Kala Dhan

भोर था प्यार अब दोपहर हो गया,
स्वपन का था महल खँडहर हो गया!
करूँ जितना प्रयास पर मिलता नहीं,
तुम्हारा प्यार नहीं काला धन हो गया!!

Comments

One response to “Kala Dhan”

  1. Abhishek kumar

    Kala dhan…
    Ha…ha.

    Ha

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