मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है! मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है! दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी, यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है! मुक्तककार – […]

मेरी तन्हाई में जब भी गुजर होती है! मेरे ख्यालों में ख्वाबों की सहर होती है! दर्द की कड़ियों से जुड़ जाती है जिन्दगी, यादों की दिल में चुभती सी लहर होती है! मुक्तककार – […]

मेरे गम को मेरा ठिकाना मिल जाता है! तेरे ख्यालों का आशियाना मिल जाता है! जब दिल को सताती है प्यास तमन्नाओं की, मेरी तिश्नगी को मयखाना मिल जाता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है! वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है! तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का, तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

हवा सर्दियों की पैगामे-गम ले आती है! वक्ते-तन्हाई में तेरा सितम ले आती है! तूफान नजर आता है अश्कों में यादों का, तेरी चाहत को पलकों में नम ले आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जीवन की पथरीली राहों पर, जब चलते-चलते थक जाऊँ, पग भटके और घबराऊँ मैं, तब करुणामयी माँ के आँचल सा स्पर्श देना, ऐ ईश मेरे । जब निराश हो, किसी मोड़ पर रूक जाऊँ, हताश […]

कभी तो किसी शाम को घर चले आओ! कभी तो दर्द से बेखबर चले आओ! रात गुजरती है मयखाने में तेरी, राहे-बेखुदी से मुड़कर चले आओ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय #मात्रा_भार_22

मेरा हरेक आलम ख्वाब तेरा लगता है! तेरा ख्याल सर्दियों में धूप सा जलता है! जब भी सताती हैं सरगोशियाँ इरादों की, नींद के आगोश में दर्द तेरा चलता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ग़ज़ल उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है, मेरी दौलत मेरी पहचान चली जाती है। जिंदगी रोज गुजरती है यहाँ बे मक़सद, कितने लम्हों से हो अंजान चली जाती है। तीर नज़रों के मेरे […]

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ! तेरी तमन्नाओं की जागीर से मिलता हूँ! नजरों को घेर लेता है यादों का समन्दर, चाहत की बिखरी हुई तकदीर से मिलता हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ! तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ! जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के, जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुम्हारी मुस्कान जब बनी मेरी आदत.. तुम बने मेरी क़यामत तक की इबादत.. यादों की लहरें जब बनीं मेरा सहारा.. डूबती रही जान, दूर हुआ किनारा..

तेरी याद में तन्हा होकर रह जाता हूँ! तेरी याद में तन्हा रोकर रह जाता हूँ! जब भी तीर चुभते हैं तेरी रुसवाई के, जाम के पैमानों में खोकर रह जाता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

यादों की राह में सवाल आ जाता है! तेरी रुसवाई का ख्याल आ जाता है! जब भी ख्वाब आते हैं मेरी आँखों में, तेरी जुदाई का मलाल आ जाता है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती…. बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती…. आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब, लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को […]

झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती…. बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती…. आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब, लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को […]

मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो? मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो! यादों की आहट रुला देती है मुझको, #साँसे_जिस्म को गमों से जोड़ गये हो! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! हीटर बने हैं भाग्य विधाता, चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता, सुबह उठ […]

शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! हीटर बने हैं भाग्य विधाता, चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता, सुबह उठ […]

हम तो ख्वाबों की चौखट पर बैठे थे , लेकर हसीन ख्वाब … प्यारी आँखों के परदे पर || ख्वाबों को ख्वाब बनाने , आया एक मुसाफिर , रख दिया ख्वाबों को , उसने जलती […]

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है! मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की? जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है! मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है! चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी, मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

माँ महेंगे होटलो मे भी (“रहस्य”) तेरी हाथों कि वो दो रोटियाॅ कहीं और बिकती नहीं माँ महँगे होटलों में भी खाने से भूख मिटती नही “””””””””” “””””””””” गरमाहट बहुत मिलती थी तेरी ऑचल कि […]

Happy mother day मेरे तरफ से एक छोटी सी कोशिश उम्मीद करता हूँ सबको पसंद आएगा €€€€€€€€€€€€€ ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी देने की वजहा बता देता, ऐसा क्या किये थे तू मुझे मेरी खता बता […]

एक और मासूम की जिन्दगी (“रहस्य”) ?????? दौलत की चाहने रिश्तों के धागे को तार तार कर दिया हैं, एक और मासूम की जिन्दगी को मरने पर लाचार कर दिया हैं,, ?????? पापा सब दिया […]

मुर्दों को उठाने चलें है ” रहस्य “देवरिया अफ़सोस की हम सबको जगाने चलें है , हाँ ये सच है की मुर्दों को उठाने चलें है,, हर हिन्दू मस्त है अपनें मे जमाने से बेखबर […]

जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे , तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा , ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से , जब तन्हाई में खुद को […]

जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे , तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा , ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से , जब तन्हाई में खुद को […]

लम्हे बचें जो जिंदगी के वो खुल के काट लें, जो बाकी रह जाए पिटारे में उसे आपस में बांट लें, वो नीले समंदर के किनारे, पिघले मोती से अंगारे, चल ख्वाहिशों की मुट्ठी में […]

रास्ताें से गुजरते हुए ईक शहर नजर आया, जिससे उढते धुएँ में इंसानियत का रिसता खुन नज़र आया, हँसते हुए चेहराे में, खुद को झूठा साबित करता हर इंसान जाे पाया, तब कहीं जाकर हमें […]

मैं बेटी हूँ….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ….. मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस मैं ढोती हूँ। मैं बेटी हूँ…….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। […]