मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
मेरी आँखों की पलकों पर तेरी यादें बसती हैं, इस डर से इनको झपकाने से डरता हूँ मैं।। राही (अंजाना)
उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना)
एक तिनका भी उड़ा जाती है, जब हवा मूड बना जाती है, मिलती नहीं जब खबर यार की, तब उसकी तबियत बता जाती है, राही (अंजाना)
जिसको जैसे समझ आये समझाना पड़ता है, एक शिक्षक को बड़ा दिमाग लगाना पड़ता है, बहुत शरारत करते हैं जब, बच्चे मन के सच्चे हैं जब, गुरु ज्ञान की महिमा को फिर सबको दिखलाना पड़ता […]
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
कितना भी पढ़ लूँ मगर भूल ही जाता हूँ, तेरे चेहरा मुझे किसी किताब से कम नहीं लगता।। राही (अंजाना)
बारिश की चन्द बूंदों ने मेरा घर ढूंढ ही लिया, भिगाया मुझे और मेरे एहसासों को चूम ही लिया, सूखा पड़ा था मेरे आँगन का जो कोना कभी, आज मेरे दिल संग मन का आँचल […]
गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]
जो आँखों से बयाँ होते हैं, वो लफ़्ज़ों में कहाँ होते हैं, गुफ्तगू ख़्वाबों में करने वाले, सुना हकीकत में जवाँ होते हैं, मोहब्बत का काजल लगाने वाले, सच कहूँ रौशनी की ज़ुबा होते हैं॥ […]
गुफ्तगू बन्द न हो, बात से बात चले, मै तेरे साथ चलूँ, तू मेरे साथ चले, तुझे देखूं तो दिल जले, न देखूं तो ये जान जले, काश तेरे संग मेरे जीवन की, सुख दुःख […]
दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए, अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए, अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये, सपनों में रंग भरने को वो क्यों […]
न तन पर कपड़े न पैरों में चप्पल का होश होता है, ये बचपन बस अपने आप में मदहोश होता है, इच्छाओं की दूर तलक कोई चादर नहीं होती, बस माँ के आँचल में सिमटा […]
मैं कुछ कहता नहीं वो सब जान लेती है, सच महबूबा नहीं है कोई वो माँ है मेरी।। राही (अंजाना)
ख्वाबों का क्या है हर रोज़ बदल जाते हैं, दिलों में रहते हैं जो वो चेहरे नहीं बदलते।। Rahi
अभी जा रहे हो फिर लौट कर आना, जब तुम नहि होते तो वक्त कटता नहीं मेरा।। राही
ये मेरे ख्वाब हकीकत में तब्दील हो जायें, गर दिल के राज़ मेरे तेरी आँखों की तदबीर हो जायें।। राही (अंजाना)
गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे, शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे, गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे, गुप्प अँधेरे में भी […]
सोंच का समन्दर और भी गहरा होता गया, मैं जितना लोगों से मिला उतना बहरा होता गया, भूल गया उठना ख़्वाबों के घने अँधेरे से एक दिन, मैं जब जागा तो दूर तलक रौशनी का […]
दादी पोते के बीच का रिश्ता बहुत अजीब देखा है, किस्से कहानियों का भी रूप मैने सजीव देखा है, सफेद बाल मुलायम खाल का स्पर्श सच्ची याद है मुझे, बिन दाँतों वाली दादी को मैने […]
समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)
तुझको इतना याद किया, मैं खुद को ही भूल गया, तेरे ख्वाबो में सोया था, के मैं उठना ही भूल गया।। राही (अंजाना)
बहुत कुछ भूलने लगा हूँ मैं, एक तुझमें ही घूमने लगा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
नींदों के साथ ख्वाब भी ले गई, वो मेरे हाथ में अपनी तस्वीर दे गई।। राही (अंजाना)
टूट कर जुड़ता नहीं एक टुकड़ा भी जहाँ, मैंने खुद बैठकर जोड़े हैं दिल के टुकड़े अपने।। राही (अंजाना)
बचपन के सारे खिलौने बेच दूँ, तेरे एक इशारे पे मैं खुद को बेच दूँ।। राही (अंजाना)
रंगहीन ज़िन्दगी को रंगीन बना दिया, जिस पल तूने मुझे अपना चेहरा दिखा दिया। राही (अंजाना)
आसमान में कटते ही लूट ली जाती थी, अब उड़ती हुई कहीं वो पतंग नहीं दिखती।। राही (अंजाना)
रिश्तों के मन्ज़र चुप चाप देखने पड़े, कई बार मुझे अपने ही ख्वाब तोड़ने पड़े।। राही (अंजाना)
बांध कर हाथ में घड़ी दो घड़ी न पकड़ सका, हर पल रेत सा सरकता रहा पल पल वक्त मेरा।। राही (अंजाना)
किसी के कहने से सुधर जाऊं मैं, अभी इतना भी बिगड़ा नहीं हूँ मैं।। राही (अंजाना)
कदम छोटे छोटे रखकर रक़ीब आ गया, एक लम्हा मेरे इतने भी करीब आ गया।। राही (अंजाना)
आँखों की दहलीज लांग आया हूँ, आज मैं सबसे रूबरू हो आया हूँ, झूठ ये है के एक बून्द पानी हूँ मैं, सच ये के मै आँसू कहलाया आया हूँ, राही (अंजाना)
अँधेरे के पार चलके देखना होगा, रौशनी का अब न इन्तज़ार देखना होगा। राही (अंजाना)
तू ही सहारा तू ही किनारा बन गया, जिस पल से तू बस हमारा बन गया। राही (अंजाना)
व्यवहार चेहरे से झलक जाने लगे, हम एक दूजे के करीब आने लगे।। राही (अंजाना)
जब कोई मिला ही नहीं मुझे कुछ कहने के लिए, तब खामोश तस्वीरों को मैने अपना मित्र बना लिया।। राही (अंजाना)
मैं वो गुलाब हूँ जो अपनी ही खुशबू भूल गया, जिस पल से तेरे बदन की खुशबू सूंघ ली मैने।। राही (अंजाना)
मैं वो गुलाब ही जो अपनी ही खुशबू भूल गया, जस पल से तेरे बदन की खुशबू सूंघ ली मैने।। राही (अंजाना)
किसी बोतल का नशा चढ़ा ही नहीं मुझपर, तेरे इश्क के समन्दर में गोते मारने के बाद।। राही (अंजाना)
चलते चलते थक रहा हूँ मैं, शायद अंदर से जल रहा हूँ मैं।। राही (अंजाना)
शर्म के पर्दे अक्सर उठ जाया करते हैं, मोहब्बत में जब दो लोग करीब आते हैं।। राही (अंजाना)
किसी उम्र किसी रूप का, किसी रंग किसी ढंग का, किसी जाती किसी धर्म का, किसी भी कैसे भी वक्त का, ये कुर्सी है जो परहेज नहीं करती, राही (अंजाना)
तेरी बेवफाई का ज़रा इल्म भी हो जाता, तो राही तेरे प्यार में दीवाना न हो जाता।। राही (अंजाना)
तुम्हारा इस कदर चर्चा हुआ, के मेरा घर रहा महका हुआ। राही (अंजाना)
हार कर जीतने का हुनर सीख़ लिया, मैने लहरों से सारा समन्दर खींच लिया।। राही (अंजाना)
हर बात की हद होती है, ख़ामोशी बेहद होती है। राही (अंजाना)
गिल्ली डंडे के खेल पुराने हो गए, कंचे के काँच दिखे जमाने हो गए, भरे रहता था आसमाँ जिन पतँगों से कभी, अब ज़मी पर बच्चे भी निराले हो गए।। राही (अंजाना)
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