छोड़ बाबुल का घर, जब चली जाती हैं बेटियां सभी त्यौहार लगते हैं सूने, बहुत याद आती हैं बेटियां दिवाली के हर दीप में, मुस्कुराती हैं बेटियां होली के हर रंग में, खिलखिलाती हैं बेटियां […]

रात भर दीपक जला, भोर होने लगी तो बोला,”अब मैं चला” मैंने कहा और जलो, अभी अंधियारा बाकी है, “मेरी भी एक सीमा है”, कह कर वो मुस्कुराया उसकी अर्थपूर्ण मुस्कुराहट में, एक संदेशा मैंने […]

मौसम सुहाना सावन का आया, संग अपने उत्सवों का पिटारा लाया ठंडी ठंडी ये बहती पवन, बागों में खिले हैं कितने सुमन आए जब बरखा की फुहार, पिया भी करे हैं मनुहार अंगना में भीगे […]

ये कलियुग है, इस में सतयुग सी बात कहां, जो प्यार करे ,कहलाए दीवाना परवाह करे ,उसे पागल माना तिनका चुगता है हंस यहां, मोती खाए कौवा काना जो चाल चले टेढी मेढ़ी, चढ़ जाता […]

ए वक्त तू गवाह है मेरा, तू बात, बता क्या थी हम बिछड़ गए, मेरी खता क्या थी हजारों बंदिशें भी थीं,हजारों मिन्नतें भी की समझा ना ये ज़माना ,ये बात पता क्या थी वो […]

कलरव करता पंछी उड़ा आकाश तो अच्छा लगा, शुद्ध हवा में आई सांस तो अच्छा लगा ये कोरोना आया तो गलत है लेकिन, प्रकृति का ये बदलाव अच्छा लगा तारे चमक रहे हैं निर्बाध चमचम, […]

अब के बरस भैया पीहर ना आऊं, बांधन को राखी तोय रे रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है, नजर वो रखे है मोए पे डाक से भेजी है भैया को राखी, भतीजी से लियो बंधवाए […]

“सावन” पर मुझे मिले, कुछ अनदेखे, अनजाने दोस्त जिनकी समीक्षा पाने की, प्रतीक्षा रहती है हर रोज़ लेखन की इस नगरी में, स्वागत करते हैं सबका शत शत नमन है उन मित्रों को,🙏 मेरा भी […]

वो मेरी बचपन की सखी, मिली मुझे कितने दिन बाद जानती थी मैं ये कबसे, आएगी उसे एक दिन मेरी याद घर गृहस्थी में व्यस्त रही थी, चेतन मन में थे कितने काम पर अवचेतन […]

हास्य कविता बिट्टू घूम रहा था गुमसुम, हाथ में लेकर एक फोटो मां ना जाए छोड़कर कहीं, इस उलझन में था वो नाना जी को फोन लगाया, अपने मन का हाल बताया नाना -नानी अचरज […]

जिस महफ़िल में कोई जानता ना हो, उस महफ़िल में जाना क्यूं है जिस महफ़िल में,अनसुना कर दें तुझे उस महफ़िल में, कुछ सुनाना क्यूं है मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां, वहां तुझे […]

ये रणबांकुरे भारत के,सीमा पर देखो खड़े हैं हम चैन से सोएं रातों को, दुश्मन से वो लड़े हैं गर्मी का मौसम हो,या पड़े कड़कती सर्दी भारत मां की रक्षा करते ,पहन के फौजी वर्दी […]

हृदय की वेदना जब सीमा के पार हुई कोशिशें बहुत कीं कम करने की, पर वो शमशीर की धार हुई तब लेखनी चल पड़ी मेरी, दर्द कम करने के लिए दिल के जज्बातों को जब […]

लोभी दुनियां में जी गई मैं, विष का प्याला पी गई मैं ना मीरा हूं ना नीलकंठ, फिर भी सब झेल गई मानों प्राणों पर खेल गई, हुई भावहीन,हुई उदासीन कंचन सी निखर गई, टूटे […]

किसी पत्थर की मूरत में, लगी सूरत खुदा की सी उसे पूजा उसे माना, उसे अपना खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमसे, आंखों से आंसू निकल पड़े, व्यर्थ गई सब साधना निरा पत्थर का […]

जब मैं हुई उदास, तो तेरा मुस्कुराना याद आया जब हुई तुझसे दूर, तो तेरा पास आना याद आया तू नहीं आया, पर तेरी याद चली आई तेरी याद से मिलकर, मुझे मुस्कुराना याद आया […]

महफ़िलों से डर लगने लगा, तन्हाई हमें रास आने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा, दुश्मनी की बांस आने लगी समझा था जिसे अपना हमसफ़र, उसी ने बदल दी है अपनी डग़र दो राहे पे […]

शहर में छिपा है अन्देखा ,अन्जाना बैरी दोस्तों इससे जीतने की कर लो तैयारी दोस्तों आता नहीं नज़र,पर रख़ता है वो नज़र, ना रहना इससे तुम बेख़बर दोस्तों वो करता है वार, जाते ही बाहर […]

ये मेहनतकश हैं भारत के, चल पडे बैठकर रेल में इनकी दुविधा समझें हम सब, ना लें इसको खेल में देश बन्द हुआ, काम बन्द हुआ पेट बन्द तो नहीं होता काम नहीं, कमाई नहीं […]