झुका के मन को जीना सिखा जाता ख़ुद जीता और दूसरों को जीवा जाता अकड़ तेरी किस कम की निकली जिसने तेरी सारी हस्ती ही निगली …… यूई
झुका के मन को जीना सिखा जाता ख़ुद जीता और दूसरों को जीवा जाता अकड़ तेरी किस कम की निकली जिसने तेरी सारी हस्ती ही निगली …… यूई
है यह नियम कुदरत का जो भी यहां अकड़ता है छोटे से झोंके सह ना पाता टूटता वोह सबसे पहले है …… यूई
झुकना है दरबार में जाके फिर क्यों इतनी हांके तू उसको जो पसंद है बंदिया उसको क्यों ना जाने तू …… यूई
तू तुच्छ सा जीव ओ बंदिया किस बात पे इतना अकड़ता तू पल भर की तेरी हस्ती नही है किस बात पे इतना इतरता तू …… यूई
झुकना है निशानी मन निमाने की निम्न मन ही तो सबको अपना पता निम्न मन ही तो सब सच जान पता निम्न मन ही तो असल में जी पाता …… यूई
प्यार जब दिल में भर जाएगा झुकना ख़ुद ही सीख जाएगा …… यूई
अकड़ तेरे मन की काली छाया इसको कर बड़ा क्या तू पाएगा ख़ुद अंधेरों से निकाल ना पाएगा किसी को क्या तू राह् दिखाएगा …… यूई
झुके हुए सर को मिलता गुरु का प्यार है अकड़े हुए सर को मिलता गुरु का दुत्कार है …… यूई
जिस ने पाया झुक के पाया अकड़ के कुछ ना मिलता है झुकना यह है जीवन की माया झुक के ही सब मिलता है …… यूई
मेरा मेरा बस रटता रह्ता सब तेरे मन के भ्रान्ति है वक्त रहते संभल जा बंदिया अभी भी कुछ ना खोया है …… यूई
अकड़ तेरी सब झूठी बंदिया है कुछ ना तेरे हाथ में बंदिया …… यूई
झुके हुए सरो ने ही सोच के शांत मन से झुकाया कितनी शमशीरों को बचाया है कितनी तक़दीरों को …… यूई
झुका के सर अपना तू दिलों को सर कर पाएगा झुका के मन अपना तू सबको अपना बना जाएगा …… यूई
झुके हुए सर निशानी है इंसानो की अकड़े हुए सर निशानी है हैवानो की …… यूई
अकड़ अकड़ में मिट जाएगा कुछ ना तुझको मिल पाएगा सबसे मिलना सीख ले बंदिया झुक के जीना सीख ले बंदिया …… यूई
अकड़ अकड़ करता है बन्दे जब तू पूरा अकड़ा जाएगा इक पल ना फिर बच पाएगा तपती आग में सेका जाएगा …… यूई
झुकना तेरी कमजोरी नही ना झुकना तेरी कमजोरी है …… यूई
झुक के सब मिल जाता है अकड़ के कुछ ना पाता है …… यूई
जो झुका वोही तो फलता है जो अकड़ा वोही तो कटता है …… यूई
झुकना ही तो नम्रता है अकड़ा वो तो मुर्दा है …… यूई
अत्याचार दिन ब दिन बढ़ रहे हैं भारत की बेटी पर। रो-रो कर चढ़ रही बिचारी एक-एक करके वेदी पर ।। भिलाई से लेकर दिल्ली तक प्रतिदिन नई कहानी है। किसने पाप किया है ये, […]
Der se hi sahi ; Mujhko is baat ka ehsaas hua; ke mujhe chod kar koi or nahi is dil ke pass hua ; Dusron ke lie jeena chodo yaaro kyuki is zindagi ke baad […]
. ღღ__ना कोई उम्मीद, ना तड़प, ना ही इंतज़ार किसी का; . कितना अच्छा होगा वो जहाँ, जहाँ मोहब्बत नहीं होगी !!….अक्स .
मिलती है आशीष झुकने से इंसा फिर अकड़ता क्यों है राजेश’अरमान’
कोई तीर निकला कमान से बेवज़ह न जाने किसकी बारी आई बेवज़ह राजेश’अरमान’
सुना है बहुत दूर की सोचते है वो हमें वो सोचे इसके वास्ते शायद दूर जाना पड़ेगा राजेश’अरमान’
कितने मुश्किल सफर तय किये है मुड़ के तो देख अब रूक क्यों गया है फिर चल के तो देख राजेश’अरमान’
लुप्त होते रहे गर अच्छे इन्सां इसी तरह , इक दिन ये कहीं डाइनासोर न हो जाए राजेश’अरमान’
कल छोड़ के आया था जिसे अँधेरे में वो तन्हाई आज , फिर मुझे रोशन कर रहीं है राजेश’अरमान’
न तख्तो पे न ताज़ों पे नज़र रखता हूँ न कोई जलवा न रिवाज़ों पे नज़र रखता हूँ जो देखने का मुझे बंद आँखों से जुनूँ रखते है बंद आँखों से , उन बंद आँखों […]
फ्रेंडशिप डे पर फेस बुक के सभी दोस्तों के लिए रस्म कुछ फेस बुक में हम इस तरह निभाते है बिन मिले कभी हम दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते है हर वक़्त आँखें गड़ी रहती दोस्तों […]
फिर तुम्हे याद किया याद न आने की फ़रियाद किया राजेश’अरमान’
कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]
काश दिलासो की कश्तियों में कोई छेद न होता राजेश’अरमान’
अक्सर हादसे सहते रहे काश ख्वाब भी कोई हादसा होता राजेश’अरमान’
ख्वाब तो आफताब है शाम होते ही ढल जाते है राजेश’अरमान’
हिचकोलों से भरी ज़िंदगी ढूंढ़ती किनारा चुपचाप सा राजेश’अरमान’
वो ज़ज़्बा कहा खो गया जब इंसा सिर्फ इंसा था राजेश’अरमान’
वास्ता नहीं खुद से लेकिन दुनिया की फ़िक्र रखते है राजेश’अरमान’
सच से दूर हो रहा इंसा कोई चढ़ा दे पारा चेहरे पर राजेश’अरमान’
जब वो बेवज़ह मुस्कराते है गम लेता है अंगड़ाई चुपके से राजेश’अरमान”
आईने को कोई झूठ सीखा दे आईने को कोई आईना दिखा दे राजेश’अरमान’
काफिलों के साथ साथ चलते रहे दुनिया के रंग में बस ढलते रहे राजेश’अरमान’
अपने ही लोग फिर शहर में दहशत क्यूँ अपनी ही आँखों में जहर सी वहशत क्यूँ कहीं तो सुनी जाएगी आख़िर फ़रियाद किसी सजदे को ,किसी दुआ की हसरत क्यूँ राजेश’अरमान’
कुछ अकेले से एहसास फिरते है दरम्या मेरे कुछ कशिश है उदास फासलों के घने अँधेरे दबे कदम चलती साँसें सहमे कदम आते सबेरे हलकी बारिश का मौसम आँखों में धुँआ के फेरे सोती रात […]
खुद को बदलने से जरूरी है खुद का किरदार बदलना आदमी दुनिया में पहचाना जाता है किरदारों से राजेश’अरमान”
ना खुद को बदल सका ना तेरी निगाहों को सिलसिला बस चलता रहा खत्म होने के लिए राजेश’अरमान’
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