किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं, कोई बस्ती में है बचपन से मस्ती के पैमानों की, बहुत बदल गई है दुनियाँ रस्में रीत गुनाहों की, तोड़ दीवारें लुट जाती हैं अस्मत यहां […]

मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये […]

कलम की स्याही को फीकी होने न देना, जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना, छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी, अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।। राही […]

किरदार कई बदले पर यार न बदला हालात कई बदले पर उसका प्यार न बदला जीवन के सफर में ठोकरें लगी कई हज़ार पर बार-बार वो यही बोला “तू इतनी चिंता क्यों करता है मेरे […]

तुमसे टकराकर मैं हर पल बिखर जाती हूँ, मैं बूंद हर बार मगर जिद्दी पर उतर आती हूँ, सिलसिला रुकता नहीं मैं थमती नहीं कहती हूँ, के आसमाँ से धरती को मैं भिगाने चली आती […]

ह्र्दयतल में बंशीधर ने सखा सुदामा कुछ ऐसे बसाये लिए, दुःख सुख सब जैसे श्रीधर ने सारे आप ही दूर भगाए दिए, रहे ग्वालों और ग्वालिन के संग राधे, प्रेम रस गगरी छलकाए दिए, जब […]

ख्वाइशों का पंछी गगन में उड़ता रहता है, बैठता एक पल नहीं धरती से उठा रहता है, आंसुओं का बहना कम नहीं होता एक पल, इंसा का सर बस रब के आगे झुका रहता है।। […]

वक्त निकल गया निगाहों से निगाहें मिलाने में, सफर में एक दूजे को समझने -समझाने में, परिचय तो पहली मुलाक़ात में हो गया मगर, ढूढ़ते रहे हम खुद को अपने ही मकानों में।। राही (अंजाना(

अपने ही घर में क्यों बंटवारे हो गए, जो अपने थे अपनों से किनारे हो गए, बहुत शिद्दत से जुड़े थे जो खून के रिश्ते, दो गज़ ज़मीं की खातिर बे-सहारे हो गए, जान के […]

माँगने पर तस्वीर अपनी पुरानी दे दी, हमने जिनको अपनी पूरी जवानी दे दी, ख़्वाबों की दरख्तों में दफ़्न हुई थी कभी, कोरे कागज़ पर लिखने को वही कहानी दे दी।। राही (अंजाना)

अनजान रस्तों पर उनसे यूँ मुलाक़ात हो गई, बिन मौसम जैसे उस एक रोज़ बरसात हो गई, बादल, आसमाँ, हवाओं सबकी साज़िश थी मानो, दो दिलों को मिलाने को साथ कायनात हो गई।। राही (अंजाना)

कागज़ की कश्ती भी पार लगाई है हमने, लहरों को चीर कर मन्ज़िल पाई है हमने, बहुत मुश्किल था तैर कर उस पार जाना, हौंसलों के बाज़ुओं से जीत पाई है हमने।। राही (अंजाना)

दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]

दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]

आज दिल में छुपे हर राज़ लिखने बैठा हूँ, तुझको अपने ख़्वाबों किस्सों का सरताज लिखने बैठा हूँ, एतराज़ हो कोई तो मुझसे खुल कर कह देना, आज खामोशी को भी तेरी आवाज लिखने बैठा […]

सच के समन्दर में झूठ की कश्तियाँ डूबती नज़र आती हैं, जहाँ तलक नज़र जाती है बस सच की कश्तियाँ नज़र आती हैं, बढ़ते झूठ के सुनामी हैं कई सच की बस्तियाँ गिराने को, मगर […]

किसके कहने पे ये डाली झूम- झूम इठलाती है, तेज हवा के झोंके से ये पत्ती क्यूँ गिर जाती है, बारिश की ये बूँद भला क्यूँ खुदपर इतना इतराती है, धरती से मिल जब अपना […]

तुमसे अपने आंसू छिपाने पड़ते हैं, मुझको तो लाख बहाने बनाने पड़ते हैं, तुम्हे तो मुझे हंसते हुए देखना है, मुझको तो गम भी ठिकाने लगाने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)

मन करता है सपने जो देखूं, मैं सच में उनसे मिल जाऊं, मन करता है पढ़ लिखकर मैं अपने, माँ पापा से आगे बढ़ जाऊँ, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं […]

मन करता है पढ़ लिख कर मैं, माँ पापा का नाम कराऊँ, मन करता है सपनों को देखूं, आसमान में मैं उड़ जाऊं, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं लड़ जाऊं, […]