जीवन सिर्फ जीवकोपार्जन
March 19, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
जीवन सिर्फ जीवकोपार्जन के लिए किया प्रयास नहीं है
जी सभी रहे है लेकिन जीने का एहसास नहीं है
सदियाँ बीती हवाओं की भी इस ज़माने की हवा लग गई है
दीपक हौसलों के बस साथ रखो फिर कोई मुश्किल खास नहीं है
न सुबह का वर्चस्व तो फिर कैसे हो सकता है रात का
जीवन कुछ और भी है , हर पल वनवास नहीं है
पिघलते आसमान से अपनी ज़मीं को रखना है तुमको दूर
अपने कर्मों से जीने से बड़ा संसार में कोई संन्यास नहीं है
जीवन सिर्फ जीवकोपार्जन के लिए किया प्रयास नहीं है
जी सभी रहे है लेकिन जीने का एहसास नहीं है
राजेश’अरमान’