ना चैन है, ना सुकून है
ये दिल को क्या फितूर है l
करता है ये मनमानियां ,
करता है ये शैतानिया
सुनता नहीं बेधड़क है ये दिल, जानिया
धड़कता है जब ये सीने मे,
मजा है फिर तभी जीने मे
ना रिवाजो मे , ना समाजो मे
उड़ता फिरे ये खयालो मे ,
कभी सजदे मे है,
कभी शिकवे मे है ,
कभी किसी के हिस्से मे है
ना चैन है , ना सुकून है
ये दिल को क्या फितूर है !
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ये दिल…
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नारी हूँ मै…
नारी हूँ मै, नादान नहीं हूँ
निस्छल हूँ , निर्लज नहीं हूँ !पथ की उलझन सुलझाना चाहु
पग के बंधन तोडना चाहु
सिर्फ यही अपराध करु मै
अपने मान की पहचान करु मै !अभिमान को अपना मान बताए
और मेरी पहचान सिया बतलाए
जब हर घर सिया विराज रही है
तब क्यू हर घर राम नही है !जब मेरे प्रश्नो का तुम पर उत्तर नही है
मेरे मन के बन्धनों का हल नहीं है
तो फिर क्यू स्वयं को ज्ञानी बतलाए
स्वयं को मेरा स्वामी बतलाए !नारी हूँ मै , नादान नहीं हूँ
निस्छल हूँ , निर्लज नहीं हूँ ! -
कुछ
कुछ ना होने का भी
कुछ तो मतलब होगा
यूँ ही तो नहीं
कुछ ना हुआ होगा
वो मतलब खोज लीजिए
कुछ ना होना कुछ होने मै बदल जाएगा
जिंदगी का ढंग
आपके ढंग मे ढल जाएगा ! -
अजीब है दुनिया
अजीब है दुनिया
अजीब बाजार है दुनिया
जिंदगी का लिबास पहने
मुर्दा है दुनिया
ये रूह बेचकर रिवाज
ख़रीदा करती है
मन के अहसास जलाकर
पथर पूजा करती है
जात को अपनी पहचान बता ,
अपनी ओकात छुपाया करती है
गाय को माता बताकर
गुंडागर्दी , और
नारी को पैर की जूती बताकर
परुषार्थ सिद्ध करती है
अजीब बाजार है दुनिया
यहाँ सभी जिन्दा है, पर
अभी मुर्दा है दुनिया ! -
मैं वो नहीं
मैं वो नहीं जो पास रहकर तुझे हँसाउगा
मैं तो वो हूँ जो रहू या ना रहू लैकिन
तेरी मुस्कुराहट की वजह कहलाऊँगा !
मैं वो नहीं जो उजालो मैं तेरा साया कहलाऊंगा
मैं तो वो धुल हूँ जो अंधेरे से घबराकर तेरे माथे से
टपके पसीने के सहारे तेरे पैरो से लिपट जाऊँगा !
मैं वो नहीं जो याद आकर तेरी आँखों से छलक जाऊँगा
मैं तो वो हूँ जो ख्यालो की जमी पर उग कर
तेरी जिंदगी को खुशहाल कर जाऊँगा !
मैं वो नहीं जो रीती – रिवाजो की आड़ मैं तुझसे जुदा कर दिया जाऊँगा
मैं तो वो हूं जो हर रीती की शूरुआत बन जाऊँगा !
तु मुझे अपना तो एक बार
मैं तेरा ख्वाब हूं आज , कल हक़ीकत बन जाऊँगा ! -
Kawwali…….
वो कहने लगे रुख से पर्दा हम हटा नहीं सकते
हम ने कहा तुम्हारे हुस्न को देखे बिना हम जा नहीं सकतेवो कहने लगे इस से हमारी रुसवाई होगी
हमने कहा होने दो गर जो जगहसाई होगीउस ने कहा कभी तो हमारा कहा भी मान लिया करो
हमने कहा हरदम परदे में रह कर न जान लिया करोवो कहने लगे बड़े ही लाचार नज़र आते हो
हमने कहा कभी बेपर्दा आप आते होमुस्कुरा कर वो बोले अबके जरूर आउंगी
हमने कहा वादा करो के अबके निभाऊंगीइतना कहना था के वो मुस्कुराने लगे
धीरे धीरे नज़रें अपनी वो उठाने लगेफिर धीरे से कहा ये वादा है हमारा
हमने कहा अब बस इंतज़ार है तुम्हाराइतना कह कर वो महफ़िल से जाने लगे
कसम इश्क़ की वो और भी याद आने लगेउनके दिल को जाना शायद मंज़ूर न था
मगर वक़्त को शायद ये मंज़ूर न थाअब तो इंतज़ार है हमको उनके आने का
और उनके बेपर्दा हुस्न पर गौर फरमाने का………………….!!D K
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मंगल पांडे चितू पांडे ! Pankaj Sahani
जरा याद करो उस बलिया को
जो बीर पुरूष की धरती है
जीवन का हो उदय यहां
रोशन कुर्बानी करती है
मंगल पांडे चितू पांडे
चन्द्रशेखर जैसे बीर जहाँ
शहीद हुये इस भारत पे
कश्मीर को अपना जान कहा
हम भी है उस बलिया के
जहा रग रग मे प्रेम पनपती है
जरा याद करो उस बलिया को
जो बीर पुरूष की धरती है
सच्चे बीर सिपाही नेता
देश पे अपने जान को देता
आये बारी शहीद होने का
इतिहास भी शिश झुकाती है
याद करो उस बलिया को
जो बीर पुरूष की धरती है
Written By -Pankaj Sahani
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गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था
गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था,
तन्हाइयों में मेरा तुझसे अब मिलना बहोत जरुरी था !
मिटाने थे वो गिले सिकवे हुए हम दोनों के दरम्यान,
इस पत्थर से दिल का भी पिघलना बहोत जरुरी था !! -
bchpn
लो फिर याद आ गया ,
वो बचपन सुहाना
वो झूठ का रोना , वो सच का आँखों सी आलू का टपकना
वो बेबाकी सी उदझ्ना सबसे.
वो अपने साये सी भी डरना
वो बारिश की मस्ती, वो कागज की कस्ती
वो रेत का घर, वो मिटी का खिलौना ,
वो यारो की यारी, वो यारो की नाराजगी
वो नादानी, वो मासूम सी शैतानी
वो स्कूल न जाने का बहाना
वो टीचर को सताना
लो फिर याद आ गया वो बचपन सुहाना
काश भूल पति वो बड़कपन का जमाना -
Frk btana
jb mai ud nhi pata tha
tb kha mai jinda tha
aksar chutai-chutai nano sai
aakash ko taka krta tha
kya hai isam jo itna dur hai
aksar ma sai puch krta tha
hans kr bs itna khti
aik jruri frk btana hai iska kam
aj uda hu to jana hai
kya hai iskai pas
jinda hona or sans laiuai
ka frk btana hai iska kam
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Roulette
Blood shared
Names yelled
This is the way
I want my Hell
Lips pressed
Teeth clenched
Does anyone know
What happens next
Trigger pulled
Bullet found
Passion defined
Within that sound
Pain Is real
Fear is fun
Another round
For anyone?
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Untamed
They say I play games
Maybe I do
But I remember their names
I feel pain too
Distance is familiar
To this state of mind
Love’s the shameless killer
Of the quickest kind
Go ahead and love me
For my skin that has no depth
But my nature’s tricky
And my temper is unkempt
You’ll never understand
How to win my favor
But you can take my hand
And taste a sweet New flavor
Don’t make any promises
I will do the same
Skip the tender kisses
My spirit they won’t take
Perhaps one day I’ll settle
My heart may turn to gold
For now it’s hardcore metal
And my soul is freezing cold….
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Nazm
” इंतज़ार ”
सोचा भी न था मैंने
वो मुलाक़ातें
मेरे ख़्वाबों का
मुक़द्दर बन जाएँगी
उसकी बातें, उसकी यादें
मुझे तड़पायेगी
उसके नाम
मेरी सांसों में
बस जायेगा
और __ हर रात
मेरे ख़्वाबों में आके
वो मुझसे पूछेगी
” यावर ”
कब _____आओगे ___________यावर कफ़ील
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जाने मेरा शुमार किन में करे है…. तू
महफ़िल में ये हालत देखता नहीं मुझे_________________यावर कफ़ील
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kehna tha..
Bite palo ki baad aaj hme unse kehna tha..
Diye the pyar me jo drd aaj bhi sehna tha..
Waqt ke faslo ne aaj unhe badal dia jrur…
kiya hi pyar kyu jb unhe dur hi rehna tha…
Kehta h fir bhi dil baar baar aaj unse kehna tha…
Kehna tha….vk
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1
This servitude eternal,
Bound by duty and faith,
I find hope fading, Devoured by these, Ordeals.
These trials,
Harbringers of all
That is ordained,
Also conduct terrible fate.
Dread comes,
For this bounding main
Of darkness,
Lies absolute.
Imploring for dilligence,
We are engulfed.
a.s.
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तकदीर की क्या खूबी है
तकदीर की क्या खूबी है,
मेहनत करने वाले नंगे बैठे है
काले धन वाले
मोटे लिहाफ़ कम्मल लपेटे है -
सोच जरुरी …
देश में उथल पुथल का माहौल बना है,
जियो लेने को भी यहाँ भीड़ घना है,
व्यस्त यहाँ इंसान हर रोज़ इस तरह सा,
हज़ार का पत्ता भी अब हर ओर मना है।देश प्रेम बातूनी दे रहे बहोत से सलाह हैं,
जियो सही, बैंक की लाइन पे कर रहा वही आह है,
तो मुखौड़ा क्यों ओढ़े हुए सब देश भक्ति का यहाँ,
हमेशा आलोचना करने की कैसी ये चाह है।सरहद पे खड़ा है सैनिक, तो कहता उसका काम है,
जान भी दे दे तो करते नही उसका ये सम्मान है,
ट्विटर पे बैठे रहना, इनका बहोत ही जरुरी है,
पेट पालने को नही की मेहनत फिर कैसा ये आम है।काला धन नही है रखा तो क्यों तू चिल्लाता है,
500, हज़ार पे क्यों फिर इतना बौखलता है,
देश हित में थोड़ी सी परेशानी से कुछ न जायेगा,
करता नही बहस आम लाइन में चुप चाप खड़ा हो जाता है।और दिया था मौका, मज़बूरी की बात करने वालों को,
देश हित में योगदान देने को, सभी के सभी हवालों को,
पर नियत का कोई पैमाना कहाँ कोई बना पाया है,
और हम भी खारिज़ करते हैं इनके सभी सवालों को।और यहाँ कुछ अच्छा करने को इक सोच जरुरी है,
सीधी ऊँगली से नही तो फिर परोक्ष की मज़बूरी है,
किसी को न लगे धक्का न हो कोई आहात,
तो फिर लगता है कि हर बात ही बस अधूरी है।कृपया आम आदमी का मुखौटा तुम अब छोड़ दो,
अपनी कोशिश संजोके देश हित में ही थोड़ा मोड़ दो,
कभी कभी ही सही, अच्छे काम की प्रशंसा तो करो,
न की अपनी कुकौशल से हर बात को ही मरोड़ दो। -
“हलाला देती बरबादी ?”
“हलाला देती बरबादी ?”
मुद्दा तलाक का तीन तलाक लाना |
बिना विचार किये महिला को हटाना ||
हजरत उमर का था वह रहा ज़माना |
तीन तलाक पर चालीस कोड़ा लगाना ||
किस्सा था पुराना जब दुल्हन का लाना |
खोलकर नकाब उसका घर उसे लौटाना ||
मजहवी बहाना करता रहा है मनमाना |
महिला को अधिकार जनता को दिलाना ||
उपयोग की वस्तु नही! बदला नव ज़माना |
तरक्की पसंद जहां है कुछ करके दिखाना ||
आओ मिल बैठकर परिवार को है बचाना |
परसनलला पुराना . तरक्कीनुमा खजाना ||
साहस से राहत मिले महिला हक़ है लाना |
हिम्मत ले आगे आ खड़ा है अपना ज़माना ||
तलाक की दंश झेलती अगले निकाह की तैयारी |
साहस में राहत मिलती हलाला देती है बर्बादी || -
Meri jindagi uske aane se..
Main kuch kuch rutha rutha tha..
main kuch kiya kiya tha.
kisi me mujhko pehchana
kisi ne bnaya diwana.
chahat hazaro hoti h bedardi ke bzaar me.
pehla eshshaas mujhe hua.
duza uska purana koi diwana tha.
Uski chahat bhi badli.
Aaj hum sath h dosto ko tarah.
are dosti to ek bahana tha -
बचपन की याद
जब भी बैठता हूं किसी सिरहाने से सटकर, बहुत सी यादें याद आ जाती हैं…
इस आधुनिकता के खेल में भी मुझे, अपने बचपन की याद आ जाती है..
रसना खुश नही इन मंहगे पकवानो से, बस बचपन की वो ‘मलाई’ याद आती है…
नही मिलता जब चैन ठंडे आशियानों में भी, तो नीम के नीचे पङी वो ‘चारपाई’ याद आती है…
अकेले जब किसी सफर में थक जाता हूं मैं, तो सुकून देने वाली वो मां की गोद याद आती है…
तसल्ली महसूस न होती खुद की कमाई से जब, तो पापा के पैसे देने वाली वो ‘आदत’ याद आती है…
बीमार पङते हैं अब खुद चुन लेते हैं दवाई, फिर भी बिस्तर पर लेटे हुए अपनो की ‘इबादत’ याद आती है…
दौङ धूप में गुजर जाते हैं दिन अब तो, खेलकर लौटते थे वो ‘शाम’ याद आती है…
आशियाने जलाये जाते हैं जब तन्हाई की आग से, तो बचपन के घरौंदो की वो मिट्टी याद आती है…
याद होती जाती है जवां बारिश के मौसम में तो, बचपन की वो कागज की नाव याद आती है…
सुलगते है शरीर चारदीवारी में रहकर, तो मां-पापा के स्वर्ग की छांव याद आती है…
~कविश कुमार
रसना =जीभ -
नजर नहीं आये
शहर छोड़ गये हो सोचा मैंने, जब से तुम नजर नही आये…
अजीब हो तुम भी शहर में होकर भी, तुम हमारे शहर नही आये…
जो तुम न दिखते हो पास तो, अल्फाजों की निंदा कर देता हूँ मैं…
कागजों और अल्फाजों को प्रताड़ित करके, इन्हें शर्मिंदा कर देता हूँ मैं…
जो तुम दिख जाते हो पास तो, नयी कोशिश चुनिंदा कर लेता हूं मैं…
दोनों की सुलह करवा कर, नए अल्फाज़ जिंदा कर लेता हूँ मैं…
गीले कागज हुए थे आब-ए-चश्म से मेरे, तुम्हें क्यूं ये नजर नही आये…
गलियों की गली में जिस गली से गुजरे, उस गली में तुम कभी नजर नहीं आये…
~कविश कुमार
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संकल्प
है कुछ करना भी मुझे कुछ नया सा कुछ अलग
की मैं न बस रहूँ एक धूमिल खंडित नग——(१)
तोड़के बंधन सभी, छोड़के सब व्याधियां
लो चला मैं देख लो नव सृजन करने अभी——-(२)
आज मेरे हौंसले चट्टान से भी सख्त हैं
मेरे मन में हैं भरे वन उल्लास के ना मायूसी के दरख़्त हैं ——-(३)
आज उठ कर हम सभी संकल्प क्यों ना ये करें
तोड़ देंगे हम सभी उन खरपतवारी नियमो को———(४)
जिनके कारण एक दुसरे के मन में भरी घृणा रहे
फिर हमारी मुस्कुराहटों से प्यार का पौधा हरे ———-(५)
– कुलदीप
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The “getting free” lure …..!.
The “getting free” lure …..!.
A young family,
Mr. John, his wife, two kids,
Doing well for themselves,
Staying in a small bungalow,
Found one morning,
Their new car missing,
Stolen from garage
where it was parking.Very upset, disheartened
they investigated, searched,
looked everywhere
But the car was no where.“Immediately complain to the police”,
was neighbors advice, sound
& they helped them lodge an FIR,
with all details of the right kind.John & family were now praying,
For the Police for quickly finding
The Car, which like a family member,
they were greatly missing,
Wife & kids helpless & crying….While the police, were as usual,
still busy (or lazy) investigating,
& calling them often for interrogating
To the surprise of them all,
On the 3rd day Morning,
They found, their car, back
Parked in the same place,
From where it went missing,
And more so without any damage,
which was amazing & heartening.And to a greater surprise,
There was a prominent note,
Left in the car, in bold, reading:-“We working on a secret National mission,
utilized your car in a holy operation
Sorry for the inconvenience,
Hope you pardon us in the situation,
But as our obligation,
Here are 4 free movie tickets,
It will be to our great satisfaction,
If you & your whole family enjoy,
As from us, this humble reparation”
Note was signed by Head of the missionMr. John & family
felt moved by this gesture from the mission
Delighted that their car did work in a noble operation
Were also more happy,
As the free classy tickets were for,
Highly Acclaimed, 4 ½ hour running,
none other movie than the famous “Gandhi”
Getting any tickets for this movie then was not easyThe whole family
in due gratitude, did go for the movie,
Enjoyed it fully,
With no cut backs on interval snacking,
Returned feeling full & very happy,
For the movie was also a beauty…Unfortunately only to find on return,
their house completely burgled
in the period interim,
with all household valuables missing…..!The burglars had nicely planned,
what they had in mind…..!
And the family was lured,
into this free gift grind,
of a horrible kind……!I am reminded of this story,
Whenever I find people running to any degree,
To acquire anything advertised as available free
Without realizing nothing in the world is given free,
One has to always spend very much more,
Whenever anyone has acquired anything free.Better & always wise to buy whatever you want
Of the right quality & of the right kind,
Paying its appropriate price with wisdom in mind,
Never to fall a prey to free offers promoted by crooked mindsVery sorry for this write, so lengthy
For, even for reading anything free
We have to spend,…. Expend our time,
Time which is money, valuable very
especially in these times
When we are racing, always in a hurry ……!” Vishvnand “
(P.S.: This is a modified version & adoption from a happening, a news item; I recall reading in a newspaper abroad, in late 70’s. I get reminded of it due to the lure of free gifts & giveaway’s being flouted about galore presently to fool the public)
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मां की महिमा
कौन बिन माँ के जगत में जन्म पाया ,
देव से बढ़कर तुम्हारी मातृ माया ,
है नही ऋण मुक्त कोई मातृ से ,
जन्म चाहे सौ मिले जिस जाति से ,
दूसरा है रूप पत्नी का तुम्हारा ,
जो पुरुष का रात दिन बनती सहारा ,
सुख दुःख में है सदा संधर्ष करती ,
धर्म अपना मानकर अनुसरण करती ,
तू बहन है तीसरे परिवेश में ,
भ्रातृ की रक्षा करे परदेश मे ,
ले बहन का रूप जब आती धरा पर ,
भावनाये याद है राखी बराबर ।
एक तेरा रूप पुत्री में समाया ,
पितृ सुख है पिता मन में समाया ,
कौन तेरी रात दिन रक्षा करेगा ,
हो वरण कैसे पिता चिंता करेगा ।
वंश की उन्नति तुम्हारे योग से ,
नित्य समरसता तुम्हारे भोग से ,
तू सुधा सी धार बन जीवन निभाती ,
प्राण की बलि भी चढ़ा कर मुस्कुराती ।?? जयहिंद ??
प्रस्तुति – रीता जयहिंद
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ರವಿಗೊಂದು ಕವಿಯ ಕರೆ
ಓ ಮೂಡಣದವನೆ ,ಬಂದು ನೋಡು ಈ ಧರೆಗೆ.ಸಸ್ಯಶಾಮಲೆಯಾದ ಸುಂದರ ಭೂಮಿಯ ನೋಡು ।।ಜುಳು ಜುಳು ನಾದವ ಮೀಟುತ ಜೇಂಕಾರ ನುಡಿಸಿರುವ ಕಾವೇರಿಯ ನೋಡು ।।ಹನಿ ಹನಿಯ ಹಬ್ಬಕ್ಕೆ ನಲಿದು ನರ್ತಿಸುವ ನವಿಲನ್ನು ನೋಡು ।।ಸ್ವರ್ಗವನ್ನೆ ನಾಚಿಸುವಂತ ಅಲಂಕಾರ ರಚಿಸಿರುವ ಹೂ ರಾಶಿಯ ನೋಡು ।।ಮಂಜಿನ ಹನಿಗಳ ಹೊತ್ತು ತರುವ ಮಲಯ ಮಾರುತವ ನೋಡು ।।ಕಲ್ಲಿನ ಪರ್ವತಗಳು ದೂರ ದೂರ ಹೋದಂತೆ ಮಂಜಲ್ಲಿ ಮರೆಯಾಗುವ ಅಧ್ಬುತವ ನೋಡು ।।ಬರಡು ಭೂಮಿ ಇದು ನಿನ್ನಿಂದ ವರ್ಣಮಯವಾದ ವಿಸ್ಮಯವ ನೋಡು ।।ನಿನ್ನ ಬರುವಿಕೆಯನ್ನೇ ಕಾಯುವ ಪಕ್ಷಿ ಸಂಕುಲವ ನೋಡು ।।ನಿನ್ನನ್ನೇ ಉಸಿರಾಗಿಸಿಕೊಂಡ ಸೂರ್ಯ ಕಾಂತಿಯ ನೋಡು ।।ಓ ಮೂಡಣದವನೆ , ಬಾ ನೀ ಧರೆಗೆ ,ನಿನ್ನ ಸೃಷ್ಟಿಯ ಸೊಬಗ ಒಮ್ಮೆ ಸವಿದು ಹೋಗು ।।ನವೀನಸ್ಫೂರ್ತಿ -
My late night early diagnosis
My late night early diagnosis
Is it my look?
Is it my height?
The sadness innocent boy look,
When you stare into my eyes?The evilness that fastly builds up,
Slowly deep down inside.How he wants to touch me.
How he wants to ravish me,
With his disgusting,
Filthy mind.Deliver him from evil,
Because his temptation,
Is my,
Late night early diagnosis.From my PTSD,
To my,
New STD.This strange man that started,
My late night,
Early diagnosis.He smiles with pleasure.
His excitement,
Leads me steady smiling,
Now with excruciating pain,
Fastly forcing me,
But now in his domain.My late night early diagnosis,
Now takes my,
Boy innocence away.As he raises my shirt higher,
Removing it slowly from my body.He then lowers my pants,
Fastly down my ankles.I feel the rushing blood,
Going all through my veins.My late night early diagnosis,
Forever haunts me in my dreams.Forever it keeps happening,
Atleast to me it seems.This late night pain,
Isn’t just a dream.But yet,
It’s only,
The beginning,
Of my early diagnosis.So when shall I be saved?
From whatever,
This sick bastard,
Craves?Please help others,
To avoid,
This late night,
Early diagnosis. — at Salvation Army Harbor Light Mission. -
Article
लेख
जिस तरह से एक शिकारी जाल फैलाता है और उसके जाल में शिकार खुद व खुद आकर फंस जाता है, उसी तरह कलयुग के कई नौजवान देश की नारियो, (बहन, बेटियो) की जिन्दगी को नरक के सामान दुःख दायी बर्बाद करने में लगे है और नारी को प्रेम जाल में फसाकर उसका उपयोग करके छोड़ देते है। जब तक नारी इस बात को समझती है, बहुत देर हो जाती है, और कही मुँह दिखाने के काबिल तक नही रहती, आत्म हत्या जैसा कदम उठा लेती है। हर महिला को अपनी जिन्दगी में एक मर्यादा रखना आवश्यक है उसे अपनी हद को लांघकर कभी कोई गलत कदम नही उठाना चाहिये, ताकि बाद में पछताना पड़े और पारिवारिक लोगो को उसकी बजह से शर्मिंदगी हो। उसके पिता जीते जी मर जाए। ये बात हर बेटी को याद रखना चाहिये किसी के प्रेम में पढ़कर अपना तन,मन किसी को सौंप देना और अपने जन्मदाता को छोड़कर भाग कर प्रेम विवाह जैसे कदम उठाना हितकर नही है। इसके बहुत से उदहारण यही आसपास देखने को मिल जायेंगे। पुरुषो की मानसिकता को पता नही क्या हो गया है। खुद पर नियंत्रण नही है समय से पूर्व ही सब कुछ पाने की लालसा उन्हें गलत राह पर चलने और बुरी संगति इंसान के मस्तिष्क को पूर्णतः प्रदूषित कर देती है। उसकी सोच समझ नष्ठ हो जाती है और नीचता की सारी हदे पार कर बैठता है। इंटरनेट, टेलीविजन और अश्लील सामग्रियों ने मानव मन को बहुत दूषित किया है। छोटे- छोटे बच्चों की बाते सुने तो आप हैरान रह जायेंगे कि इतना सब ये कहाँ से सीख रहे है। जमाना पतन की और जा रहा है फिर भी कहते है देश का विकास हो रहा है। स्वदेशी थोड़ा ही है हमारे देश में देश हमारा धीरे-धीरे विदेशी हो रहा है। अन्य देशो की तरह बलात्कार, गुंडा गर्दी, छेड़छाड़ की घटनाये आम हो गई है, सुबह का अखबार उठाकर देखे तो कही न कही इस तरह की खबर से इंसान शर्मसार हो ही जायेगा। महिला को अपनी मर्यादा का सदैव ख्याल रखना चाहिये और प्रेम जाल से बचने का यत्न करना चाहिये। नारी को अपनी सुरक्षा के लिये खुद को कठोर, निर्भिक बनाना चाहिये और समय आने पर चंडी का रूप भी धरना पड़े तो पीछे नही हटना चाहिये। नारी शक्ति के आगे देव और महादेव भी शीश झुकाते है पुरुषो को भी इनका सम्मान करना होगा। तब ही इस तरह की घटनाओ को रोका जा सकता है अच्छे विचारो का आदान-प्रदान कर समाज और देश को स्वच्छ बनाया जा सकता है। जिससे मानव मात्र का कल्याण होगा और फिर किसी बहन की इज्जत पर दाग नही लगेगा और वो निर्भिक होकर सर उठाकर जी सकेगी।
✍?शिवेश अग्रवाल ”नन्हाकवि”
खिरकिया ,दिनाँक- 11/09/2016
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क्यों है आज आत्माए अतृप्त इतनी
क्यों है आज आत्माए अतृप्त इतनी
भूल गई सारी उत्कृष्टताये अपनी
बस स्वअर्जन की चाहनाये इतनी
क्यों विघटन की कामनाये इतनी
हम ही हम की इच्छाये इतनी
दुसरो के लिए वर्जनाएं इतनी
ऐसे कैसे मानवता पनपेगी
है कोई यहाँ पर इतना जतनी
जो बता सके कैसे अर्जन करे
हर इंसा यहाँ मानवता अपनी ।
सरे भेद भाव भूल कर इंसा
अर्जन करे इंसानियत अपनी ।– डॉ आशा सिंह
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एक नजारा
ट्रेन के डस्टबिन के पास
मैले -कुचेले फटेहाल
वस्त्रों से अपना तन ढकती,
गोद में स्केलेटन सा
बिलखता बच्चा थामे,
डालती है अपना हाथ
डस्टबिन में वो ।
कचरे के बीच
बचे -खुचे खाने से भरी
एक थाली
ले आती है चमक
उसकी आँखों में।
इसपर भी चखती
अपनी उंगली से
बची-खुची दही-रायता।
फ़िर भरती है
बिनी हुई कटोरियों में
वोही झूठन ….
शायद घर पर
बीमार बूढी माँ
के लिए है वो सब ।
रोते बच्चे को
सूखे स्तन से
लगाती है जबरन ।
बटोरकर आशा
ट्रेन से
उतर जाती है
अगले पड़ाव पर ।
वाह रे भारत देश !
भारत की ये भारती !– पूनम अग्रवाल ……
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भजनों में, पूजन में, हे गणराजा … ! (भक्ति गान )
भजनों में, पूजन में, हे गणराजा … ! (भक्ति गान )
भजनों में, पूजन में, मगन है मन हमरा,
हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा है तुम्हरा……!जो हमरा है आता, वो तोसे ही आता,
जो हमरा है जाता , वो तोका ही जाता,
हमरा ना यहाँ कुछ भी, बस तू ही इक हमरा,
हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा है तुम्हरा……!हमरा लगता हम ही करते हैं सारा काम,
काम में भूल जाते हम लेना तोरा नाम,
तोरी कृपा से ही तो, चले काज ये सब हमरा,
हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा, है तुम्हरा……!तोरी कृपा हो हमपर, तो हमरा है क्या कम,
चरणों में प्रभु तोरे ही रहना चाहें हम,
तोरी ही हो पूजा ये जीवन सब हमरा,
हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा, है तुम्हरा……!भजनों में पूजन में, मगन है मन हमरा,
हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा, है तुम्हरा……!” विश्व नन्द “
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Yadon ke kisse
Yad hy tumhe wo sahil ka kinara…….
Jahan ek din betha main apni adhuri khwahison ke panno ko zindgi ki kitab se fad kr sahil m baha rha tha…
Mujhse kuch dur bethi ek ajnabi si tum najane kin soch m gum thin…
Tum kinare ki ret pe kuch likh kr mitati rahin,na Jane kya hua fir tumhe tumhari aakhen nam ho gyin…
Tumne aansuon ke moti sahil m bahana suru kr diya…
Dur betha m dekhta rha tumhe,,
Yad hy mene kagaz ki ek nav bna kr tmhari taraf bahai thi..
Tumne use pani se utha kr kinare pr rakh diya tha ,us waqt tum halka sa muskurayin thin…..
Us waqt main tha ,tum thin ,sahil tha ,aur ek doori Jo hum dono ke darmiyan thin……
Waqt ne hum dono ko milaya ……
Pr wo dooriyan jo thin wo aj bhi vhin hy…
usi sahil ke kinaro pr jahan m tha jahan tum thin….
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My thoughts
!!!! DIL KI BAAT !!!!
Paisa
………….Pyaar
………………….aur ShauhratSirf aur sirf bhagya se milta hai
No matter who so ever deserve it
Jo mila hai na ussi main khush raho
@@ SAGAR @@
21/8/16 :: 12:12 PM -
नई – नई शादी
मेरे घर के पडौस में अभी नई – नई शादी हुई थी । सुनने में आया कि लड़की वाले गरीब हैं । फिर भी बहू ढेर सारा दहेज साथ लाई थी मुझे कुछ अचंभा हुआ और मुझसे बिन पूछे रहा नहीं गया मैंने बातों ही बातों मे पूछ ही लिया बहू तो गरीब घर की थी फिर इतना सारा दहेज? इस पर उसके ससुर कुछ तुनककर बोले कि लड़की ब्याह रहे हैं इसमें हमारा क्या कसूर है । लड़के की पढ़ाई पर जो खर्च किया वही तो भरेगी।मुझे उनकी बातें अच्छी नहीं लगी और मैं वहाँ से चली आई। अगले ही दिन सुनने मेरी आया कि 10 तोले सोने की कमी रह गई थी जब मैं सुबह उठी तों देखा पडौस में भीड़ लगी थी शायद आग लगने से बहू जला दी गईं थी जब मैं माजरा मालूम करने पहुँची पता चला लड़की के पिता 10तोला सोना कहीं से अरेंज करके लाये थे पर उन्हें भरोसा ही नहीं था कि ये कांड हो गया । मैंने चिल्लाकर कहा इन्हें जेल भिजवाईये । शायद पुलिस वालों का पहले से ही नोटों से मुॅह बंद करवा दिया था वह उल्टे मुझे ही हथकड़ियां पहनाने लगी और कहने लगी बवाल मचाती है । अगलों की नई दुल्हन नहीं रही और तुम उनका दुख बढ़ा रही हो किसने कहा कि मामला दहेज का है । दरअसल लड़की का एक ब्वायफ्रेंड भी है । हाल से तरह – तरह की आवाजें आने लगी। कोई कलमुॅही तो कोई मुॅहजली कह रहा था । लड़की के पिता से जिल्लत सही नहीं गई और उन्हें अटैक आ गया । आवाजें और तेज हो गई की सालाना दुनिया से मुॅह छिपा गया उसकी बेबसी पर मुझे रोना आ गया ऐ खुदा क्या जमाना आ गया ।
प्रस्तुति – रीता अरोरा -
बाल कविता (जिस दिन सरहद पर जाऊंगा)
बन सिपाही जिस दिन सरहद पर जाऊंगा
दुशमन को फिर उस रोज़ मज़ा चखाऊंगा
मां तुम रोना मत गर वापिस न आऊं मैं
देश का अपने पर देखना मान मैं बढ़ाऊंगा
जब तक रहेगी आखिरी सांस बाकि मेरी
चुन चुन कर सबको सरहद से भगाऊंगा
तेरा बेटा हूँ मां तुझसे ही तो सीखा है
जीवन अपना देश को अर्पण कर जाऊंगा।।।
कामनी गुप्ता *** -
इश्क और भूगोल
प्रशांत महासागर सी अनंत विस्तार लिए हुए तुम्हारे इश्क़ में
मेरियाना ट्रेंच सी गहराई महसूस होती है ।
एवरेस्ट की ऊँचाई जैसी हमारी आकांक्षाओं को जब तुम 8848 मीटर से देखती हो तो बरबस ही मेरी निगाहें सागर की प्रवाल भित्तियाँ सी तुम्हें निहारती है …
मेरी और तुम्हारी दूरी के बीच फ़ासला इन्दिरा कौल से लेकर इन्दिरा पॉइंट तक है
पर हमेशा लगता है की तुम मेरी इर्द गिर्द ही हो ।मैं तुम्हें ठीक वैसे ही फॉलो करता हूँ जैसे चंद्रमा पृथ्वी को करता है ।
कभी कभी तुम नाराज हो जाती हो तो लगता है जैसे तुम्हारे अंदर क्लोरोफ़्लोरोकार्बन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा बढ़ गयी हो ।
और तुम अब बस मेरे दिल के ओज़ोन परत को छलनी करने ही वाली हो
लेकिन तभी तुम्हें मैं मांट्रियल और क्योटो प्रोटोकाल की कसमें देकर मनाता हूँ।
और तुम चुपचाप विकासशील देश जैसी मुझे सुनती हो और ये सिलसिला फिर कोन्फ्रेंस ऑन पार्टी की तरह हर साल चलता है ……कभी न ख़त्म होने वाली बैठकों की तरह …………….. -

बिकने दो! शराब अभी इस गाँव में…
बिकने दो! शराब अभी
इस गाँव में।
अभी भी कुछ बच्चे स्कूल जाते हैं
घर आकर क ख ग घ गाते हैं।
लेकिन कुछ बच्चे तालाब किनारे
खाली बोतल चुनते है।
कुछ तो खाली बोतल में
पानी डालकर पीते है।
उम्र कम है लेकिन
उनको पापा के जैसे
बनना है।
ये सब देखकर
कमला, बुधिया का ही रोना है।
समारु, बुधारु का क्या कहना-
उनको तो दो पैग अभी
और होना है।
कोई डरता हो,
डर जाये।
कोई मरता हो
मर जाये।
दारु के संग
बस रात चले।
उनके मन में
ये बात चले।
बिकने दो शराब अभी
इस गाँव में।।सरकारी नौकर बहुत खुश है।
उनके लिए क्या सावन और क्या पूश है।।
अब तो दारू खुद चलकर घर तक आता है।
मोबाइल के एक मैसेज से काम बन जाता है।
गुरुजी बेचारे तो शाम से शुरु होते है।
शाम को शराबी और दिन में गुरु होते हैं।
उनका तो वहाँ बहीखाता है।
दारुवाले से गहरा नाता है॥
तभी तो उन्हे यही समझ आता है
बिकने दो शराब अभी
इस गाँव में।चुनाव जीताने का वादा है।
मुखिया तो उसका चाचा है।।
हर शाम दो बोतल चाचा के घर जाता है।
दारु के दम पर पंचों पर रौब वह जमाता है।
इसी लिए तो पंचायत में गीत यही वो गाता है।
बिकने दो शराब अभी इस गाँव में।कुछ नौजवान शाम को आते है।
मूछों पर ताव लगाते हैं।
कहते हैं शराब बेचना बंद करो।
वर्ना थाने हमारे साथ चलो।
दारुवाला समझदार है।
समझ गया बेचारा
ये बेरोजगार है।
सब पीने का बहाना है।
एक पौवा दो प्लेन का
बाकी तो अपना जमाना है।
नौजवान नशे में धूत हुआ।
लगता है वो भूत हुआ।
धूल चांटते जमीन पर
बस यही चिल्लाता है
बिकने दो शराब अभी
इस गाँव में॥वर्दी वाले भी आते हैं
खाली खोली में
दिमाग लगाते हैं
शायद उनको सब
मालुम है।
बोतल कहाँ पर गुम है।
लगता है सबका अपना हिस्सा है
तभी तो ये किस्सा है
बिकने दो शराब अभी
इस गाँव में।
ओमप्रकाश चंदेल “अवसर”
पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़
7693919758 -
rapp
Dress teri short kudi tu hot
Lagti Punjaban tujhe iska hiii RobSexy teri chal swag Tera baimisal
Chati firti baby hot ness ki DukanBaby jadha chasma payti fastrak vala
Gore Gore galo per hai til kalaBaby de naina vich duldi sharab
But chij ye khrab haiPer badi lajawab hai
Jydha pile oda alag hiii jawab haiMai nhi pita q ki piña tou Gandi bt hai.
Classic boy
By RLv gahlotA
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khwaishe
ख्वाइशें भी हैं और कुब्बत भी है छू लेने की बुलंदियां ,
मगर, रौंदने का दूसरों को हुनर मैं कहाँ से लाऊँ,
जो हर कदम देखकर भी सोये हैं मेरी मेहनत,
उन फरिश्तों को जगाने का हुनर मैं कहाँ से लाऊँ,
यूँ तो छिपा रखे हैं अभी हुनर कई बाकी,
जहाँ कद्र हो “राही” तुम्हारी वो शहर कहाँ से लाऊँ॥
राही (अंजाना)
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देश तुम्हारा भी तो है
हिन्द के चूल्हे की रोटी खा रहे फिर भी,
बांध पाक के घुंघरू ये गा रहे फिर भी,
इन्हें मुजरा ही आता है भजन क्या जाने,
तभी ज़ाकिर,अफ़जल के गुण गा रहे फिर भी।।मेरा एक नही सौ बार खून खौलता है,
इन्हें अपने ही घर में क्यूँ भय लगता है,
अरे बेवकूफ औलादो कभी जाना क्या तुमने,
क्या कुरान कहता है क्या हिंदुस्तान कहता है।।शेरे-वतन के वीरों ने है सम्हाला तुमको,
बाढ़ हो तूफ़ान हो और दुश्मनों से तुमको,
तुम खुद जल रहे हो जला रहे क्यूँ सबको,
ये देश है हमारा और हम रत्न है इसके ।।जब आती है मुसीबत आके जिनपे गिरते हो,
फिर सम्हल के उन्ही पे पत्थर क्यूँ फेंकते हो,
जिस थाली में खाते हो क्यूँ उसको तोड़ते हो,
फिर भूख भी लगेगी ये क्यूँ न सोचते हो।।
© अश्विनी यादव -
मुक्तक
पुकारा तो नहीं लेकिन जुबां पर नाम तो आया ।।
सकूँ दिल को नहीं आया मगर आराम तो आया ।।किसी को मिल गया मौका बुलन्दी पर पहुंचने का !
मेरा नाकाम होना भी किसी के काम तो आया !!– Nitin sharma
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Maine socha
Raat bahut hogyi thi Maine socha
Par dil main abhi bhi thi roshni
Time bht ho gya tha Maine socha
Par dil tham sa gaya tha aur laga koi hosh nahi
Phone check karne ka Maine socha
Par whatsapp ki koi notification nahi
Taare aasman main jyada ho gye the Maine socha
Par Dikha abhi tak mera chand nahi
Gaane sunlu thode romantic se Maine socha
Par uski aawaz ko chhod koi chahat nahi
Nahi aane wali Maine socha
Par ye baat to dil ne maani nahi
Hawa si chali zor se aur mud kar Maine dekha
WO aagyi Maine socha
Ar yahi tha
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मुक्तक
न मैं तुलसी जैसा हूँ ,और न मैं खुसरो जैसा हूँ,
मेरी कल्पना अपनी है ,सच नहीं दुसरो जैसा हूँ ।हम सभी एक ही ग्रन्थ के ,हाँ हर पन्नो सिमटे है,
छन्दों में जो सिमट जाऊ तो,सुंदर बहरो जैसा हूँ ।।लालजी ठाकुर
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बदल गया है देश
वो कहते हैं अपनी सरकार आते ही बदल गया है देश,
रंग है बदला रूप है बदला और बदल गया परिवेश,
बेवजह झूठे दावे करने की इनको लगी बीमारी है,
भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई से से कहां मुक्त हो गया देश।
जिज्ञासु
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I want to say something….
ચિંતન મનન કરતા કરતા મારે કંઈક કહેવું છે,
ખબર નથી શું? પણ છતાં મારે કંઈક કહેવું છે.જીવન છે ટૂંકું, રસ્તો છે લાંબો, છતાં મારે કંઈક કહેવું છે,
આ સ્વાર્થી દુનિયાના સ્વાર્થી લોકો વિષે મારે કંઈક કહેવું છે.ગાય ને ઘાસ નાંખે, કુતરા ને બિસ્કીટ નાંખે,પણ ઘરના સભ્યો ને તરછોડે, આવા
માણસો વિષે મારે કંઈક કહેવું છે,
વહેલી સવારના પંખીઓ તથા આથમતા સૂર્ય વિષે મારે કંઈક કહેવું છે.સબરી ના રામ વિષે તથા મીરાં ના કૃષ્ણ વિષે મારે કંઈક કહેવું છે,
પરમ કૃપાળુ પરમાત્મા વિષે તથા નિ:સ્વાર્થ ભાવે પ્રેમ કરનાર
એવા મારા મા-બાપ વિષે મારે કંઈક કહેવું છે.ભાઈ જેવા મિત્રો વિષે તથા રામ-ભરત જેવા મારા ભાઈઓ વિષે
મારે કંઈક કહેવું છે,
કઠીન છે પરિસ્થિતિ, પણ આ પરિસ્થિતિ ના મારા સંઘર્ષો વિષે
મારે કંઈક કહેવું છે.સ્વાર્થી મિત્રો છે ઘણા, પણ અમુક સુદામા જેવા મારા મિત્રો વિષે
મારે કંઈક કહેવું છે,
કંઈ બોલ્યા વગર સમજી જાય એવા જીવનસાથી વિષે
મારે કંઈક કહેવું છે.ચિંતન મનન કરતા કરતા મારે કંઈક કહેવું છે,
ખબર નથી શું? પણ છતાં મારે કંઈક કહેવું છે…… -
दोहे
“कुछ दोहे”
गुरु की महिमा का हरि करते है गुंणगान |
श्रेष्ठ न गुरू से है कोई बता दिये भगवान ||नित्य श्रद्धा से लीजिए श्री भगवत का नाम |
सब संयम से कीजिए दिए जो उसने काम ||खाली हाथ तु आया है जाना खाली हाथ |
फिर भी पागल भाँति क्यों मरता तु दिन-रात ||पाखंडो में गवां दिये तुमने कितने धन – धान |
पर गरीब की भूख को दिया न कुछ भी दान ||आया है तो जायेगा जतन लाख कर योग |
धन बैभव सब कुछ तेरा करता दूजा भोग ||जीवन का उपयोग करो दान धरम के साथ |
आखिर गत पछताओगे कुछ ना लगेगा हाथ ||
उपाध्याय… -
कविता – इलाहाबाद की बात निराली
इलाहाबाद की बात निराली
नगरी वही निराला वाली |
एक तरफ प्रयाग राज है
दूजी तरफ गंगा मतवाली ||
इलाहाबाद की बात…
गूढ भेद सारगर्भित बातें
बडी निराली इसकी रातें |
देख उजाला ऐसा लगता
जैसे हर एक रात दिवाली ||
इलाहाबाद की बात…
पावन करने कर्म नहाने
महाकुंभ में दुनियां आती |
धन्य धरा इलाहाबाद की
सबके पाप छुडाने वाली ||
इलाहाबाद की बात निराली…
उपाध्याय… -
कविता
……..दर्शन…….
यह अति नूतन दर्शन है
पावन यह परिवर्तन है |
सर्वोत्तम ज्ञान का दर्पण
है दिव्य दान यह धन है ||
इसका उत्थान इसी में
नित नव्य कला साधन है |
है ज्ञान तभी जीवन है
यह मुक्ति हेतु बंधन है ||
उपाध्यायय… -
कविता
सो रहा कई रातों का जगा
तुम आज मुझे जगाना मत |
शब्दों के घाव बड़े मतिहीन
उर को मेरे पहुँचाना मत ||
होती रिश्तों की डोर नरम
कदापि इसे आजमाना मत |
होते है कान दिवारों के
खुद को भी राज बताना मत ||
छल क्षद्म भरा सारा जग है
मुझसे तुम नेह लगाना मत |
यदि मन मुझसे लग जाये तो
नीज नेह भी मुझे जताना मत ||
उपाध्याय…
