किसी ने पूछा मुझसे, “सावन” पे लिखती हो, क्या मिल जाता है? मैनें कहा —– मुझे समझने वाले सखा, सखी हैं, समझते हैं, जो रचनाएं मैनें लिखी हैं। उनकी लिखी रचनाओं को भी पढ़ पाती […]
किसी ने पूछा मुझसे, “सावन” पे लिखती हो, क्या मिल जाता है? मैनें कहा —– मुझे समझने वाले सखा, सखी हैं, समझते हैं, जो रचनाएं मैनें लिखी हैं। उनकी लिखी रचनाओं को भी पढ़ पाती […]
एक बाबा बरसाने के, प्रतिदिन यमुना में स्नान कर के, दर्शन करते थे राधा – रानी के। जीवन का एक भाग यूं ही बिताया, एक दिन दर्शन करते – करते ,बाबा के मन में विचार […]
कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे, फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से। चैन सा आता है, बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है। ———— फकत मतलब केवल विज्ञान के अनुसार […]
चंद लम्हे यादों के, जीना सिखा गए वरना, ज़िन्दगी जीना आसान नहीं होता।
आंखों में नमी है,मगर रोती नहीं हूं मैं, किसी से किया हुआ,एक वादा पुराना याद आया।
आज फ़िर मेघा बरसे, रिमझिम – रिमझिम, मन – मयूर नृत्य कर उठा, छ्मछम – छमछम। ठंडी – ठंडी पवन चली है, खिल उठे सारे वन – उपवन। वृक्ष भी नाचें ,झूम – झूमकर, लिपटी […]
आज कल के इस माहौल में, जहां जिम (व्यायाम – शालाएं) बंद हो चुकी है। तो हमें घर पर ही योगाभ्यास करना चाहिए।इसी संदर्भ में मेरी एक प्रस्तुति…… योग करें, सब योग करें रहने को […]
पिता बरगद का साया है, मां ममता की छाया है। जीवन में दोनो ही का, स्नेह मैंने पाया है। एक भी ना हो जीवन में, वो जीवन किसको भाया है। जहां मां का दिल कोमल […]
हमने कभी बयां नहीं किया, आदत नहीं थी गम बताने की। वो भी नहीं समझे दर्द मेरा, यही सज़ा मिली गम छिपाने की।
नसीब सबका है अपना – अपना , कहीं ख्वाब परवान चढ़े, कहीं हुआ झूठा कोई सपना। ज़िन्दगी में जो मिला, वो भी कुछ काम ना था। ऐसा भी नहीं है, कि कोई ग़म ना था। […]
साक्षात्कार था मेरा उस दिन, चिंता से था हृदय धड़कता। एक दस का नोट पड़ा जेब में, ऑफिस तक की भी बस कैसे पकड़ता। दो सौ रुपयों की दरकार थी, ज़िन्दगी से मेरी तकरार थी। […]
इंसान इंसान से डरने लगा अदृश्य जीवों से मरने लगा, ज़िन्दगी महकती थी जिन लोगों से कभी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, गया वक्त फिर लौट के […]
शंका ना थी कोई भी,वो समाधान करने बैठ गए। हम तो बात करना चाहते थे,वो व्याख्यान करने बैठ गए।
गणेश – चतुर्थी के शुभ अवसर पर —- गणपति आज हमारे घर आए, खुशियां बहुत साथ वो लाए। साथ रहेंगे कुछ दिन हमारे, हम भी खाएंगे लड्डू ,मोदक उनके सहारे। उनके आने से घर महका […]
एक था जिम और एक थी डैला, दोनों लंदन में रहते थे। कहानी ये बिल्कुल सच्ची है, मेरे दादा कहते थे। डैला थी बहुत ही सुन्दर, बाल सुनहरी थे उसके जिम भी बांका युवक था, […]
अभी ना मेरा दीदार कर, थोड़ा ख़ुद को मैं संवार लूं। तेरा हर लफ्ज़ हो शहद सा, तुझे दिल में मैं उतार लूं। जब मिले तेरी नज़र से, नज़र मेरी, तेरी छवि जिगर में उतार […]
मैं हंसी तो हंस दिया, संग मेरे ये जहां। वरना ,किसी को, किसी के, अश्क देखने की फुर्सत कहां। इसलिए .गम अपने छिपाकर, मैं भी, हंस लेती हूं यहां। कलम चलाकर कर लेती हूं, दिल […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या […]
हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या हो घाटी गलवान खड़े मिलेंगे […]
समन्दर भी ना जाने, उसमें कितनी नदियां समाती हैं। ये तो नदिया ही जाने, उसको कितनी सौतन मिल जाती हैं। मीठे – मीठे पानी की नदियां, समन्दर की ओर बह जाती हैं। फिर , मीठा […]
हर हाल में मुस्कुराना हमें आता है, अपने .गम भी छिपाना हमें आता है। छोटी सी कश्ती में घूम कर भी ख़ुश हो जाती है”गीता,” और, बड़े- बड़े सागर भी पार करना हमें आता है।
हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी? रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी। जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं, यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है। सागर है विशाल, लहरें […]
मीठी- मीठी बातें करते, मन में रखें बैर। ऐसे अपनों से दूर भले, उनसे अच्छे .गैर।
याद आता है मुझको अपना गांव, वो बड़ा सा आंगन, वो नीम की छांव। बारिश के पानी में, चलती थी कागज़ की नाव, ख़ूब खेलते थे, धूप हो या छांव। जब से आई है ये […]
रात थी गहरी, काली, अंधियारी जब जन्मे थे, गोपाल – गिरधारी। भाद्रपद का मास था, कृष्णा पक्ष की अष्टमी, दिन, उस दिन बुधवार था, नक्षत्र था रोहिणी। वसुदेव, देवकी के खुल गए ताले, सो गए […]
बारह बरस की कोमल कली थी, अपने ही घर पर, पर, अकेली थी। जाने कहां से आए थे दानव, दानव ही थे वो, बस दिखते थे मानव। कोयल सी बोली थी, दिखने में भोली थी, […]
बारिश मूसलाधार है, मुम्बई की थमी रफ्तार है। हर जगह है जलभराव, रेल की पटरी पर चले है नाव। हवाएं भी बहुत तेज़ चली, आती रही बारिश ,मुसीबत ना टली। जल भर गया है, हर […]
यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू […]
भव्य मंदिर बना, राम लला का ना ही कोई उपमा है, ना कोई तोड़ इसकी कला का सोचा था, चाहा था, उम्मीद थी लगाई, आशा हुई है पूरी, देखो शुभ घड़ी है आई। सदियों से […]
कोई जब जीवन से चला जाता है, टूटता नहीं फ़िर भी नाता है। बेबस से हो जाते हैं सब, ग़म उसका हरदम सताता है। उजड़ ही जाती है, दुनियां किसी की, जब कोई अपना इस […]
एक रात की बात बताऊं मित्रों , मेरे घर पर आए चोर । थी मैं अकेली उस दिन घर पर, मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर । “पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना […]
पटरी पर फिर लौटा जीवन, पर पहले जैसी बात नहीं है। मुंह ढ़ककर घूमे हैं दिनभर, पहले जैसी रात नहीं है। हॉल, मॉल सब बंद पड़े हैं, विद्यालयों पर लगे हैं ताले। रौनक गुम है […]
इंसान इंसान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। जिन लोगों से महकती थी ज़िंदगी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, मिलकर “अकेले – अकेले” ये दुआ […]
हमने सच बोला, वो बुरा मान गए ज़रा मुंह खोला, वो बुरा मान गए। सदियों से सुनती ही तो आई है नारी, आज ज़रा सुनाया, तो बुरा मान गए। औरों की चाहत को हमेशा चाहा, […]
यशोदा ,देवकी को लगे है, कान्हा सबसे प्यारा। मेरी मैया सबसे प्यारी, कान्हा का ये नारा। मैया मैया कहता कान्हा, लगे बहुत है प्यारा। मेरी मैया सबसे सुंदर, माने ये जग सारा।
अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी, हार से पहले रोता क्यूं है। इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग, कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,। पलकें भिगोता क्यूं है।
अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।
ज़िंदगी की तपिश बहुत हमने सही, ये तपन अब खलने लगी। रौशनी की सदा आस ही रही, रौशनी की कमी अब खलने लगी। बहुत चोटें लगीं, बहुत घाव सहे सहते ही रहे कभी कुछ ना […]
जीवन का सफ़र सुहाना है साथी, गर साथ तुम्हारा है। जीवन की इस बगिया में, मैं तेरा सहारा हूं, तू मेरा सहारा है। बच्चों की ज़िम्मेदारी करनी है पूरी, अब ये काम हमारा है। जीवन […]
झूठ की दुकान खूब चली, “सच”, सच बोलता रहा उसकी ना चलनी थी, ना चली, पर ये ज्यादा लंबा चलने वाला ना था काठ की हांडी में एक बार तो पका लिया, फिर दोबारा चढ़ी, […]
सूना जाए राखी का त्यौहार, राखी भेजी है, डाक से इस बार ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें, ना मिले मां पापा का प्यार। ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं, ना कर […]
रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे […]
दोस्तों से मिले मुद्दतें हो गईं, देखे हुए चेहरे खिले, मुद्दतें हो गईं कोरोना ने जाल बिछाया ऐसा, बाहर ना निकल सके हम बाहर की बहार देखे मुद्दते हो गई कोई जल्दी से लाए इसका […]
थक कर बैठ गया क्यूं राही, क्या अभी थकान बाक़ी है? नहीं मिलती मंज़िल आसानी से, अभी इम्तिहान बाक़ी है। जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी, घबराना नहीं है तुझको, अभी […]
किताबों से अच्छे मित्र कहां हैं, कविता से अच्छे चित्र कहां हैं। दुखी हो के ना बैठ “गीता”, “सावन” पे जाओ, सखी, दोस्त, बंधु यहां हैं।
जय हो कृषक, जय हो किसान, भारत मां का तू सम्मान “लॉकडाउन” की मजबूरी में, महंगे दामों बेच रहे थे,जब साहूकार अपना सामान तब भी भूमिपुत्र ने अन्न दिया, अधिक दाम भी नहीं लिया शत […]
मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई। रौनक लग गई मेरे घर पर, बजने लगे ढ़ोल शहनाई आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार, लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार देख के उसको […]
नमन है मेरा उन वीरों को, जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं भारत मां की रक्षा खातिर, सीने पर गोली खाते हैं जय हिन्द का लगता नारा है जोश की कमी नहीं है,जोश बहुत सारा […]
बाद मरने के अपने, हम बहुत रोए उन्हें पता ही ना चला, उन्हें लगा हम थे सोए कुछ देर बाद, उन्हें हुआ अहसास, रो के बोले,”क्यूं चले गए मेरे ख़ास” किसी को खोज रही थी […]
हर जीव को जीने का हक़ है, जीवों ने डाली है अर्जी कुदरत ने अपील सुनी है, अब ना चले बस, मानव की मर्ज़ी क्षुधा मिटाने की खातिर, निर्दोषों को है मारा, कैसा है शैतान […]
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