न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं, मेरे शहर में पाव और पीज़ा के रगड़े नज़र आते हैं, न मेरे गाँव की हवा न वो छप्पर छावँ नज़र आते है, ऊँची मीनारों […]
न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं, मेरे शहर में पाव और पीज़ा के रगड़े नज़र आते हैं, न मेरे गाँव की हवा न वो छप्पर छावँ नज़र आते है, ऊँची मीनारों […]
किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं, कोई बस्ती में है बचपन से मस्ती के पैमानों की, बहुत बदल गई है दुनियाँ रस्में रीत गुनाहों की, तोड़ दीवारें लुट जाती हैं अस्मत यहां […]
मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये […]
चाहतों की चाह में बहुत आगे निकल आये, कुछ लोग देखो अपनों से आगे निकल आये।। राही अंजाना
कलम की स्याही को फीकी होने न देना, जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना, छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी, अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।। राही […]
किरदार कई बदले पर यार न बदला हालात कई बदले पर उसका प्यार न बदला जीवन के सफर में ठोकरें लगी कई हज़ार पर बार-बार वो यही बोला “तू इतनी चिंता क्यों करता है मेरे […]
तुमसे टकराकर मैं हर पल बिखर जाती हूँ, मैं बूंद हर बार मगर जिद्दी पर उतर आती हूँ, सिलसिला रुकता नहीं मैं थमती नहीं कहती हूँ, के आसमाँ से धरती को मैं भिगाने चली आती […]
ह्र्दयतल में बंशीधर ने सखा सुदामा कुछ ऐसे बसाये लिए, दुःख सुख सब जैसे श्रीधर ने सारे आप ही दूर भगाए दिए, रहे ग्वालों और ग्वालिन के संग राधे, प्रेम रस गगरी छलकाए दिए, जब […]
ख्वाइशों का पंछी गगन में उड़ता रहता है, बैठता एक पल नहीं धरती से उठा रहता है, आंसुओं का बहना कम नहीं होता एक पल, इंसा का सर बस रब के आगे झुका रहता है।। […]
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
वक्त निकल गया निगाहों से निगाहें मिलाने में, सफर में एक दूजे को समझने -समझाने में, परिचय तो पहली मुलाक़ात में हो गया मगर, ढूढ़ते रहे हम खुद को अपने ही मकानों में।। राही (अंजाना(
छोटी सी गुड़िया बड़ी सयानी हो गई, ख़्वाबों से निकल के कहानी हो गई, पलकों पर रखी बड़े सहेज कर बरसों, आज आँखें ही उसकी ज़ुबानी हो गई।। राही (अंजाना)
अपने ही घर में क्यों बंटवारे हो गए, जो अपने थे अपनों से किनारे हो गए, बहुत शिद्दत से जुड़े थे जो खून के रिश्ते, दो गज़ ज़मीं की खातिर बे-सहारे हो गए, जान के […]
माँगने पर तस्वीर अपनी पुरानी दे दी, हमने जिनको अपनी पूरी जवानी दे दी, ख़्वाबों की दरख्तों में दफ़्न हुई थी कभी, कोरे कागज़ पर लिखने को वही कहानी दे दी।। राही (अंजाना)
अनजान रस्तों पर उनसे यूँ मुलाक़ात हो गई, बिन मौसम जैसे उस एक रोज़ बरसात हो गई, बादल, आसमाँ, हवाओं सबकी साज़िश थी मानो, दो दिलों को मिलाने को साथ कायनात हो गई।। राही (अंजाना)
उम्र तो बस तेरी कोख में बढ़ रही थी, अब तो हर पल जिंदगी घटटी नज़र आती है।। राही (अंजाना)
मैं कागज़ की नाव चलाने लगा, फिर बचपन में धीरे से जाने लगा, सहसा हुई जब एक दस्तक अचानक, मैं ख़्वाबों से बाहर फिर आने लगा। राही (अंजाना)
कागज़ की कश्ती भी पार लगाई है हमने, लहरों को चीर कर मन्ज़िल पाई है हमने, बहुत मुश्किल था तैर कर उस पार जाना, हौंसलों के बाज़ुओं से जीत पाई है हमने।। राही (अंजाना)
हार के अँधेरे से कभी डरता नहीं, मैं राही सफर में कहीं रुकता नहीं।। राही (अंजाना)
दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]
दूसरों को पढाने लगे तो खुद को पढ़ना भूल गए, चेहरे ऐसे भी थे जिन्हें हम गढ़ना भूल गए, समझ ली मोहब्बत की किताब सबसे पहले हमने, तो बाकी सारे विषयों से हम जुड़ना भूल […]
मैं खुद उलझनों से कभी जब निकल पाता नहीं, वो हर बार अपने बालों सा सुलझा देती है मुझे।। राही (अंजाना)
रात भर ख़्वाबों में परेशान करती है जो नज़र, सहसा ही सुबह को हैरान करती है वो नज़र।। राही (अंजाना)
वो अपने होने का एलान कर देता है, मेरे हर सफर को वो यूँ आसान कर देता है।। राही (अंजाना)
झूठ के रस्ते पे सच का फ़रिश्ता मिला, मुझे हर कोई रिश्ता बड़ा पक्का मिला।। राही (अंजाना)
जिस्म छोड़ कर रूह पे असर उसका होता रहा, दवा नहीं मर्ज़ ऐ मोहब्बत की चपेट में था मैं।। राही (अंजाना)
आज दिल में छुपे हर राज़ लिखने बैठा हूँ, तुझको अपने ख़्वाबों किस्सों का सरताज लिखने बैठा हूँ, एतराज़ हो कोई तो मुझसे खुल कर कह देना, आज खामोशी को भी तेरी आवाज लिखने बैठा […]
सच के समन्दर में झूठ की कश्तियाँ डूबती नज़र आती हैं, जहाँ तलक नज़र जाती है बस सच की कश्तियाँ नज़र आती हैं, बढ़ते झूठ के सुनामी हैं कई सच की बस्तियाँ गिराने को, मगर […]
किसके कहने पे ये डाली झूम- झूम इठलाती है, तेज हवा के झोंके से ये पत्ती क्यूँ गिर जाती है, बारिश की ये बूँद भला क्यूँ खुदपर इतना इतराती है, धरती से मिल जब अपना […]
ख्वाबों में आकर वो हमसे रोज़ मिलते रहे, और हम मासूम बस उनसे यूँहीं छलते रहे।। राही (अंजाना)
मोहब्बत की तालीम कहीं मिलती नहीं यहाँ पर, फिर भी इस रंग में लोग रंगे नज़र आते हैं।। राही (अंजाना)
हर सुबह ज़िन्दगी की नई जंग शुरू करता हूँ, हर शाम तजुर्बों से अपनी किस्मत बुनता हूँ।। राही (अंजाना)
अब एन्टिना कोई घुमाता नहीं, छत पर यूँहीं कोई जाता नहीं, बैठे रहता हर एक यहां फैल कर, अब रिमोट से ऊँगली हटाता नहीं।। राही (अंजाना)
जब बोलते रहे तो कोई सुनने वाला न मिला, जब खामोश हो गए तो बहुत सुना गया हमें।। राही (अंजाना)
जवाब देने में हाजिरजवाब बताये गए हम, अपने ही घर में खामोश कराये गए हम।। राही (अंजाना)
आँखों पर पड़ा पर्दा हटाना होगा, कुछ तो अर्थपूर्ण कर दिखाना होगा, यूँही मिलता नहीं सम्मान जगत में, कोई चित्र तो परिपूर्ण बनाना होगा।। राही (अंजाना)
आँखों पर पड़ा पर्दा हटाना होगा, कुछ तो अर्थपूर्ण कर दिखाना होगा, यूँही मिलता नहीं सम्मान जगत में, कोई चित्र तो परिपूर्ण बनाना होगा।। राही (अंजाना)
तुझको अपने सिरहाने रख सोता हूँ, मैं तुझ संग ही अपने सपने बोता हूँ।। राही (अंजाना)
इंतज़ार के बाद मिलने का मज़ा आ गया, सुबह दरवाजे पर मेरे उसका तार आ गया।। राही (अंजाना)
बारिश में नहाये तो हम सभी थे मगर, जिनके उतरने थे सारे रंग उतर गए।। राही (अंजाना)
उसके चेहरे को देखकर मैं दीवाना हो गया, मेरी छोड़ो आइना भी उसका दीवाना हो गया।। राही (अंजाना)
कोई दवा कोई दुआ काम न आई, आँख जब बन्द की तो सामने माँ आई।। राही (अंजाना)
यार इसमें तो मज़ा ही नहीं, कोई हमसे खफा ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है दोस्त, इसकी कोई दवा ही नहीं।। राही (अंजाना)
हाथों की लकीरों में तेरा नाम नही देखा तो, लेकर कलम हाथों में खुद ही तेरा नाम लिख लिया।। राही (अंजाना)
तुमसे अपने आंसू छिपाने पड़ते हैं, मुझको तो लाख बहाने बनाने पड़ते हैं, तुम्हे तो मुझे हंसते हुए देखना है, मुझको तो गम भी ठिकाने लगाने पड़ते हैं।। राही (अंजाना)
मन करता है सपने जो देखूं, मैं सच में उनसे मिल जाऊं, मन करता है पढ़ लिखकर मैं अपने, माँ पापा से आगे बढ़ जाऊँ, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं […]
मोहरे बड़े होकर भी पीछे खड़े रहते हैं, बिसात पर सैनिकों का ओहदा ज़रा हटके है।। राही (अंजाना)
मुमकिन नहीं के किसी की तकदीर खरीद ले कोई, बादशाह कितना भी बड़ा हो इस शहर का कोई।। राही (अंजाना)
पत्थरों को चीर कर रस्ते बना लेता है, जब पानी अपनी सारी हदें मिटा देता है।। राही (अंजाना)
मन करता है पढ़ लिख कर मैं, माँ पापा का नाम कराऊँ, मन करता है सपनों को देखूं, आसमान में मैं उड़ जाऊं, मन करता है डर को जीतूँ, इस दुनियाँ से मैं लड़ जाऊं, […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.