मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में?
नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में!
सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें,
बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में?
नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में!
सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें,
बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में?
नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में!
सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें,
बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर!
टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर!
रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में,
तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर!
टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर!
रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में,
तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर!
टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर!
रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में,
तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी जिन्दगी में हरपल कमी सी है!
अश्क की आँखों में हरपल नमी सी है!
दौर है कायम अभी तेरी यादों का,
दर्द की ख्यालों में हरपल जमीं सी है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरे सितमगर फिर से कोई वादा न करो!
मेरे दिल़ को तोड़ने का इरादा न करो!
क्यों इम्तिहान लेते हो कई बार सब्र का?
चाहत की बेचैनी को और ज्यादा न करो!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जब पास तेरे कुछ ना हो
उम्मीद किसी से कुछ ना हो
अमावस की रात हो
काला घाना अंधकार हो
तब खुद को तू सवारना
हिम्मत कभी ना हारना।
जब मायूसियो की आंधी हो
मुश्किलो की सूनामी हो
दुखों का चक्रवात हो
और ना किसी का साथ हो
तब खुद को तू पुकारना
हिम्मत कभी ना हारना।
जब अपेक्षाएँ ना रहे
संवेदनाएँ ना रहे
लालच के मायाजाल में भावनाऐ ना रहे
तब खुद को तू ललकारना
हिम्मत कभी ना हारना।
जब सावन तुझे पतझङ लगे
चुनौतियों से डर लगे
देखे दिखाए रास्ते जब तुझे जंगल लगे
तब होसले की धार से
एक नई डगर निकलना
हिम्मत कभी ना हारना।
मेरी आंखों में झाँक लो आकर
जलते ख्वाब जो देखना चाहो।
जख्म जिन्दा है तेरी याद भी आ जाती है!
बेकरार पल में तेरी आरजूू सताती है!
मैं तन्हा हो गया हूँ गमें-अंजाम से मगर,
ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी तस्वीर से मेरी नजर हटती ही नहीं!
तेरे दीदार की हसरत कभी मिटती ही नहीं!
मैं जोड़ता रहता हूँ तेरी यादों के टुकड़े,
गम-ए-इंतजार की तन्हाई कटती ही नहीं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तू जबसे गैर की बाँहों में चली गयी है!
जिन्दगी जख्मों की आहों में चली गयी है!
यादें चुभती हैं जिग़र में शीशे की तरह,
शाम मयखानों की राहों में चली गयी है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरी जिंदगी को अंजान सा रहने दो!
दिल में जुस्तजू का तूफान सा रहने दो!
टूटे हुए से ख्वाब हैं पलकों में लेकिन,
अश्कों में यादों को निशान सा रहने दो!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कितना भी गिरूँ जीवन में तू ताकत देना उठने की,
ऐ खुदा
अस्त सूरज सा खूबसूरत दिखूँ
और चढ़ते सूरज सा ऊर्जावान।।
-मनीष
एक तू ही नहीं है जो वक्त से हारा है!
हर शख्स दुनिया में हालात का मारा है!
हर-पल बदल रही है तस्वीर-ए-जिंदगी,
टूटते दिलों का हैरान सा नजारा है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तुम मेरी जिन्दगी का ऐतबार बन गयी हो!
तुम मेरी मंजिलों का इंतजार बन गयी हो!
शामों-सहर नज़र आता है रंग यादों का,
तुम मेरी तमन्नाओं का संसार बन गयी हो!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं खुद को यादों में भुलाकर रह गया हूँ!
मैं खुद को दर्द से रूलाकर रह गया हूँ!
हर कोशिश नाकाम है दीदार की जबसे,
मैं अश्क को आँखों में लाकर रह गया हूँ!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी चाहत मेरे गुनाह की तरह है!
तेरी तिश्नगी दिल में आह की तरह है!
खींच लेती है खुशबू तेरे ख्यालों की,
तेरी याद बेखुदी की राह की तरह है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरी हर कोशिश तुम्हें पाने के लिए थी!
तेरी जुल्फों के तले आने के लिए थी!
लेकिन समझ न पाया मैं तेरी दिल्लगी,
तेरी हर अदा तो तड़पाने के लिए थी!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हमें दर्द जिंदगी में मिलते रहेंगे!
हम राहे-मंजिलों पर चलते रहेंगे!
डरते नहीं किसी से रंग मौसमों के,
फूल तमन्नाओं के खिलते रहेंगे!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मुझको तेरी चाहते-नजर चाहिए!
दिल में तमन्नाओं की लहर चाहिए!
झिलमिलाते ख्वाब हों जुगनू की तरह,
मुझको यादों का वही शहर चाहिए!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं कैसे कहूँ कि तेरा दीवाना नहीं रहा?
मैं कैसे कहूँ कि तेरा परवाना नहीं रहा?
मुझे खींचती है मधुशाला तेरे नयनों की,
मैं कैसे कहूँ कि आशिके-पैमाना नहीं रहा?
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
बंद होकर भी आँखें कुछ बोल जाती हैं!
राह तमन्नाओं की कुछ खोल जाती हैं!
रोशनी जल जाती है यादों की शक्ल में,
दर्द की लहरें जेहन में डोल जाती हैं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरी शामें-तन्हाई न खाली जाएगी!
मेरी जुबां पे फिर से आह डाली जाएगी!
सोहबत बुरी है मेरी दिलजलों से साकी,
मयखानों से गम की राह निकाली जाएगी!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तुम मेरी जिन्दगी से यादों को ले लो!
तुम मेरे दर्द की फरियादों को ले लो!
मैं कब तलक सहता रहूँ आहे-तमन्ना?
तुम मेरे ख्यालों से इरादों को ले लो!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
सोचता हूँ आज तुमसे मुलाकात कर लूँ!
रात की तन्हाई में तुमसे बात कर लूँ!
तेज कर लो तुम फिर से तीर-ए-नज़र को,
जख्मों को सह लेने की करामात कर लूँ!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
He did not raise his hands
He did not push me back
He did not come closer to me
He did not touch my body
Trust me,
He did nothing abusive- Physically
Yet, he managed to rape me
Harass me
Humiliate me
And,
It is disturbing
It is making me question myself
It is making me question, why me?
It is one such nightmare
And trust me
He did rape me
It is the mental rape
That he did
Not once, but constantly!!!
Walk around
Walk onto all the corners of round
Life is beautiful
Just don’t bother who’s around
Don’t think of beauty
Instead, see the beauty
Life will bring you everything
Or it’s already given to you
Just see around
Here, it’s not only words which are gorgeous
But in reality the world here is real magnificence
So, just look around
Walk around
मेरी जिंदगी गमों से डर पाएगी क्या?
दिल में ख्वाहिश गैऱ की कर पाएगी क्या?
सब्र अभी जिन्दा है जख्मों को सहने का,
वस्ल से पहले तमन्ना मर पाएगी क्या?
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी यादों के कदम रुकते नहीं कभी!
तेरी जुल्फों के सितम रुकते नहीं कभी!
रोशनी उम्मीदों की जलती है हरदम,
तेरी चाहत के वहम रुकते नहीं कभी!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय


‘गीत विधा ‘के लिए समर्पित मध्यप्रदेश की साहित्यिक, साँस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था “सृजक संसद ” के तत्वावधान में ,आयोजित काव्योत्सव में सुप्रतिष्ठित गीतकार जानकी प्रसाद विवश का हिंदी साहित्य में गीत विधा मे विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया ।ं
तेरी यादों के कदम रुकते नहीं कभी!
तेरी जुल्फों के सितम रुकते नहीं कभी!
रोशनी उम्मीदों की जलती है हरदम,
तेरी चाहत के वहम रुकते नहीं कभी!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Jo hai, usi me khud rhe Diwane….
Jo hai,. usi me khud rhe Diwane.
Yha to Asma k pas bhi zmi nhi….
मैं जब कभी शाम की तन्हाइयों में चलता हूँ!
मैं अपने ख्यालों की खामोशियों में ढलता हूँ!
जब जिंदगी जलती है हालात की ज्वाला से,
मैं वक्त की दीवारों पर बर्फ सा पिघलता हूँ!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरे आ जाने से फिर बहार आ गयी है!
हरतरफ तेरी खुशबू खुशगवार आ गयी है!
वीरान था आलम मेरी तमन्नाओं का,
मेरी जिन्दगी फिर से एक बार आ गयी है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हमें आप जब कभी याद आने लगते हैं!
हमें दर्द ख्वाहिशों के सताने लगते हैं!
यूँ पास आ जाते हो मेरी निगाहों में,
हमें ख्वाब गुफ्तगूं के जलाने लगते हैं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कौन है किसी का हमदर्द इस जमाने में?
कैद ख्वाहिशें हैं हालात के तहखाने में!
किसी को कहीं खौफ है हर वक्त उजालों से,
कोई मश़गूल है ख्वाबों को जलाने में!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हर घड़ी तेरा तलबगार हूँ कबसे!
तेरे इश्क में गिरफ्तार हूँ कबसे!
अब कोई खौफ नहीं है अंजाम का,
वक्ते-सितम के लिए तैयार हूँ कबसे!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
शायद मेरे गम की कभी रात आखिरी हो!
मेरी तन्हाई से मुलाकात आखिरी हो!
यूँ कबतलक चुभती रहेगी तेरी जुस्तजू?
तेरी यादों से कभी तो बात आखिरी हो!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
सितम के दौर में सभी यार भूल जाते हैं!
राह-ए-वफा को वफादार भूल जाते हैं!
जब करवटें लेती है तस्वीर-ए-जिंदगी,
उम्र भर किसी का इंतजार भूल जाते हैं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी नजर में कबसे प्यार सा कुछ है!
तेरी अदाओं में इजहार सा कुछ है!
हर वक्त ढूंढती हैं किसी को करवटें,
तेरी बाँहों को इंतजार सा कुछ है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं अपने सितमगर को सता कर आया हूँ!
मैं आज उनको बेवफा बता कर आया हूँ!
जख्मों को भूल जाना बहुत मुश्किल है मगर,
मैं रास्ता मयखाने का पता कर आया हूँ!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हर किसी के दिल में किसी की आस है!
जिंदगी में हर पल किसी की प्यास है!
क्यों चाँद रहता है मगर तन्हाई में?
जब चाँदनी की रोशनी उसके पास है!
रचनाकार- #मिथिलेश_राय
जिसतरह फूलों को मुस्कुराहट ढूंढ लेती है!
मुझको तेरी यादों की आहट ढूंढ लेती है!
जब घेरती हैं नजरों को तस्वीरें दर्द की,
मुझको मयकशी की सुगबुगाहट ढूंढ लेती है!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

एक नज़र चाह कर भी मिलाने को तैयार नहीं,
ज़िन्दगी एक पल भी सर उठाने को तैयार नहीं,
नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी ज़िन्दगी को कैसे,
क्यों एक लम्हा भी कोई ठहर जाने को तैयार नहीं।
राही (अंजाना)
काश मैंने तुमको पहचान लिया होता!
तेरी बेवफाई को जान लिया होता!
यूँ बेवसी न मिलती कभी तन्हाई की,
तेरी अदा को दिल्लगी मान लिया होता!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरे दिल की बात बदल न जाए कहीं!
वक्ते-मुलाकात निकल न जाए कहीं!
कब तक करूँ यकीन तेरे प्यार पर?
तन्हाई में रात ढल न जाए कहीं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरे दिल की बात बदल न जाए कहीं!
वक्ते-मुलाकात निकल न जाए कहीं!
कब तक करूँ यकीन तेरे प्यार पर?
तन्हाई में रात ढल न जाए कहीं!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तुमने स्वीकार किया ना किया..
मैने तो अपना मान लिया !
प्रिय मन में मुझे बसाना था..
तुम भ्रांति ह्रदय में बसा बैठी !!
~~~
प्रिय स्नेह निमन्त्रण दिया तुम्हे..
तुमने क्यूँ उसको टाल दिया !
मेरे अरमानों की पुष्प लता को..
यूँ ही किनारे डाल दिया !!
~~~
मैं स्वयम् ही अपना दोषी हूँ..
इक तरफ़ा तुमसे प्यार किया !
ना कुछ सोचा, ना समझा कुछ..
बस जा तुमसे इज़हार किया !!
~~~
वो एकल प्रणय निवेदन ही..
कर गया मेरे मन को घायल !
तुम समझ ना पाई मर्म मेरा..
और व्यग्र फ़ैसला ले बैठी !!
~~~
अब ऐसे प्यार की बातों का..
क्या मतलब है क्या मानी है !!
मैने क्या चाहा समझाना..
तुम जाने कुछ और समझ बैठी !!
प्रिय मन में मुझे बसाना था..
तुम भ्रांति ह्रदय में बसा बैठी !!
x-x-x-x-x
*deovrat – 12.03.2018 (c)
तेरे बगैर मैं तो तन्हा जिया करता हूँ!
शामो-सहर मैं तुमको याद किया करता हूँ!
ख़ुद को खो चुका हूँ इतना तेरे प्यार में,
नींद में भी तेरा मैं नाम लिया करता हूँ!
मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.