जब भी बैठता हूं किसी सिरहाने से सटकर, बहुत सी यादें याद आ जाती हैं… इस आधुनिकता के खेल में भी मुझे, अपने बचपन की याद आ जाती है.. रसना खुश नही इन मंहगे पकवानो से, बस […]
जब भी बैठता हूं किसी सिरहाने से सटकर, बहुत सी यादें याद आ जाती हैं… इस आधुनिकता के खेल में भी मुझे, अपने बचपन की याद आ जाती है.. रसना खुश नही इन मंहगे पकवानो से, बस […]
शहर छोड़ गये हो सोचा मैंने, जब से तुम नजर नही आये… अजीब हो तुम भी शहर में होकर भी, तुम हमारे शहर नही आये… जो तुम न दिखते हो पास तो, अल्फाजों की निंदा […]
है कुछ करना भी मुझे कुछ नया सा कुछ अलग की मैं न बस रहूँ एक धूमिल खंडित नग——(१) तोड़के बंधन सभी, छोड़के सब व्याधियां लो चला मैं देख लो नव सृजन करने अभी——-(२) […]
The “getting free” lure …..!. A young family, Mr. John, his wife, two kids, Doing well for themselves, Staying in a small bungalow, Found one morning, Their new car missing, Stolen from garage where it […]
कौन बिन माँ के जगत में जन्म पाया , देव से बढ़कर तुम्हारी मातृ माया , है नही ऋण मुक्त कोई मातृ से , जन्म चाहे सौ मिले जिस जाति से , दूसरा है रूप […]
ಓ ಮೂಡಣದವನೆ ,ಬಂದು ನೋಡು ಈ ಧರೆಗೆ. ಸಸ್ಯಶಾಮಲೆಯಾದ ಸುಂದರ ಭೂಮಿಯ ನೋಡು ।। ಜುಳು ಜುಳು ನಾದವ ಮೀಟುತ ಜೇಂಕಾರ ನುಡಿಸಿರುವ ಕಾವೇರಿಯ ನೋಡು ।। ಹನಿ ಹನಿಯ ಹಬ್ಬಕ್ಕೆ ನಲಿದು ನರ್ತಿಸುವ ನವಿಲನ್ನು ನೋಡು ।। ಸ್ವರ್ಗವನ್ನೆ ನಾಚಿಸುವಂತ ಅಲಂಕಾರ ರಚಿಸಿರುವ ಹೂ ರಾಶಿಯ ನೋಡು ।। […]
My late night early diagnosis Is it my look? Is it my height? The sadness innocent boy look, When you stare into my eyes? The evilness that fastly builds up, Slowly deep down inside. How […]
लेख जिस तरह से एक शिकारी जाल फैलाता है और उसके जाल में शिकार खुद व खुद आकर फंस जाता है, उसी तरह कलयुग के कई नौजवान देश की नारियो, (बहन, बेटियो) की जिन्दगी को […]
क्यों है आज आत्माए अतृप्त इतनी भूल गई सारी उत्कृष्टताये अपनी बस स्वअर्जन की चाहनाये इतनी क्यों विघटन की कामनाये इतनी हम ही हम की इच्छाये इतनी दुसरो के लिए वर्जनाएं इतनी ऐसे कैसे मानवता […]
ट्रेन के डस्टबिन के पास मैले -कुचेले फटेहाल वस्त्रों से अपना तन ढकती, गोद में स्केलेटन सा बिलखता बच्चा थामे, डालती है अपना हाथ डस्टबिन में वो । कचरे के बीच बचे -खुचे खाने से […]
भजनों में, पूजन में, हे गणराजा … ! (भक्ति गान ) भजनों में, पूजन में, मगन है मन हमरा, हम और हमरा सबकुछ, हे गणराजा है तुम्हरा……! जो हमरा है आता, वो तोसे ही आता, […]
Yad hy tumhe wo sahil ka kinara……. Jahan ek din betha main apni adhuri khwahison ke panno ko zindgi ki kitab se fad kr sahil m baha rha tha… Mujhse kuch dur bethi ek ajnabi […]
!!!! DIL KI BAAT !!!! Paisa ………….Pyaar ………………….aur Shauhrat Sirf aur sirf bhagya se milta hai No matter who so ever deserve it Jo mila hai na ussi main khush raho @@ SAGAR @@ 21/8/16 […]
मेरे घर के पडौस में अभी नई – नई शादी हुई थी । सुनने में आया कि लड़की वाले गरीब हैं । फिर भी बहू ढेर सारा दहेज साथ लाई थी मुझे कुछ अचंभा हुआ […]
बन सिपाही जिस दिन सरहद पर जाऊंगा दुशमन को फिर उस रोज़ मज़ा चखाऊंगा मां तुम रोना मत गर वापिस न आऊं मैं देश का अपने पर देखना मान मैं बढ़ाऊंगा जब तक रहेगी आखिरी […]
प्रशांत महासागर सी अनंत विस्तार लिए हुए तुम्हारे इश्क़ में मेरियाना ट्रेंच सी गहराई महसूस होती है । एवरेस्ट की ऊँचाई जैसी हमारी आकांक्षाओं को जब तुम 8848 मीटर से देखती हो तो बरबस ही […]
बिकने दो! शराब अभी इस गाँव में। अभी भी कुछ बच्चे स्कूल जाते हैं घर आकर क ख ग घ गाते हैं। लेकिन कुछ बच्चे तालाब किनारे खाली बोतल चुनते है। कुछ तो खाली बोतल […]
Dress teri short kudi tu hot Lagti Punjaban tujhe iska hiii Rob Sexy teri chal swag Tera baimisal Chati firti baby hot ness ki Dukan Baby jadha chasma payti fastrak vala Gore Gore galo per hai til […]
ख्वाइशें भी हैं और कुब्बत भी है छू लेने की बुलंदियां , मगर, रौंदने का दूसरों को हुनर मैं कहाँ से लाऊँ, जो हर कदम देखकर भी सोये हैं मेरी मेहनत, उन फरिश्तों को जगाने […]
हिन्द के चूल्हे की रोटी खा रहे फिर भी, बांध पाक के घुंघरू ये गा रहे फिर भी, इन्हें मुजरा ही आता है भजन क्या जाने, तभी ज़ाकिर,अफ़जल के गुण गा रहे फिर भी।। मेरा […]
पुकारा तो नहीं लेकिन जुबां पर नाम तो आया ।। सकूँ दिल को नहीं आया मगर आराम तो आया ।। किसी को मिल गया मौका बुलन्दी पर पहुंचने का ! मेरा नाकाम होना भी किसी […]
Raat bahut hogyi thi Maine socha Par dil main abhi bhi thi roshni Time bht ho gya tha Maine socha Par dil tham sa gaya tha aur laga koi hosh nahi Phone check karne ka […]
न मैं तुलसी जैसा हूँ ,और न मैं खुसरो जैसा हूँ, मेरी कल्पना अपनी है ,सच नहीं दुसरो जैसा हूँ । हम सभी एक ही ग्रन्थ के ,हाँ हर पन्नो सिमटे है, छन्दों में जो […]
वो कहते हैं अपनी सरकार आते ही बदल गया है देश, रंग है बदला रूप है बदला और बदल गया परिवेश, बेवजह झूठे दावे करने की इनको लगी बीमारी है, भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई से से […]
ચિંતન મનન કરતા કરતા મારે કંઈક કહેવું છે, ખબર નથી શું? પણ છતાં મારે કંઈક કહેવું છે. જીવન છે ટૂંકું, રસ્તો છે લાંબો, છતાં મારે કંઈક કહેવું છે, આ સ્વાર્થી દુનિયાના સ્વાર્થી લોકો વિષે મારે […]
“कुछ दोहे” गुरु की महिमा का हरि करते है गुंणगान | श्रेष्ठ न गुरू से है कोई बता दिये भगवान || नित्य श्रद्धा से लीजिए श्री भगवत का नाम | सब संयम से कीजिए दिए […]
इलाहाबाद की बात निराली नगरी वही निराला वाली | एक तरफ प्रयाग राज है दूजी तरफ गंगा मतवाली || इलाहाबाद की बात… गूढ भेद सारगर्भित बातें बडी निराली इसकी रातें | देख उजाला ऐसा […]
……..दर्शन……. यह अति नूतन दर्शन है पावन यह परिवर्तन है | सर्वोत्तम ज्ञान का दर्पण है दिव्य दान यह धन है || इसका उत्थान इसी में नित नव्य कला साधन है | है ज्ञान तभी […]
सो रहा कई रातों का जगा तुम आज मुझे जगाना मत | शब्दों के घाव बड़े मतिहीन उर को मेरे पहुँचाना मत || होती रिश्तों की डोर नरम कदापि इसे आजमाना मत | होते है […]
एक पिता ने अपने बेटे की बेहतरीन परवरिश की। बेटा एक सफल इंसान बना और एक मल्टीनेशनल कम्पनी का CEO हो गया । शादी हुई और एक सुन्दर सलीकेदार पत्नी उसे मिली। बूढ़े हो चले […]
बाबा मैं वापस गांव आना चाहता हूं। उस घर में जहां से आधुनिकता की आंधी ना गुजरी हो अभी तक, वहां मिट्टी के चूल्हे की रोटी खाना चाहता हूं… बाबा मैं वापस गांव आना चाहता […]
उसने बन्दूक उठाई , मैंने कलम उसने गोली चुनी , मैंने शब्द उसने खून बहाया , मैंने आंसूं उसने घर जलाये , मैंने दिल उसने दीपक बुझाया , मैंने उसे जलाया उसने लोगों को सुलाया […]
बात गर खत्म हो जाती तो और बात थी। रात गर खत्म हो जाती तो और बात थी। हीर और राँझा अब भी है देश में लेकिन जात गर खत्म हो जाती तो और बात […]
Waking to a draft of air the moonlight empowers the scape, shadows cast to the floor. The smells of grass carried through the windows and the feel of wood on the sill.. I look out […]
सुनो शारदे ज्ञानदायनी, विनती मेरी बारम्बार । भँवर बीच में नैया मेरी, आकर मात लगाओ पार ।। तम का साया मुझ पर छाया, अंधकार से मात उबार । मुझे सद्बुध्दि स्मरण शक्ति दो, मिट […]
बच्चे झगड़ रहे थे मोहल्ले के जाने किस बात पर, सूकून इस बात का था न मंदिर का ज़िक्र था न मस्जिद का |
माँ के दिल में बसर नहीं छोड़ा. बाकी कोई कसार नहीं छोड़ा. घर की मजबूरियों ने भेजा है, हमनें यूँ ही शहर नहीं छोड़ा. —–डॉ.मुकेश कुमार (राज गोरखपुरी) www.facebook.com/drmkraj2010
नीर बन जो बह रही धरा पर, थी वह पर्वत की शिरमौर्य कभी, आज तपन बाधाएँ निज पग में, सह रही जो,था उसके जीवन में, भी शीतलता का अंम्बार कभी, पतझड़ में झड़ते पत्ते जो, […]
Everyone has his or her own Path to traverse, Known or unknown, Without any options of a reverse Back,going back to the start Again and taking another path, Beginning with a jumpstart, Treading into strange […]
तेरी मुलाकात मुझे अब याद नहीं है! अश्क की बरसात मुझे अब याद नहीं है! रफ्ता-रफ्ता गुजर रही है जिन्दगी मगर, दर्द़ की सौगात मुझे अब याद नहीं है! Composed By #महादेव
मनहरण घनाक्षरी रण में लड़े जो सदा, शत्रुओं से डरे बिना वीरों में भी वीर ऐसे राणा अति वीर थे । धर्म देश जाति नीति, का सदैव मान रखे त्याग तप ज्ञान बुद्धि, की बड़ी […]
Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE dhoka milega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO ByRLvgahlot
Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE milegamilega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO ByRLvgahlot
Mohobat mai unki aisa alam tha Na din ka pta na rat ka dhikana tha×2 Chur the hum unki yado mai Or lafjo per unka hiii afsana tha Ger bna kr ek pal mai chodh gyi Is masom dil KO tode gyi Ye kissa hiii bewafao ka Purana that By RLvgahlot
Rat de khamoshi Te akha vich piyar Rab to v sona labiya mai yr Te odi ek hasi vich meri Duniya vasdii aye Te ode gum NAL meri zind kut diii ayeee Socha mai aisa […]
??????(मुक्तक)???????? ????????? माँ चरण आपके स्वर्ग का रूप है। माँ सभी शक्तियो का मिला रूप है। जिंदगी श्याम मेरी न होगी कभी। माँ नजर आपकी प्रेम का धूप है। ????????? रचनाकार अविनाश सिंह अमेठिया (देवरिया) […]
पूर्व की हवाएँ जब भी बदलता है मौसम वसंत के बादऔर ग्रीष्म के पहले का लंबा अंतराल तो सूर्य के विरुद्ध जा कर पुरबवैयाँ चलती हैं। गाँव में कहावत है ऐसे मौसम में मत […]
तेरी लहर मिल गयी है यादों की फिर से! तस्वीर मिल गयी है इरादों की फिर से! डूबी है फिर जिन्दगी तेरे अफसानों में, जागीर मिल गयी है मुरादों की फिर से! Composed By #महादेव
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