जो मस्तियों का दौर था वो आज नहीं है! अब जिन्दगी में शौक का मिजाज नहीं है! टुकड़ों में नजर आती हैं वस्ल की रातें, अब जुस्तजू में जोश का अंदाज नहीं है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जो मस्तियों का दौर था वो आज नहीं है! अब जिन्दगी में शौक का मिजाज नहीं है! टुकड़ों में नजर आती हैं वस्ल की रातें, अब जुस्तजू में जोश का अंदाज नहीं है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आज अपने गम को मिटाने निकल पड़ा हूँ! आज तेरी याद को भुलाने निकल पड़ा हूँ! जाग उठी हैं रौनकें शामे–मयकदों की, आज लबों की प्यास बुझाने निकल पड़ा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आज हवा भी जरा सी नम हो गयी है! गमे–जुदाई भी बेरहम हो गयी है! धड़कनों में उठ रही है दर्द की लहर, आँखों में नींद भी कुछ कम हो गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Muskurahat thi unk chehre pe, Or kajal bhi bigad rha tha, Unki aankho ka. #hemmu’s #collection
मैं कभी-कभी निकलता हूँ ज़माने में! शामे–गुफ्तगूं होती है मयखाने में! थक जाती है महफिल भी सब्र से मेरे, वक्त तो लगता है दर्द को भुलाने में! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मत करो तुम कोशिश जब वो आसान हो! खोज लो उजाले जब कभी वीरान हो! चाँद खींच लेना प्यार से आगोश में, राहे–जिन्दगी न तेरी सूनसान हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (#मात्रा_भार_22)
तन्हा रात हुई है फिर कुछ होने को है! किसी की यादों में जिन्दगी खोने को है! चाँद तमन्नाओं का फिर आया है नजर, मेरी जुस्तजू इरादों की रोने को है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
कभी न कभी हमको हमारा मिल ही जाता है! कभी न कभी हमको सहारा मिल ही जाता है! जब भी चल पड़ते हैं कदम हिम्मत की राह पर, डूबती कश्ती को किनारा मिल ही जाता […]
क्यों तुम भटक गये हो वस्ल की राहों में? क्यों तुम बिखर गये हो दर्द की आहों में? ढूँढती हैं मंजिलें रफ्तार हिम्मत की, क्यों तुम नजरबंद हो खौफ की बाँहों में? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जबसे तेरे दर्द का पैगाम आ गया है! तबसे मेरी जिन्दगी में जाम आ गया है! मैं क्या करूँ नुमाइश अपनी तमन्नाओं की? जब तेरा बेवफाओं में नाम आ गया है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तुम मेरी जिन्दगी में खास बन गये हो! तुम मेरी मंजिलों की प्यास बन गये हो! हर वक्त तड़पाते हो आकर यादों में, तुम मेरे दर्द का एहसास बन गये हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (23)
अगर बैठना हैं, महोबत की नाव मे, तो एक बार हर किनारे से रिस्ते-नाते तोड़ने होंगे.. #devil
तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया! अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया! नींद भी आती नहीं है तेरी याद में, करवटों में दर्द को जगाकर चला गया! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! तड़पाते हालात की रवानी होते हैं! कभी होते नहीं जुदा यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
कोई रोके लाख मगर सवेरा नहीं रुकता! सामने उजालों के अंधेरा नहीं रुकता! हम रोक लेंगे हिम्मत से तूफाने-सितम को, जुल्मों के खौफ से कभी बसेरा नहीं रुकता! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
Na nind aati tum bin, Na khana khate tum bin, Na kuch or acha lgta tum bin. Viraan ho gye tum bin, smj nhi aata kon h hum tum bin, Na jee skenge tum bin, […]
तेरी याद कभी-कभी मुस्कान देती है! तेरी याद कभी-कभी तूफान देती है! टूटी हुई चाहत भी जुड़ जाती है कभी, कभी-कभी हर आलम सूनसान देती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी आज भी मुलाकात का असर है! तेरे ख्यालों की हर बात का असर है! नींद उड़ जाती है यादों की चोट से, तड़पाते लम्हों की रात का असर है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय
मैं क्या भरोसा कर लूँ इस ज़हाँन पर? डोलता यकीन है टूटते इंसान पर! हर किसी को डर है तूफाने-सितम का, आदमी जिन्दा है वक्त के एहसान पर! रचनाकार -#मिथिलेश_राय
चलते हुए कदमो के निशां को बदलते हुए देखा हमने। हर रिस्ते नातों को आज बदलते हुए देखा हमने। जो कभी टूट कर चाहा करती थी जमाने हमें, आज उसे ही छोड़ जमाने , जाते […]
कविता ***************************** ये जीवन सरिता ,तुम युं ही बहते रहना। कल कल कर मधुर नांद सै बहते रहना। गर.. लाख मुस्किलें हो राहो मे पर भी, एक लक्ष्य बना ,और आगे बडते रहना । गर […]
कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को […]
कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को […]
हरबार तुम एक ही नादानी करते हो! हर किसी से जिक्र तुम कहानी करते हो! हँसते हुए सहते हो अपनों के सितम को, हरबार तुम अपनी कुर्बानी करते हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कैसे कहूँ मैं गमज़दा नहीं होता हूँ! कैसे कहूँ मैं यादों में नहीं खोता हूँ! जब अश्कों का सागर है मेरी आँखों में, कैसे कहूँ मैं तेरे लिए नहीं रोता हूँ! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मैं सोचता हूँ तेरा इरादा छोड़ दूँ! तुमसे प्यार करने का वादा तोड़ दूँ! यूँ कबतक देखता रहूँ तेरी अदाऐं, मैं तेरी निगाहों का इशारा मोड़ दूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कौन मेरी तन्हाई में हमारा बनेगा? नाकामियों के दौर में बेचारा बनेगा! टूटती मीनार हूँ अपने आशियाने की, अब कौन इन दीवारों का सहारा बनेगा? मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
भुज पे आई कहा से,एै रूपसी, नेह निश्छल निर्मल लिये प्यारी। स्वरों की हो,शायद तुम जादुगरी। रीझाती उर-उर तुम क्यों हमारी। तितली की सी लगती,होतुम बागो की, वादियों मे दहकने लगी,देख तुम्हे सुर्ख सुमन बावरी। […]
तेरा जब मुझे रुखसार याद आता है! तेरे हुस्न का दीदार याद आता है! यादों से जुड़ जाती हैं वक्त की कड़ियाँ, सब्र का दिल से तकरार याद आता है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
मुझे तेरी मुलाकात याद रहती है! तेरी नजरों की बात याद रहती है! आज भी तड़पाती हैं तेरी अदाऐं, तेरे ख्यालों की रात याद रहती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Khola mon khola chithi Seye bristi makha smriti Seye Coffee seye adda Seye sporso amay kore Aschorcho Phirey ashuk na seye bela Jakhun tumi sudhu amar Tomay khapabona kotha dichi Eye jibon bastotay thomkey darak […]
एक नई कविता”अंग्रेजी न्यू ईयर”के आगमन पर …समर्पित (डा0दिलीप गुप्ता,घरघोड़ा.रायगढ़.छ0ग0) 0 **स्वागत हे नव वर्ष क्या लेकर आए हो.. विषाद की बोरियां या बिंडलों मे हर्ष !! या ओढ़कर भेंड़ की खाल आये हो !! […]
तुम पास नहीं हो तो कुछ भी नहीं है! तुम जहाँ हो मेरी हर खुशी वहीं है! खुद को ढूंढता हूँ अज़नबी सा मैं, मैं कहीं हूँ मेरी जिन्दगी कहीं है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
एक योषिता, नाम योगिता मनमोहक – मनहरण है उसकी रूप सुन्दरता। सागर की सी शूतलता, मेघों की सी चंचलता, बागों में इठलाती खेलती तितली सी, है उसकी सतरंगी छटा। एक योषिता – नाम योगिता। सपनो […]
मुक्तक दस्तक क्युँ करते हो बार बार, बिहड़ मन उपवन के सुने द्वार। न छेड़ो प्रेमागम की तार को, चुभत है दिल पे इनकी झनकार।
ऐ चाँदनी रीतें तुम__ युँ ही एैसे ही रहना। टिमटिमातें -जगमगीतें, झिलमिल सपना तुम लाना। हलकी – हलकी, शीतल – शीतल, पुरवाईयों का तुम संग बहना। इक चॉह जगा देती है……, सागर मे हो पानी […]
हुँ मै तेरी हाथों की कलम गढ़ ले तु गीत नया जोगन। हर शब्द हो तीर लक्ष्य भेदी, मुक्त हो प्रेम का अटुट बंधन। आँखो के कोरो मे बसा ले, बना प्रित का स्वच्छ अंजन। […]
मुझे तेरे प्यार की आदत नहीं रही! तेरे इंतजार की आदत नहीं रही! जबसे देख लिया है बाँहों में गैर की, तेरे ऐतबार की आदत नहीं रही! रचनाकार- #मिथिलेश_राय
धधकते लावा है मेरे सीने मे, जिसमे सेक रही हो रोटी कई महीने से। क्यॉ अब तक पकी नही ,तेरी तंदुरी, क्यॉ बाकी है अब भी ……, हवस की चाह तक पहुचने की दुरी। छोड […]
तेरी आरजू मुझे सोने नहीं देती! तेरे सिवा गैर का होने नहीं देती! धड़कनों में दौड़ती है तेरी तमन्ना, तेरे प्यार को कभी खोने नहीं देती! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं
Dil… dhadakta Hai sirf…..tumhare liye… Pata nahi wo din kab aayega… Ki jab …wo kahenge …hame bhi Pyar ….he Sirf tumhare… love you….
तेरी कभी दिल से ख्वाहिश नहीं जाती! तेरे ख्यालों की नुमाइश नहीं जाती! जाती नहीं हैं यादें मेरे जिगर से, तेरे दर्द की पैदाइश नहीं जाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी! जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी! हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को, अपने जिगर के जख्मों को सीते नहीं सभी! मुक्तककार – […]
Ik chirag fr se Jala.. Meri zaat ko raushan krne…. Mjhe fr se wakti zndagi dene.. Lkn mjhe.. Dr lgta hai us Roshni SE.. Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna Dr lgta […]
Ik chirag fr se Jala.. Meri zaat ko raushan krne…. Mjhe fr se wakti zndagi dene.. Lkn mjhe.. Dr lgta hai us Roshni SE.. Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna Dr lgta […]
Ik chirag fr se Jala.. Meri zaat ko raushan krne…. Mjhe fr se wakti zndagi dene.. Lkn mjhe.. Dr lgta hai us Roshni SE.. Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna Dr lgta […]
kuch pal hasi te.. khamoshi me bi khushi ti.. ye dil b awara ta. ye barish bi.. wo dhndhli si yd.. dhndhli ankho se jhlkti hai.. fir sochti hun..ye dhndhli hai?? mai ise bhul kyn […]
इक जिंदगी थी मेरे पास जो खो गयी है रखता था जिसको बड़े सहेजकर मेरी फटी जेब से इक दिन अचानक सरक गयी बिना आवाज किये आज तलक उसको ढूढ रहा हूं इक जिंदगी थी […]
तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ! तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ! डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में, मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
तेरे बगैर आज मैं तन्हाई में हूँ! तेरे बगैर दर्द की गहराई में हूँ! डूबा हूँ कबसे जाम के पैमाने में, मयकशी की झूमती अंगड़ाई में हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
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