उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना)

जिसको जैसे समझ आये समझाना पड़ता है, एक शिक्षक को बड़ा दिमाग लगाना पड़ता है, बहुत शरारत करते हैं जब, बच्चे मन के सच्चे हैं जब, गुरु ज्ञान की महिमा को फिर सबको दिखलाना पड़ता […]

बारिश की चन्द बूंदों ने मेरा घर ढूंढ ही लिया, भिगाया मुझे और मेरे एहसासों को चूम ही लिया, सूखा पड़ा था मेरे आँगन का जो कोना कभी, आज मेरे दिल संग मन का आँचल […]

गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]

जो आँखों से बयाँ होते हैं, वो लफ़्ज़ों में कहाँ होते हैं, गुफ्तगू ख़्वाबों में करने वाले, सुना हकीकत में जवाँ होते हैं, मोहब्बत का काजल लगाने वाले, सच कहूँ रौशनी की ज़ुबा होते हैं॥ […]

दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए, अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए, अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये, सपनों में रंग भरने को वो क्यों […]

न तन पर कपड़े न पैरों में चप्पल का होश होता है, ये बचपन बस अपने आप में मदहोश होता है, इच्छाओं की दूर तलक कोई चादर नहीं होती, बस माँ के आँचल में सिमटा […]

गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे, शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे, गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे, गुप्प अँधेरे में भी […]

सोंच का समन्दर और भी गहरा होता गया, मैं जितना लोगों से मिला उतना बहरा होता गया, भूल गया उठना ख़्वाबों के घने अँधेरे से एक दिन, मैं जब जागा तो दूर तलक रौशनी का […]

दादी पोते के बीच का रिश्ता बहुत अजीब देखा है, किस्से कहानियों का भी रूप मैने सजीव देखा है, सफेद बाल मुलायम खाल का स्पर्श सच्ची याद है मुझे, बिन दाँतों वाली दादी को मैने […]

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)

गिल्ली डंडे के खेल पुराने हो गए, कंचे के काँच दिखे जमाने हो गए, भरे रहता था आसमाँ जिन पतँगों से कभी, अब ज़मी पर बच्चे भी निराले हो गए।। राही (अंजाना)