महेश गुप्ता जौनपुरी
क्या बयॉ करे
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
क्या बयॉ करे……
क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से
हंसकर दर्द छुपाता हूँ
दिल के गहरे घाव को
अपने किस्मत को मैं कोसता हूँ
सुबह शाम दर्द को झेलता हूँ
क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से
खुश रहना खुश रखना चाहता हूँ
फिर भी ख़्वाहिशे अधुरी हैं
दिल का दर्द छिपा सीने में
होठो से मुस्कान बिखेरता हूँ
क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से
पागल जमाना समझता हैं
दुःख सुख हैं मेरा साथी
मैं उसका हूँ मित्र पुराना
जीवन की डोर पकड़ कर जीता हूँ
क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से
मैं ही अकेला अभागा नहीं
संसार में बहुत से पीडित हैं
सुख को महसूस करता हूँ
दुःख भागे चले आता हैं
क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से
जीवन की काली पूड़िया को
हर रोज मैं पीता रहता हूँ
क्या करे शिकायत इस जमाने से
बस जीता हूँ अपनो से चोट खाने के लिए…
महेश गुप्ता जौनपुरी
मन कि सोच….
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
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मन की सोच से……
आईने को जब देखता हूँ
खुद को घुटता पाता हूँ
लगता हैं नहीं दे पायेगे
खुशी इस जमाने में
खुद को जीतना छिपाना चाहता हूँ
बेवसी मुझ पर हँसती हैं
मेरे गमो की माला को
दिन रात जपती हैं
नहीं दे सकता मैं
किसी के जीवन में खुशी
मैं समझ नहीं पाता
क्या खता कर बैठा मैं
खुशी देने निकला
ऑसू दे बैठा मैं
खुद को कैसे समझाऊ
मेरे अपने ही रुठे रहते हैं
लगता हैं मैं अपने अस्तित्व को
खो दुगॉ गम की परछाई में
महेश गुप्ता जौनपुरी
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तुम्हारे लिए…..
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
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सिर्फ तुम्हारे लिए…..
तुम ख्वाब हो अरदास हो
मेरे दिल की धड़कन हो
तुम प्यार हो पहचान हो
मेरे जीने की वजह हो
तुम जीवन हो हकिकत हो
मेरे सपनो की मुस्कान हो
तुम जज़्बात हो हमसफर हो
मेरे सॉसो की खुशबू हो
तुम महक हो खुबसुरत हो
मेरे प्यार की निशानी हो
तुम खामोश हो इश्क़ हो
मेरे जीवन की रोशनी हो
तुम एहसास हो सुकून हो
मेरे ऑखो की प्यास हो
महेश गुप्ता जौनपुरी
रक्षा करना बहना का
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
रक्षा करना बहना का
सूत के बन्धन का
प्यार के रिस्तो का
भाई बहन के दुलार का
बचपन की ठिठोली का
टूटने ना देना
रिस्ते की बुनियाद को
रक्षा करना बहना का
दरिन्दो की आड़ से
ज़ुल्मी संसार से
दहेज के प्रहार से
भोलेपन ठगहार से
मनचलो के क्रुर से
तानाशाही ससुराल से
रक्षा करना बहना का
बहकते कदम को
चलती जुबान को
ऑगन की लड़ाईयो से
झुठेपन की चतुराईयो से
समय की प्रवाधान का
बेवजह घुमना बाजार का
रक्षा करना बहना का
किसान कि वेदना
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
किसान की वेदना
खुले आसमान के तले
रोटी का निवाला लिए
ऑखो में बेरुखी
नाप रहे धरती की छाती
ना सोने के लिए हैं शीश महल
ना रहने को हैं राजमहल
किसान के लिए हैं एक विकल्प
करो या मरो धरती के आंचल में
सुनहरे सपनो के संग सोना
खेत से जीना खेत में मरना
लाठी के सहारे चलना
रस्सी के संग फॉसी चढ़ना
नहीं हैं आसान कुछ भी
किसान बनना सबके बस की नहीं
किसान के संग बदसलूकी करना
किसान के संग धोखा करना हैं
हर चीज पैसे से नहीं तौला जाता
भूखी रोटी किसान से ही मिलता
चलो एक कदम बढाये हम
किसान का हक दिलाये हम
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – ९९१८८४५८६४
जीवन कि परछाई
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
जीवन की परछाई
जीवन मरण कहानी हैं
सुन्दर छवि अलौकिक
क्या लेकर तुम आये थे
क्या लेकर तुम जाओगे
रिश्ते को निभाते रहना
जीवन की कमाई हैं
धन दौलत सब रह जायेगा
घमण्ड क्यो हैं फिर भाई
शान से जीना सच्चाई पर रहना
यही जीवन की परछाई हैं
सब छुट जायेगा अन्तर्मन से
बस नाम रह जायेगा संसार में
क्यो इतना करना भेद भाव
जब सब कुछ जाना हैं झोडकर
प्यार लुटाओ प्यार करो
नहीं किसी से टकरार करो
महेश गुप्ता जौनपुरी
राजनीति
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
राजनीति
राजनीति के गलीयारे में
ऊच नीच सभी बह जाते हैं
जिसको दुध पिलाकर पाला
सपोले बनकर डस जाते हैं
राजनिति की परछाई में पड़कर
देश को खोखला कर जाते हैं
शौहरत नाम के लिए राजनेता
अपनी मॉ का सौदा तक कर जाते हैं
चलती हैं चुनाव की आगाज
नेता भी कुत्ता बन जाते हैं
गली गली चौराहे तक
पैदल चलते दिख जाते हैं
नेतागिरी का धौंस जमाकर
देश को दिमक बनकर चट जाते हैं
नेता का कोई धर्म संस्कार नहीं
अपनी जन्मभूमी का सौदा कर जाते हैं
पहन जनेऊ रखकर सिर पर टोपी
जनता को गुमराह कर जाते हैं
जाति धर्म का चुगली करके
दंगा फसाद करवा जाते हैं
लम्बी लम्बी बाते करके
चुनावी दंगल जीत जाते हैं
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
नारी कि गाथा
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
नारी की गाथा
जीवन में रंग को भरने वाली
प्यारी भोली नारी हो तु
घर ऑगन को सँवारने वाली
तुम फूलो कि क्यारी हो
माँ बहन बेटी बनकर तुम
घर को अलंकित करती हो
मुझसे तुम हो तुमसे मैं हूँ
फिर भी कोई मेल नहीं
भाव तुम्हारा सुन्दर हैं
क्योकि तुम अनमोल हो
त्याग संतोष तुम्हारा धन
यही सत्य कहानी हैं
धरा की अलौकिक प्यार समेटे
नारी छवि तुम्हारी भारी हैं
प्यार हमेशा लुटाती रहती
नारी हो सब पर भारी हो
महेश गुप्ता जौनपुरी
नया साल का पहरा
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
नया साल का पहरा
खेत खलिहान के सरहद पर
रंग बिरंगे फूलो का बसेरा होगा
ठंड बसन्त के हवाओ से
नया साल का उजाला होगा
मदमस्त महकती फिजा होगी
घर अॉगन में रौनक चॉदनी
धरा सुन्दर अलंकृत होगा
सुरज का गहरा पहरा होगा
घर घर मंगल गीत होगा
जब चैत्र मास आयेगा
कोयल की मिठे गीत से
फागुन का रंग छा जायेगा
नये साल में नव गीत का
स्वागत एवम् अभिनन्दन होगा
चैत्र शुक्ल का जब आगमन होगा
नये साल में मौसम बड़ा सुनहरा होगा
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
वृक्ष/पेड़
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
वृक्ष
दिन प्रतिदिन कटते जा रहे हैं
वन्य पेड़ झाड़ियॉ
प्रदुषण की ललकार ने
पैरो में डाल दी रोगो की बेड़िया
घुटते जा रहे हैं इंसान
अपने कर्म की अठखेलियो से
पेड़ को काटकर…..
उजाड़ रहे हैं परिन्दो के खरौदे
भूमण्डल में गजब का हलचल छाया हैं
आने वाला साल मौत फरमाया हैं
यू काटते रहें पेड़ तो
अस्तित्व खत्म हो जायेगा
धरा भी धीरे – धीरे त्रिण हो जायेगा
इंसान अपने ही स्वार्थ से
जीवन को खतरे में डाल रहा
चेहरे की हँसी सिमट सी गयी
भोर की हवा थम सी गयी
प्रदुषण के मार से
धरा पर तापमान बढ़ सा गया
एक कदम बढ़ाना ही होगा हम सभी को
विरान वंसुधरा को हरा भरा बनना ही होगा
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
नेता जी का सत्ता
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
नेता जी का सत्ता
मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो
मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी
कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का
बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी
नफरत का जहर जहन में ना डालो
हम इंसान को वोट के लिए ना मारो
हमें मुल्क से माँ बाप ने भेद भाव नहीं सिखाया था
तुम्हारे दशहत गर्दिशो से मारे मारे फिरते हैं नेता जी
इसका फायदा उठा देश का बाटाधार करते हो
फैला नफरत की आग रोटी सेंकते हो
कभी मन्दिर कभी मस्जिद पर लडा़ते हो
वर्षो पहले की मोहब्बत पर पानी फेर देते हो
अपने फायदा के लिए देश को भी नहीं छोड़ते हो
बनकर रंगबाज नेता देश को लुटते हो
चुनावी दंगल में मीठा मीठा बोलते हो
बड़े प्यार से फिरकी वोटरो का लेते हो
दिखा कर अपने को समाजसेवी नेता जी
देश दुनिया को लुटते फिरते हो
अपने बातो की अल्फाज में उलझा कर
देश प्रेम का गीत गाते फिरते हो नेता जी
इंसानो के ऊपर राज करते हो
अपने इसी काला बाजारी से नेता जी
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
हौशला
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
हौशला….
अपने हौशले की उड़ान से उड़ना चाहता हूँ
समुन्दर के लहरो का तूफान देखना चाहता हूँ
ये हवा तेरे गर्दिश का मैं दिदार करना चाहता हूँ
पत्थर दिल लेकर पत्थर से टकराना चाहता हूँ
ओंस की बुदो से मैं खेलना चाहता हूँ
दुनिया के दर्द की किताब को पढना चाहता हूँ
पंक्षीयो के सुर से सुर मिलाना चाहता हूँ
विरान तुफानो से मैं एक सवाल पुछना चाहता हूँ
ये रंग बिरंगे फिजाओ से अपनत्व पुछता हूँ
जल अग्नि वायू से मैं व्यवहार पुछता हूँ
नदी झरनो से मैं उनका पता पुछना चाहता हूँ
जमीं आसमान से मैं एक फरियाद करना चाहता हूँ
रंग बंसती का मैं हवाओ में देखना चाहता हूँ
दिलो के दुरियो को मैं गले लगा मिटाना चाहता हूँ
मिट्टी की खुशबू को मैं सॉसो में भरना चाहता हूँ
अपने कर्म भूमि भारत माँ को नमन करना चाहता हूँ
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
माँ कि ममता
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
माँ कि ममता
टुटे छप्पर के द्वार पर
महलो के किनार पर
जाते हुए फुटपाथ पर
ममता दिखती रहती हैं |
बोलते हुए इंसान में
बेजुबान के ललकार में
पछीं के आवाज में
ममता दिखती रहती हैं |
नन्हें से चींटी की चाल में
हाथी की हुंकार में
कोयल की कू – कू में
ममता दिखती रहती हैं |
माँ के दुलार में
अधरो के मुस्कान पर
जीवो के प्यार में
ममता दिखती रहती हैं |
नन्हे अनजान में
शेर के खूंखार में
मासुम दिलकश जानवरों में
ममता दिखती रहती हैं |
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
माँ
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
( माँ )
माँ ओ मेरी प्यारी माँ
जग से सुन्दर
मेरी माँ
गले मुझे लगाती
तन मन को
शीतल कर देती
प्यार बहुत
लुटाती माँ
जग से सुन्दर
है तू मेरी माँ
मेरे जीवन की
आशा है तू
सब कुछ न्योछावर
करती है
अपने को दुखी रखकर
मेरा पालन करती है
माँ ओ मेरी प्यारी माँ
जग से सुन्दर
मेरी माँ
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
प्रभु से वन्दन
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
गीत – प्रभु से वन्दन
हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे
अपने चरण में बुला लेना
थोड़ा सा दया हम पर करना
मुझको भव से पार लगा देना
मैं दीन दुःखी आभागा हूँ
किस्मत का मैं तो मारा हूँ
हैं तुमसे प्रभू विनती इतनी
जीवन को मेरे सँवार देना
हैं जग में घनघोर अंधेरा
प्रभु मुझको राह दिखा देना
जीवन में मैं सेवा भाव करु
बस इतना हो मेरा कर्म सदा
जीवो पर सदैव समर्पित रखना
कर्म सेवी मुझे बना देना
भूमण्डल का मुझको प्रभु
रक्षक बेजुबानो का बना देना
हो कर्म सदा मेरा इतना
मुझको धरा पर जगह देना
हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे
अपने चरण में शरण देना
महेश गुप्ता जौनपुरी
रंग बिरंगे सपने
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
रंग बिरंगे सपने
नव गीत नव सृजन को
मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
आसमान की ऊँचाई को
मैं नापना चाहता हूँ
हौसले की उड़ान से
सब कुछ बदलना चाहता हूँ
रंग बिरंगे सपनो को
मैं अपना बनाना चाहता हूँ
नभ अम्बर की गलीयों में
प्यार लुटाना चाहता हूँ
मनुष्य के जीवन को
प्यार सिखाना चाहता हूँ
चिड़िया कि चहचहाहट में
एक सृजन लिखना चाहता हूँ
फिर से सपने में खो कर मैं
स्वच्छ सुन्दर संसार चाहता हूँ
महेश गुप्ता जौनपुरी
फौलादी मन
July 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
फौलादी मन
किसी शाख कि मोहताज नहीं हूँ साहब
जमींर जिन्दा हैं मेहनत करके खाता हूँ
बैसाखी का नंगा नाच करके क्या हैं फायदा
मुझे अपने ऊपर हैं चट्टानो सा भरोसा
मेरी खुद्दारी का हाल तुम जानकर क्या करोगे
मेरी झोली में जितना हैं मैं उसी में खुश हूँ
कटोरे पकड़ मैं भी माँग कर गुजारा कर लेता
जमीं ही मेरी गवाही ना दी भीख की निवाले को
तरस खैरात की रोटी नहीं हैं कमाना
बैसाखी का बहाना बना नहीं पकड़ना हैं कटोरा
बाजू में दम हैं हिम्मत में हैं हौसला
मैं विकलांग हूँ तन से मन से मैं फौलादी
खुश हूँ खुश रहता हूँ मदमस्त जीता हूँ
परिवार कि जिम्मेदारी हौसले से पुरा करता हूँ
रोटी की निवाले को बाँट कर खा लेता हूँ
अपने जमींर को मैं कभी गिरने नहीं देता हूँ
महेश गुप्ता जौनपुरी