माँ तेरी ममता का कोई हिसाब नहीं। तेरी आँचल की छाया और जिसको तेरी गोद मिले। खुशनसीब है वो संतान जिसको ममता की मोद मिले।। तेरे मन की शीतलता के सम कोई माहताब नहीं । […]
माँ तेरी ममता का कोई हिसाब नहीं। तेरी आँचल की छाया और जिसको तेरी गोद मिले। खुशनसीब है वो संतान जिसको ममता की मोद मिले।। तेरे मन की शीतलता के सम कोई माहताब नहीं । […]
🌹*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*🌹 💕 माँ- दुःख में सुख का एहसास है, माँ – हरपल मेरे आस पास है। माँ- घर की आत्मा है, माँ- साक्षात् परमात्मा है। माँ- आरती, अज़ान है, माँ- गीता […]
Happy mothers day हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों डूबती नैया पार लगदे वो किनारा है दोस्तों माँ के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जायगा माँ के प्यार से सब ठीक हो […]
“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम” ************************ माँ तू जननी है, तूने मुझे, कोख में, पाला, नौ माह तक, जन्म दी, इस वसुंधरा का, दर्शन कराई, जननी हो न, खुद दुख सहकर, सुख का भोग […]
मातृदिवस पर माँ को बच्चे याद बखूबी करते हैं। सोशल मीडिया पर आकर अह्लाद बखूबी करते हैं। माँ ने अपने दूध की ममता फेसबुक पर डाला क्या? दिल के एस डी कार्ड से भैया तेरा […]
क्या लिखूं तुझ पर ? तू खुद शब्दों की माया है, खुद ना आ सका विधाता इसलिए तुझे भिजवाया है। Happy mother’s day
एक तरफ सावन के रुसवाई तो दूसरे तरफ महबूब की जुदाई। ए मेरे खुदा तू ही बता कैसी है सावन व महबूब की खुदाई।।
जब से सावन मेरी जिंदगी में बहार बनके आया तब से हम कविताओं को अपनी डायरी में जगह नहीं देते। शब्द लपेट लेते हैं अपने दामन में उसको दिल में जगह नहीं देते घाव कितने […]
जब से सावन मेरी जिंदगी में बहार बनके आया तब से हम कविताओं को अपने डायरी में जगह नहीं देते।
आसमान के तारे भी सूक्ष्म मलिन से लगते हैं जब भारत के सैनिक वर्दी पहन ओढ़ कर चलते हैं जान ठोकर खाती है कदमों में और होंठों पर मुस्कान लिए चलते ऐसा जिगरा तो केवल […]
हम देश के सिपाही ये हिन्द है हमारा। चंदन लगे हैं माटी अभिमान है हमारा।।
देश के भीतर कोरोना है और सरहद पर आतंकवाद। संयम और धीरज से हमसब निज देश को रखेंगे आबाद।।
दिन अरतालिस बन्द रहे सब घर के भीतर काम काज सब छोड़ व्यापार। फिर भी कोरोना जालिम बन हो गया बन्धु साठ हजार।।
यूँ हीं नौराता बीत गया और गई बैशाखी खाली-खाली। कहर कोरोना के कारण जेब तिजोरी सब हो गए खाली।।
“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम” “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम, मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े” “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का, दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते” “चिराग जलाते हुए जीने […]
ना तीर से डरते हैं ना तलवार से डरते हैं। हम तो वीर सैनिक हैं सिर्फ गद्दार से डरते हैं।।
कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों को सुनने और सुनाने को जी करता है मेरा जब भी तेरी आँचल में आ जाता हूँ। तू जननी है जन्मभूमि है तेरी गोद में आकर मैया सुख जन्नत का […]
नब्ज टटोलकर भी पूछते हो तुम्हें रोग क्या है ? दिल दिलदार का पूछता है दवा-ए-वियोग क्या है?
एक तरफ सावन के बरसात तो दूसरे तरफ अश्कों के शैलाब। जब जब बैरी कँगना खनके तब तब दिल हो जाए बेताब।।
दिल के वीराने में फिर, उल्फते गीत गा रहा है कोई। महफूज धड़कनो में मुद्दत बाद, एहसास दे रहा कोई।।
कोरोना कें कहर में न ताली काम आई न थाली काम आई। काम आई तो सिर्फ घर घर कंगाली ईनाम आई।।
देखते देखते हम बदनाम हो गए देखते देखते हम सिरफिरे और नाकाम हो गए, कल कहते थे हम जिंदगी है उनकी आज उनके लिए हम दास्तां-ए शाम हो गए।
वो आकर हमें हमारी कमियां गिना रहे हैं जो खुद उलझे है जिंदगी की उलझनों में वह हमें जीना सिखा रहे हैं…….
मैं खिड़की पर खड़ा था और वह दरवाजे पर खिड़की से दरवाजे कि ये दूरी तब भी थी जब वह मेरे पास आ रही थी और अब भी है जब वह मुझे छोड़ कर जा […]
हां मशगूल हूं अपनी दुनिया में मुझसे बेहतर मुझे कोई जानता नहीं खामोश रहूं? या सवाल करू? मेरे शब्दों को कोई पहचानता नहीं।
आईना नहीं है आंखें मेरी फिर भी हकीकत तो जानती हैं ना तुम राही हो ,ना हमराही हो फिर भी तुम्हें अपना मानती हैं ।
ये खुदा है जनाब ! उसके ही ख्वाब दिखाता है जिसको हमारी किस्मत में नहीं लिखा जाता है।
कैसे होगी शहरी अब कैसे होगा इफ्तार भला। कहर कोरोना के कारण बन्द पड़ा बाजार भला।।
न फूल मिला न हार मिला। न नारियल चुन्नी सिंगार मिला। मन्दिर में ताले लटक रहे यूँ हीं नौराते का त्यौहार गया।।
सोच विचार करते करते, जीवन की नैया डुब गयी। बैठ कर गलतीयां गिनते गिनते, बटोही आधी उम्र बीत गयी ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
राह में चलते चले मनु, खुद को खुद से ढ़ो रहें। सोच विचार करके मनु, अपने आप को खो रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खोल यादों की पोटली सोच विचार कर रहें, मानव अपने कर्मों पर गहन विचार कर रहें। कैसी ये मुफलिसी है छायी मेरे चेहरे पर, अपने आप को ढुंढ कर अपने आप में ही खोए रहें।। […]
आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें, यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें। कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन करें, जिंदगी के क्रुध्द पल का आ बटोही हनन करें।। […]
ये दोस्त ये रास्तें ही मेरी मंजिल है, मेरे दिल का जज़्बात ही मेरी साहिल है। सोच लेता हूं कभी अपना गुजरा हुआ कल, मेरा दुःख दर्द मेरा किस्मत ही जाहिल है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मन की चिंता है हितकारी, कभी ना भागो मेरे भाई । सोच विचार ही लाता परिणाम, इसे देख ना घबराओ भाई ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सोच विचार की दोस्ती देता ताउम्र साथ, मित्र के सोच को समझ कर ही बढ़ाओ हाथ। दोस्ती का बंधन टिकता विश्वास के साथ, धुर्त चोर उचक्कों से माफ करो मुझे नाथ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
राह भले हो लम्बी अपनी, सोच विचार करके है चलना। देखकर टिमटिमाते हुए तारें, प्रेम की बंशी बजाते है रहना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
चिंता हो या चिंतन करो सोच समझकर, ना पगलाओ तुम ना पागल करो मुझे। दिग्गज के चक्कर में ना करो जीवन नर्क, शान से जीयो शान से रहो मेरे तुम बात को बुझो।। ✍महेश गुप्ता […]
जीवन एक अलौकिक धारा, सदैब पानी संग बहते रहना। लुटाकर अपने अनोम विचार, सोच समझ कर बढ़ते रहना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
काला चश्मा पहनकर चलते सतरंगी चाल में, खुद से खुद बातें करते फंसते देखो जाल में। बात के जंजीरों में जकड़ पीसते देखो जात में, अपने सर का बोझ उठाये फिरते अंधेरी रात में।। ✍महेश […]
हकिकत को पहचाने का तजुर्बा है, झूठ को ठुकराने का हौसला है । सोच विचार से निकलता है मार्ग, धूर्त मक्कार सदैव फिसलता है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मन का घोड़ा ,बेशक़ लंगड़ा हरदम जाए भागे-भागे। जन्नत भी फीका लगता है महबूब की गलियों के आगे।
बेशक़ बदनाम हो गई उनकी गलियों में बाकसम अब भी अपनी -सी लगती है।
ज्ञान और विज्ञान की धरती त्याग और बलिदान की धरती। क्यों बन रही है आज एक जालिम और बेईमान की धरती।।
ए आँखें, ए होंठ किसी मय से कम नहीं। वो मय किस काम का जिस मय में आप नहीं।।
खोटे सिक्के को यूं ही सरेआम जलील मत करो यारों, कभी खोटा सिक्का भी बादशाह हुआ करता था, बस वक्त वक्त की बात होती है, समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है, महेश गुप्ता […]
मधुशाला खोल के भारत ने हरिवंश राय बच्चन की रचना को चरितार्थ किया मंदिर-मस्जिद बैर कराते मेल कराती मधुशाला फैली है चारों ओर महामारी फिर भी खुली हुई है मधुशाला पूरा भारत है लाक डाउन […]
काली स्याह जुल्फे तेरी, काली घटा पे कयामत ढाती है। गर बिखरा दे अपनी जुल्फ, मेरी कयानात में रौशनी आ जाती है।।
कौन कहता है तेरी अदा के कायल हम नहीं है। रात दिन तेरी गेसुओं मे उलझा रहता हूँ ए क्या कम है।।
यों न देख इस अदा से कहीं मर हम न जाए। ए आँखें देखे है कई मर्तबा दीवानो को मरते हुए।।
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