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rajesh arman

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rajesh arman

@rajesh arman • Joined Feb 2016 • Active 2 months ago

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by rajesh arman

किसी रंजिश से दो चार नहीं

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

किसी रंजिश से दो चार नहीं
लोग जुगनुओं का भी फ्यूज  ढूँढ़ते है

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by rajesh arman

वक़्त का तमाचा

March 29, 2016 in हाइकु

वक़्त का तमाचा
हाथ क्या पूछे

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by rajesh arman

वज़ूद तेरा बूँद सा

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वज़ूद तेरा बूँद सा
शामिल है मगर समुंदर में

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by rajesh arman

गिर के संभले तो मगर

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गिर के संभले तो मगर
संभले मगर गिर गिर के

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by rajesh arman

बगैर दुनिया के हम नहीं है

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बगैर दुनिया के हम नहीं है
दुनिया कौन सा अकेले चलती है

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by rajesh arman

फिर वहीँ फ़रियाद

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

फिर वहीँ फ़रियाद
कौन रखेगा याद
सिरहाने बैठी रही
सिसकियाँ अपनी आबाद

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by rajesh arman

बिन तेरे कमीं तो थी

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बिन तेरे कमीं तो थी
आँख में कुछ नमी तो थी
युँ तो सांसें चलती रही मगर
सांस कुछ देर को धमी तो थी

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by rajesh arman

किसकी हसरत कैसी हसरत

March 29, 2016 in हाइकु

किसकी हसरत कैसी हसरत
अपने तो दुखों को मिली बरकत
उसे गुनाहगार कैसे कह दो
सब थी अपनी ही वैसी हरकत

2 Comments »

by rajesh arman

जिल्द बिन किताब का

March 29, 2016 in हाइकु

जिल्द बिन किताब का
फूल बिन हिज़ाब का
रातों का नहीं
ख्वाब हूँ आफताब का

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by rajesh arman

न सही गम सही

March 29, 2016 in हाइकु

न सही गम सही
खुद बन मरहम सही

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by rajesh arman

सीने में दबे अरमान

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सीने में दबे अरमान
आँखों में झलक जाते है
आँखों में छुपे अरमान
ख्वाब बनके ढलक जाते है

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by rajesh arman

घर से निकलोगे तो जानोगे

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

घर से निकलोगे  तो जानोगे
चांदनी का वज़ूद क्या है

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by rajesh arman

कहीं पर लब मचल गए

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहीं पर  लब मचल गए
कही मतलब मचल गए
इंसा की हसरतों का क्या
जब देखो तब मचल गए
    राजेश ‘अरमान’

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by rajesh arman

कोई पीर न था

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोई पीर न था
कोई राहगीर न था
बहता हुआ नीर न था
 ज़िंदगी का फ़क़ीर न था
बस कुछ ढूंढती  है आँखें  
ज़माने की कोई तस्वीर न था

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by rajesh arman

माना वो सिकन्दर था

March 29, 2016 in शेर-ओ-शायरी

माना वो सिकन्दर था
उसका भी मुक़द्दर था
हमने अपने हाथों से उजाड़ा
कुछ अपने भी तो अंदर था

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by rajesh arman

मत रोको आंसुओं को

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मत रोको आंसुओं को
कहीं बहता पानी रोक जाता है

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by rajesh arman

ज़ख्म को गिनते क्यों हो

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़ख्म को गिनते क्यों हो
गोया अब इन्तहा हो गई हो

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by rajesh arman

कौन पी सका समुंदर को

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कौन पी सका समुंदर को
लहरे ही दर्द सहती है

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by rajesh arman

मैखाने की बातें मैखाने

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैखाने की बातें मैखाने तक रहने दो
आंसुओं के सैलाब ही समुंदर होते है

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by rajesh arman

कोरे कागज़ पे लिखी

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोरे कागज़ पे लिखी
कोई दास्तां नहीं
वज़ूद अपना बुलंद
ज़माने से वास्ता नहीं

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by rajesh arman

उन्हें ज़िद थी न हारने की

March 29, 2016 in हाइकु

उन्हें ज़िद थी न हारने की
कारण बन गई हार का

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by rajesh arman

घर के अंदर घर नहीं मिलता

March 29, 2016 in हाइकु

घर के अंदर घर नहीं मिलता
कोई सुखनवर नहीं मिलता

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by rajesh arman

बिक गया वो शक्स भी

March 29, 2016 in हाइकु

बिक गया वो शक्स भी
जिसे हम सौदागर समझते रहे

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by rajesh arman

न सूरत में न सीरत में

March 29, 2016 in हाइकु

न सूरत में न सीरत में
सब कुछ मन की जीनत में

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by rajesh arman

कहाँ गई वो हवाएं

March 29, 2016 in हाइकु

कहाँ गई वो हवाएं
कहाँ गई वो फ़िज़ाएं
बिखर गई अब वफ़ाएं

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by rajesh arman

गुमशुदा इंसा

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गुमशुदा इंसा
इस्तहार कहाँ दे

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by rajesh arman

हर किताब की कहानी

March 29, 2016 in हाइकु

हर किताब की कहानी
पन्नो की मेहरबानी

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by rajesh arman

सब कुछ वैसा ही

March 29, 2016 in हाइकु

सब कुछ वैसा ही
सब कुछ पैसा ही

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by rajesh arman

वीराना अपना

March 29, 2016 in हाइकु

वीराना अपना
वीराना बेगाना
वीराने को कौन जाना

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by rajesh arman

चलो फिर बांट ले

March 29, 2016 in हाइकु

चलो फिर बांट ले
गम को फेक डाले
खुशिओं को छांट ले

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by rajesh arman

मन आतुर नयी सुबह को

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मन आतुर नयी सुबह को
सुबह आदत से मज़बूर

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by rajesh arman

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो

March 29, 2016 in हाइकु

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो
गुमी हुई है गुमी रहेगी

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by rajesh arman

दर्द के पंजों में

March 29, 2016 in हाइकु

दर्द के पंजों में
दर्द है

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by rajesh arman

क्या लिखता है

March 29, 2016 in हाइकु

क्या लिखता है
सब दिखता है
इंसा बिकता है

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by rajesh arman

उनकी तकलीफ देखी न गई

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उनकी तकलीफ देखी न गई
जब तकलीफ देखी न गई
वजह भी पूछी न गई
कुछ निशान खामोश है

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by rajesh arman

वो जलते क्यों है

March 29, 2016 in हाइकु

वो जलते क्यों है
क्या शमा से रिश्ता है

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by rajesh arman

कोई अजनबी

March 29, 2016 in हाइकु

कोई अजनबी
छोड़ जाता
आवाज़ दबी

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by rajesh arman

किसकी कितनी उम्र वो जाने

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

किसकी कितनी उम्र वो जाने
हम तो ज़िंदगी का हिसाब नहीं करते

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by rajesh arman

जो उसकी तमन्ना

March 29, 2016 in हाइकु

जो उसकी तमन्ना
बाकि फिर क्या करना

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by rajesh arman

कोई रहबर नहीं

March 29, 2016 in हाइकु

कोई रहबर नहीं
कोई सहर नहीं
अपनी भी खबर नहीं

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by rajesh arman

नीले सपनो में

March 29, 2016 in हाइकु

नीले  सपनो में
काले से
है शुमार अपनों में

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by rajesh arman

उसने की थी शुरू लड़ाई

March 29, 2016 in हाइकु

उसने की थी शुरू लड़ाई
मात मैंने भी कभी न खाई

2 Comments »

by rajesh arman

मैंने जीतने की खवाइश की

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैंने जीतने की खवाइश की
हार खुदबखुद शर्मा गई

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by rajesh arman

वक़्त पकड़ता लम्हा

March 29, 2016 in हाइकु

वक़्त पकड़ता लम्हा
इस दुनिया में
हर इंसा तनहा

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by rajesh arman

जंग इंसानियत की

March 29, 2016 in हाइकु

जंग इंसानियत की
इंसान हो रहे लुप्त

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by rajesh arman

उसके क़दमों की चाप

March 29, 2016 in हाइकु

उसके क़दमों की चाप
सनाटों को रौंद गई चुपचाप

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by rajesh arman

नफरतें बेहिसाब

March 29, 2016 in हाइकु

नफरतें बेहिसाब
पहने नक़ाब
निकलते जनाब

2 Comments »

by rajesh arman

काश कोई पिंजरा ऐसा होता

March 29, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

काश कोई पिंजरा ऐसा होता
जो आसमा में टंगा होता

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by rajesh arman

कौन आया

March 29, 2016 in हाइकु

कौन आया
कौन गया
यही दुनिया

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by rajesh arman

दिखते तो अब जो कभी

March 29, 2016 in हाइकु

दिखते तो अब जो कभी
दिखाई देते पर  दिखने जैसे नहीं

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