भोर था प्यार अब दोपहर हो गया, स्वपन का था महल खँडहर हो गया! करूँ जितना प्रयास पर मिलता नहीं, तुम्हारा प्यार नहीं काला धन हो गया!!
भोर था प्यार अब दोपहर हो गया, स्वपन का था महल खँडहर हो गया! करूँ जितना प्रयास पर मिलता नहीं, तुम्हारा प्यार नहीं काला धन हो गया!!
पहली मोहोब्बत का तकाज़ा क्या करे हम वो मिला था हमको बहारों की तरह दीवानगी इस से बढ़ कर और क्या होगी हमने चाहा था उसको तलबगारों की तरह खता क्या हुई एक छोटी सी […]
mere pass bhi khab hai tu pankh jud dai mere pass bhi dil hai, dhadkan jud dai mere pass bhi sai hai ruh jud dai mere pass bhi himat hai junun jud dai mere pass […]
कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है क्यों करते […]
—————————- यूँ थककर ना बैठ मुसाफ़िर अभी तेरी मंज़िल नहीं आई शायद–चलेगी कुछ देर और तेरे संघर्ष की लड़ाई………. थककर यूँ बैठ गए अगर— राहे भी आसान ना होगी ज़मानें की रुसवाईयाँ भी– राहों की […]
चुन कर कचरे से कुछ चन्द टुकड़ों को, जिंदगी को अपनी चलाते हुए, अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ थम जाती है जहाँ एक पल में साँसों की डोरी, वहीं […]
Love I find myself, in love, waste I thought, love is, totally waste But someone told me, it is nice By which, every human become wise It includes sorrow, reliance & emotion That is […]
तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी. फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के. कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे. ज़हर भरे […]
जितना व्यस्त रखना है रख लो खुद को , नहीं तो मेरी यादें तुम्हे सब कुछ भुला देंगी ! नफरत करनी हो तो जरा दिल को मजबूत रखना , नहीं तो मेरी खामोशियाँ भी तुम्हे […]
कहीं कोहरे की धुंध के पीछे छुप गए हैं मेरी सफलता के सभी रास्ते, जितना भी करीब जाता हूँ उतने ही दूर मेरे रास्ते नज़र आते हैं, यूँ तो दायरा है मेरे इर्द गिर्द कितनी […]
आज भी मैं तेरी राहों को देखता हूँ! बेकरार वक्त की बाँहों को देखता हूँ! जुल्मों सितम की दास्ताँ है मेरी जिन्दगी, आरजू की दिल में आहों को देखता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं'(24)
वो सुबह न आये जिसमे तुझको टूट कर बिखरता देखूं, तेरे रगो में न कभी मैं जुदाई का जहर उतरता देखूं, मांगा है जिसे मैंने भी हर चौखट पर खुदा की, वो पल ही न […]
मेरा मन ये कहता था के यह फिर इस बार नहीं होगा, मैं आगे बढ़ गया हूँ अब फिर पीछे कदम नहीं होगा, फिर मन में जिज्ञासा थी फिर कुछ पाने की आशा थी, एक […]
सम्भाल कर रक्खी थीं जो तेरी यादें, चलो आज उनको सरेआम करते हैं। मन ही मन में जो बस गई है दिल में, आओ अब तेरी उस तस्वीर को खुलेआम करते हैं। तेरी इजाजत के […]
मेरे दिल और दिमाग की जद्दोजहद में कलम की स्थिति गम्भीर देखो, दोनों अपनी अपनी ओर खींचे कैसे कलम की डोर देखो, लिखने को लिख दूँ मैं अपने मन की हर एक पीर देखो, पर […]
रौंद कर निकल भी जाऊ आगे सबसे, मगर अपनों के ऊपर चलने का हुनर कहाँ से लाऊँ, बनाने को तो बनाए रहूँ रिश्ते सभी, मगर जो रिश्तों को जोड़े रक्खे वो डोर कहाँ से लाऊ, […]
कभी सूनसान गली तो कभी खुले मैदान में पकड़ ली जाती है, तू क्यों कटी पतंग सी हर बार लूट ली जाती है, वो चील कौवों से नोचते कभी जकड़ लेते हैं तुझे, तू क्यों […]
———————– धधक रहा है मन में सवालों के अंगारे— सच है कौन-?झुठ है क्या-? मन में जो भ्रम पल रहे, या, आँखों से दिखते नज़ारे किस क़दर समझुँ– और, क्या समझाऊँ दिल को या, तन्हा […]
——————— तेरे दिल में याद बनकर समा जाऊँगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊँगा कशिश की सरहद से दूर ना जा पाओग मैं खुशबू बनकर एहसास की———– ———–तेरी साँसों में घुल जाऊँगा ये तो […]
गम के इन आसुओं का निकलना बहोत जरुरी था, तन्हाइयों में मेरा तुझसे अब मिलना बहोत जरुरी था ! मिटाने थे वो गिले सिकवे हुए हम दोनों के दरम्यान, इस पत्थर से दिल का भी […]
क्या इस साल भी लड़ना है तुमको धर्म और जाति के नाम पर क्या इस साल भी लुटने देनी है लड़की की इज़्जत नीलाम पर क्या इस साल भी सोचा है तुमने फिर से […]
हजारों वजह है तेरे पास मुझसे दूर जाने की , एक वजह मुझे भी दे दो अपने पास आने की ! वादा है मेरा की कभी आपको रोने न दूंगा , कोई भी खुशियां आपसे […]
लो फिर याद आ गया , वो बचपन सुहाना वो झूठ का रोना , वो सच का आँखों सी आलू का टपकना वो बेबाकी सी उदझ्ना सबसे. वो अपने साये सी भी डरना वो बारिश […]
साथ नहीं हो लेकिन क्यों हमसे रूठ गये हो? राह-ए-जिन्द़गी में तुम हमसे छूट गये हो! बढ़ती ही जा रही हैं अपनी दूरियाँ दिल की, हाथ की लकीरों में क्यों हमसे टूट गये हो? #महादेव_की_कविताऐं'(26)
अपनी इश्क़-ऐ-नाकामी का सबब बस इतना था साहिब मांग बैठे थे खुदा से वो चीज़, जो बहुत अज़ीज़ थी खुदा के लिए…………!! […]
ऐ खुशियां अब तो लौट आ तू मेरी ज़िन्दगी में सुलह कर करके के अब न वो रहा, न उसकी यादें, और न कोई बहाना इस दिल का…………!! […]
कही तन्हा न कर दे तुझे, ये आदत तन्हा रहने की रातों को अपना हाल-ऐ-दिल तू चाँद, तारो से कह दिया कर……………….!! […]
इस बारिश के रुकने का इंतज़ार न करना तुम आज हमने पीया है गम-ऐ-आंसू, सारे मौसम रो रहे है……………..!! […]
तू हुकुम ही नहीं दे सका, हमको रोशन करने के लिए के हम तो पड़े थे तेरे ही घर मे, चिराग की तरह……………..!! […]
ताश के पत्तों की तरह हो गई है ज़िन्दगी अपनी, जो भी आता है बस खेल कर चला जाता है………………!! […]
इतना भी आसान नहीं, किसी को इश्क़ मे पा लेना पूरी ज़िन्दगी दाव पर लगनी पड़ती है, हर तरह से किसी का होना पड़ता है…………..!! […]
आज अपने ही सवाल पर मायूस खड़े हो क्यों तुम तुम ही तो कहा करते थे न, वो हर किसी का नहीं होता है…………….!! […]
कौन किस से कितना मुकातिफ़ होता है ये तो वक़्त जनता है, और वक़्त ही बता देता है……………!! […]
तू मुझे अगर धुल भी कहे तो कोई बात नहीं के हवा चलने पर ये भी आँखों मे समां जाती है……………!! […]
हमारे जाने के बाद किसी से इश्क़ फरमा कर देख लेना अगर कोई चाहे शिददत से हमारी तरह, तो कहना………………!! […]
मैंने जिस शक्श से मोहोब्बत फरमाई थी आज वही शक्श मुझे बेवफा कहता फिरता है…………..!! […]
उसकी आंखें झील सी गहरी तो है मगर, उस में परछाई मेरे चेहरे की नहीं उसकी बेरुखी से न नाप, इश्क़-ऐ-गहराई को तू वो आदतन मजबूर है, मगर दिल का बुरा नहीं……………………..!! […]
आंखें निकलवा कर हमारी वो अंगारों से, बोले अब इज़ाज़त है तुमको, हमसे रूब-ओ-रू होने की……………….!! […]
अपने चाहत की तपन से उसको हमने सोना तो बना दिया मगर, अब उसको ख़रीदे कैसे, यही सोचते है हम………………..!! […]
हँस दिए आप ने रोते रोते यूँ ही क्यों साहिब ऐसा कौन सा ख़ुशी का पल याद आ गया आपको……………!! […]
अपने विश्वास को पतंग की उंचाईयों तक पहुचा दो , अपने दिलों में आप एक मोहबत्त का दीप भी जला दो ! माँ बाप के पैरों को छूकर जरा आशीर्वाद भी ले लो , गजक,तिल के […]
मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो? #महादेव_की_कविताऐं’
jb mai ud nhi pata tha tb kha mai jinda tha aksar chutai-chutai nano sai aakash ko taka krta tha kya hai isam jo itna dur hai aksar ma sai puch krta tha hans kr […]
अब उसे याद न करू तो कुछ अधूरा सा लगता है एक अरसा हो चला है, उसको याद करते करते…………..!! […]
वो कहते है, झूठ है तू और तेरी बातें तो क्यों याद करता है वो, मुझे और मेरी बातें………………!! […]
मुमकिन है वो किसी रोज़ लौट आये हमारे शहर की तरफ इसलिए भी रोज़ बदल देता हू, मैं हालात-ऐ-दिल अपना…………..!! […]
भला मुक्कदर का लिखा कोई मिटा पाया है वो खामखा ही फ़िज़ूल कोशिशें करा करते है……………!! […]
जिस शक्श को आप ढूंढ रहे हो, वो अब ख़ाक हो गया जला था किसी की चाहत मे, जल कर राख हो गया…………………!! […]
वो रोज़ देखता है चेहरा अपना, आईने मे सुबह उठ कर काश मैं भी उसके घर के आईने का हिस्सा होता…………………..!! […]
अपनी ही हँसी पर आज मुझे हँसी आ गयी के हैरान हू मैं, कैसे मुझे हँसी आ गयी…………..!! […]
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