
    प्रकाश ब्यवस्था सड़क सफाई
    के बहाने
    बन्दर भालू,कुकुर कऊवा मनमाने
    सारे खातों की.. न कर दें सफाई
    नगर प्रशासन के ह्रदय में
    तुम जरूर- जरूर आना
    हे नव वर्ष मेरे भाई !!!!!!
    0
    रुपयों की गर्मी तो उतारा
    हवेली औ जेवर भी उतार देना,
    दम्भी हवशी मन की
    औकात..उघार देना,
    समेट कर कोई जाएगा नहीं
    सच को संवार देना…
    ऊपर से राम-राम
    भीतर पार्टी हित के काम
    न रहना मोदी साईँ
    2000 जना 5000 न बना देना
    टोपी-कुर्सी में भी
    गांव हित-गरीब हित में आना मेरे भाई।।
    0
    1813/15.@कॉपीराइट
    ~~|~~~~~~~|~~~~~|~~~~

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तुम पास नहीं हो तो कुछ भी नहीं है!
    तुम जहाँ हो मेरी हर खुशी वहीं है!
    खुद को ढूंढता हूँ अज़नबी सा मैं,
    मैं कहीं हूँ मेरी जिन्दगी कहीं है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • एक योषिता

    एक योषिता, नाम योगिता
    मनमोहक – मनहरण है
    उसकी रूप सुन्दरता।
    सागर की सी शूतलता,
    मेघों की सी चंचलता,
    बागों में इठलाती खेलती तितली सी,
    है उसकी सतरंगी छटा।
    एक योषिता – नाम योगिता।

    सपनो की है सेज सजाती,
    निशावर को नीस आकर जाती,
    माधवी राग मै चपके-चुपके,
    वह प्रेम गीत सुनाती।

    प्रकृति हो उन्मुक्त
    स्वरो की जादु से
    बहाती नव सरगम सरीता।
    एक योषिता – नाम योगिता।

    यक्ष कामनी देख शरमाएँ,
    स-स्पर्श से सुमन खिल जाएँ,
    मलय गंध पा पवन बावरा
    उन्मुक्त हो इठलाये,
    है, एैसी उसकी स-श्रृगांर सुन्दरता।
    एक योषिता – नाम योगिता।

    योगेन्द्र कुमार निषाद
    घरघोड़ा (छ.ग.)

  • मुक्तक

    मुक्तक

    दस्तक क्युँ करते हो बार बार,
    बिहड़ मन उपवन के सुने द्वार।
    न छेड़ो प्रेमागम की तार को,
    चुभत है दिल पे इनकी झनकार।

  • कविता

    ऐ चाँदनी रीतें तुम__
    युँ ही एैसे ही रहना।
    टिमटिमातें -जगमगीतें,
    झिलमिल सपना तुम लाना।
    हलकी – हलकी, शीतल – शीतल,
    पुरवाईयों का तुम संग बहना।
    इक चॉह जगा देती है……,
    सागर मे हो पानी जीतना।
    महकी-महकी अधखीली कलियों संग,
    रातों मे तुम-का बातें करना।
    सुमनों का खुशबु बिखरीना।
    और कहना है फुलो का,
    तुमसा नही कोई जग मे,
    तुम अम्बर का हो गहना।
    एै चाँदनी रातें……एैसे ही रहना।

  • हाथों की कलम

    हुँ मै तेरी हाथों की कलम
    गढ़ ले तु गीत नया जोगन।
    हर शब्द हो तीर लक्ष्य भेदी,
    मुक्त हो प्रेम का अटुट बंधन।

    आँखो के कोरो मे बसा ले,
    बना प्रित का स्वच्छ अंजन।
    मधुर चमन खिले पाक ईश्क का
    बागवां मे दहके सूर्ख सुमन।

    मन मन्दिर मे बसुं बन मुरत,
    खुशियों मे झुमे तेरी मुदित नयन।
    हुँ मै तेरी हाथों की कलम।
    गढ़ ले तु गीत नया जोगन

    योगेन्द्र कुमार निषाद,घरघोड़ा (छ.ग.)

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मुझे तेरे प्यार की आदत नहीं रही!
    तेरे इंतजार की आदत नहीं रही!
    जबसे देख लिया है बाँहों में गैर की,
    तेरे ऐतबार की आदत नहीं रही!

    रचनाकार- #मिथिलेश_राय

  • कविता

    धधकते लावा है मेरे सीने मे,
    जिसमे सेक रही हो रोटी
    कई महीने से।
    क्यॉ अब तक पकी नही ,तेरी तंदुरी,
    क्यॉ बाकी है अब भी ……,
    हवस की चाह तक पहुचने की दुरी।
    छोड यह छिछोली नही बस की तेरी।
    नही हर उस नजर को अधिकार,
    जिसकी आँखो में है हवस की खुमार।
    जानते है गर्म होता है जब बदन……
    समझ लिया करो उनको है हवस की बुखार।
    नाजुक दिल मे होता है, भडकते ज्वाला लिये
    वही बन जाती है एक दिन घातक
    देखा जाये तो यही है जीवन का नाटक।
    जिसे खेला जा रहा है,
    दुनिया के रंग मंचो पर
    सिर्फ जिन्दगी का मजा लेने के लिए।
    जहरीले ऑसु पीने के लिए।
    अधेरी राह पर चल पडे है लोग
    अस्पतालो के कुड़े दानों मे मरने के लिए।
    मगर ……..
    तुम मुझसे यह आस न करो,
    कि बचा लुगां तुम्हे,
    कोशिश करू भी तो
    यह न कर पाऊगां मैं
    क्योकि मै तो खुद एक आग हु।
    कैसे तेरी आग को बुझा पाऊगां मै।

    योगेन्द्र निषाद घरघोड़ा (छ.ग.)

  • मुक्तक

    तेरी आरजू मुझे सोने नहीं देती!
    तेरे सिवा गैर का होने नहीं देती!
    धड़कनों में दौड़ती है तेरी तमन्ना,
    तेरे प्यार को कभी खोने नहीं देती!

    #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

  • Dil ki aavaz

    Dil… dhadakta Hai sirf…..tumhare liye…
    Pata nahi wo din kab aayega…
    Ki jab …wo kahenge …hame bhi Pyar ….he
    Sirf tumhare… love you….

  • मुक्तक

    तेरी कभी दिल से ख्वाहिश नहीं जाती!
    तेरे ख्यालों की नुमाइश नहीं जाती!
    जाती नहीं हैं यादें मेरे जिगर से,
    तेरे दर्द की पैदाइश नहीं जाती!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी!
    जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी!
    हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को,
    अपने जिगर के जख्मों को सीते नहीं सभी!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • ik chirag

    Ik chirag fr se Jala..
    Meri zaat ko raushan krne….
    Mjhe fr se wakti zndagi dene..
    Lkn mjhe..
    Dr lgta hai us Roshni SE..
    Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna
    Dr lgta hai fr se mchlti ummid se..
    Chahti Hun andhere me khojana..
    Jise wo chirag b na Roshan kr ske..
    Khud bi andhere ka wajood bn Jana.
    Wo Andhera….
    Jise fr ujale ki pyas na ho..
    Jise koe wakti lamha Zar Zar na krsake..
    Jise khud ka b ehsas na ho..
    Jise fr ye farebi chirag mutassir na kr ske.
    Q ki Mai.
    Drti Hun us raat se..
    Jo Roshni ke bad ati hai..
    Mai drti Hun shama Dena wale hathon SE.
    Jo hi khud hi Roshni ko rakh krta hai….

  • ik chirag

    Ik chirag fr se Jala..
    Meri zaat ko raushan krne….
    Mjhe fr se wakti zndagi dene..
    Lkn mjhe..
    Dr lgta hai us Roshni SE..
    Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna
    Dr lgta hai fr se mchlti ummid se..
    Chahti Hun andhere me khojana..
    Jise wo chirag b na Roshan kr ske..
    Khud bi andhere ka wajood bn Jana.
    Wo Andhera….
    Jise fr ujale ki pyas na ho..
    Jise koe wakti lamha Zar Zar na krsake..
    Jise khud ka b ehsas na ho..
    Jise fr ye farebi chirag mutassir na kr ske.
    Q ki Mai.
    Drti Hun us raat se..
    Jo Roshni ke bad ati hai..
    Mai drti Hun shama Dena wale hathon SE.
    Jo hi khud hi Roshni ko rakh krta hai….

  • ik chirag

    Ik chirag fr se Jala..
    Meri zaat ko raushan krne….
    Mjhe fr se wakti zndagi dene..
    Lkn mjhe..
    Dr lgta hai us Roshni SE..
    Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna
    Dr lgta hai fr se mchlti ummid se..
    Chahti Hun andhere me khojana..
    Jise wo chirag b na Roshan kr ske..
    Khud bi andhere ka wajood bn Jana.
    Wo Andhera….
    Jise fr ujale ki pyas na ho..
    Jise koe wakti lamha Zar Zar na krsake..
    Jise khud ka b ehsas na ho..
    Jise fr ye farebi chirag mutassir na kr ske.
    Q ki Mai.
    Drti Hun us raat se..
    Jo Roshni ke bad ati hai..
    Mai drti Hun shama Dena wale hathon SE.
    Jo hi khud hi Roshni ko rakh krta hai….

  • yadein

    kuch pal hasi te..
    khamoshi me bi khushi ti..
    ye dil b awara ta.
    ye barish bi..

    wo dhndhli si yd..
    dhndhli ankho se jhlkti hai..
    fir sochti hun..ye dhndhli hai??
    mai ise bhul kyn nae jati..?
    dhndhli hoke ye khtm kyn ne hoti..

    shyd wo pal ruh me utar gya..
    pal ke log gzrtey gae..
    karwan chlta rha…
    par mai muntazir thi tere thahrne ki..
    fr zndagi thahr gae.
    dil thk gya..
    pao chlte rhte..
    dil thak gya..
    fir bi ye muskan chlti rae..
    jiti rae un viran yadon me..
    jo
    jin viraniyon me zindagi bsti thi meri..

    dr lgta hai kdm bdhate hue..
    dr lgta h yadein fr n bn jae saza.
    ji krta hai thahr jaun..
    s
    dil ke sth ye sanse bi tham jae..

    self written..
    hope u all will like it..

  • इक जिंदगी थी मेरे पास

    इक जिंदगी थी मेरे पास
    जो खो गयी है
    रखता था जिसको बड़े सहेजकर
    मेरी फटी जेब से
    इक दिन अचानक सरक गयी
    बिना आवाज किये
    आज तलक उसको ढूढ रहा हूं
    इक जिंदगी थी मेरे पास

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ!
    तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ!
    डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में,
    मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ!
    तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ!
    डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में,
    मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • Hain mein pagal hoon

    Pagal !! pagal !! pagal !!
    Hain mein pagal hoon
    Tou kya hua saari duniya pagal hai,
    Koi paiso k liye pagal hai ,
    tou koi izzat k liye pagal hai,
    Tou koi shohrat k liye pagal hai,
    Tou koi ishq mein pagal hai!!

    Tou Koi kapkapati thandh mein Border pe bharat mata ki jaykara patata hua woh jawan pagal hai,
    Taptapati grami mein bhukhe pet,hamare liye annaj ugata wo kisaan pagal hai,
    Andhero mein bhi Reh ker dusro ke ghar roshan kerne wala insane pagal hai,

    Sarak pe sote hua masum pe gari chadhane wala wo Salmaan pagal hai,
    Apne hi desh k sainiko pe pathar bersane wala wo naujawaan pagal hai,
    Hamare tax pe padh k videsh mein jane wale wo vidwaan pagal hai,
    Garibo ka khan chus tiroir bharne wala wo dhanwaan pagal hai!!

  • Tut Gaye woh spane

    Tut Gaye woh spane, badal gya kitabo ka itihash,Jinka pehle se hi tha aabhash!!
    Ho Gaye pure sapne unke, jo dekhe the sab k Mann k,
    Main phi laut aaya hu apni zindagi mein,
    Ker liya hu apna pura kaam,
    Bus Jita hu ek umeed k Sahare,
    Koi aayega, koi aayega, koi aayega!!
    Ya achanak ye sapno ka Bharat raam rajya ban jayega!!
    Dharm bhi höga,Majhab bhi hoga,
    Bus nahi höga tou ye duriya ye ehsaash

  • Tut Gaye woh spane

    Tut Gaye woh spane, badal gya kitabo ka itihash,Jinka pehle se hi tha aabhash!!
    Ho Gaye pure sapne unke, jo dekhe the sab k Mann k,
    Main phi laut aaya hu apni zindagi mein,
    Ker liya hu apna pura kaam,
    Bus Jita hu ek umeed k Sahare,
    Koi aayega, koi aayega, koi aayega!!
    Ya achanak ye sapno ka Bharat raam rajya ban jayega!!
    Dharm bhi höga,Majhab bhi hoga,
    Bus nahi höga tou ye duriya ye ehsaash

  • मुक्तक

    मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
    मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
    दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
    यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है!
    मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है!
    दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी,
    यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • Manzil

    Sun lo bhaiya kehti hoon
    Man ki baat main sachhi
    Koi aata thal pe
    Koi vayu koi jal
    Koi chalta chaal kachhue ki
    Koi ude mast malang
    Manzil sabki ek hi bhaiya
    Woh manzil hai masti

    Maano na tum baat meri
    Padho santo muniyo ke chhand
    Sabka kehna ek hi bhaiya
    Vaastav mein jeevan hai
    Anand hi anand

  • Sadak

    Khudi sadak par khud Gaye he aaate Armaan mere
    Chala tha aasmaan ki taraf, khude Gadde me for pade

  • मुक्तक

    मेरे गम को मेरा ठिकाना मिल जाता है!
    तेरे ख्यालों का आशियाना मिल जाता है!
    जब दिल को सताती है प्यास तमन्नाओं की,
    मेरी तिश्नगी को मयखाना मिल जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है!
    वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है!
    तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का,
    तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आन्शु

    Naaraj nhi tujse.
    Bus khud se nirash hu..
    Ki itna pyar dene k bavjud bhi.
    Tune sirf ashu die..
    #devil

  • आन्शु

    Naaraj nhi tujse.
    Bus khud se nirash hu..
    Ki itna pyar dene k bavjud bhi.
    Tune sirf ashu die..
    #devil

  • माहोबत नही वजूद मे

    ठहरना मुश्किल हैं
    ठहर गये तो माहोबत हौ जाएगी..
    ठहरने की अब मुझमे हिम्मत नही..
    ऑर माहोबत मेरे वजुद मे लिखी नही…

  • मुक्तक

    मुक्तक

    हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है!
    वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है!
    तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का,
    तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    कबतक देखता रहूँ तुमको देखकर?
    कबतक सोचता रहूँ तुमको सोचकर?
    हर साँस गुजरती है मेरे जिस्म की,
    मेरे लबों की राह से दर्द बनकर!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • स्पर्श

    जीवन की पथरीली राहों पर,
    जब चलते-चलते थक जाऊँ,
    पग भटके और घबराऊँ मैं,
    तब करुणामयी माँ के आँचल सा स्पर्श देना,
    ऐ ईश मेरे ।

    जब निराश हो,
    किसी मोड़ पर रूक जाऊँ,
    हताश हो, कुण्ठाओं के जाल से,
    न निकल पाऊँ मैं,
    तब सूर्य की सतरंगी किरणों सा,
    स्फूर्तिवान स्पर्श दे,
    श्री उमंग जगा देना,
    ऐ ईश मेरे।

    जब चंचल मन के अधीन हो,
    अनंत अभिलाषाओं के क्षितिज में,
    भ्रमण कर भरमाऊँ मैं,
    तब गुरु सम निश्छल ज्ञान का स्पर्श देना,
    ऐ ईश मेरे ।

    जब जीवन के रहस्यमय सागर में,
    डूबूँ उतराऊँ और गोते लगा-लगा,
    थक जाऊँ मैं,तब नाविक बन,
    पूर्ण प्रेम का स्पर्श दे,
    मेरी नईया तीर लगाना,
    ऐ ईश मेरे ।।

  • मुक्तक

    मुक्तक

    कभी तो किसी शाम को घर चले आओ!
    कभी तो दर्द से बेखबर चले आओ!
    रात गुजरती है मयखाने में तेरी,
    राहे-बेखुदी से मुड़कर चले आओ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
    #मात्रा_भार_22

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मेरा हरेक आलम ख्वाब तेरा लगता है!
    तेरा ख्याल सर्दियों में धूप सा जलता है!
    जब भी सताती हैं सरगोशियाँ इरादों की,
    नींद के आगोश में दर्द तेरा चलता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल
    उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है,
    मेरी दौलत मेरी पहचान चली जाती है।

    जिंदगी रोज गुजरती है यहाँ बे मक़सद,
    कितने लम्हों से हो अंजान चली जाती है।

    तीर नज़रों के मेरे दिल में उतर जाते हैं,
    चैन मिलता ही नहीं जान चली जाती है।

    याद उनकी जो भुलाने को गए मैखाने,
    वो तो जाती ही नहीं शान चली जाती है।

    एक रक़्क़ासा घड़ी भर को आ के महफ़िल में,
    तोड़कर कितनो के ईमान चली जाती है।

    खोए रह जाते हैं हम उसके तख़य्युल में ‘मिलन’,
    और वो ‘गुलशन ए रिज़वान’ चली जाती है।

    बेमक़सद-लक्ष्यहीन
    रक़्क़ासा-नाचने वाली
    तख़य्युल-याद
    गुलशन ए रिज़वान-स्वर्ग के बाग़ सी खूबसूरत सुंदरी,
    —– मिलन ‘साहिब’।

  • मुक्तक

    मुक्तक

    होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ!
    तेरी तमन्नाओं की जागीर से मिलता हूँ!
    नजरों को घेर लेता है यादों का समन्दर,
    चाहत की बिखरी हुई तकदीर से मिलता हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ!
    तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ!
    जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के,
    जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • Kar Guzar Jane Ka Jis Din Housala Ho Jayega

    Kar Guzar Jane Ka Jis Din Housala Ho Jayega

    Kar guzar jane ka jis din housala ho jayega
    Is zamee’n se us falak tak rasta ho jayega

    Tu baja le raag saare waqt jab tak sath hai
    Zindagi ka saaz ik din besuraa ho jayega

    Shaq kabhi rahne nahi deta salamat dosti
    Rafta-rafta do dilo’n me faaslaa ho jayega

    Pahli tankhwa’h dekh ro di maa ne kab socha tha ye
    Itni jaldi phool sa baccha bada ho jayega

    Ishq ki fitrat agar yun hi rahi sahab to fir
    har diwana ik n ik din diljalaa ho jayega
    ….
    कर गुज़र जाने का जिस दिन हौसला हो जायेगा
    इस ज़मीं से उस फ़लक़ तक रास्ता हो जायेगा

    तू बजा ले राग सारे वक़्त जब तक साथ है
    ज़िन्दगी का साज़ इक दिन बेसुरा हो जायेगा

    शक कभी रहने नहीं देता सलामत दोस्ती
    रफ़्ता-रफ़्ता दो दिलों में फासला हो जायेगा

    पहली तनख्वाह देख रो दी माँ ने कब सोचा था ये
    इतनी जल्दी फूल सा बच्चा बड़ा हो जायेगा

    इश्क की फितरत अगर यूँ ही रही ‘साहब’ फिर
    हर दिवाना इक न इक दिन दिलजला हो जायेगा
    ….
    साहब इन्दौरी

  • आदत

    तुम्हारी मुस्कान जब बनी मेरी आदत..
    तुम बने मेरी क़यामत तक की इबादत..
    यादों की लहरें जब बनीं मेरा सहारा..
    डूबती रही जान, दूर हुआ किनारा..

  • मुक्तक

    मुक्तक

    तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ!
    तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ!
    जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के,
    जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मुक्तक

    यादों की राह में सवाल आ जाता है!
    तेरी रुसवाई का ख्याल आ जाता है!
    जब भी ख्वाब आते हैं मेरी आँखों में,
    तेरी जुदाई का मलाल आ जाता है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • छोटी सी बात

    छोटी सी बात

    ठहरी हुई है वो शाम इधर ही,
    जिन शाम हम मिले थे ।
    इन शाम की खुशबू से ,
    महकता रहता पहर आठो ।
    वो स्वर्ग ही क्या जिनमें प्यार न हो।
    वो प्यार ही क्या जिनमें हम न हो।

  • छोटी सी बात

    छोटी सी बात

    दिल की जुबां

  • अच्छाई नहीं मिलती

    झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती….
    बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती….

    आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब,
    लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को फिर भी दवाई, नहीं मिलती….

    सर्द रातों मे सड़कों पे ठिठुर रहें हैं इंसान यहाँ पर,
    सुकून की नींद तो वो भी सो जाए, पर रज़ाई, नहीं मिलती….

    यूँ तो हर रोज़ हर गली हर नुक्कड़ पर होते है दंगे यहाँ,,
    फिर भी महाभारत-रामायण सी धरम की लड़ाई, नहीं मिलती….

    तिजारत बन कर रह गयी है, शिक्षा आज के जमाने मे,
    गुरुकुलों मे होने वाली वो शास्त्रों की पढ़ाई, नहीं मिलती….

    मिलावट के इस दौर मे, कुछ भी अच्छा नहीं मिलता ‘हरीश’,
    गाय-भैंस तो आज भी वही हैं, पर वो मलाई, नहीं मिलती….

    सिसक रही इंसानियत को हो सके तो बचा लो वतनवासियों,
    लुटी जो कहीं किसी की आबरू, तो भरपाई, नहीं मिलती….

  • अच्छाई नहीं मिलती

    झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती….
    बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती….

    आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब,
    लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को फिर भी दवाई, नहीं मिलती….

    सर्द रातों मे सड़कों पे ठिठुर रहें हैं इंसान यहाँ पर,
    सुकून की नींद तो वो भी सो जाए, पर रज़ाई, नहीं मिलती….

    यूँ तो हर रोज़ हर गली हर नुक्कड़ पर होते है दंगे यहाँ,,
    फिर भी महाभारत-रामायण सी धरम की लड़ाई, नहीं मिलती….

    तिजारत बन कर रह गयी है, शिक्षा आज के जमाने मे,
    गुरुकुलों मे होने वाली वो शास्त्रों की पढ़ाई, नहीं मिलती….

    मिलावट के इस दौर मे, कुछ भी अच्छा नहीं मिलता ‘हरीश’,
    गाय-भैंस तो आज भी वही हैं, पर वो मलाई, नहीं मिलती….

    सिसक रही इंसानियत को हो सके तो बचा लो वतनवासियों,
    लुटी जो कहीं किसी की आबरू, तो भरपाई, नहीं मिलती….

  • मुक्तक

    मुक्तक

    मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो?
    मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो!
    यादों की आहट रुला देती है मुझको,
    #साँसे_जिस्म को गमों से जोड़ गये हो!

    #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

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